विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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युवा वैज्ञानिकों की खोज और अनुसंधान को प्रोत्साहन

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 5:03PM by PIB Delhi

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने युवा वैज्ञानिकों को सहयोग देने के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें शामिल हैं:

 

युवा वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकीविदों के लिए योजना (एसवाईएसटी) का उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों को सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित समाधान निकालने करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। बीते पांच वर्ष (2021 से 2025 तक) में एसवाईएसटी के अंतर्गत 120 युवा वैज्ञानिकों को सहयोग दिया गया है।

 

डब्ल्यूआईएसईपीएचडी के लिए फेलोशिप कार्यक्रम का उद्देश्य 27-45 वर्ष की आयु वर्ग की उन महिला वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों को बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज में डॉक्टरेट रिसर्च करने के मौके प्रदान करना है जो एसटीईएम क्षेत्रों में प्रयोगशाला स्तर की वैज्ञानिक के रूप में अनुसंधान करना चाहती हैं। यह कार्यक्रम महिलाओं को स्वतंत्र परियोजना अनुदान के माध्यम से उच्च शिक्षा, यानी पीएचडी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। बीते पांच वर्ष में, डब्ल्यूआईएसई पीएचडी के लिए फेलोशिप के माध्यम से 241 युवा वैज्ञानिकों को मदद प्रदान की गई है।

 

विज्ञान ज्योति कार्यक्रम का उद्देश्य लैंगिक असमानता को कम करते हुए, लड़कियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में करियर बनाने के लिए प्रेरित और सशक्त करना है। यह कार्यक्रम स्कूल से लेकर कॉलेज तक विज्ञान की पढ़ाई कर रही लड़कियों के लिए एक सहयोगी वातावरण प्रदान करता है और आईआईटी, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, एनआईटी, आईआईएसईआर, एम्स और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों सहित नॉलेज पार्टनर्स (केपी) के साथ सहयोग करके ज्ञान और मौकों तक पहुंच को बढ़ाता है। नियमित गतिविधियों के जरिए, विज्ञान ज्योति कार्यक्रम नवीनतम प्रगति से अवगत कराता है और विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित करने में सहायता करता है, जिससे विज्ञान ज्योति कार्यक्रम के छात्रों को एसटीईएम में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। बीते पांच वर्ष में, विज्ञान ज्योति कार्यक्रम के अंतर्गत 1,12,682 छात्रों को सहायता प्रदान की गई है।

 

कॉग्निटिव साइंस अनुसंधान पहल के अंतर्गत सीएसआरआई-पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप (सीएसआरआई-पीडीएफ) कार्यक्रम युवा वैज्ञानिकों (40 वर्ष से कम आयु के) को कॉग्निटिव साइंस के अग्रणी क्षेत्रों में नवाचारी अनुसंधान करने के अवसर प्रदान करता है। बीते पांच वर्ष में, सीएसआरआई-पीडीएफ के अंतर्गत 20 युवा वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान की गई है।

 

अभिप्रेरित अनुसंधान हेतु विज्ञान उपलब्धियों में नवोन्मेष (इंस्पायर) योजना का उद्देश्य मेधावी युवाओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर बुनियादी और प्राकृतिक विज्ञान का अध्ययन करने और इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि और पशु चिकित्सा विज्ञान सहित बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज क्षेत्रों में अनुसंधान करियर बनाने के लिए आकर्षित करना है। यह योजना देश भर के सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हुई है। इसका लक्ष्य देश के अनुसंधान एवं विकास के लिए आधार का विस्तार करना है। इसमें विशेष रूप से युवा वैज्ञानिकों के लिए निम्नलिखित फेलोशिप शामिल हैं:

 

उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति (एसएचई) का उद्देश्य प्रतिभाशाली युवाओं को विज्ञान-प्रधान कार्यक्रमों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है और अग्रणी शोधकर्ताओं के साथ ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप के माध्यम से मार्गदर्शन दिया जाता है। यह योजना 17-22 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को प्राकृतिक और मूलभूत विज्ञानों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिए 5 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 0.80 लाख रुपये की 12,000 छात्रवृत्तियां प्रदान करती है। बीते पांच वर्ष में, एसएचई के माध्यम से 53,097 छात्रों को सहायता प्रदान की गई है।

 

इंस्पायर फेलोशिप उन छात्रों को दी जाती है, जिन्होंने राष्ट्रीय महत्व के विश्वविद्यालय/ शैक्षणिक संस्थान (जैसे आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर) में इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि, पशु चिकित्सा सहित बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज में प्रथम स्थान प्राप्त किया हो। साथ ही, यह फेलोशिप उन इंस्पायर छात्रों को भी दी जाती है जिन्होंने एमएससी स्तर पर कुल मिलाकर 70% अंक प्राप्त किए हों और देश के किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/ शैक्षणिक संस्थान में पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्र हों। बीते पांच वर्ष में, इंस्पायर फेलोशिप के माध्यम से 3101 युवा वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान की गई है।

 

इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप 27-32 वर्ष आयु वर्ग के पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ताओं को इंजीनियरिंग, कृषि, पशु चिकित्सा और चिकित्सा सहित बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज क्षेत्रों में 5 वर्षों के लिए अवसर प्रदान करती है। पिछले पांच वर्षों में, इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप के माध्यम से 482 युवा वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान की गई है।

 

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) भारत में युवा वैज्ञानिकों की पहचान करने और उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री प्रारंभिक कैरियर अनुसंधान अनुदान (पीएमईसीआरजी), राष्ट्रीय पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप (एनपीपीडीएफ), रामानुजन फेलोशिप और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा सहायता (आईटीएस) जैसी योजनाओं को लागू कर रहा है।

 

इसके अलावा, एएनआरएफ (पहले एसईआरबी) के पास स्टार्ट-अप अनुसंधान अनुदान (एसआरजी), एसईआरबी अनुसंधान वैज्ञानिक (एसआरएस), अनुसंधान उत्कृष्टता के लिए शिक्षक संघ (टीएआरई) जैसे कार्यक्रम थे, जिनका उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों को वैज्ञानिक गतिविधियों में शामिल होने/ अनुसंधान कार्य के लिए प्रोत्साहित करना था। बीते पांच वर्ष में इन कार्यक्रमों से लाभान्वित युवा वैज्ञानिकों की संख्या नीचे दी गई है:

 

प्रधानमंत्री प्रारंभिक कैरियर अनुसंधान अनुदान (पीएमईसीआरजी): 712

 

स्टार्ट-अप अनुसंधान अनुदान (एसआरजी): 1887

 

राष्ट्रीय पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप (एनपीडीएफ): 1561

 

रामानुजन फेलोशिप: 168

 

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) अपने क्षमता निर्माण एवं मानव अनुसंधान विकास कार्यक्रम के अंतर्गत युवा शोधकर्ताओं को डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरेट अनुसंधान करने हेतु फेलोशिप प्रदान करती है। बीते पांच वर्ष में इस कार्यक्रम के अंतर्गत 9880 युवा शोधकर्ताओं को डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरेट अनुसंधान हेतु फेलोशिप प्रदान की गई है। इसके साथ ही, सीएसआईआर रमन अनुसंधान फेलोशिप (आरआरएफ) कार्यक्रम का संचालन करती है, जिसके अंतर्गत सीएसआईआर के प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिकों को विदेशों में अग्रणी वैश्विक अनुसंधान केंद्रों में अल्पकालिक अनुसंधान कार्य करने के मौके प्रदान करके उन्नत अनुभव और प्रशिक्षण प्राप्त किया जा सकता है। बीते पांच वर्ष में सीएसआईआर के 65 युवा वैज्ञानिकों को 22 देशों में अनुसंधान करने के लिए रमन अनुसंधान फेलोशिप से सम्मानित किया गया है।

 

जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने देश भर में युवा वैज्ञानिकों की पहचान करने के लिए कई कार्यक्रम लागू किए हैं, जिनके तहत बीते पांच वर्ष में निम्नलिखित कार्यक्रमों के अंतर्गत 500 से अधिक वैज्ञानिकों का चयन किया गया है:

 

डीबीटी रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप

 

बायोटेक्नोलॉजी करियर उन्नति एवं पुनर्भिविन्यास (बायोकेयर)

 

एमके भान – युवा शोधकर्ता फेलोशिप कार्यक्रम

 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने आईसीएआर संस्थानों के युवा वैज्ञानिकों के लिए एक प्रतियोगी चयन प्रक्रिया के माध्यम से 21 राष्ट्रीय फेलो कार्यक्रम और 50 युवा वैज्ञानिक परियोजनाओं को मंजूरी दी। ये परियोजनाएं 1 जनवरी, 2026 से शुरू हुईं और 31 दिसंबर, 2028 तक जारी रहेंगी। बीते पांच वर्ष में इन परियोजनाओं के लिए कुल 22.4377 करोड़ रुपये का  आउटले मंजूर किया गया है।

उपरोक्त सभी योजनाएं/ कार्यक्रम बिहार सहित पूरे देश में प्रतिस्पर्धी आधार पर लागू किए जाते हैं। बिहार के ग्रामीण और पिछड़े/ उभरते जिलों के युवाओं सहित कई युवाओं को इन कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान करने के लिए मदद की जाती है। कृषि एवं सेवा विभाग के इंस्पायर कार्यक्रम ने बीते पांच वर्ष में बिहार के 1033 छात्रों को विज्ञान-प्रधान कार्यक्रमों के अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए एसएचई छात्रवृत्ति के माध्यम से मदद प्रदान की है। इसके साथ ही, 48 युवा शोधकर्ताओं को इंस्पायर फेलोशिप और 8 पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ताओं को इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। विज्ञान ज्योति कार्यक्रम के अंतर्गत बिहार में 4084 लड़कियों को सहायता प्रदान की गई। एएनआरएफ ने स्टार्ट-अप अनुसंधान अनुदान के माध्यम से 32 युवा वैज्ञानिकों को मदद की, साथ ही बिहार राज्य में 8 प्रधानमंत्री प्रारंभिक कैरियर अनुसंधान अनुदान (पीएमईसीआरजी) और 4 राष्ट्रीय पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप (एन-पीडीएफ) भी प्रदान की गईं।

इसके साथ ही, बिहार के नवादा जिले में, कृषि एवं संचार प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की ओर से वित्त पोषित एक परियोजना के अंतर्गत, आईसीएआर-आरसीईआर, पटना की ओर से सिरदला और मेस्कौर ब्लॉकों में दो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) केंद्र स्थापित किए गए हैं। चयनित ग्रामीण युवाओं को डिजिटल प्रौद्योगिकियों और आईसीटी उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे लगभग 40 किसानों को समय पर और स्थान के अनुसार विशिष्ट कृषि सलाह प्रदान कर सकें।

यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एमएम


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