पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
“मुंबई बंदरगाह के पूर्वी तट का 22,672 करोड़ रुपए की समुद्री विकास परियोजना से कायापलट होगा”: सर्बानंद सोनोवाल
“मुंबई का पूर्वी तट भारत की वैश्विक समुद्री महत्वाकांक्षा का केंद्र बनेगा”: सर्बानंद सोनोवाल
“5,500 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला छत्रपति शिवाजी महाराज कन्वेंशन सेंटर मुंबई के एमआईसीई को बढ़ावा देगा”: सर्बानंद सोनोवाल
“प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में मुंबई बंदरगाह योजना से 2047 तक 5.5 लाख रोजगार सृजित होंगे और 25 मिलियन पर्यटक आएंगे”: सर्बानंद सोनोवाल
प्रविष्टि तिथि:
06 FEB 2026 8:28PM by PIB Delhi
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई बंदरगाह प्राधिकरण (एमबीपीए) की चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की, जिसमें केंद्र ने मुंबई के पूर्वी तट को वैश्विक समुद्री, रसद और पर्यटन केंद्र में बदलने के लिए 22,672 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।
समीक्षा में 2047 तक मुंबई को एक प्रमुख समुद्री और तटवर्ती पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से एक दीर्घकालिक विकास रोडमैप की रूपरेखा तैयार की गई। बदलाव की यह रणनीति दो समानांतर विकास मार्गों पर आधारित है - मुंबई बंदरगाह के मुख्य माल ढुलाई कार्यों को मजबूत करना और बंदरगाह की कम उपयोग वाली भूमि को शहरी, पर्यटन और व्यावसायिक अवसंरचना के लिए दोबारा उपयोग में लाना।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, भारत विश्व के अग्रणी समुद्री राष्ट्रों में से एक बनने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। मुंबई के पूर्वी तट का 22,672 करोड़ रुपए का कायाकल्प इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो समुद्री आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा, व्यापार और पर्यटन का विस्तार करेगा और वैश्विक स्तर पर मानक स्थापित करने वाले तटवर्ती बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगा। यह पहल विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप है, साथ ही मुंबई को वैश्विक समुद्री और नीली अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में स्थापित करती है”।
पूर्वी तट के किनारे की बड़ी-बड़ी अनुपयोगी भूमि का व्यवस्थित रूप से पुनर्विकास किया जा रहा है, ताकि क्रूज पर्यटन, समुद्री व्यापार, कौशल विकास और नीली अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके। यह पुनर्विकास कार्यक्रम समुद्री अमृत काल विजन 2047, क्रूज भारत मिशन और नीति आयोग की मुंबई महानगर क्षेत्र विकास केंद्र योजना के अनुरूप है, जिसका मकसद तट को एक बहुउपयोगी आर्थिक और सार्वजनिक स्थान के रूप में स्थापित करना है।
मुंबई बंदरगाह का लक्ष्य 2047 तक 150 मिलियन टन प्रति वर्ष की माल ढुलाई क्षमता हासिल करना है, जो मुख्य रूप से जवाहर द्वीप और पीरपाऊ में कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, एलएनजी और रसायनों जैसे अपतटीय तरल थोक माल की आवाजाही से प्रेरित है। प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं में भूमि सुधार और तट संरक्षण कार्य, जवाहर द्वीप में 22 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले छठे तेल बर्थ का विकास और ठोस थोक माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए बाहरी बंदरगाह में नई लंगरगाह सुविधाएं शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “मुंबई हमेशा से ही विश्व के लिए भारत का समुद्री प्रवेश द्वार रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जी का समुद्री शक्ति के पुनरुद्धार, पुनर्जीवन और सुधार का आह्वान, आत्मनिर्भर भारत बनने की हमारी यात्रा का केंद्रबिंदु है। मुंबई का एक आधुनिक, कुशल और जन-केंद्रित बंदरगाह शहर के रूप में पुनरुद्धार, आने वाले दशकों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार, रसद और समुद्री सेवाओं को आकार देने में सक्षम वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में भारत के उत्थान में निर्णायक भूमिका निभाएगा”।
विकसित भारत मुंबई मरीना एक प्रमुख परियोजना है, जिसे हाइब्रिड ईपीसी-पीपीपी मॉडल के ज़रिए 887 करोड़ रुपए के निवेश के साथ भारत के पहले और सबसे बड़े विश्व स्तरीय मरीना के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसके पूरक के रूप में नमो भारत इंटरनेशनल सेलिंग स्कूल होगा, जिसका उद्देश्य संरचित नौकायन शिक्षा प्रदान करना और जल-आधारित खेलों और कौशलों तक समान सार्वजनिक पहुंच का विस्तार करना है।
पुनर्विकास योजना में प्रिंसेस डॉक स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र भी शामिल है, जिसे पीपीपी आधार पर लगभग 5,500 करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश से प्रस्तावित किया गया है। एक उत्कृष्ट एमआईसीई गंतव्य के रूप में डिज़ाइन किए गए इस केंद्र के, तटवर्ती क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलनों और कार्यक्रमों की मेजबानी करने की उम्मीद है। एम-शेड में रोपैक्स टर्मिनल, भाऊचा धक्का ग्लास हाउस और यात्री टर्मिनल जैसी परियोजनाओं के ज़रिए यात्री और क्रूज बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है, साथ ही घरेलू क्रूज टर्मिनल को शहर के प्रमुख कार्यक्रमों के लिए एक स्थल के रूप में सक्रिय किया जा रहा है।
पारंपरिक समुद्री आजीविका के आधुनिकीकरण के तहत, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग से मल्लेट बंदर में 132 करोड़ रुपए की लागत से एक नया मछली घाट विकसित किया जा रहा है। यह सुविधा मछली पकड़ने वाली ट्रॉलरों की क्षमता को लगभग 300 से बढ़ाकर 1,200 से अधिक कर देगी, साथ ही सुरक्षा और दक्षता में सुधार के लिए मत्स्य पालन कार्यों को यात्री आवागमन से अलग करेगी। आसपास के तटवर्ती क्षेत्र को थीम आधारित सड़कों, खुले में भोजन करने के लिए क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों के ज़रिए जीवंत बनाया जाएगा, जिससे नागरिकों और पर्यटकों के लिए 3.5 किलोमीटर लंबा एक निरंतर तटवर्ती सैरगाह तैयार होगा।
इस परिवर्तन के तहत संस्थागत और शासन संबंधी बुनियादी ढांचे का भी उन्नयन किया जा रहा है। इसमें 295 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बन रही नई मुंबई बंदरगाह प्रशासनिक इमारत और मल्लेट बंदर स्थित शिवदुर्ग टावर शामिल हैं, जिसमें वधवन बंदरगाह और जहाजरानी महानिदेशालय के कार्यालय होंगे। इसके अलावा, कई केंद्रीय सरकारी निकायों को एक ही आधुनिक स्थान पर समेकित करने के लिए कॉटन ग्रीन में एक केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर विकसित किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “मुंबई के पूर्वी तट का कायापलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को विश्व के अग्रणी समुद्री राष्ट्रों में शामिल करने के स्पष्ट और दीर्घकालिक दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है। विश्व स्तरीय बंदरगाह बुनियादी ढांचे, क्रूज और सम्मेलन सुविधाओं, आधुनिक मत्स्य पालन, कौशल विकास संस्थानों और सार्वजनिक तटवर्ती स्थानों को एकीकृत करके, हम नए समुद्री अवसरों को खोल रहे हैं, जो रोजगार, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। समुद्री और नीली अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में मुंबई का पुनरुत्थान समुद्री सेवाओं और रसद में वैश्विक नेता बनने की दिशा में भारत की यात्रा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।”
मुंबई बंदरगाह प्राधिकरण मेट्रो लाइन 11, ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव सुरंग परियोजना और रेडियो क्लब जेटी जैसी प्रमुख राज्य-स्तरीय अवसंरचना परियोजनाओं का भी समर्थन कर रहा है, जिससे बंदरगाह-आधारित विकास का मुंबई के व्यापक शहरी परिवहन नेटवर्क के साथ निर्बाध एकीकरण हो सके। परियोजनाओं के इस एकीकृत पोर्टफोलियो से लगभग 5.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा, 500 हेक्टेयर से अधिक निर्मित समुद्री और नीली अर्थव्यवस्था क्षेत्र का निर्माण होगा और 2047 तक प्रति वर्ष 25 मिलियन से अधिक पर्यटक आएंगे।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि मुंबई के पूर्वी तट का कायापलट भारत को एक अग्रणी समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को दर्शाता है।





पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2224792)
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