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शिक्षा मानव पूंजी का मुख्‍य स्‍तंभ और 2047 तक भारत को विकसित राष्‍ट्र बनाने की दिशा में राष्‍ट्र के वृद्धिपथ का केन्द्रीय स्‍तंभ: आर्थिक समीक्षा 2025-2026


समीक्षा के अनुसार साक्षरता दर में वृद्धि, स्‍कूलों और उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में नामांकन दर बढ़़ने, व्‍यवसायिक शिक्षा के प्रावधान शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धि

प्राथमिक चरण में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 90.9, उच्‍च प्राथमिक चरण के लिए 90.3 हुआ

भारत में अब 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्‍स,  इसके साथ जंजीबार और आबुधाबी में आईआईटी के दो अंतर्राष्‍ट्रीय परिसर

एकेडेमिक बैंक और क्रेडिट के दायरे में 2660 संस्‍थान, 4 करोड़ 60 लाख से अधिक पहचान पत्र जारी

वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत जीईआर का एनईपी लक्ष्‍य हासिल करने के लिए 153 विश्‍वविद्यालयों में प्रवेश और निकास की लचीली व्‍यवस्‍था तथा वर्ष में दो बार प्रवेश की सुविधा

भारतीय उच्‍च शिक्षा संस्‍थान प्रतिष्ठित विदेशी विश्‍वविद्यायलों के साथ ट्विनिंग, संयुक्‍त और ड्यूअल डिग्री प्रदान करेंगे 15 विदेशी उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के भारत में परिसर स्‍थापित करने की संभावना

आर्थिक समीक्षा के अनुसार रोजगार दक्षता जल्‍दी उपलब्‍ध कराने के लिए माध्यमिक स्‍कूलों में व्‍यवस्‍थि‍त कौशल निर्माण की सुविधा          

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 2:16PM by PIB Delhi

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि सामुदायिक जुडा़व, प्रभावी मूल्‍यांकन, अधिक जवाबदेही और शिक्षा तथा कौशल जरूरतों के बीच मजबूत तालमेल के माध्‍यम से गुणवत्‍ता और पहुंच  बढ़ाने के कारण स्‍कूल और उच्‍च शिक्षा में प्रगति हुई है।

समीक्षा के अनुसार शिक्षा क्षेत्र में प्राप्‍त उपलब्धियों में बढ़ी हुई साक्षरता दर, स्‍कूलों और‍ उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में नामांकन में वृद्धि और व्‍यवसायिक शिक्षा के प्रावधान शामिल हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) ने सार्वभौमिक रूप से गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच का विस्‍तार कर, समानता को बढ़ावा देकर और शिक्षण-अधिगम में नवाचार को प्रोत्‍साहित करने के माध्‍यम से भारत के शैक्षिक परिदृश्‍य  को आकार देने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत ने अवसंरचना तथा शिक्षक क्षमता को सुदृढ़ करने करके विद्यालय नामांकन में उल्‍लेखनीय  प्रगति की है। पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं ने शिक्षा तक पहुंच और समानता को बढ़ावा दिया है। सकल नामांकन  अनुपात (जीईआर) प्राथमिक स्‍तर (कक्षा I से V में 90.9, उच्‍च प्राथमिक स्‍तर कक्षा V से VII) में 90.3, माध्‍यमिक स्‍तर (कक्षा IX एवं X में 78.7 तथा उच्‍च माध्‍यमिक स्‍तर (कक्षा X एवं XII) में 58. 4 है।   

स्‍कूल शिक्षा में प्रगति

स्‍कूल शिक्षा से मानव पूंजी की बुनियाद निर्मित होती है और यह 2047 तक भारत को विकसित राष्‍ट्र बनाने की दिशा में राष्‍ट्र के वृद्धि पथ को मजबूत करने का केन्‍द्रीय पक्ष है। तेजी से बढ़ती एशियाई अर्थव्‍यवस्‍थाओं के अनुभवों से स्‍पष्‍ट प्रदर्शित होता है कि शिक्षा, कौशल  विकास और प्रौद्योगिकी में सतत निवेश से उत्‍पादकता में महत्‍वपूर्ण वृद्धि हो सकती है, नवाचार को प्रोत्‍साहन मिल सकता है और आर्थिक कायाकल्‍प की प्रक्रि‍या तेज हो सकती है।

विशाल मानव संसाधन को पूरी तरह उच्‍च गुणवत्‍ता वाली मानव पूंजी में बदलने के लिए भारत को स्‍कूलिंग के अनुमानित वर्षों को बढ़ाने की आवश्‍यकता है। इस प्रकार तीन से 18 वर्ष की उम्र की स्‍कूलिंग संरचना को एनईपी के 5+3+3+4 के जरिए 15 वर्ष करने की आवश्‍कयता है। इसके लिए समग्र और ऐसे जीवन चक्र दृष्टिकोण की आवश्‍यकता है जो बच्‍चे की आरंभिक शिक्षा, आधारभूत साक्षरता और संख्‍याज्ञान, (एफएलएन), सार्वभौमिक माध्‍यमिक स्‍कूलिंग और व्‍यवसायिक तथा डिजिटल कौशलों का निर्बाध एकीकरण पर केन्द्रित हो।

नई शिक्षा नीति-एनएपी के लक्ष्‍य हासिल करने के लिए सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान, उल्‍लास, पीएम श्री (पीएम स्‍कूल्‍स फोर राइजिंग इंडिया), पीएम पोषण (पीएम पोषण शक्ति निर्माण) जैसी स्‍कूल स्‍तर की योजनाएं तथा परख, विद्या प्रकाश, दीक्षा (डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रचर फोर नॉलेज शेयरिंग), निपुण भारत मिशन और अटल टिंकरिंग लैब जैसी पहल शुरू की हैं। स्‍कूल शिक्षा में नीतिगत बल शिशुओं की देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) एफएलएम, शिक्षा अधूरी छोड़ने की देर कम करने, सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्‍चित करने, पाठ्यक्रम और पेडागोगी को नया रूप देने, शिक्षक क्षमता मजबूत करने, समानता को प्रोत्‍साहन तथा गुणवत्‍ता सुधार पर दिया जा रहा है।

स्‍कूल अवसंरचना

भारत विश्‍व की सबसे बड़ी स्‍कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन कर रहा है, जिसके अंतर्गत  14.71 लाख विद्यालयों में 24.69 करोड़ विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है और इस व्‍यवस्‍था को 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक सहयोग प्रदान कर रहे है( यूडीआईएसई +2024-25)। वर्ष 2030 तक प्री प्राइमरी से माध्‍यमि‍क शिक्षा तक शत प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) हासिल करने के एनईपी लक्ष्‍य के अनुरूप सभी स्‍कूल स्‍तरों पर स्थिर प्रगति देखी गई है।

एनईपी शैक्षिक संरचना के अनुसार जीईआर स्‍कोर प्रीपेयेरेटरी स्‍टेज (ग्रेड-3 से ग्रेड-4) पर 95.4, मिडिल स्‍टेज पर (ग्रेड-6 से ग्रेड-8) पर 90.3 और सेकेन्‍डरी स्‍टेज (ग्रेड-9 से ग्रेड-12) पर 68.5 हैं। सरकार की विभिन्‍न योजनाओं से जीईआर में महत्‍वपूर्ण सुधार हुआ है। इनमें 33 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों में 13 हजार 76 पीएम श्री स्‍कूलों की स्‍थापना, उच्‍च गुणवत्‍ता शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच के लिए शिशु देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) प्रणाली को एकीकृत और मजबूत करने के लिए 2 लाख 99 हजार 544 स्‍कूलों के साथ ही आंगनवाड़ी केन्‍द्र खोलना शामिल हैं। जादुई पिटारा, ई जादुई पिटाराकिताब एक पढ़े अनेक  और भारतीय भाषा पुस्‍तक स्‍कीम जैसी योजनाओं ने बच्‍चों को स्‍थानीय भाषाओं में शिक्षा सामग्री उपलब्‍ध कराई है।

भारत ने अवसंरचना और शिक्षक क्षमता को मजबूत करके स्‍कूल नामांकन में महत्‍वपूर्ण प्रगति की है, इसके साथ पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाएं पहुंच और समानता को प्रोत्‍साहन दे रही हैं। अवसंरचना सुधारमजबूत डाइट (जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्‍थान) और एससीईआरटी (राज्‍य शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) और शासन में अभिभावकों तथा समुदायों की भागीदारी के जरिए शिक्षा कौशल समावेशी और विद्यार्थी केन्द्रित वातावरण बना सकते हैं। इन रणनीतियों के साथ पाठ्यक्रम और मूल्‍यांकन सुधारों को एनईपी के अनुरूप समाहित करना तथा पीएम ई विद्या जैसे डिजिटल प्‍लेटफार्म का उपयोग दूरदराज क्षेत्रों में भी उच्‍च गुणवत्‍ता वाली और समान शिक्षा उपलब्‍ध करा सकती है।

अधिगम परिणामों में सुधार

वर्ष 2001 से राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा संचालित राष्‍ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षणों (एनएएस) ने स्‍कूली शिक्षा प्रणाली के बारे में बहुमूल्‍य जानकारी प्रदान की है। इसी आधार पर और योग्‍यता-आ‍धारित अधिगम पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए परख (समग्र) विकास के लिए ज्ञान का प्रदर्शन मूल्‍यांकन, समीक्षा, एवं विश्‍लेषण) राष्‍ट्रीय सर्वेक्षण 2024 प्रारंभ किया गया। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य प्रमुख कक्षाओं में विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों, योग्‍यता और समग्र प्रगति का मूल्‍यांकन करना तथा नीति, पाठयक्रम एवं संसाधन नियोजन के लिए मार्गदर्शक प्रदान करना है।

विद्यालय-से-कौशल मार्ग

माध्‍यमिक स्‍कूलों में व्‍यवस्थित कौशल मार्ग जोड़ने से शिक्षा अधिक प्रासंगिक हो सकती है बशर्ते रोजगार योग्‍य दक्षताएं जल्‍दी उपलब्‍ध हो जाएं और स्‍कूलों को आजीवन शिक्षा केन्‍द्र में बदल दिया जाए। पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार, 14-18 वर्ष आयु वर्ग के केवल 0.97 प्रतिशत युवाओं को ही संस्‍थागत प्रशिक्षण प्राप्‍त हुआ है, जबकि लगभग 92 प्रतिशत युवाओं को कोई प्रशिक्षण नहीं मिला है। भारत के जनसांख्यिकी लाभांश का लाभ उठाने के लिए इस अंतर को दूर करना अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है। विद्यालयों में कौशल शिक्षा युवाओं को बाजार के अनुरूप कौशल से लैस करेगी, विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में जो औपचारिक रूप से प्रशिक्षित युवाओं के आधे से अधिक को रोजगार प्रदान करता है, साथ ही शिक्षा को आर्थिक अवसरों से जोड़कर विद्यालय छोड़ने वालों की संख्‍या को काम करेगी।

उच्‍च शिक्षा

उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों (एचईआई) की संख्‍या 2014-15 में 51534 थी जो जून 2025 में 70018 हो गई। विश्‍वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्‍या में महत्‍वपूर्ण वृद्धि से यह संभव हुआ। प्रीमियर उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों (एचईआई) की संख्‍या में 2014-15 और 2024-25 के बीच महत्‍वपूर्ण वृद्धि हुई है। अब देश में 23 आईआईटी( 21 आईआईएम और 20 एम्‍स हैं। इसके साथ जंजीबार और आबुधाबी में आईआईटी के 2 अंतर्राष्‍टीय परिसर भी हैं।

अखिल भारतीय उच्‍च शिक्षा सर्वेक्षण 2022-23 (अनंतिम) के अनुसार विद्यार्थियों का नामांकन 2021-22 में 4 करोड़ 33 लाख से बढ़कर 2022-23 में 4 करोड़ 46 लाख हो गया।

एनईपी के तहत उच्‍च शिक्षा प्रणाली में अनेक सुधार किए गए हैं। 170 विश्‍वविद्यायलों में नेशनल केन्द्रित फ्रेमवर्क अपनाया गया है। इसका उदेश्‍य शिक्षा और कौशल आधारित अधिगम का संगम है। एकेडेमिक बैंक ऑफ क्रेडिट 2660 उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में लागू है। इसके साथ 4 करोड 60 लाख  से अधिक पहचान पत्र बनाए गए हैं जिनमें क्रेडिट के साथ 2 करोड़ 20 लाख अपार पहचान पत्र शामिल हैं।

2035 तक 50 प्रतिशत जीईआर का एनईपी लक्ष्‍य हासिल करने के लिए 153 विश्‍वविद्यायलों में लचीला प्रवेश-निकास पथ और वर्ष में 2 बार प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की गई है।

एनईपी के अनुरूप गतिशील अनुसंधान और विकास क्षमता बनाने के लिए अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्‍थापना की गई है ताकि देशभर के विश्‍वविद्यालयों, कॉलेजों और अनुसंधान संस्‍थान में अनुसंधान आधारित शिक्षा संस्‍कृति को प्रोत्‍साहन दिया जा सके।

तकनीकी शिक्षा की गुणवत्‍ता में सुधार के लिए तकनीकी शिक्षा में बहुविषयी शिक्षा और अनुसंधान सुधार योजना को 175 इंजीनियरिंग कॉलेजों और 100 पॉलि‍टेक्‍निक सहित 275 तकनीकी संस्‍थानों के लिए हाल ही में स्‍वीकृति दी गई है।

 

स्‍टेम शिक्षा में उद्योग अकादमिक एकीकरण

एनईपी का उद्देश्‍य  व्‍यावसायिक प्रशिक्षण को सामान्‍य शिक्षा के साथ एकीकृत करना और उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के भीतर उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को प्रोत्‍साहित करना है। उच्‍च शिक्षा क्षेत्र में उद्योग-अकादमिक संबंधों में परंपरागत रूप से अनुसंधान सहयोग पर जोर दिया जाता रहा है, जैसे कि संयुक्‍त अनुसंधान, परामर्श और प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण।

ऐसा ही एक उपाय यूजीसी और एआईसीटीई द्वारा उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ श्रेणी की शुरुआत करना है। पीओपी की अवधारण उद्योग जगत के पेशेवरों को वास्‍तविक दुनिया के तौर-तरीकों और अनुभवों को कक्षा में लाने और उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में संकाय संसाधनों को बढ़ाने की अनुमति देती है। इसके पूरक के रूप में, एआईसीटीई-उद्योग फैलोशिप कार्यक्रम को उद्देश्‍य शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी के माध्‍यम से शिक्षा जगत और उद्योग के बीच अंतर को पाटना है।

उच्‍च शिक्षा का अंतर्राष्‍ट्रीयकरण

एनईपी का लक्ष्‍य भारतीय प्रणाली को आत्‍मनिर्भर बनाना और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाकर उच्‍च शिक्षा का अंतर्राष्‍ट्रीय करना है ताकि अधिक से अधिक विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित किया जा सके और भारतीय विद्यार्थियों के विदेश पलायन को कम किया जा सके।

विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग-यूजीसी ने भारतीय और विदेशी उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग विनियम 2022 जारी किए हैं जो भारतीय संस्‍थानों को प्रतिष्ठित विदेशी विश्‍वविद्यालयों के साथ साझेदारी-ट्विनिंग संयुक्‍त और दोहरी डिग्री कार्यक्रम प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं। इसके अतिरिक्‍त उच्‍च शिक्षा में 100 प्रतिशत एफडीआई प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है। इन प्रयासों को यूजीसी भारत में विदेशी उच्‍च संस्‍थानों के परिसरों की स्‍थापना और संचालन विनियम 2023 द्वारा बल मिलता है जिसके तहत 15 विदेशी उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों से भारत में परिसर स्‍थापित करने की अपेक्षा की जाती है।

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति -एनईपी की शुरुआत विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग-यूजीसी के अद्यतन दिशा-निर्देश शै‍क्षणिक सहयोग तथा अर्हताओं की पारस्‍परिक मान्‍यता से जुड़े विनियम और जीआईएफटी सिटी सहित विदेशी शासन परिसरों की स्‍थाना हेतु अनुमतियों के साथ भारत की अंतर्राष्‍ट्रीयकरण संबंधी नीति-परिस्थिति अधिक अनुकूल हो गई है।

भविष्‍य के लिए तैयार श्रम शक्ति बनाने के लिए एकीकृत जवाबदेह और अनुकूल नीतिक रूपरेखा के जरिए राष्‍ट्र की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए भारत के शिक्षा क्षेत्रों पर पूरा ध्‍यान देने की जरूरत है ।

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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई


(रिलीज़ आईडी: 2220027) आगंतुक पटल : 90
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