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सुरक्षित पटरियों परः कवच और एआई से मजबूत हो रही भारत में रेलवे सुरक्षा

प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 1:59PM by PIB Delhi

मुख्य बिंदु

  • कवच, स्वदेश में विकसित स्वचालित ट्रेन रक्षा प्रणाली है। यह ट्रेनों को सुरक्षा के साथ ही टक्कर रोकने की क्षमता भी मुहैया कराती है।
  • कवच को 2200 रूट किलोमीटर से ज्यादा रेल मार्गों पर क्रियान्वित किया जा चुका है।
  • कवच 4.0 के दायरे में अब पांच भारतीय रेल जोन में 1300 रूट किलोमीटर से ज्यादा रेल मार्ग आते हैं।
  • वंदे भारत 4.0 में इसके उन्नत सुरक्षा और प्रौद्योगिकी फ्रेमवर्क के हिस्से के रूप में कवच 5.0 को शामिल करने की योजना है।

परिचय

हर ट्रेन यात्रा के साथ एक गहरा मानवीय वायदा भी चलता है। यह वायदा कि परिवारों का मिलन होगा, कामगार वापस घर पहुंचेंगे और छात्र अपने मुकाम तक सुरक्षित पहुंच सकेंगे। इस वायदे को पुख्ता करने के इरादे से तथा मौजूदा और भविष्य की परिवहन की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय रेलवे एक बड़े बदलाव से गुजर रही है। रेल यातायात बढ़ने के साथ ही भारतीय रेलवे की गति क्षमता को भी बढ़ाने की योजना है। सुरक्षा से कोई समझौता किए बिना डिब्बों, पटरियों, कर्षण विद्युत और सिग्नलिंग प्रणालियों समेत मौजूदा परिसंपत्तियों की क्षमता को अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

इस सुरक्षा क्रांति को भारत की स्वदेश में विकसित स्वचालित ट्रेन रक्षा (एटीपी) प्रणाली कवच आगे बढ़ा रही है। उन्नत एआई समर्थित निगरानी और पूर्वसूचना टूल्स के साथ कवच रेलवे को हर साल ज्यादा मजबूत, तेज और भरोसेमंद होने वाला सुरक्षा परिवेश बनाने में मदद कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप ट्रेन दुर्घटनाओं में तेजी से कमी आई है। वर्ष 2014-15 में 135 रेल दुर्घटनाएं हुई थीं जो घट कर 2024-25 में 31 और 2025-26 (नवंबर तक) में 11 रह गईं। ये सुधार दुर्घटनाओं की रोकथाम, आधुनिक प्रौद्योगिकी में निवेश और हर यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के संकल्प पर ध्यान को प्रतिबिंबित करते हैं।

सुरक्षा संबंधी इस बदलाव को लगातार वित्तीय निवेश के जरिए मजबूत किया जा रहा है। भारतीय रेलवे सुरक्षा पर अपने व्यय को लगातार बढ़ा रही है। उसने सुरक्षा पर 2013-14 में 39200 करोड़ रुपए खर्च किए थे जो रकम बढ़ कर 2022-23 में 87336 करोड़ रुपए, 2023-24 में 101662 करोड़ रुपए, 2024-25 में 114022 करोड़ रुपए और 2025-26 में 117693 करोड़ रुपए हो गई। इससे समूचे रेलवे नेटवर्क में सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करने की उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का पता चलता है।

कवच क्या है?

कवच एक स्वचालित स्थितिजन्य जागरूकता प्रणाली है। यह ट्रेनों को सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम क्षमताएं प्रदान करती है। यह मानवीय भूलों, संचालन की सीमाओं और उपकरणों की नाकामी से होने वाली खतरनाक घटनाओं के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। इस तरह यह ट्रेन संचालन में सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त व्यवस्था करती है। यह प्रणाली रेल चालकों को उनके केबिन में सिग्नलिंग सूचना के समयबद्ध प्रदर्शन के जरिए मदद करती है। चलने की अनुमति, लक्षित गति, लक्षित दूरी और सिग्नल के पहलुओं का यह प्रदर्शन 120 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार में सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक हो जाता है।

कवच को भारतीय रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने विकसित किया है। यह बिना अनुमति सिग्नल पार करने की दशा में तथा अत्यधिक गति और टक्कर से ट्रेनों की रक्षा करता है। यह सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान कर भारत के तेज गति और उच्च घनत्व वाले रेल नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

क्यों है कवच की जरूरत?

पहले भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन मुख्यतः पटरी के किनारे सिग्नलिंग और हस्तचालित नियंत्रण पर निर्भर था। बेशक आधुनिक इंटरलॉकिंग प्रणालियों ने सुरक्षा में सुधार किया। लेकिन ट्रेन का संचालन अब भी पटरी के किनारे सिग्नलों को देखने और गति नियंत्रित रखने की चालक की क्षमता पर काफी हद तक निर्भर था। मानव पर निर्भर इस प्रणाली की अपनी सीमाएं थीं। सिग्नल को नजरंदाज किए या गलत समझे जाने से गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी।

पारंपरिक सिग्नलिंग प्रणाली से चालक को निर्धारित रफ्तार, लक्षित दूरी, किसी खास समय में अवस्थिति और पटरी के झुकाव के बारे में जानकारी अपने केबिन में नहीं मिल पाती थी। पटरी के घुमाव और खराब मौसम की वजह से सिग्नल की दृश्यता प्रभावित होती थी। सुरक्षा के लिए ट्रेनों के बीच दूरी ज्यादा रखे जाने की वजह से नेटवर्क की क्षमता में कमी आती थी। बिना पूर्व सूचना के बाधित सेक्शन में ट्रेन संचालन से जोखिम और बढ़ जाता था।

इन चुनौतियों के साथ ही लाल सिग्नल को पार करने की घटनाओं, उच्च गति पर प्रतिक्रिया के कम समय, स्थिति की सीमित जानकारी तथा खास तौर से उत्तरी भारत में कुहासे और कम दृश्यता की स्थितियों से स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणालियों की जरूरत और बढ़ गई थी।

एटीपी प्रणालियों को ट्रेन की अवस्थिति, गति और चलने की अनुमति की लगातार निगरानी के लिए विकसित किया गया है। इनका काम असुरक्षित संचालन रोकने के लिए स्वचालित हस्तक्षेप करना भी है। यातायात का घनत्व और संचालन की गति बढ़ने के साथ ही समूचे रेल नेटवर्क में सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इन्हें इस्तेमाल में लाना अनिवार्य हो गया। कवच लगातार पल-पल की स्थिति की जानकारी देकर और सुरक्षा मानकों के स्वचालित क्रियान्वयन के जरिए इस जरूरत को पूरा करता है। यह सुरक्षा अखंडता स्तर 4 (एसआईएल 4) प्रमाणित है जो रेलवे सिग्नलिंग में सर्वोच्च वैश्विक सुरक्षा मानकों में से एक है। यह ट्रेन पर सूचनाओं, पटरी के किनारे की प्रणालियों और स्वचालित हस्तक्षेप को एक साथ लाकर भारतीय रेलवे के संचालन में सुरक्षा, विश्वसनीयता और मजबूती में महत्वपूर्ण वृद्धि करता है।

कवच के लाभ

  • रेल चालकों के लिए उपयोग में आसान केबिन सिग्नलिंग।
  • बहु-विक्रता अंतरसंचालनीयता- एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता नहीं।
  • भारतीय रेलवे की विशिष्ट जरूरतों और स्थितियों के अनुरूप।
  • कुहासे वाले मौसम में सुरक्षा बढ़ाता है।
  • तेज गति में प्रभावी।
  • ट्रेनों की आवाजाही की वास्तविक समय में केंद्रीकृत निगरानी को सक्षम बनाता है।

 

कवच के काम करने का तरीका

कवच सुरक्षित अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (यूएचएफ) रेडियो एंटीना और ट्रैक-माउंटेड रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) टैग का उपयोग करके ट्रैकसाइड सिस्टम और लोकोमोटिव के बीच निरंतर वास्तविक समय संचार के माध्यम से संचालित होता है। ये टैग ट्रेन की सटीक स्थिति प्रदान करते हैं, जबकि 'वे-साइड' (स्थिर) इकाई स्टेशन इंटरलॉकिंग सिस्टम से लाइव डेटा एकत्र करती हैं, जिसमें सिग्नल की स्थिति, पॉइंट पोजीशन, ट्रैक पर ट्रेन की मौजूदगी और रूट की स्थिति शामिल होती है।

इस जानकारी के साथ-साथ ट्रेन की स्थिति, गति और ट्रैक प्रोफाइल (जैसे कि ढलान और गति सीमा) का उपयोग करते हुए, 'वे-साइड' सिस्टम 'मूवमेंट अथॉरिटी' की गणना करता है, जो ट्रेन को चलने के लिए सुरक्षित दूरी तक अनुमति देता है और इसे ऑन-बोर्ड कवच यूनिट को प्रेषित करता है। ऑन-बोर्ड सिस्टम निरंतर ट्रेन की गति की निगरानी करता है, रेल इंजन चालक को महत्वपूर्ण जानकारी देता है और विभिन्न परिचालन स्थितियों के लिए 'ब्रेकिंग कर्व्स' तैयार करता है।

यदि ट्रेन किसी खतरे के सिग्नल के करीब पहुँचती है, तय गति से ज़्यादा तेज़ चलती है, या गलत रूट पर चली जाती है, तो कवच अपने आप ब्रेक लगा देता है। इससे किसी भी तरह के खतरे को टाला और संभावित टक्करों को रोका जा सकता है। ब्लॉक सेक्शन में, यदि दो ट्रेनें एक-दूसरे की ओर आती हुई दिखती हैंतो सिस्टम दोनों को स्वचालित देखते ही रुक जाने का कमांड देता है।

समूचे नेटवर्क में दृश्यता सुनिश्चित करने के लिए सभी महत्वपूर्ण परिचालन संबंधी घटनाओं को एक केंद्रीय निगरानी प्रणाली को प्रेषित किया जाता है, जबकि सुरक्षित संचार प्रोटोकॉल और प्रमाणीकरण तंत्र प्रणाली को सुरक्षित रखते हैं।

कवच की सुरक्षा विशेषताएं

इस परिचालन ढांचे के सहयोग से, 'कवच' में अंतर्निहित सुरक्षा कार्यक्षमताएँ  मिलती हैं जो दुर्घटनाओं को रोकती हैं और रेल चालक की सतर्कता बढ़ाती हैं। यह प्रणाली स्वचालित हस्तक्षेप और वास्तविक समय सीमा पर्यवेक्षण के माध्यम से परिचालन व्यवस्था सुनिश्चित करती है।

  • सिग्नल पार करने और खतरे की स्थिति में ट्रेन को सिग्नल से पहले ही स्वचालित रूप से रोकना।
  • मूवमेंट अथॉरिटी, लक्ष्य दूरी, गति और सिग्नल संकेतों के प्रदर्शन के साथ कैब सिग्नलिंग।
  • ट्रैन को वास्तविक समय में लगातार जानकारी और अपडेट देना।
  • मोड़ों पर गति कम करने को सख्ती से लागू करना।
  • पूरे रूट पर निर्धारित गति सीमाओं का पालन सुनिश्चित करना।
  • अस्थायी गति सीमाओं का अनुपालन (वर्तमान में परीक्षण चरण में है)।
  • रेल फाटकों के करीब पहुँचने पर स्वचालित रूप से हॉर्न बजना।
  • रोल बैक/रोल फॉरवर्ड प्रोटेक्शन – ट्रेन को अनजाने में पीछे या आगे जाने से रोकता है, खासकर ढलान पर या रुकने के दौरान।
  • सभी तरह की ट्रेन टक्करों से बचाव: आमने-सामने, पीछे से, और बगल से होने वाली टक्करों से बचाव।
  • संकटपूर्ण स्थितियों में तत्काल आपातकालीन संदेश जारी करना।
  • परिचालन सुरक्षा के लिए ट्रेन की लंबाई की गणना।
  • शंटिंग के दौरान निर्धारित सीमाओं और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना।
  • पूरे नेटवर्क पर ट्रेनों की आवाजाही की केंद्रीय स्तर पर वास्तविक समय में निगरानी।

 

कवच का विकास

कवच का विकास और इसे लगाने का काम एक चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से किया गया है। यात्री ट्रेनों पर इसका प्रारंभिक क्षेत्रीय परीक्षण फरवरी 2016 में शुरू हुआ था। परिचालन संबंधी अनुभव और एक स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता द्वारा किए गए स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर, कवच संस्करण 3.2 की आपूर्ति के लिए 2018-19 के दौरान तीन फर्मों को मंजूरी दी गई थी।

दक्षिण मध्य रेलवे पर 1,465 से अधिक किलोमीटर के विस्तार और उससे प्राप्त अनुभवों के आधार पर, यह प्रणाली निरंतर सुधारों और अपग्रेड करने से विकसित हो रही है। इन क्रमिक विकासों के परिणामस्वरूप विशिष्टताओं को संशोधित किया गया है, जिससे इसकी कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है और यह भारतीय रेलवे नेटवर्क पर व्यापक अनुप्रयोग के लिए अधिक उपयुक्त बन गई है।

तत्पश्चात, जुलाई 2020 में 'कवच' को राष्ट्रीय स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के रूप में अपनाया गया। इसके कार्यान्वयन में बुनियादी ढांचे, ऑन-बोर्ड और संचार संबंधी गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनमें विश्वसनीय सिस्टम संचालन के लिए आवश्यक दूरसंचार और ऑप्टिकल फाइबर अवसंरचना के साथ-साथ ट्रैकसाइड, स्टेशन-आधारित और लोकोमोटिव-जनित उपकरणों का प्रावधान शामिल है।

परिचालन अनुभवों और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनों के आधार पर निरंतर सुधारों के फलस्वरूप जुलाई 2024 में 'कवच संस्करण 4.0' को मंजूरी दी गई। यह रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इसे भारत के विविध और उच्च-घनत्व वाले रेल नेटवर्क की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कवच 4.0 एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी कदम है।

ये व्यवस्थित अपग्रेड 'कवच 4.0' को अधिक सुदृढ़, त्वरित और भारत के विविध एवं उच्च-घनत्व वाले रेल नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए उपयुक्त बनाते हैं। इस प्रणाली को 'स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता' द्वारा वैश्विक सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए भी प्रमाणितकृत किया गया है।

अप्रैल 2025 में, उपनगरीय खंडों के लिए डिज़ाइन की गई एक उन्नत सुरक्षा और सिग्नलिंग प्रणाली 'कवच 5.0' के शुभारम्भ की घोषणा की गई है। इसके माध्यम से ट्रेनों के बीच के अंतराल को काफी कम करने की उम्मीद है, जिससे सुरक्षा और कुशल संचालन को बनाए रखते हुए ट्रेनों की आवृत्ति को बढ़ाया जा सकेगा। 'वंदे भारत 4.0' में अपने उन्नत सुरक्षा और तकनीकी ढांचे के हिस्से के रूप में भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के अगले संस्करण 'कवच 5.0' को शामिल करने की परिकल्पना की गई है।

कवच की रणनीति और प्रगति

लगभग 96% रेलवे यातायात उच्च-घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) और अत्यधिक प्रयुक्त नेटवर्क (एचयूएन) मार्गों पर किया जाता है। इस यातायात के सुरक्षित परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए, कवच कार्यान्वयन रेलवे बोर्ड द्वारा परिभाषित प्राथमिकताओं के आधार पर केंद्रित तरीके से किया जा रहा है:

  • पहली प्राथमिकता: नई दिल्ली-मुंबई और नई दिल्ली-हावड़ा खंड सहित उच्च-घनत्व वाले मार्गों को स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) और केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण (सीटीसी) के साथ 160 किमी प्रति घंटे के लिए मंजूरी दे दी गई है, जहां ट्रेनें एक-दूसरे के करीब चलती हैं, और मानवीय त्रुटि का जोखिम अधिक होता है।
  • द्वितीय प्राथमिकता: अत्यधिक उपयोग वाले नेटवर्क रूट, जहाँ एबीएस और सीटीसी की सुविधा उपलब्ध है।
  • तृतीय प्राथमिकता: अन्य यात्री उच्च-घनत्व वाले रूट, जो एबीएस (ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग) से लैस हैं।
  • चतुर्थ प्राथमिकता: अन्य सभी शेष मार्ग।

व्यापक परीक्षणों के बाद, शुरुआत में 'कवच  4.0' को 738 मार्ग किलोमीटर पर चालू किया गया था। इसमें दिल्ली-मुंबई मार्ग पर पलवल-मथुरा-नागदा खंड (633 मार्ग किमी) और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर हावड़ा-वर्धमान खंड (105 मार्ग किमी) शामिल हैं। इसके बाद से, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा दोनों गलियारों के शेष खंडों में भी कवच के कार्यान्वयन का कार्य शुरू कर दिया गया है।

जारी विस्तार के हिस्से के रूप में, गुजरात के पहले खंड—बाजवा (वड़ोदरा) और अहमदाबाद के बीच 96 रूट किलोमीटर पर 'कवच 4.0' को चालू  किया गया है। यह नए परिचालन क्षेत्रों में इसके प्रवेश का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

जनवरी 2026 में, भारतीय रेलवे ने एक ही महीने के एक ही दिन में 472.3 रूट किलोमीटर पर 'कवच 4.0'  सुरक्षा प्रणाली स्थापित करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, जो अब तक सर्वाधिक है। नए कवर किए गए रूट में पश्चिम रेलवे पर वडोदरा-विरार (344 किमी), उत्तर रेलवे पर तुगलकाबाद जंक्शन केबिन-पलवल (35 किमी) और पूर्व मध्य रेलवे पर मानपुर-सरमातनर (93.3 किमी) शामिल हैं। इस विस्तार के साथ, 'कवच 4.0' अब पांच भारतीय रेलवे जोनों के 1,306.3 रूट किलोमीटर को कवर करता है, जिससे दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख गलियारों पर सुरक्षा मजबूत हुई है। इसके अतिरिक्त, 2,667 रूट किलोमीटर के कार्यों को मंजूरी मिल चुकी है, जिनका क्रियान्वयन अभी जारी है।

इस प्रणाली का 'स्वचालित ब्रेकिंग परीक्षणों' के माध्यम से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इसके अतिरिक्त, वडोदरा-नागदा और विरार-मुंबई सेंट्रल सहित अन्य खंडों में विस्तार का कार्य तेजी से चल रहा है। साथ ही, 'मिशन रफ़्तार' के तहत गति को 160 किमी प्रति घंटे तक अपग्रेड करने की योजना भी बनाई गई है।

कुल मिलाकर, 'कवच' को अब 2,200 से अधिक रूट किलोमीटर पर लागू किया जा चुका है, जो राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पर भारत की इस स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के निरंतर और तीव्र विस्तार को दर्शाता है।

रेलवे सुरक्षा के लिए एआई और तकनीक-आधारित सिग्नलिंग एवं दूरसंचार उपाय

परिचालन सुरक्षा बढ़ाने, संचार की विश्वसनीयता में सुधार करने और यात्री सूचना प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए, भारतीय रेलवे पूरे रेल नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, दूरसंचार और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठा रही है। कवच के साथ-साथ, ये पहलें वास्तविक समय की निगरानी, ​​पूर्वानुमानित रखरखाव, स्वचालित अलर्ट के माध्यम से पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों की पूरक बनती हैं। इनका उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भरता कम करना, सिस्टम की प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार करना और दुर्घटना रोकथाम एवं बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

 

  1. एआई-सक्षम घुसपैठ पहचान प्रणाली

अत्यधिक संवेदनशील रेल गलियारों में रेलवे पटरियों पर हाथियों और अन्य जंगली जानवरों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए 'वितरित ध्वनिक सेंसिंग'(डीएएस) तकनीक पर आधारित एक एआई समर्थित अतिक्रमण प्रणाली विकसित की गई है। यह प्रणाली जानवरों की आवाजाही के संबंध में वास्तविक समय में सावधान करती है और ट्रैन चालकों, स्टेशन मास्टरों तथा नियंत्रण कक्षों को चेतावनी भेजती है, जिससे निवारक कार्रवाई तुरंत संभव होती है और दुर्घटना के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे पर 141 रूट किलोमीटर पर परिचालन शुरू हो चुका है।
  • अतिरिक्त 981 रूट किलोमीटर के लिए निविदाएं आवंटित कर दी गई हैं।

रेलवे पटरियों के पास जंगली जानवरों, विशेष रूप से हाथियों की आवाजाही को रोकने के लिए, रेलवे क्रॉसिंग पर नई तरह के 'हनी बीबजर उपकरण स्थापित किए गए हैं। इन उपकरणों द्वारा उत्पन्न ध्वनि हाथियों को पटरियों से दूर भगाने के लिए एक प्रतिकर्षक के रूप में कार्य करती है। इसके अतिरिक्त, रात के समय या कम दृश्यता की स्थिति में सीधे ट्रैक पर जंगली जानवरों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए 'थर्मल विजन कैमरों' का परीक्षण किया जा रहा है, जो ट्रैन चालकों को समय पर सावधान  करते हैं।

  1. वीडियो निगरानी प्रणाली (वीएसएस)

स्टेशन-स्तरीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए, 1,731 रेलवे स्टेशनों पर वीडियो निगरानी प्रणाली (वीएसएस) चालू की गई है। ये प्रणाली अतिक्रमण और पटरियों पर किसी के होने जैसी घटनाओं का स्वचालित रूप से पता लगाने के लिए एआई-आधारित 'वीडियो एनालिटिक्स' से लैस हैं। इसके साथ ही, वास्तविक समय में पहचान और निगरानी के लिए 'फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर' (एफआरएस) का उपयोग किया जा रहा है, जो सुरक्षा प्रबंधन में सहायता प्रदान करता है।

  1. एआई-संचालित पूर्वानुमान और निरीक्षण
  • मानकीकृत विफलता पूर्वानुमान लॉजिक और चेतावनी भेजने का तंत्र विकसित करने के लिए चुनिंदा स्टेशनों पर सिग्नलिंग प्रणालियों के एआई-आधारित रखरखाव का परीक्षण किया जा रहा है।
  • रोलिंग स्टॉक के दोषों का जल्द पता लगाने और परिसंपत्तियों के स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी के लिए 'ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टॉक सिस्टम' (ओएमआरएस) और 'व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर्स' (डब्ल्यूआईएलडी) को अपनाया गया है।

 

  • भारतीय रेलवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) के बीच 'वेसाइड मशीन विजन-आधारित निरीक्षण प्रणाली' (एमवीआईएस) के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह प्रणाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग द्वारा संचालित है, जो चलती ट्रेनों में लटके हुए या लापता पुर्जों या हिस्सों का स्वचालित रूप से पता लगाती है।

 

  • भारतीय रेलवे और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के बीच 'स्वचालित व्हील प्रोफाइल माप प्रणाली (एडब्ल्यूपीएमएस) के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह प्रणाली पहियों की ज्यामिति और घिसावट का स्वचालित, बिना संपर्क के, वास्तविक समय में मापन सक्षम बनाती है, जिससे परिचालन सुरक्षा और अनुरक्षण दक्षता में वृद्धि होती है।

 

  1. डिजिटल रेडियो संचार

सुरक्षित ट्रेन संचालन ट्रैन चालकों और गार्ड के बीच विश्वसनीय ध्वनि संचार पर निर्भर करता है। इस दिशा में, पारंपरिक एनालॉग प्रणालियों के स्थान पर डिजिटल 5 डब्ल्यू अति उच्च फ्रीक्वेंसी (वीएचएफ) वॉकी-टॉकी सेट की खरीद को मानकीकृत किया गया है।

  1. सुरंग संचार प्रणाली

लंबी सुरंगों वाले रेल खंडों में सुरंग संचार प्रणाली लागू की गई है, जिसमें उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना विशेष रूप से शामिल है। ये प्रणालियाँ ट्रेनों और परिचालन नियंत्रण केंद्रों के बीच निर्बाध रेडियो संचार सुनिश्चित करती हैं, जिससे सुरंगों के भीतर परिचालन सुरक्षा और आपातकालीन स्थिति को सँभालने की क्षमता बढ़ती है।

  1. ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) नेटवर्क

आधुनिक सिग्नलिंग, दूरसंचार और डेटा संचार को सुचारू बनाने के लिए ओएफसी नेटवर्क का व्यापक विस्तार किया गया है। अक्टूबर 2025 तक, 619 रूट किलोमीटर नई ओएफसी बिछाई गई, जिससे अब कुल कवरेज लगभग 67,233 रूट किलोमीटर तक पहुँच गया है।

  1. यात्री सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली

यात्रियों को अपने कोच (डिब्बे) की स्थिति का पता लगाने में मदद करने के लिए 1,064 स्टेशनों पर कोच गाइडेंस सिस्टम स्थापित किए गए हैं। यह प्रणाली प्लेटफार्म पर कोच की सटीक स्थिति बताती है। 1,449 स्टेशनों पर ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड (टीआईबी) लगाए गए हैं, जो ट्रेन नंबर, नाम, समय और प्लेटफार्म नंबर सहित ट्रेन के आगमन/प्रस्थान का विवरण प्रदर्शित करते हैं।

  1. इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग

दिसंबर 2025 तक, 6,660 स्टेशनों पर पॉइंट और सिग्नल के केंद्रीकृत संचालन के साथ इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम प्रदान किए गए हैं। ये प्रणालियाँ मानवीय चूक के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम करती हैं।

  1. सतर्कता नियंत्रण उपकरण (वीसीडी)

ट्रेन चालकों की सतर्कता को बेहतर बनाने के लिए सभी ट्रेनों को सतर्कता नियंत्रण उपकरणों से लैस किया गया है।

  1. कोहरे के दौरान सुरक्षा उपाय
  • विद्युतीकृत क्षेत्रों में, कोहरे के कारण दृश्यता कम होने पर क्रू को आगे आने वाले सिग्नल के प्रति सचेत करने के लिए सिग्नल से दो 'ओएचई मास्ट' पहले, सिग्नल मास्ट पर, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड लगाए गए हैं।
  • कोहरे से प्रभावित क्षेत्रों में लोको पायलटों को जीपीएस-आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस (एफएसडी) प्रदान किए गए हैं। यह उपकरण उन्हें सिग्नल और लेवल क्रॉसिंग गेट आने पर उनकी दूरी का अंदाजा लगाने में सक्षम बनाता है।

 

  1. ट्रैक और रेल की स्थिति की निगरानी
  • रेल की पटरियों के आंतरिक खराबी का पता लगाने और खराब रेल को समय पर हटाने के लिए नियमित रूप से अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (यूएसएफडी) परीक्षण किया जाता है।
  • ट्रैक के दोषों की पहचान करने, यात्रा गुणवत्ता का आकलन करने और रखरखाव की आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओएमएस) और ट्रैक रिकॉर्डिंग कार (टीआरसी) का उपयोग करके ट्रैक की निरंतर निगरानी की जाती है।

 

  1. डिजिटल ट्रैक परिसंपत्ति प्रबंधन

तर्कसंगत रखरखाव योजना को सक्षम करने और संसाधन तैनाती को अनुकूलित करने के लिए ट्रैक डेटाबेस और निर्णय लेने में सहायता करने वाली प्रणाली सहित ट्रैक परिसंपत्तियों की एक वेब-आधारित ऑनलाइन निगरानी प्रणाली को अपनाया गया है।

निष्कर्ष

कवच 4.0, आगामी कवच 5.0 और एआई-संचालित निगरानी प्रणालियों को संयुक्त रूप से इस्तेमाल करके, भारतीय रेलवे सक्रिय रूप से एक आधुनिक, एकीकृत और भविष्योन्मुखी सुरक्षा ढांचे का निर्माण कर रही है। इन प्रौद्योगिकियां की मदद से परिचालन विश्वसनीयता को मजबूती मिल रही है, यात्रियों और रेल कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, साथ ही ये  प्रौद्योगिकियां बुनियादी ढांचे की रक्षा कर रही हैं, उपनगरीय नेटवर्क की क्षमता बढ़ा रही हैं और वन्यजीवों की सुरक्षा में भी सुधार कर रही हैं।

2016 के पहले क्षेत्रीय परीक्षणों से लेकर बड़े पैमाने पर राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन तक, यह यात्रा सुरक्षा, स्वदेशी नवाचार और निरंतर सुधार के प्रति एक अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जैसे-जैसे इसका कार्यान्वयन आगे बढ़ रहा है, भारतीय रेलवे निरंतर दुनिया के सबसे सुरक्षित, तकनीकी रूप से उन्नत और भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्कों में से एक बनने की ओर अग्रसर है।

 

संदर्भ:

रेल मंत्रालय

सुरक्षित पटरियों परः कवच और एआई से मजबूत हो रही भारत में रेलवे सुरक्षा

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पीआईबी शोध

 

पीके/केसी/एसके


(रिलीज़ आईडी: 2224863) आगंतुक पटल : 11
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