पर्यटन मंत्रालय
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हिमाचल प्रदेश में पर्यटन का विकास

प्रविष्टि तिथि: 13 FEB 2026 11:54AM by PIB Delhi

पर्यटन स्थलों का संवर्धन एवं विकास मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार/केन्द्र-शासित प्रदेश (यूटी) प्रशासन द्वारा किया जाता है। हालांकि, पर्यटन मंत्रालय अपने निरंतर प्रयासों के तहत हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों और उत्पादों को समग्र रूप से बढ़ावा देता है। इसके लिए वह प्रचार कार्यक्रमों तथा घरेलू संवर्धन एवं प्रचार (डीपीपीएच) योजना के तहत राज्य सरकारों/केन्द्र-शासित प्रदेश के प्रशासनों को मेलों, उत्सवों और पर्यटन संबंधी कार्यक्रमों के आयोजन हेतु केन्द्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) जैसी विभिन्न पहल करता है।

मंत्रालय स्वदेश दर्शन (एसडी) तथा तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक एवं विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद) के राष्ट्रीय मिशन जैसी योजनाओं के तहत राज्य सरकारों/केन्द्र-शासित प्रदेश के प्रशासनों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है और हिमाचल प्रदेश राज्य सहित देश में पर्यटन से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सहायता प्रदान करता है। पर्यटन मंत्रालय ने राज्य सरकारों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के प्रशासनों के परामर्श से पर्यटन और पर्यटन स्थलों पर केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए टिकाऊ एवं जिम्मेदार पर्यटन स्थलों का विकास करने के उद्देश्य से अपनी स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी2.0) के रूप में संशोधित किया है। पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत एक उप-योजना, चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस उप-योजना का उद्देश्य पर्यटन मूल्य श्रृंखला के सभी पहलुओं में पर्यटन से जुड़े अनुभव को बेहतर बनाने हेतु पर्यटन स्थलों का समग्र विकास करना है, ताकि हमारे पर्यटन स्थलों को टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन स्थलों में परिवर्तित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, पर्यटन मंत्रालय ने राज्य सरकारों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता (एसएएससीआई) - वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित पर्यटन केन्द्रों के विकास के लिए संचालन संबंधी दिशानिर्देश और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का खाका जारी किया है। केन्द्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीए) के तहत केन्द्रीय वित्तीय सहायता योजना आईटीडीसी, वैपकॉस, बेसिल, एएसआई, पोर्ट ट्रस्ट ऑफ इंडिया, रेल मंत्रालय आदि जैसी केन्द्रीय एजेंसियों को पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास हेतु सहायता प्रदान करती है।

पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण योजना (सीबीएसपी) शुरू की है, जिसके तहत आतिथ्य क्षेत्र के विभिन्न स्तरों को कवर करते हुए पर्यटन सेवा प्रदाताओं को शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान किया जाता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यटन सेवा प्रदाताओं के हर स्तर पर मानव संसाधन को प्रशिक्षित और उन्नत करना है, ताकि हिमाचल प्रदेश राज्य सहित देश की पर्यटन की अपार संभावनाओं का भरपूर दोहन किया जा सके और पेशेवर विशेषज्ञता प्रदान की जा सके। सीबीएसपी योजना के जरिए कार्यान्वित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यटन सेवा प्रदाताओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाना है, ताकि वे अनौपचारिक से औपचारिक नौकरियों की ओर अग्रसर हो सकें जिससे उनकी आय में वृद्धि हो और/या कामकाज की परिस्थितियों में सुधार हो।

भारत को वैश्विक स्तर पर साहसिक पर्यटन और पर्यावरण पर्यटन के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करने हेतु, पर्यटन मंत्रालय ने साहसिक पर्यटन और पर्यावरण पर्यटन के लिए दो अलग-अलग राष्ट्रीय रणनीतियां तैयार की हैं।

भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश सहित देशभर में पर्यटन क्षमता का अधिकतम लाभ उठाने के लिए होमस्टे की स्थापना को प्रोत्साहित करने हेतु 2025-26 के बजट में होमस्टे के लिए बिना गिरवी के मुद्रा ऋण की संस्थागत पेशकश की घोषणा की है।

ग्रामीण पर्यटन से संबंधित पर्यटन मंत्रालय की निम्नलिखित पहलें हैं:

(1) भारत में ग्रामीण पर्यटन विकास के लिए राष्ट्रीय रणनीति और रोडमैप - आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक पहल। रणनीतिक दस्तावेज में निम्नलिखित प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है:

(i) ग्रामीण पर्यटन के लिए आदर्श नीतियां और सर्वोत्तम कार्यप्रणाली

(ii) ग्रामीण पर्यटन के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियां और प्लेटफॉर्म

(iii) ग्रामीण पर्यटन के लिए क्लस्टर विकसित करना

(iv) ग्रामीण पर्यटन के लिए विपणन सहायता

(v) हितधारकों की क्षमता का विकास

(vi) शासन और संस्थागत ढांचा

(2) ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए एक कार्य बल का गठन सचिव (पर्यटन) की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें चिन्हित केन्द्रीय मंत्रालयों/संगठनों, राज्य सरकारों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के प्रशासनों और उद्योग हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

(3) पर्यटन मंत्रालय ने सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव प्रतियोगिता के दो संस्करण आयोजित किए, ताकि उन गांवों को सम्मानित किया जा सके जो सामुदायिक मूल्यों, वस्तुओं और जीवनशैली को संरक्षित करने एवं बढ़ावा देने वाले पर्यटन स्थल का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और पर्यटन को सकारात्मक परिवर्तन के वाहकों में से एक बनाने के व्यापक लक्ष्य के साथ स्थिरता के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता रखते हैं। अब तक इकहत्तर गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।

यह जानकारी केन्द्रीय पर्यटन तथा संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 13 फरवरी 2026 को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/आर/एसएस   


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