कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, यूएनडीपी भारत और गेट्स फाउंडेशन ने किसान समृद्धि के लिए पीएम धन-धान्य कृषि योजना (डीडीकेवाय) के लाभ उठाने पर सीएसआर कॉन्क्लेव आयोजित किया

प्रविष्टि तिथि: 13 FEB 2026 7:45PM by PIB Delhi

भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू), कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) इंडिया और गेट्स फाउंडेशन के साथ मिलकर आज नई दिल्ली में "किसान समृद्धि के लिए पीएम धन-धान्य कृषि योजना (डीडीकेवाय) का लाभ उठाना" विषय पर एक उच्च स्तरीय सीएसआर कॉन्क्लेव का आयोजन किया। इस सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, कॉर्पोरेट सीएसआर प्रमुखों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और विकास भागीदारों ने एक मंच पर आकर नई पहल डीडीकेवाय के तहत रणनीतिक सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

इस कॉन्क्लेव में प्रमुख कॉर्पोरेट कंपनियों जैसे यूनिलीवर, रिलायंस फाउंडेशन, आईटीसी, एक्सिस बैंक, टीसीएस, जेके सीमेंट आदि के 65 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

डीडीकेवाय की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा 11 अक्टूबर, 2025 को छह वर्ष की अवधि के लिए की गई थी, जिसका लक्ष्य 100 जिलों को कवर करना है। यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित है और अपनी तरह की पहली ऐसी पहल है जो विशेष रूप से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर केंद्रित है।

डीडीकेवाय का उद्देश्य (1) कृषि उत्पादकता को बढ़ाना, (2) फसल विविधीकरण और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने में वृद्धि करना, (3) पंचायत और ब्लॉक स्तर पर कटाई के बाद के भंडारण (पोस्ट-हार्वेस्ट स्टोरेज) की क्षमता का विस्तार करना, (4) सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना और (5) दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है। इस योजना को 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, अन्य राज्य की योजनाओं और निजी क्षेत्र के साथ स्थानीय भागीदारी के साथ समन्वय के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव, श्री देवेश चतुर्वेदी ने अपने उद्घाटन भाषण में बड़े पैमाने पर मापने योग्य प्रभाव प्राप्त करने के लिए सरकारी योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बीच बेहतर समन्वय बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निजी भागीदारी केवल कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के योगदान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें यंग प्रोफेशनल्स जैसे मानव संसाधन सहायता, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ संबंधों को मजबूत करने, किसानों को शिक्षित करने और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के माध्यम से सक्रिय जुड़ाव शामिल होना चाहिए। इस तरह के सहयोगी प्रयास न केवल सेवाओं की पहुंच और वितरण में सुधार करते हैं, बल्कि विभिन्न जिलों में निजी क्षेत्र के उद्यमों की उपस्थिति का भी विस्तार करते हैं।

उन्होंने इन जिलों में विशेष अभियानों और लक्षित वित्तीय समावेशन की पहलों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाय) जैसी प्रमुख योजनाओं की सफलता सुनिश्चित करने में अग्रणी बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

यूएनडीपी भारत की स्थानीय प्रतिनिधि, सुश्री एंजेला लुसिगी ने अपने विशेष संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि जब सीएसआर भागीदारी को डीडीकेवाय जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा जाता है, तो यह सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत कर सकती है और छोटे किसानों के लिए बड़े पैमाने पर स्थायी प्रभाव पैदा कर सकती है। उन्होंने रेखांकित किया कि डीडीकेवाय इन जिलों के लिए एक गेम चेंजर (व्यापक बदलाव लाने वाली योजना) साबित हो सकती है, जिसमें किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गरीबी कम करने और कृषि समुदायों के लिए ढेरों आर्थिक अवसर पैदा करने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।

गेट्स फाउंडेशन की जेंडर इक्वलिटी विभाग की उप-निदेशक, सुश्री साची भल्ला ने अपने स्वागत भाषण में किसानों की आजीविका को मजबूत करने और सतत कृषि मॉडलों के विस्तार में कैटेलिटिक पार्टनरशिप के महत्व पर जोर दिया।

केनरा बैंक के उप महाप्रबंधक (डीजीएम), श्री सुनीत कुमार सिंह को डीडीकेवाय जिलों के लिए 50 लाख रुपये के सीएसआर अनुदान हेतु सम्मानित किया गया। यह सम्मान जिला स्तर पर कृषि परिवर्तन को समर्थन देने में वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने के लिए दिया गया।

केनरा बैंक के उप महाप्रबंधक (डीजीएम), श्री सुनीत कुमार सिंह को डीडीकेवाय जिलों के लिए 50 लाख रुपये के सीएसआर अनुदान हेतु सम्मानित किया गया। यह सम्मान जिला स्तर पर कृषि परिवर्तन को समर्थन देने में वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने के लिए दिया गया।

डीडीकेवाय की विशेषताओं पर विस्तृत प्रस्तुति के बाद, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें वित्तपोषण मॉडल, जलवायु-अनुकूल कृषि, ग्रामीण आजीविका मिशनों के साथ समन्वय और डीडीकेवाय की प्राथमिकताओं के साथ सीएसआर निवेश को जोड़ने के तंत्र पर चर्चा की गई। एक अन्य तकनीकी सत्र में यूनिलीवर, रिलायंस फाउंडेशन, आईटीसी और एक्सिस बैंक के पैनलिस्टों ने सीएसआर-एफपीओ सहयोग पर व्यावहारिक अनुभव साझा किए। इस दौरान चुनौतियों के समाधान, मापने योग्य परिणामों और सफल मॉडलों को विभिन्न क्षेत्रों में विस्तारित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने दीर्घकालिक जुड़ाव, क्षमता विकास, तकनीक को अपनाने और मजबूत निगरानी तंत्र के महत्व पर जोर दिया।

कॉन्क्लेव के दौरान डीडीकेवाय जिलों के लिए यंग प्रोफेशनल्स की सहायता और स्टार्ट-अप्स को समर्थन देने हेतु सीएसआर फंडिंग में गहरी रुचि दिखाई गई। इसके अलावा, इच्छुक कॉर्पोरेट फर्मों और संस्थानों को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के साप्ताहिक वेबिनार प्लेटफॉर्म का उपयोग करके इन 100 डीडीकेवाय जिलों के साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित किया गया। इस सीएसआर कॉन्क्लेव ने डीडीकेवाय जिलों में वित्तीय प्रतिबद्धता, वैल्यू चेन के निर्माण और मार्केट लिंकेज सुनिश्चित करने के लिए चर्चा की शुरुआत की।

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पीके/केसी/डीवी


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