वित्त मंत्रालय
व्यापार नीतियों में निरंतर बदलाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के इक्विटी बाजार ने नपातुला, फिर भी गतिशील प्रदर्शन किया : आर्थिक समीक्षा 2025-26
निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स ने अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान क्रमशः लगभग 11.1 प्रतिशत और 10.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की
प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025- प्रतिभूति बाजार विनियमन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
वित्त वर्ष 26 में दिसंबर 2025 तक 235 लाख डीमैट खाते जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 21.6 करोड़ से अधिक हो गई
सितंबर 2025 में डीमैट खाते वाले अद्वितीय निवेशकों की संख्या 12 करोड़ के पार हो गई, जिनमें से लगभग एक चौथाई महिलाएं हैं
दिसंबर 2025 तक म्यूचुअल फंड में 5.9 करोड़ अद्वितीय निवेशक थे, जिनमें से 3.5 करोड़ गैर-टियर-I और टियर-II शहरों से थे
एसआईपी योगदानों में अद्वितीय निवेशक आधार वित्त वर्ष 20 के लगभग 3.1 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 25 तक 11 करोड़ से अधिक हो गया
भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार वित्त वर्ष 15 और वित्त वर्ष 25 के बीच लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा
अस्थिर विदेशी पूंजी प्रवाह के बीच, डीआईआई ने विदेशी निवेश बहिर्वाह को संतुलित कर बाजारों की सहायता की
गिफ्ट सिटी ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स इंडेक्स में नौ स्थान ऊपर चढ़कर 120 वित्तीय केंद्रों में से 43वें स्थान पर पहुंच गया
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 2:13PM by PIB Delhi
केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में पेश किए गए आर्थिक समीक्षा 2025-26 में कहा गया है कि व्यापार नीतियों में निरंतर बदलाव और बढ़ी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच, भारत के इक्विटी बाजारों ने संतुलित लेकिन मजबूत प्रदर्शन का एक चरण प्रदर्शित किया, जो सहायक नीतियों, वृहद आर्थिक स्थितियों और निरंतर घरेलू निवेशक भागीदारी के परस्पर प्रभाव को दर्शाता है। समीक्षा के अनुसार, व्यक्तिगत आयकर में कटौती, जीएसटी में सुधार, मौद्रिक नीति में ढील और घटती महंगाई, साथ ही वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस में सुधार जैसे कई उपायों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बाज़ार की सहायता की।
भारत के वित्तीय इकोसिस्टम की शक्ति
निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स ने अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान क्रमशः लगभग 11.1 प्रतिशत और 10.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। वित्त वर्ष 26 (दिसंबर 2025 तक) में प्राइमरी मार्केट मज़बूत और जीवंत रहे और इनिशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ) जारी करने में विश्व में सबसे आगे रहे। वित्त वर्ष 26 (दिसंबर 2025 तक) में आईपीओ वॉल्यूम आईपीओ 25 की तुलना में 20 प्रतिशत ज़्यादा था, और जुटाई गई राशि वित्त वर्ष 25 की इसी अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक थी। वित्त वर्ष 26 (दिसंबर 2025 तक) में आईपीओ गतिविधि की एक खास बात ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) कंपोनेंट्स की प्रमुखता थी, जिसमें विद्यमान शेयरधारक कंपनी द्वारा नए शेयर जारी करने के बजाय अपने शेयर बेचते हैं।
एसएमई लिस्टिंग: वित्त वर्ष 26 (दिसंबर 2025 तक) में एसएमई लिस्टिंग की संख्या वित्त वर्ष 25 (दिसंबर 2024 तक) में 190 से बढ़कर 217 हो गई। जुटाई गई राशि 7,453 करोड़ रुपए से बढ़कर 9,635 करोड़ रुपए हो गई। अपनी शुरुआत से अब तक, 1,380 से ज़्यादा कंपनियां बीएसई और एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हो चुकी हैं। प्राइमरी मार्केट के ज़रिए संसाधनों को लगातार जुटाना और एसएमई प्लेटफॉर्म के ज़रिए उभरते उद्यमों की बढ़ती भागीदारी भारत के कैपिटल मार्केट की बढ़ती व्यापकता और बेहतरी की ओर इंगित करती है।
सिक्योरिटीज़ मार्केट्स कोड (एसएमसी): सिक्योरिटीज़ मार्केट्स कोड, 2025, कानूनी ढांचे को मज़बूत करने और सिक्योरिटीज़ मार्केट रेगुलेशन की नींव को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आर्थिक समीक्षा में रेखांकित किया गया है कि कोड बोर्ड की संरचना, स्वतंत्रता, विवाद प्रबंधन, पारदर्शिता, रेगुलेटरी सैंडबॉक्सिंग, निवेशक संरक्षण, मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों (एसआईआई) के शासन और व्यापार करने में सुगमता जैसे विषयों को शामिल करता है। पहली बार, यह कोड एमआईआई, स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन, डिपॉजिटरी आदि को एक स्पष्ट वैधानिक आधार पर लाता है और उन्हें महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य करने वाली संस्थाओं के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता देता है।
पूंजी बाज़ारों में रिटेल भागीदारी बढ़ाना
वित्त वर्ष 26 (दिसंबर 2025 तक) के दौरान, 235 लाख डीमैट खाते जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 21.6 करोड़ से ज़्यादा हो गई। एक अहम पड़ाव सितंबर 2025 में अद्वितीय निवेशकों की संख्या का 12 करोड़ के पार जाना था, जिनमें से लगभग एक चौथाई महिलाएं थीं। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का भी विस्तार हुआ, दिसंबर 2025 के आखिर में 5.9 करोड़ अद्वितीय निवेशक थे, जिनमें से 3.5 करोड़ (नवंबर 2025 तक) गैर-टियर-I और टियर-II शहरों से थे।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि इक्विटी निवेश, जो कभी घरों की बैलेंस शीट का एक छोटा हिस्सा थे, अब व्यापक भागीदारी और पहुंच के ज़्यादा विविध माध्यमों के कारण वित्तीय संपत्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। यद्धपि इक्विटी बाज़ारों में व्यक्तियों की सीधी हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ी, वित्त वर्ष 14 के 8 प्रतिशत से कुछ कम की तुलना में सितंबर 2025 तक लगभग 9.6 प्रतिशत हो गई, इसी अवधि में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी लगभग तीन गुना बढ़कर 9.2 प्रतिशत हो गई।
सालाना घरेलू वित्तीय बचत में इक्विटी और म्यूचुअल फंड का हिस्सा वित्त वर्ष 12 के 2 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 15.2 प्रतिशत से अधिक हो गया। यह बदलाव एसआईपी योगदान में लगातार बढ़ोतरी के साथ हुआ है, जिसमें औसत मासिक एसआईपी फ्लो वित्त वर्ष 17 में 4,000 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 26 (अप्रैल-नवंबर) में 28,000 करोड़ रुपए से ज़्यादा हो गया है। महामारी के बाद के शुरुआती सालों में अद्वितीय निवेशक आधार में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई, जो वित्त वर्ष 20 के लगभग 3.1 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 25 तक 11 करोड़ से ज़्यादा हो गया।
सेबी की हाल की पहलें
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि सेबी ने विनियामकीय अखंडता को सुदृढ़ करने, मार्केट ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करने और निवेशक सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से कई पहलें की हैं। कुल मिलाकर, ये उपाय भारत में एक पारदर्शी, मज़बूत और समावेशी पूंजी बाज़ार इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सेबी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं, साथ ही सिक्योरिटीज़ मार्केट के प्रमुख सेगमेंट में बेहतर वेरिफिकेशन, डिस्क्लोज़र, एक्सेसिबिलिटी और रिस्क सर्विलांस के ज़रिए मार्केट के भरोसे को मज़बूत करते हैं।
निवेशक सुरक्षा और सशक्तिकरण: सेबी ने 1 अक्टूबर 2025 से सभी सेबी-रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज़ के लिए एक नया यूपीआई एड्रेस स्ट्रक्चर अनिवार्य कर दिया है जो निवेशक से फंड इकट्ठा करते हैं।
नियामकीय संरचना को सुदृढ़ करना और प्रचालनगत दक्षता में सुधार: सेबी-रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर्स को एक अलग बिज़नेस यूनिट के तहत गिफ्ट-आईएफएससी में सिक्योरिटीज़ मार्केट से संबंधित गतिविधियां करने में सुविधा देने के लिए, विशिष्ट सेबी मंज़ूरी प्राप्त करने की आवश्यकता को हटा दिया गया था।
डेट मार्केट
भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट ने प्रभावशाली वृद्धि दिखाई है, जिसमें बकाया इश्यू वित्त वर्ष 15 में 17.5 ट्रिलियन रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 53.6 ट्रिलियन रुपए हो गए हैं, जो लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहे हैं। वित्त वर्ष 25 में, अब तक के सबसे ज़्यादा नए इश्यू रिकॉर्ड किए गए, जो कुल 9.9 ट्रिलियन रुपए थे।
मार्च 2025 तक, देश की जीडीपी में कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट की हिस्सेदारी 15-16 प्रतिशत है और कॉर्पोरेट बॉन्ड से फंड जुटाना अब बैंक क्रेडिट का पूरक है। वित्त वर्ष 26 में, डेट मार्केट ने अप्रैल-दिसंबर 2025 में प्राइमरी मार्केट से कुल संसाधन जुटाने में 63 प्रतिशत से ज़्यादा का योगदान दिया। रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ ने बॉन्ड मार्केट के विकास के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। सेबी ने रिक्वेस्ट फॉर कोट प्लेटफॉर्म पेश किया, जिससे रिटेल एक्सेस आसान हुआ, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए शासन के मानक मज़बूत हुए और जारी करने के नियमों को सरल बनाया गया।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेश
वित्त वर्ष 26 में भारत के विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के रुझान में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही के दौरान एफपीआई भारतीय इक्विटी के निवल खरीदार और डेट इंस्ट्रूमेंट्स के निवल विक्रेता थे। इसके विपरीत, वित्त वर्ष 26 की दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान इक्विटी के निवल खरीदार से निवल विक्रेता बन गए, जबकि डेट इंस्ट्रूमेंट्स के निवल खरीदार बने रहे। कुल मिलाकर, एफपीआई अप्रैल से दिसंबर 2025 तक भारतीय सिक्योरिटीज के निवल विक्रेता थे। सेबी द्वारा एफपीआई निवेश नियमों में ढील और जारी भारत-अमेरिका व्यापार चर्चाओं के समर्थन से, भारत के डेट मार्केट में एफपीआई प्रवाह के लिए दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 तक, एफपीआई की कस्टडी में एसेट बेस 81.4 लाख करोड़ रुपए था, जो 31 मार्च 2025 की तुलना में 10.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
घरेलू संस्थागत निवेशक: एफपीआई को संतुलित करना
अस्थिर विदेशी पूंजी प्रवाह के बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई), विशेष रूप से म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों ने, विदेशी निवेश बहिर्वाह की अस्थिरता को संतुलित किया है और बाजारों को आवश्यक सहायता प्रदान की है। लगातार खरीदारी के साथ, 30 सितंबर 2025 तक, एनएसई-सूचीबद्ध इक्विटी में डीआईआई स्वामित्व 18.7 प्रतिशत है।
डीआईआई ने भारतीय इक्विटी में निवल खरीदार के रूप में लगातार अपनी स्थिति बनाए रखी है, जिससे एफपीआई की बिक्री का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया गया है और घरेलू बाजार की शक्ति बढाई गई है। डीआईआई का हिस्सा (होल्डिंग्स के मूल्य के अनुसार) वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में पहली बार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) से आगे निकल गया और अब वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में म्यूचुअल फंड का हिस्सा (होल्डिंग्स के मूल्य के अनुसार) 10.9 प्रतिशत के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसलिए, भले ही एफआईआई भारतीय पूंजी बाजार में महत्वपूर्ण भागीदार बने हुए हैं, डीआईआई, खुदरा निवेशकों और उच्च-नेट-वर्थ वाले व्यक्तियों के साथ मिलकर, बाजार में भागीदारी के संबंध में एफआईआई द्वारा लिए गए निर्णयों को संतुलित करने में एक मज़बूत भूमिका निभा रहे हैं।
गिफ्ट सिटी
30 नवंबर 2025 तक, गिफ्ट सिटी ने मज़बूत ग्रोथ दिखाई है, जिसमें अलग-अलग कैटेगरी में 1,034 से ज़्यादा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं पंजीकृत हैं। एक साल के अंदर, गिफ्ट सिटी ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स इंडेक्स (जीएफसीआई) में नौ पायदान ऊपर चढ़ गया है, और 120 फाइनेंशियल सेंटर्स में से 43वें स्थान पर पहुंच गया है। फिनटेक स्पेसिफिक रैंकिंग में, गिफ्ट सिटी दस पायदान ऊपर चढ़ा है, जो फिनटेक के लिए एक खास रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, एकेडमिक पार्टनरशिप और इनोवेशन सेंटर्स के ज़रिए हुई प्रगति को दिखाता है।
निष्कर्ष
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि सदी के मध्य तक विकसित भारत बनने की भारत की आकांक्षा के लिए वित्त के बारे में मौलिक रूप से फिर से सोचने की आवश्यकता है, न केवल वित्त-पोषण के रूप में, बल्कि आर्थिक बदलाव के ढांचे के तौर पर। निरंतर विकास के वित्त पोषण के लिए, भारत को लॉन्ग-टर्म कैपिटल मार्केट को मज़बूत करना होगा। सेबी ने रेगुलेटरी मॉडर्नाइज़ेशन और इन्वेस्टर प्रोटेक्शन के प्रति भी ऐसी ही प्रतिबद्धता दिखाई है। रेगुलेटरी क्वालिटी में प्रणालीगत बढ़ोतरी को 2025 में आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक द्वारा संयुक्त रूप से किए गए फाइनेंशियल सेक्टर असेसमेंट प्रोग्राम (एफएसएपी) के ज़रिए अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली है। दोनों रिपोर्टों में बताया गया है कि कैपिटल मार्केट वर्ष 2017 में जीडीपी के 144 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024 में 175 प्रतिशत हो गए हैं।
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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई -33
(रिलीज़ आईडी: 2220024)
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