सहकारिता मंत्रालय
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एक समान राष्ट्रीय सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र

प्रविष्टि तिथि: 11 MAR 2026 5:36PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार फरवरी, 2026 में आयोजित मंथन बैठक तक 33,853 नए एम-पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियाँ पंजीकृत की गई हैं; और 21,292 डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को सशक्त किया गया है ।

आदर्श  राज्य सहकारी अधिनियम नहीं बनाया गया है ।

राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए मंत्रालय द्वारा पहलों की एक श्रृंखला की गई है जिनमें से कई पहलों को तो नीति के औपचारिक शुभारंभ से पूर्व ही प्रारंभ कर दी गईं थीं । इन पहलों की विस्तृत सूची संलग्नक पर संलग्न है । राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अधीन एक कार्यान्वयन प्रकोष्ठ तथा एक नीति कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति का गठन किया गया है ।

मंत्रालय की पहलों के सुचारू और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए राज्यों को सक्रिय रूप से जोड़ा गया है। सहकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू की गई पहलों की प्रगति की समीक्षा करने के लिए सचिव, सहकारिता की अध्यक्षता में राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मासिक बैठकें आयोजित की जाती हैं । इसके अतिरिक्त, राज्यों के सहकारी विभागों के प्रधान सचिवों/सचिवों और राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों के सहकारी समितियों के पंजीयकों के साथ भौतिक रूप से त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं । हाल ही में माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में दिनांक 17 फरवरी 2026 को राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के माननीय सहकारिता मंत्रियों की भागीदारी के साथ 'मंथन बैठक' का आयोजन किया गया था ।

राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के छह रणनीतिक स्तंभ हैं जिनमें से एक समावेशिता को बढ़ावा देना और पहुंच को सघन करता है जिससे सहकारी आंदोलन में समाज के सभी वर्गों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके सके । इस नीति के अधीन प्रमुख प्रावधानों में निम्‍नलिखित शामिल हैं:

 समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं, युवाओं, लघु और सीमांत किसानों एवं कमजोर वर्गों (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजन, आदि) की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और सहकारी समितियों में उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका देना ।

 मात्स्यिकी, डेयरी, हथकरघा बुनाई, हस्तशिल्प, लघु वनोत्‍पाद, आदि जैसे क्षेत्रों में कमजोर और सीमांत वर्गों के लिए सहकारी समितियों को बढ़ावा देना और उन्‍हें सशक्त करना ।

 लैंगिक, कमजोर वर्गों, आदि पर विसमूहित डेटा के विकास में सहयोग करना और लक्षित इंटरवेंशंस हेतु राष्‍ट्रीय सहकारी डेटाबेस में उन्‍हें शामिल करने के लिए अनुशंसा करना ।

इसके अतिरिक्त, सहकारिता मंत्रालय ने डेयरी क्षेत्र में सहकारी कवरेज के विस्तार, रोजगार सृजन और महिला सशक्तीकरण के लिए सहकारित आधारित श्‍वेत क्रांति 2.0 का शुभारंभ किया है । इस पहल का लक्ष्‍य आगामी पांच वर्षों में डेयरी सहकारी समितियों के दुग्ध प्रापण में 50% की वृद्धि करना है ।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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AK/AP


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