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बल्क ड्रग पार्क योजना

प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 1:48PM by PIB Delhi

बल्क ड्रग पार्कों को बढ़ावा देने की योजना को मंत्रिमंडल ने 20 मार्च, 2020 को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य देश में तीन (3) बल्क ड्रग पार्क स्थापित करना है, जिससे विश्व-स्तरीय सामान्‍य अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण के माध्यम से बल्क ड्रग्स के उत्पादन की लागत को कम किया जा सके। इससे बल्क ड्रग्स के उत्पादन में पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता प्रति पार्क अधिकतम 1000 करोड़ रुपये या सामान्‍य अवसंरचना सुविधाओं (सीआईएफ) की परियोजना लागत का 70 प्रतिशत (पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर तथा केंद्र शासित प्रदेश और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के मामले में 90 प्रतिशत) तक सीमित है, जो भी कम हो। इस योजना के लिए आवंटित धनराशि 3000 करोड़ रुपये है। योजना की अवधि वित्त वर्ष 2020-2021 से वित्त वर्ष 2026-2027 तक है।

इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा सामान्‍य अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जैसे कि-

    1. केंद्रीय अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी)
    2. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
    3. वर्षा जल निकासी नेटवर्क
    4. सामान्य विलायक भंडारण प्रणाली, विलायक पुनर्प्राप्ति और आसवन संयंत्र
    5. सामान्य वेयर हाउस
    6. फ़ैक्टरी गेट पर आवश्यक ट्रांसफ़ॉर्मर के साथ समर्पित पावर सब-स्टेशन और वितरण प्रणाली
    7. कच्चा, पीने योग्य और खनिज रहित पानी
    8. भाप उत्पादन और वितरण प्रणाली
    9. सामान्य शीतलन प्रणाली और वितरण नेटवर्क
    10. सामान्य लॉजिस्टिक्‍स
    11. उन्नत प्रयोगशाला परीक्षण केंद्र, एपीआई (सक्रिय फार्मास्युटिकल) की जटिल परीक्षण/अनुसंधान आवश्यकताओं के लिए भी उपयुक्त, जिसमें माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला और स्थिरता चेम्‍बर शामिल हैं
    12. आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र
    13. सुरक्षा/खतरनाक संचालन लेखा परीक्षा केंद्र और
    14. उत्कृष्टता केंद्र आदि।

वर्ल्‍ड ड्रग पार्कों को बढ़ावा देने की योजना के अंतर्गत, विभाग को 13 राज्यों से प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मूल्यांकन के बाद, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश के बल्‍क ड्रग पार्कों की स्थापना के प्रस्तावों को प्रत्येक पार्क को 1000 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता के साथ मंजूरी दी गई। इन पार्कों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:

अनुमोदित राज्य

स्थान

क्षेत्रफल

(एकड़ में)

राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (एसआईए)

कुल परियोजना लागत

(करोड़ रुपये में)

सीआईएफ लागत

(करोड़ रुपये में)

गुजरात

जंबूसर, भरूच

2015.02

गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी)

2507.02

1457.01

हिमाचल प्रदेश

हरौली, ऊना

1405.01

हिमाचल प्रदेश बल्क ड्रग पार्क इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचपीबीडीपीआईएल)

1923

1118.46

आंध्र प्रदेश

नक्कापल्ली, अनाकापल्ली

2001.80

आंध्र प्रदेश बल्क ड्रग इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन (एपीबीडीआईसीएल)

1876.66

1438.89

 

इन पार्कों के विकास की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है: -

(i) गुजरात बल्क ड्रग पार्क: सड़कों, जल निकासी, जल अवसंरचना, अपशिष्ट संग्रहण और रैक सिस्टम से संबंधित सभी सामान्य अवसंरचना सुविधाओं (सीआईएफ) के लिए नागरिक अवसंरचना निविदाएं आवंटित की जा चुकी हैं और कार्य पूर्णता के उन्नत चरण में हैं। सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी), विलायक पुनर्प्राप्ति और उपचार भंडारण एवं निपटान सुविधाओं (टीएसडीएफ) से संबंधित उपयोगिता निविदाएं भी आवंटित की जा चुकी हैं और निष्पादन कार्य जारी है।

(ii) आंध्र प्रदेश बल्क ड्रग पार्क: आंतरिक सड़कों, बिजली, पानी, जल निकासी और उपयोगिता भवनों के लिए अवसंरचना निविदाएं आवंटित की जा चुकी हैं और कार्य प्रगति पर है। परियोजना की सीमा के साथ बाड़बंदी पूरी हो चुकी है, बाहरी जल पाइपलाइन बिछाई जा रही है और बिजली अवसंरचना डिजाइन की मंजूरी प्रक्रियाधीन है। अतिरिक्त भूमि के लिए भूमि अधिग्रहण जारी है और उक्त भूमि के लिए पर्यावरण मंजूरी जनवरी 2026 में प्रदान की गई थी।

(iii) हिमाचल प्रदेश बल्क ड्रग पार्क: आंतरिक सड़कों, जल निकासी, पुलों और जल अवसंरचना के लिए निविदाएं जारी कर दी गई हैं और कार्य प्रगति पर हैं। सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र और भाप उत्पादन एवं वितरण प्रणालियों सहित शून्य तरल निर्वहन सुविधाओं के लिए निविदा जारी कर दी गई है। स्थल का सीमांकन, ग्रेडिंग और भूमि समतलीकरण कार्य भी प्रगति पर हैं।

वर्तमान में, भारत सरकार की ओर से बल्‍क ड्रग पार्क संवर्धन योजना के अंतर्गत तमिलनाडु बल्‍क ड्रग पार्क स्थापित करने का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

हालांकि उक्त योजना के अंतर्गत तमिलनाडु के लिए किसी भी बल्क ड्रग पार्क को मंजूरी नहीं दी गई है, सरकार तमिलनाडु सहित पूरे देश में दवा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए चिकित्सा उपकरण पार्क संवर्धन योजना और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना जैसी अन्य पहलों के माध्यम से प्रयासरत है। इन योजनाओं का विवरण इस प्रकार है:

(i) चिकित्सा उपकरण पार्क प्रोत्साहन योजना: चिकित्सा उपकरण पार्क प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य चिकित्सा उपकरण पार्कों में स्थापित चिकित्सा उपकरण इकाइयों को विश्वस्तरीय, साझा अवसंरचना सुविधाओं तक सुगम पहुंच प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत, तीन पार्क स्थापित किए जा रहे हैं और उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा, मध्य प्रदेश के उज्जैन और तमिलनाडु के कांचीपुरम में विकास के उन्नत चरण में हैं। इन पार्कों की कुल परियोजना लागत 871.11 करोड़ रुपये है, जिसमें सामान्‍य अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण के लिए प्रत्येक पार्क से 100 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान शामिल है। इससे संसाधनों के अनुकूलन और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं के माध्यम से उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद है। तीनों पार्कों के लिए सिविल निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। दिसंबर 2025 तक, 306.64 एकड़ क्षेत्र में फैले तीनों पार्कों में 199 चिकित्सा उपकरण निर्माताओं को भूमि आवंटित की जा चुकी है और 34 इकाइयों ने अपने संयंत्रों का निर्माण शुरू कर दिया है।

(ii) उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई):

1. भारत में महत्वपूर्ण सक्रिय औषधि अवयवों (केएसएम/डीआई/एपीआई) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना (जिसे आमतौर पर बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना के रूप में जाना जाता है): इस योजना का कुल बजट परिव्यय 6,940 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य उन महत्वपूर्ण औषधियों के निर्माण में उपयोग होने वाले सक्रिय औषधि अवयवों (एपीआई) की आपूर्ति में व्यवधान को रोकना है जिनके लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। यह योजना एकल स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आपूर्ति व्यवधान के जोखिम को कम करके ऐसा करती है। योजना के अंतर्गत स्थापित ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से निर्मित 41 चिन्हित केएसएम/डीआई/एपीआई उत्पादों की बिक्री पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। योजना के अंतर्गत, 33 बल्क ड्रग्स के निर्माण के लिए 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 2 परियोजनाएं तमिलनाडु से स्वीकृत हैं।

2. फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना: इस योजना का कुल बजट परिव्यय 15,000 करोड़ रूपये है। इसका उद्देश्य फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाकर तथा उच्च मूल्य वाली वस्तुओं के उत्पाद विविधीकरण में योगदान देकर देश की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है। यह योजना जैव फार्मास्यूटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाएं, पेटेंट प्राप्त दवाएं या पेटेंट की समाप्ति के निकट वाली दवाएं, ऑटोइम्यून दवाएं, कैंसर रोधी दवाएं आदि जैसी उच्च मूल्य वाली दवाओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। साथ ही, बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना के अंतर्गत अधिसूचित दवाओं के अलावा अन्य केएसएम/डीआई/एपी के उत्पादन को भी प्रोत्साहित करती है, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है। इस योजना के अंतर्गत, ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से निर्मित फार्मास्यूटिकल्स और इन-विट्रो मेडिकल डिवाइस (आईवीडी) के निर्माण के लिए 55 आवेदकों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 16 विनिर्माण इकाइयां तमिलनाडु में स्थित हैं।

3. चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना: इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2026-27 तक पांच वर्षों के लिए प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन के लिए 3,420 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत चयनित कंपनियां रेडियोथेरेपी, इमेजिंग डिवाइस, एनेस्थीसिया, कार्डियो-रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर तथा इम्प्लांट डिवाइस सेगमेंट में घरेलू स्तर पर निर्मित चिकित्सा उपकरणों की बिक्री में वृद्धि के लिए पांच वर्षों तक वित्तीय प्रोत्साहन की पात्र होंगी। इस योजना के अंतर्गत कुल 28 स्वीकृत परियोजनाओं में से दो तमिलनाडु में स्वीकृत की गई हैं।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एचएन/एमपी

 


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