पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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संसदीय प्रश्न: अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

प्रविष्टि तिथि: 11 MAR 2026 12:19PM by PIB Delhi

पृथ्‍वी-विज्ञान मंत्रालय ने मौसम विज्ञान, महासागर विज्ञान और संबंधित पृथ्वी तंत्र विज्ञान विषयों में मानव संसाधन विकास को सशक्त बनाने के लिए कई पहल की हैं। इनमें इसके अपने अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों का समर्थन, जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ), सीनियर रिसर्च फेलोशिप (एसआरएफ) और रिसर्च एसोसिएटशिप जैसी फेलोशिप की व्यवस्था, तथा विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और क्षमता विकास गतिविधियों का आयोजन शामिल है। रीचआउट योजना के अंतर्गत मंत्रालय आईआईटी, मद्रास में ओशन इंजीनियरिंग में एम.टेक कार्यक्रम को समर्थन देता है। पृथ्वी तंत्र विज्ञान में कौशल संपन्न मानव संसाधन विकास (डीईएसके) कार्यक्रम भी शुरू किया गया है, जिससे अकादमिक ज्ञान और पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय संस्थाओं की परिचालन आवश्यकताओं के बीच अंतर को कम किया जा सके। मंत्रालय ने हैदराबाद स्थित भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) में ऑपरेशनल ओशनोग्राफी के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आईटीसीओशन) स्थापित किया है, जिसे यूनेस्को श्रेणी-2 केंद्र और अंतर्राष्ट्रीय महासागर आंकड़ा एवं सूचना विनिमय कार्यक्रम (आईओडीई) के तहत क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी) के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो विशेष रूप से भारतीय महासागर क्षेत्रीय देशों से आने वाले राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। एनसीएमआरडब्ल्यूएफ में बिम्सटेक मौसम एवं जलवायु केंद्र (बीसीडब्ल्यूसी) बिम्सटेक सदस्य देशों के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ और क्षमता विकास कार्यक्रम संचालित करता है। इसके अतिरिक्त, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) पुणे, नई दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता में अपने प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण और रिफ्रेशर पाठ्यक्रम आयोजित करता है। पुणे और नई दिल्ली के केंद्रों को विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसके अलावा, पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय विश्वविद्यालयों, आईआईटी और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग करता है और महासागर एवं वायुमंडलीय विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, जल विज्ञान एवं हिम क्षेत्र अध्ययन और भूकंप विज्ञान में बाह्य निधि के माध्यम से अनुसंधान का समर्थन करता है।

  1. सभी संस्थान जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्यरत हैं, स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए वर्ष में दो बार इंटर्नशिप अवसरों का विज्ञापन करते हैं। इसके अतिरिक्त, कई विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो अकादमिक संस्थानों के संकाय सदस्यों, अनुसंधान छात्रों तथा स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को सम्मिलित करते हुए संयुक्त अनुसंधान गतिविधियों को सक्षम बनाते हैं। चूंकि मंत्रालय के अंतर्गत प्रत्येक संस्थान/केंद्र का विशिष्ट कार्यक्षेत्र होता है, ये संस्थान/केंद्र समय-समय पर अपने क्षेत्र-विशेष में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसके अलावा, मंत्रालय और इसके संबद्ध संस्थानों/केंद्रों के वैज्ञानिक और अधिकारी विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों में भी भाग लेने के लिए भेजे जाते हैं। आईएमडी प्रशिक्षण केंद्रों, पृथ्‍वी तंत्र विज्ञान में कुशल मानव संसाधन विकास कार्यक्रम (डेस्क), संचालनात्मक समुद्र विज्ञान के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आईटीसीओशन), बिम्सटेक मौसम एवं जलवायु केंद्र (बीसीडब्ल्यूसी) और रीचआउट कार्यक्रम के अंतर्गत पृथ्वी विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  1. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय विभिन्न सार्वजनिक जागरूकता और जन-संपर्क पहलें करता है जिससे जलवायु परिवर्तन, आपदा हेतु तैयारी और पर्यावरण संरक्षण के विषय में समझ बढ़ाई जा सके। रीचआउट कार्यक्रम के आउटरीच कार्यक्रम के तहत विभिन्न संस्थानों, महाविद्यालयों और विद्यालयों में जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी विज्ञान से संबंधित मुद्दों को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों को समर्थन दिया जाता है। इसमें मंत्रालय के संस्थानों द्वारा सार्वजनिक व्याख्यान, कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और जन-संपर्क कार्यक्रमों का आयोजन शामिल है; साथ ही विश्व मौसम विज्ञान दिवस, महासागर दिवस, तटीय सफाई अभियान और पृथ्वी विज्ञान से संबंधित अभियानों जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। मंत्रालय शैक्षणिक संस्थानों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ गठजोड़ भी करता है, जिससे मौसम और जलवायु से संबंधित खतरों के प्रति सार्वजनिक जागरूकता और इनके लिए तैयारी को बढ़ाया जा सके।

 

  1. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ग्रामीण और जोखिमग्रस्‍त आबादी तक वैज्ञानिक जानकारी और परामर्श कई मंचों के माध्यम से पहुँचाता है। इनमें समय पर मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनियों के लिए वेब पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, टेलीविजन, रेडियो और एसएमएस-आधारित चेतावनी प्रणाली शामिल हैं। मंत्रालय के अधीन संस्थान, विशेष रूप से भारतीय मौसम विभाग और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र, कठिन मौसमी घटनाओं, चक्रवात, तूफानी ज्वार और समुद्री परिस्थितियों से संबंधित स्थान-विशेष पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी जारी करते हैं। ये निर्देश राज्य सरकारों, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, मछुआरों और कृषि समुदायों के साथ साझा किए जाते हैं और स्थानीय प्रशासन, सामुदायिक नेटवर्क तथा मीडिया चैनलों के माध्यम से इन्‍हें व्यापक रूप से, विशेषकर ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में, प्रचारित किया जाता है।
  1. सरकार, प्रमुख वैश्विक संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और भागीदार देशों के साथ सहयोग के ज़रिए, पृथ्वी विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सम्मेलनों में भागीदारी, तथा वैज्ञानिक विशेषज्ञता साझा करने को बढ़ावा देता है। पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के संस्थान विदेशी विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थाओं के साथ समझौते (एमओयू) भी करते हैं,  जिससे मौसम विज्ञान, समुद्र विज्ञान, जलवायु विज्ञान, ध्रुवीय अनुसंधान और पृथ्वी तंत्र मॉडलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोगी अनुसंधान, क्षमता विकास और शैक्षणिक आदान-प्रदान को सक्षम बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय कई अंतरराष्ट्रीय पहलों में भाग लेता है, जैसे कि यूके मेट ऑफिस के साथ वेदर एंड क्लाइमेट साइंस फॉर सर्विस पार्टनरशिप (डब्ल्यूसीएसएसपी) कार्यक्रम, एमओईएस–यूके मोमेंटम साझेदारी, और नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए), यूएसए के साथ मानसून मिशन के तहत “मानसून डेस्क” सहयोग, जिससे मानसून अनुसंधान और पूर्वानुमान को बेहतर बनाया जा सके। मंत्रालय बेलमोंट फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में भी सक्रिय रूप से भाग लेता है और विश्व मौसम संगठन (डब्‍ल्‍यूएमओ) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) जैसे वैश्विक संगठनों के साथ निकट सहयोग बनाए रखता है। इसके अलावा, मंत्रालय संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जर्मनी, नॉर्वे, फ्रांस, जापान, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया तथा स्विट्ज़रलैंड सहित देशों के भागीदार संस्थानों के साथ पृथ्‍वी तंत्र विज्ञान में सहयोगात्‍मक अनुसंधान, क्षमता विकास और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए काम करता है।

यह जानकारी आज लोकसभा में पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई।

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पीके/केसी/पीके


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