नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा फ्लोटिंग सोलर पोटेंशियल असेसमेंट के मसौदे और नीतिगत ढांचे के मसौदे पर हितधारकों के साथ परामर्श


राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे फ्लोटिंग सोलर पीवी विकास के लिए जल निकायों की पहचान करें और उन्हें प्राथमिकता दें

प्रविष्टि तिथि: 20 FEB 2026 6:37PM by PIB Delhi

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने संयुक्त सचिव श्री जे.वी.एन. सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में 20 फरवरी  2026 को एक हितधारक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। बैठक में राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) और आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार किए गए फ्लोटिंग सोलर पीवी (एफएसपी) क्षमता आकलन रिपोर्ट के मसौदे और फ्लोटिंग सोलर नीति के मसौदे पर चर्चा की गई।

नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) परियोजनाओं में भूमि की कमी की मौजूदा समस्या को देखते हुए, एफएसपीवी एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में उभरा है। हालांकि, भारत में अब तक केवल लगभग 700 मेगावाट की एफएसपीवी परियोजनाएं ही चालू हो पाई हैं। इसका मुख्य कारण संभावित स्थलों के बारे में आंकड़ों की कमी और परियोजना कार्यान्वयन के लिए स्पष्ट ढांचे का अभाव है।

इस बाधा को दूर करने के लिए, एमएनआरई ने एनआईएसई और रुड़की के सहयोग से ये दस्तावेज तैयार किए हैं।

एमएनआरई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे राज्य स्तर पर सभी हितधारकों जैसे जल संसाधन और सिंचाई, राजस्व, मत्स्य पालन, वन, कृषि, डिस्कॉम और ट्रांसकॉम, पीडब्लूडी, पर्यटन, प्रदूषण नियंत्रण आदि के साथ आंतरिक परामर्श करें और मसौदा नीति और उसकी संभावनाओं पर उनके सुझाव और प्रतिक्रियाएँ प्राप्त करें।

बैठक के दौरान डेवलपर्स और निवेशकों के जोखिम को कम करने के लिए प्लग एंड पे मॉडल, सभी आवश्यक स्वीकृतियों के साथ जल निकायों का आवंटन आदि जैसे नवीन समाधानों पर ध्यान केंद्रित किया गया। संभावनाओं और नीति के आधार पर, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश एफएसपी परियोजनाओं के विकास के लिए स्थलों की पहचान और प्राथमिकता भी निर्धारित कर सकते हैं।

राज्यों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर, एमएनआरई, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, आर्द्रभूमि प्राधिकरण, राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण आदि के साथ फ्लोटिंग सोलर नीति पर विस्तृत परामर्श भी करेगा।

कार्यशाला में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, नवीकरणीय ऊर्जा राज्य नोडल एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्यों तथा  केंद्र शासित प्रदेशों, भारतीय सौर ऊर्जा निगम, राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) और आईआईटी रुड़की के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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पीके/केसी/जेएस


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