ग्रामीण विकास मंत्रालय
विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत रोजगार गारंटी
प्रविष्टि तिथि:
10 MAR 2026 5:21PM by PIB Delhi
विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची I के पैरा 3 के अनुसार, इसके मुख्य उद्देश्य और प्रमुख प्रावधान नीचे दिए गए हैं:
- इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास ढांचे को विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विजन के साथ जोड़ना है जिसके लिए उन ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक सौ पच्चीस दिनों की बढ़ी हुई वैधानिक मजदूरी रोजगार गारंटी प्रदान की जाएगी जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, जिससे उन्हें विस्तारित आजीविका सुरक्षा ढांचे में अधिक प्रभावी ढंग से समावेशित किया जा सके।
- सार्वजनिक कार्यों के माध्यम से सशक्तिकरण, विकास, समन्वय और संतृप्ति पर ध्यान केंद्रित करना जो विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक बनाने के लिए आवश्यक हैं, जिसमें जल संबंधी कार्यों के माध्यम से जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचे और चरम मौसम की घटनाओं के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष कार्यों पर विषयगत ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- ग्रामीण कार्यबल के लिए मजदूरी-रोजगार गारंटी के मद्देनजर, प्रमुख कृषि मौसमों के दौरान पर्याप्त कृषि-श्रमिक की उपलब्धता को आसान बनाना।
- विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से समन्वय, लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त करने वाली योजना और ‘संपूर्ण सरकार वितरण’ को संस्थागत बनाना, जो ग्राम पंचायतों की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत हो, और भू-स्थानिक प्रणालियों, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जिला और राज्य नियोजन तंत्रों द्वारा संचालित हो, जिसमें ऐसी योजनाओं को ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समेकित किया जाएगा।
- एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम के माध्यम से शासन, जवाबदेही और नागरिक जुड़ाव को आधुनिक बनाना, जिसमें विभिन्न स्तरों पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम या मोबाइल आधारित कार्यस्थल की निगरानी, रीयल-टाइम प्रबंधन सूचना प्रणाली डैशबोर्ड, सक्रिय सार्वजनिक प्रकटीकरण और नियोजन, लेखा परीक्षा और धोखाधड़ी जोखिम को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शामिल है।
इस अधिनियम में कार्यों की पहचान करना और इसकी प्राथमिकता तय करने के लिए ग्राम सभा द्वारा तैयार और अनुमोदित सहभागी विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं का प्रावधान है, जिन्हें ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर संकलित किया जाता है। कार्यों के प्रकार चार विषयगत क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं जिनमें (i) जल सुरक्षा के लिए जल-संबंधित कार्य; (ii) मुख्य ग्रामीण अवसंरचना; (iii) आजीविका-संबंधित अवसंरचना; और (iv) खराब मौसम की घटनाओं के प्रभाव को कम करने और आपदा प्रबंधन की तैयारी के लिए विशेष कार्य शामिल हैं।
यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष एक सौ पच्चीस दिनों की मज़दूरी रोजगार की गारंटी देता है। अधिनियम की धारा 22 के उप-धारा (4) के अनुसार, केंद्र सरकार वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर प्रत्येक राज्य के लिए राज्य-वार मानक आवंटन निर्धारित करेगी, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए।
अधिनियम की धारा 22 के अनुसार, इस अधिनियम के तहत कार्यान्वित योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना होगी और केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच निधि साझाकरण का प्रारूप उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 होगा और अन्य सभी राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60:40 होगा।
वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए, विकसित भारत- रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) हेतु 95,692.31 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी का प्रावधान किया गया है, जो बजट अनुमान चरण में ग्रामीण रोज़गार के लिए अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। अनुपातिक अनुमानित राज्य की हिस्सेदारी को सम्मिलित करने के साथ, कुल कार्यक्रम परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव, बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन और ग्रामीण क्षेत्रों में आय वृद्धि में काफी तेज़ी आने की उम्मीद है।
यह जानकारी ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एसके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2237887)
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