पंचायती राज मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

उत्तर पूर्वी क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान

प्रविष्टि तिथि: 10 FEB 2026 3:55PM by PIB Delhi

"स्थानीय स्वशासन" होने के कारण, पंचायत राज्य का विषय है और भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का एक भाग है। इसलिए, पंचायतों की क्षमता को मज़बूत करने के लिए सहायता प्रदान करना मुख्य रूप से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का दायित्व है। हालाँकि, मंत्रालय वित्तीय वर्ष 2022-23 से, चयनित प्रतिनिधियों (ERs) और अन्य हितधारकों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए प्रशिक्षण देकर पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की सहायता करने के उद्देश्य से संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) नामक, केंद्र प्रायोजित योजना को कार्यान्वित कर रहा है, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों सहित सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम पंचायतें प्रभावी ढंग से काम कर सकें।  

राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों (पूर्वोत्तर राज्यों सहित) को जारी की गई निधि के उपयोग सहित आरजीएसए के कार्यान्वयन की नियमित बैठकों / वीडियो सम्मेलन, क्षेत्र दौरा और पूर्व-सीईसी बैठकों के माध्यम से नियमित रूप से समीक्षा की जाती है। राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की वार्षिक कार्य योजनाओं को मंजूरी देते समय केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति द्वारा भी इसकी समीक्षा की जाती है। इसके अलावा, प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल (टीएमपी) के माध्यम से प्रशिक्षण की वास्तविक समय निगरानी की जाती है। आरजीएसए के तहत जारी निधि और व्यय को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से ट्रैक किया जाता है। राज्य / केंद्र शासित प्रदेश भी त्रैमासिक और वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

संशोधित आरजीएसए के तहत अनुभव दौरे तथा प्रशिक्षण मॉड्यूल एवं सामग्री तैयार करने सहित विभिन्न श्रेणियों जैसे बुनियादी प्रबोधन एवं पुनश्चर्या प्रशिक्षण, विषयगत प्रशिक्षण, विशेष प्रशिक्षण और पंचायत विकास योजना प्रशिक्षण के अंतर्गत सहायता प्रदान की जाती है। पूर्वोत्तर राज्यों में संशोधित आरजीएसए के तहत प्रशिक्षण पाने वाले प्रतिभागियों की संख्या अनुलग्नक-I में दी गई है। इसके अलावा, पंचायती राज मंत्रालय ने आईआईएम अहमदाबाद के सहयोग से कर और गैर-कर राजस्व स्रोतों की समझ को बढ़ाकर ग्राम पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया है। अब तक, 2,24,379 प्रतिभागियों को ओएसआर पर प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों के 4,090 प्रतिभागी शामिल हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में प्रशिक्षित प्रतिभागियों की संख्या अनुलग्नक-II में संलग्न है।

  इसके अलावा, पंचायतों को ई-सक्षम बनाने के लिए, मंत्रालय ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना को (एमएमपी) लागू कर रहा है, जिसने जमीनी स्तर पर पारदर्शिता, दक्षता और शासन को मजबूत किया है। इसके तहत, ई-ग्रामस्वराज एप्लिकेशन पंचायत स्तर पर डिजिटल योजना, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा प्रदान करता है और वास्तविक समय पर भुगतान तथा निर्बाध रूप से धन प्रवाह के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के साथ एकीकृत है। ग्राम पंचायतों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की पारदर्शी खरीद को संभव बनाने के लिए इस एप्लिकेशन को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के साथ भी एकीकृत किया गया है। इसके अलावा, ग्राम पंचायत खातों और वित्तीय प्रबंधन के ऑनलाइन ऑडिट करने के लिए ऑडिटऑनलाइन एप्लिकेशन विकसित किया गया है।

चूंकि 'पंचायत' राज्य का विषय है, इसलिए बुनियादी सुविधाएं जैसे ग्राम पंचायत भवन, सीएससी सह-स्थापन, और कंप्यूटर आदि प्रदान करना मुख्य रूप से राज्य की जिम्मेदारी है। हालांकि, मंत्रालय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों को पूरा करने में सहायक के रूप में कार्य करता है और इस योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 13,848 ग्राम पंचायत भवनों और 65,345 कंप्यूटरों के निर्माण/खरीद के लिए अनुमोदन दे चुका है। पूर्वोत्तर राज्यों को अनुमोदित पंचायत भवन के निर्माण और कंप्यूटरों की खरीद का विवरण अनुलग्नक-III में संलग्न है।

मंत्रालय राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कारों के माध्यम से विभिन्न राष्ट्रीय महत्व के विषयों के तहत उनके उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता प्रदान करते हुए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य पंचायतों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देना और उन्हें स्थानीय शासन में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित करना है। क्रॉस-लर्निंग और ज्ञान के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने के लिए, पुरस्कार विजेता पंचायतों की सर्वोत्तम पद्यतियों और नवाचारी पहलों का व्यवस्थित रूप से दस्तकवेजीकरण किया जाता है और कार्यशालाओं, सम्मेलनों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और एक्सपोजर दौरों के माध्यम से उनका प्रसार किया जाता है। इसके अलावा, इन पद्यतियों  को उजागर करने वाले संकलन और पुस्तिकाएं प्रकाशित की जाती हैं और देश भर में पंचायती राज के हितधारकों के साथ व्यापक रूप से साझा की जाती हैं। ये प्रयास सफल मॉडलों के अनुकरण और पंचायती राज संस्थाओं के समग्र सुदृढ़ीकरण में योगदान देते हैं। पूर्वोत्तर राज्यों को दिए जाने वाले विभिन्न श्रेणियों के पुरस्कारों का विवरण अनुलग्नक-IV में दिया गया है।

                             

 अनुलग्नक-I

 

पूर्वोत्तर राज्यों में संशोधित आरजीएसए के तहत प्रशिक्षित प्रतिभागियों की संख्या (31 जनवरी 2026 तक)

 

क्रं सं

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र

प्रशिक्षित प्रतिभागी

1

अरुणाचल प्रदेश

31,114

2

असम

8,36,072

3

मणिपुर

10,789

4

मेघालय

1,80,508

5

मिजोरम

28,301

6

नागालैंड

12,381

7

सिक्किम

35,394

8

त्रिपुरा

1,67,737

 

कुल

13,02,296

स्रोत: प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल (टीएमपी) पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार

अनुलग्नक II 

पूर्वोत्तर राज्यों में स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) के सृजन हेतु मॉड्यूल के तहत प्रशिक्षित प्रतिभागी

क्रं सं

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र

स्वयं के राजस्व स्त्रोत के सृजन हेतु मॉड्यूल पर प्रतिभागियों का प्रशिक्षण

1

अरुणाचल प्रदेश

383

2

असम

659

3

मणिपुर

387

4

मेघालय

96

5

मिजोरम

1665

6

नागालैंड

29

7

सिक्किम

604

8

त्रिपुरा

267

 

कुल

4,090

 

अनुलग्नक -III

 पूर्वोत्तर राज्यों के लिए स्वीकृत ग्राम पंचायत भवनों के निर्माण तथा कंप्यूटर की खरीद की स्थिति

 

क्रं सं

पूर्वोत्तर राज्य

स्वीकृत ग्राम पंचायत भवनों का निर्माण

स्वीकृत की गई कंप्यूटरों  की खरीद

1

अरुणाचल प्रदेश

1339

1200

2

असम

610

2055

3

मणिपुर

43

141

4

मेघालय

36

1677

5

मिजोरम

368

591

6

नागालैंड

183

739

7

सिक्किम

27

235

8

त्रिपुरा

131

493

 

कुल

2737

7131

अनुलग्नक -IV 

 

वर्ष 2024 के लिए विभिन्न श्रेणियों के तहत पूर्वोत्तर राज्यों की पंचायतों को प्रदान किए गए पुरस्कार

 

राज्य

श्रेणीवार पुरस्कार विजेता

दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार

नानाजी देशमुख सर्वोतम पंचायत सतत विकास पुरस्कार

ग्राम ऊर्जा स्वराज विशेष पंचायत पुरस्कार

कार्बन न्यूट्रल विशेष पंचायत पुरस्कार

पंचायत क्षमता निर्माण सर्वोत्तम संस्थान पुरस्कार

डीएआरपीजी पुरस्कार *

ग्राम पंचायत

ग्राम पंचायत

ब्लॉक पंचायत

जिला पंचायत

ग्राम पंचायत

ग्राम पंचायत

ग्राम पंचायत

ग्राम पंचायतें

असम

1

1

0

0

0

0

0

0

त्रिपुरा

4

0

1

1

1

0

0

1

* प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा ई-गवर्नेंस (एनएईजी) 2025 के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार         

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 10 फरवरी 2026 को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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