गृह मंत्रालय
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने गांधीनगर, गुजरात में महाराष्ट्र समाज गांधीनगर द्वारा निर्मित छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारूढ़ प्रतिमा का अनावरण किया
गुलामी के घने अंधकार में 16 वर्ष की आयु में शिवाजी महाराज जी ने ‘हिंदवी स्वराज’ की स्थापना का दृढ़ संकल्प लिया
शिवाजी महाराज जी ने जीवनपर्यंत स्वराज, स्वधर्म और स्वभाषा की रक्षा के लिए संघर्ष करने की प्रतिज्ञा की थी
देश के तीर्थों व मंदिरों की रक्षा करने वाले शिवाजी महाराज जी ने मुगलों को संदेश दिया कि सनातन धर्म मंदिर तोड़ने से समाप्त नहीं होगा
मोदी जी ने आक्रांताओं द्वारा खंडित काशी विश्वनाथ कॉरिडोर व सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार किया
मोदी सरकार ने भारतीय नौसेना के ध्वज से औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाकर शिवाजी महाराज की विरासत को सम्मान दिया है
प्रविष्टि तिथि:
17 FEB 2026 9:38PM by PIB Delhi
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गांधीनगर, गुजरात में महाराष्ट्र समाज गांधीनगर द्वारा निर्मित छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारूढ़ प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर गुजरात के उप-मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि यह पूरे गांधीनगर के लिए अत्यंत शुभ और हर्ष का विषय है कि यहाँ ‘हिंदवी स्वराज’ के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा का अनावरण हुआ। उन्होंने कहा कि लगभग 21 फुट ऊँची यह प्रतिमा आने वाले कई वर्षों तक गांधीनगरवासियों, खासकर युवाओं को, निरंतर प्रेरणा प्रदान करती रहेगी।
श्री अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन और उनकी महान उपलब्धियाँ कभी अप्रासंगिक नहीं होंगी। अनेक युगों तक यह देश उनके अतुलनीय उपकारों का ऋण चुकाने में असमर्थ रहेगा। उन्होंने कहा कि जब चारों ओर गुलामी का घना अंधकार छाया हुआ था और अफगानिस्तान से कन्याकुमारी और सोमनाथ से ओडिशा तक समूचा भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब ऐसा लगता था कि मुगलशाही की शक्ति कभी कम नहीं होगी और हम कभी स्वतंत्र नहीं हो पाएँगे। उस काल में मुगल सल्तनत का प्रभुत्व सर्वत्र व्याप्त था और देश के लोगों ने स्वराज का विचार ही भुला दिया था। स्वधर्म, स्वभाषा और स्वाभिमान के संस्कार भी लंबी गुलामी की यातनाओं और प्रताड़नाओं के कारण लगभग लुप्तप्राय हो चुके थे। उस समय मात्र सोलह वर्ष की आयु में शिवाजी महाराज ने रायगढ़ के रायरेश्वर मंदिर में ‘हिंदवी स्वराज’ की स्थापना करने का दृढ़ संकल्प लिया और पूरे देश को एक दिशा दिखाई।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि उस समय संसाधन नहीं थे, न सेना, न हथियार और न ही कोई बड़ा राज्य या साम्राज्य था। शिवाजी महाराज के पिता स्वयं बीजापुर की सेवा में थे। फिर भी शिवाजी महाराज ने किशोरावस्था में रायरेश्वर महादेव के समक्ष प्रतिज्ञा की कि वे जीवनपर्यंत संघर्ष करेंगे और स्वराज, स्वधर्म तथा स्वभाषा के लिए कार्य करेंगे। श्री शाह ने कहा कि मात्र चालीस वर्षों के भीतर शिवाजी महाराज ने ढाई सौ वर्षों की गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया और छत्रपति के रूप में उनका राज्याभिषेक हुआ, जिससे ‘हिंदवी स्वराज’ का स्वप्न साकार हुआ।
श्री अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज ने जीवनभर संघर्ष नहीं छोड़ा। औरंगज़ेब ने उनकी शक्ति तोड़ने के लिए पूरा मुगल साम्राज्य लगा दिया, लेकिन वे कभी पीछे नहीं हटे। जब आजादी की लड़ाई को कमजोर करने की खातिर काशी और मथुरा के मंदिर तोड़े गए, तब शिवाजी महाराज ने दक्षिण के मंदिरों की रक्षा की और सप्तकोटेश्वर मंदिर को पुनः पवित्र करके स्थापित किया। देश के तीर्थों व मंदिरों की रक्षा करने वाले शिवाजी महाराज जी ने मुगलों को संदेश दिया कि सनातन धर्म मंदिर तोड़ने से समाप्त नहीं होगा; विध्वंसक शक्तियाँ तोड़ेंगी, हम नए मंदिर बनाएँगे और यह देश स्वराज प्राप्त करके रहेगा। गृह मंत्री ने कहा कि शिवाजी महाराज द्वारा प्रारंभ की गई यह मुहिम आगे चलकर और सशक्त हुई, जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के हाथों राम मंदिर का भूमि पूजन और प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने आक्रांताओं द्वारा खंडित काशी विश्वनाथ कॉरिडोर व सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार किया है। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि शिवाजी महाराज का संकल्प आज पूरे देश ने आत्मसात कर लिया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि शिवाजी महाराज ने पहली बार नौसेना की स्थापना की और कहा— “ज्याचे आरमार, त्याचा समुद्र” यानि जिसकी नौसेना, उसका समुद्र। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने भारतीय नौसेना के ध्वज से औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाकर शिवाजी महाराज की विरासत को सम्मान दिया है। श्री शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज जी के राज्याभिषेक के समय विद्वान गागा भट्ट ने कहा था कि आने वाले समय में भारत पूर्ण तेज के साथ विश्व के सामने खड़ा होगा। आज वे शब्द साकार होते दिखाई दे रहे हैं।
गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर, सुब्रमण्यम भारती, महर्षि अरविंद, अतुलचंद्र हजारिका, श्री वाचीनाथ सहित अनेक कवियों और साहित्यकारों ने शिवाजी महाराज की प्रशस्ति में रचनाएँ कीं। झवेरचंद मेघाणी ने बच्चों में वीरता के संस्कार जगाने के लिए ‘शिवाजी नु हालरडु’ की रचना की। आज भी जो माँ चाहती है कि उसका पुत्र देश की सेवा करे, वह उसे शिवाजी की वीर गाथाएँ सुनाती है।
श्री अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज ने भारतीय भाषाओं के उत्थान के लिए भी कार्य किया। शासन में आने के बाद उन्होंने मराठी और संस्कृत को बढ़ावा दिया। उन्होंने ऐसी पीढ़ी तैयार की जो स्वराज, स्वभाषा और स्वधर्म के लिए जीती थी। शिवाजी महाराज के निधन के सौ वर्षों के भीतर ही उनका भगवा ध्वज अटक से कटक और कटक से पुणे तक लहराने लगा। आज वही भारत, शिवाजी महाराज के संस्कारों पर चलकर, विश्व के सामने तेजस्वी स्वरूप में खड़ा है।
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(रिलीज़ आईडी: 2229368)
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