वित्त मंत्रालय
आर्थिक समीक्षा 2025-26 की मुख्य बातें
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 1:44PM by PIB Delhi
वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी और जीवीए वृद्धि के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान क्रमश: 7.4 और 7.3 प्रतिशत
भारत की प्रमुख वृद्धि का अनुमान लगभग 7 प्रतिशत, जबकि वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत का अनुमान
वित्त वर्ष 2025 में केन्द्र की राजस्व प्राप्ति जीडीपी के 11.6 प्रतिशत तक बढ़ी
एनपीए में बहु-दशकीय गिरावट 2.2 प्रतिशत तक हुई
पीएमजेडीवाई के अंतर्गत मार्च 2025 तक 55 करोड़ 2 लाख बैंक खाते खोले गए,
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र में 36 करोड़ 63 लाख खाते खुले
सितम्बर 2025 में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 12 करोड़ से अधिक हुई, इनमें लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं शामिल
वर्ष 2005 से 2024 के दौरान भारत का वैश्विक व्यापार निर्यात एक प्रतिशत से लगभग दोगुना होकर 1.8 प्रतिशत हुआ
वित्त वर्ष 2025 में सेवा निर्यात अब तक का सर्वाधिक 387.6 बिलियन अमरीकी डॉलर हुआ, 13.6 प्रतिशत की वृद्धि
वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत विश्व में सबसे बड़ा जमा प्राप्ति वाला देश बना, 135.4 बिलियन अमरीकी डॉलर का आंकड़ा छुआ
16 जनवरी, 2026 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन अमरीकी डॉलर हुआ, इसमें 11 महीने का आयात और विदेशी कर्ज का 94 प्रतिशत शामिल
अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत घरेलू मुद्रास्फीति 1.7 प्रतिशत रही
कृषि वर्ष (एवाई) 2024-25 के दौरान भारत का खाद्यान्न उत्पादन 3577.3 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) पर पहुंचा, पिछले वर्ष के मुकाबले 254.3 एलएमटी की वृद्धि
पीएम किसान योजना के शुरू होने से अब तक पात्र किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई
वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए मनरेगा के स्थान पर ग्रामीण रोजगार को संरेखित करते हुए विकसित भारत-जी राम जी की स्थापना
वित्त वर्ष 2026 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण वृद्धि क्रमश: 7.72 प्रतिशत और 9.13 प्रतिशत रही, यह ढांचागत बहाली को प्रदर्शित करता है
14 क्षेत्रों में उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अंतर्गत 2 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ, सितम्बर 2025 तक उत्पादन/बिक्री 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुई और 12.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए
भारत सेमीकंडक्टर मिशन से घरेलू क्षमता बढ़ी, 10 परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये का निवेश
रेलवे के हाईस्पीड कॉरिडोर में वित्त वर्ष 2014 में 550 किलोमीटर की तुलना में (वित्त वर्ष 2026, दिसंबर 2025 तक) 5,364 किलोमीटर हुआ, वित्त वर्ष 2026 में 3500 किलोमीटर की वृद्धि
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू उड़ान बाजार, हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 से 2025 में 164 हुई
डिस्कॉम के लिए ऐतिहासिक परिवर्तन वित्त वर्ष 2025 में पहली बार 20,701 करोड़ रुपये का सकारात्मक पीएटी दर्ज किया गया
ओवरऑल नवीकरणीय ऊर्जा और स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत की विश्व स्तर पर तीसरी रैंक
भारत स्वायत्त सैटेलाइट डॉकिंग (स्पेडैक्स) क्षमता प्राप्त करने वाला चौथा देश बना
प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक चरण में कुल नामांकन अनुपात (जीईआर) क्रमश: 90.9, 90.3 और 78.7 रहा
भारत में इस समय 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स मौजूद, जंजीबार और अबूधाबी में दो अंतर्राष्ट्रीय आईआईटी कैम्पस स्थापित
1990 के बाद भारत में मातृ और शिशु मृत्यु दर में गिरावट, वैश्विक औसत से कम हुई
जनवरी 2026 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार पंजीकृत, 54 प्रतिशत महिलाएं शामिल
वित्त वर्ष 2025 में राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल पर रिक्तियों की संख्या 2.8 करोड़ से अधिक हुई और वित्त वर्ष 2026 में सितंबर तक 2.3 करोड़ की संख्या पार की
नीति आयोग द्वारा मापित बहु-आयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) 2005-06 में 55.3 प्रतिशत से 2022-23 में 11.28 प्रतिशत हुई
समीक्षा के अनुसार महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए अनुशासित स्वदेशी का आह्वान, महत्वपूर्ण क्षमता प्राप्त करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार, निवेश लागत मूल्य में कमी, उन्नत विनिर्माण में मजबूती और आत्मनिर्भरता से रणनीतिक अपरिहार्यता की ओर प्रगति
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश किया। आर्थिक समीक्षा के प्रमुख बिन्दु निम्न प्रकार है।
अर्थव्यवस्था की स्थिति
1 वैश्विक वातावरण के नाजुक होने के बावजूद अर्थव्यवस्था में वृद्धि अनुमान से अधिक रही है, लेकिन भू-राजनैतिक तनाव के चलते व्यापारिक और वित्तीय खतरा बना हुआ है। इस परिस्थिति का खतरा जारी है।
2. इस परिस्थिति में भी भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है। वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी और जीवीए वृद्धि के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान क्रमश: 7.4 और 7.3 प्रतिशत रहा। इससे लगातार चौथे वर्ष भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से वृद्धि कर रही है।
3. निजी अंतिम उपयोग व्यय वित्त वर्ष 2026 में 7 प्रतिशत बढ़ा और यह सकल घरेलू उत्पाद-जीडीपी का 61.5 प्रतिशत हो गया। यह 2012 से अब तक का सर्वाधिक है। वित्त वर्ष 2023 में यह 61.5 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि कम मुद्रास्फीति, स्थिर रोजगार और वास्तविक क्रय शक्ति में वृद्धि के कारण हुई। मजबूत कृषि उत्पादन से ग्रामीण उपभोग में वृद्धि हुई। इसके अलावा शहरी उपभोग में भी सुधार हुआ। इसके साथ टैक्स रेशनेलाइजेशन के कारण बड़े पैमाने पर मांग में वृद्धि हुई।
4. वित्त वर्ष 2026 में निवेश गतिविधियां मजबूत हुई। इसके साथ ही ग्रोस फिक्स्ड कैपिटल फोरमेशन में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और इसका हिस्सा जीडीपी का 30 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस गति को सतत सार्वजनिक पूँजीगत व्यय तथा निजी निवेश गतिविधि में पुनरुद्धार से बल मिला, जिसका संकेत कॉरपोरेट घोषणाओं से मिलता है।
5. आपूर्ति पक्ष पर, सेवाएं वृद्धि की प्रमुख चालक बनी हुई हैं। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में सेवाओं के सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पूरे राजकोषीय वर्ष के लिए इसकी वृद्धि 9.1 प्रतिशत अनुमानित है। यह रुझान इस क्षेत्र में व्यापक आधार पर विस्तार को दर्शाता है।
राजकोषीय घटनाक्रम: विश्वसनीय समेकन के माध्यम से स्थिरता सुनिश्चित करना
- सरकार की संतुलित वित्तीय रणनीति ने मैक्रो इकोनॉमिक स्थिरता को मजबूत किया। इससे 2025 में मॉर्निंग स्टार डीबीआरएस, एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग और रेटिंग एंड इंवेस्टमेंट (आरएंडआई), इन्क्लु जैसी तीन संप्रभु रेटिंग उन्नयन में योगदान मिला।
- केंद्र की राजस्व प्राप्तियाँ वित्त वर्ष 16–वित्तवर्ष 20 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 8.5 प्रतिशत थीं, जो वित्त वर्ष 22–वित्त वर्ष 25 में लगभग 9.1 प्रतिशत तक बढ़ गईं। इस सुधार का मुख्य कारण गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह में वृद्धि थी, जो महामारी से पहले जीडीपी का लगभग 2.4 प्रतिशत थी और महामारी के बाद लगभग 3.3 प्रतिशत पहुँच गई।
- प्रत्यक्ष कर आधार में लगातार वृद्धि हुई, जिसमें आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या वित्त वर्ष 22 में 6.9 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 9.2 करोड़ हो गई। रिटर्न दाखिल करने वालों की बढ़ी हुई संख्या बेहतर अनुपालन, कर प्रशासन में तकनीक के अधिक उपयोग और आय बढ़ने के साथ कर दायरे में शामिल होने वाले व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि को दर्शाती है।
- अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान सकल जीएसटी संग्रह 17.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो साल-दर-साल 6.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। जीएसटी राजस्व की वृद्धि मौजूदा नाममात्र जीडीपी वृद्धि की स्थिति के साथ मोटे तौर पर मेल खाती है। समानांतर रूप से, उच्च-आवृत्ति वाले संकेतक मजबूत लेन-देन वॉल्यूम का सुझाव देते हैं, जिसमें अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान संचयी ई-वेबिल वॉल्यूम साल-दर-साल 21 प्रतिशत बढ़ा।
- केंद्रीय सरकार का प्रभावी पूँजीगत व्यय महामारी पूर्व अवधि में जीडीपी के औसतन 2.7 प्रतिशत से बढ़कर पोस्ट-पैंडेमिक अवधि में लगभग 3.9 प्रतिशत हो गया और वित्तीय वर्ष 2025 में यह जीडीपी के 4 प्रतिशत तक पहुंच गया।
- राज्यों को पूँजीगत व्यय के लिए विशेष सहायता (SASCI) के माध्यम से केंद्र ने राज्यों को वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी के लगभग 2.4 प्रतिशत तक पूँजीगत व्यय बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया है।
- राज्य सरकारों का संयुक्त राजकोषीय घाटा महामारी के बाद की अवधि में जीडीपी के लगभग 2.8 प्रतिशत के स्तर पर व्यापक रूप से स्थिर रहा, जो महामारी पूर्व स्तर के समान है, लेकिन हाल के वर्षों में यह बढ़कर वित्तवर्ष 2025 में 3.2 प्रतिशत हो गया है, जो राज्य वित्त पर उभरते दबावों को दर्शाता है।
- भारत ने 2020 से सामान्य सरकारी कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को लगभग 7.1 प्रतिशत अंक कम किया, जबकि उच्च सार्वजनिक निवेश को बनाए रखा।
मौद्रिक प्रबंधन और वित्तीय अंतर-मध्यस्थता : विनियामक प्रदर्शन में सुधार
मौद्रिक प्रारूप
- वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल से दिसंबर 2025) के दौरान भारत के मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र मे उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
बैंकिंग क्षेत्र में प्रदर्शन
- अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की परिसम्पत्ति गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया। सितंबर 2025 में जीएनपीए अनुपात 2.2 प्रतिशत और सकल एनपीए औसत 0.5 प्रतिशत रहा। यह कई दशकों में न्यूनतम है।
- 31 दिसंबर, 2025 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का आउट स्टैंडिंग क्रेडिट साल-दर-साल की वृद्धि दिसंबर, 2024 के 11.2 प्रतिशत के मुकाबले 14.5 प्रतिशत हो गई।
वित्तीय समावेशन
- 2014 में शुरू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत मार्च 25 तक 55.02 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से 36.63 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इस योजना ने सबसे पहले बैंकिंग सेवाओं से वंचित रही आबादी के लिए आधारभूत बचत और लेनदेन का बुनियादी अवसंरचना स्थापित की है।
- स्टैंड-अप इंडिया योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को ग्रीनफील्ड उद्यम स्थापित करने के लिए 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक का बैंक ऋण प्रदान करती है।
- प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के तहत सड़क विक्रेताओं को बिना जमानत के कार्यशील पूँजी ऋण प्रदान किए जा रहे हैं।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना-विनिर्माण, व्यापार, सेवा और कृषि से सम्बद्ध गतिविधियों में शामिल सूक्ष्म और लघु उद्यमों को वित्तपोषित कर रही है। अक्टूबर 2025 तक, इस योजना के तहत 55.45 करोड़ ऋण खातों के माध्यम से 36.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
वित्तीय क्षेत्र के अन्य पहलू
- वित्त वर्ष 26 के दौरान (दिसंबर 25 तक) 2.35 करोड़ नये डीमैट खाते जोड़े गए, जिससे कुल डीमैट खातों की संख्या 21.6 करोड़ से अधिक हो गई। महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सितंबर 25 में विशिष्ट निवेशकों (यूनिक इन्वेस्टर्स) की संख्या 12 करोड़ आँकड़े को पार कर गई, जिनमें लगभग एक-चौथाई महिलाएं थीं।
- म्युचुअल फंड उद्योग का भी विस्तार हुआ है, जिसमें दिसंबर 25 के अंत तक 5.9 करोड़ अद्वितीय निवेशक (यूनिक इन्वेस्टर) थे। इनमें से 3.5 करोड़ निवेशक (नवंबर 25 तक) गैर-टियर-I और टियर-II शहरों से थे, जो पारंपरिक शहरी केंद्रों के अतिरिक्त वित्तीय भागीदारी के विस्तार की ओर इंगित करता है।
- गिफ्ट सिटी में स्थित भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र, वैश्विक पूँजी को आकर्षित करने और उसे सही दिशा प्रदान करने के लिए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है।
क्षेत्रीय परिदृश्य
- विनियामक गुणवत्ता के संदर्भ में प्रणालीगत वृद्धि को वित्त वर्ष 25 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया गया, जिसे'वित्तीय क्षेत्र मूल्यांकन कार्यक्रम' (एफएसएपी) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दी गई। दोनों रिपोर्टों में एक बढ़ती हुई लचीली, विविध और समावेशी वित्तीय प्रणाली का उल्लेख किया गया है, जिसमें कुल वित्तीय क्षेत्र की परिसंपत्तियाँ कैलेंडर वर्ष 2024 में जीडीपी का लगभग 187 प्रतिशत रहीं। साथ ही, पूंजी बाजार का विस्तार कैलेंडर वर्ष 2017 के जीडीपी के 144 प्रतिशत से बढ़कर कैलेंडर वर्ष 2024 में 175 प्रतिशत हो गया। मूल्यांकनों में यह भी पाया गया कि बैंक और एनबीएफसी गंभीर तनाव की स्थितियों में भी पर्याप्त पूंजीगत बफर बनाए रखने में सक्षम हैं।
बाहरी क्षेत्र : दूरगामी लक्ष्य की तैयारी
- वैश्विक वस्तु निर्यात में भारत की साझेदारी एक प्रतिशत से लगभग दोगुनी होकर 1.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि वैश्विक वाणिज्यिक सेवा निर्यात में इसकी साझेदारी दो प्रतिशत से बढ़कर दोगुनी से अधिक यानी 4.3 प्रतिशत हो गई है।
- अंकटाड की' व्यापार और विकास रिपोर्ट 2025' के अनुसार, भारत व्यापारिक साझेदारों के विविधीकरण में अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। भारत 'ग्लोबल साउथ' में तीसरे स्थान पर रहा और उसने सभी 'ग्लोबल नॉर्थ' की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उच्च व्यापार विविधता स्कोर दर्ज किया है।
- वित्त वर्ष 24-25 में भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड 825.3 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें मुख्य रूप से सेवा निर्यात में हुई तेज वृद्धि के कारण वर्ष-दर-वर्ष 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
- वित्त वर्ष 24-25 में गैर-पेट्रोलियम निर्यात 374.3 अरब अमरीकी डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जबकि गैर-पेट्रोलियम, गैर-रत्न और आभूषण निर्यात, कुल वस्तु निर्यात के पांचवें हिस्से का लगभग चौथा हिस्सा था।
- वित्त वर्ष 24–25 में सेवा निर्यात 387.6 अरब अमरीकी डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जिसमें 13.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई है।
- भारत का चालू खाता घाटा सीमित बना रहा, जिससे सेवा निर्यात और प्रेषण से होने वाले तेज निवल अंतर्वाह में वृद्धि दर्ज की गई, जिसने वस्तु व्यापार घाटे की भरपाई की। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में, भारत का 'चालू खाता घाटा' सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.3 प्रतिशत रहा, जो कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
- भारत विश्व में प्रेषण प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता देश बना रहा। वित्त वर्ष 2024–25 में प्रेषण अंतर्वाह बढ़कर 135.4 अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया, जिससे विदेशी खाते की स्थिरता को समर्थन प्राप्त हुआ। उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले प्रेषणों का हिस्सा बढ़ा, जो कुशल और पेशेवर श्रमिकों के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
- 16 जनवरी 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 701.4 अरब अमरीकी डॉलर हो गया, जो लगभग 11 माह के भारत के आयात की भरपाई करने सक्षम है और विदेशी ऋण के 94 प्रतिशत से अधिक हिस्से को समाहित करता है, जिससे विदेशी अस्थिरता के संबंध में जोरदार क्षमता सुदृढ़ हुई है।
- वैश्विक निवेश की मंदी के दौरान भी भारत ने पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) अंतर्वाह कुल मिलाकर 64.7 अरब अमरीकी डॉलर रहा, जो निवेशकों के निरंतर विश्वास और सेवा, डिजिटल, विनिर्माण एवं बुनियादी अवसंरचनात्मक क्षेत्रों में निवेश की तेज गति को दर्शाता है।
- भारत कैलेंडर वर्ष 2024 में 1,000 से अधिक परियोजनाओं से ग्रीन फील्ड निवेश की घोषणाओं में वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर रहा और कैलेंडर वर्ष 2020-24 में ग्रीन फील्ड डिजिटल निवेश के लिए सबसे बड़े गंतव्य के रूप में उभरा।
महंगाई: नियंत्रित और स्थिर
- भारत ने सीपीआई श्रृंखला की शुरुआत से सबसे न्यूनतम मुद्रास्फीति दर रिकॉर्ड की और अप्रैल-दिसंबर 2025 की औसत समग्र मुद्रास्फीति 1.7 प्रतिशत रही। खुदरा मुद्रास्फीति में यह कमी मुख्य रूप से भोजन और ईंधन के मूल्यों में सामान्य अवमूल्यन प्रवृत्ति को दी जा सकती है, जो मिलकर भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बास्केट का 52.7 प्रतिशत है।
- प्रमुख उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीईज़) में विशेष रूप से भारत ने 2025 में 2024 की तुलना में समग्र मुद्रास्फीति में सबसे तीव्र गिरावट दर्ज की है जो लगभग 1.8 प्रतिशत अंक के बराबर है।
कृषि और खाद्य प्रबंधन
- वित्तीय वर्ष 2015 और 2024 के बीच पशुपालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास हुआ है, जिसमें सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) लगभग 195 प्रतिशत बढ़ गया। मत्स्य पालन क्षेत्र ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें मछली उत्पादन में 2014-2024 के दौरान 140 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है जबकि 2004-2014 में तुलनात्मक रूप से कम वृद्धि दर्ज की गई थी।
- अच्छी मानसून अवधि के दौरान भारत का अन्न उत्पादन कृषि वर्ष 2024–25 में अनुमानित रूप से 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तक पहुंचने का अनुमान है जो पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 एलएमटी की वृद्धि है। यह वृद्धि चावल, गेहूं, मक्का और मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन में बढोत्तरी के कारण हुई है।
- खाद्य अनाज उत्पादन में वृद्धि के बावजूद बागवानी, जो कृषि जीवीए का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा है, कृषि वृद्धि का एक प्रमुख चालक बनकर उभरी है। 2024-25 में बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया, जो अनुमानित खाद्य अनाज उत्पादन 357.73 एमटी से अधिक है।
- सरकार कृषि विपणन और अवसंरचना में दक्षता सुधारने के लिए आईएसएएम के अधीन कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई) उप-योजना और कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) को लागू कर रही है ताकि खेत के स्तर की सुविधाओं को मजबूती प्रदान की जा सके और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके। मूल्य खोज को ई-एनएएम योजना के माध्यम से बेहतर बनाया गया है, जिसके अधीन 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 1.79 करोड़ किसान, 2.72 करोड़ व्यापारी और 4,698 एफपीओ शामिल हो चुके हैं। इसमें 23 राज्यों और चार संघशासित राज्य क्षेत्रों की 1,522 मंडियां शामिल हैं।
- अनिवार्य फसलों के लिए सुनिश्चित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के अंतर्गत आय अंतरण के माध्यम से किसानों की आय को समर्थन प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, पीएम किसान मासिक पेंशन योजना (पीएमकेएमवाई) पेंशन समर्थन प्रदान करती है, जिससे किसानों की आय संबंधी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होती है। इसके आरंभ से ही पीएम-किसान के अधीन, 21 किस्तों में पात्र किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि जारी की जा चुकी है। पीएमकेएमवाई के अधीन, 31 दिसंबर 2025 तक 24.92 लाख किसान पंजीकृत हैं।
- सरकार ने विकसित भारत– रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) की गारंटी अधिनियम 2025 को अधिनियमित किया है, जिसे विकसित भारत– जी-राम-जी अधिनियम, 2025 भी कहा जाता है। यह अधिनियम मनरेगा का एक व्यापक वैधानिक पुनर्गठन है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047की दीर्घकालिक परिकल्पना के अनुरूप बनाना है। इसका उद्देश्य जवाबदेही को मजबूत करना, अवसंरचना परिणामों में सुधार करना तथा आय सुरक्षा को मजबूत करना है। विकसित भारत- जी-राम-जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण रोजगार नीति में भारत के निर्णायक बदलाव को दर्शाता है। हालांकि मनरेगा सहभागिता, डिजिटलीकरण और पारदर्शिता से जनता के बीच काफी लोकप्रिय रहा, लेकिन कुछ ढांचोगत कमियों से इसकी प्रभावशीलता कम देखी गई।
सेवाएं : स्थिरता से नए आयामों की ओर
- सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सेवाओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (एच1 वित्त वर्ष 2026) में बढ़कर 53.6 प्रतिशत हो गई, जबकि सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में सेवाओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 26 के प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार अब तक के सर्वोच्च स्तर 56.4 प्रतिशत पर पहुंच गई।
- भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक है और 2005 में वैश्विक सेवाओं के व्यापार में इसकी हिस्सेदारी दो प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 4.3 प्रतिशत हो गई है।
- सेवा क्षेत्र विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है। वित्त वर्ष 2023 से 2025 के दौरान कुल एफडीआई प्रवाह में इसका औसत हिस्सा 80.2 प्रतिशत रहा, जो महामारी-पूर्व अवधि (वित्त वर्ष 2016 से 2020) के 77.7 प्रतिशत से अधिक है।
उद्योग की नई उड़ान : संरचनात्मक रूपान्तरण और वैश्विक एकीकरण
- वैश्विक स्तर पर छाई मंदी और निरंतर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है, जहाँ उद्योग का सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वास्तविक संदर्भ में 7.0 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।
- विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर में तेजी आई है, जहां वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जीवीए 7.72 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 9.13 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो संरचनात्मक सुधार को दर्शाता है।
- उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने 14 क्षेत्रों में लागू 2.0 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश आकर्षित किया है, जिसके परिणामस्वरूप सितंबर 2025 तक 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन/बिक्री हुई है और 12.6 लाख से अधिक नौकरियों का सृजन हुआ है।
- भारत के नवाचार प्रदर्शन में निरंतर तेजी देखी गई है, जिसके तहत वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंकिंग वर्ष 2019 के 66वें स्थान से सुधर कर वर्ष 2025 में 38 हो गई है।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने घरेलू क्षमताओं को उन्नत बनाया है, जिसके तहत छह राज्यों में दस सेमीकंडक्टर विनिर्माण और पैकेजिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
निवेश और अवसंरचना : संपर्क सूत्र, क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना
- भारत सरकार का पूंजीगत व्यय लगभग 4.2 गुना बढ़ गया है, जो वित्त वर्ष 2018 में 2.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (बजट अनुमान) में 11.21 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 (बजट अनुमान) में ‘प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये है, जो बुनियादी अवसंरचना, विकास पथ का मुख्य प्रेरक तत्व के रूप में स्थापित हो गया है।
- राष्ट्रीय राजमार्ग की आधारभूत अवसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 60 प्रतिशत की वृद्धि को दर्ज करते हुए वित्त वर्ष 2014 के 91,287 किलोमीटर से वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर तक) में 1,46,572 किलोमीटर हो गया है। इसके साथ ही, परिचालन वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर की लंबाई लगभग दस गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2014 के 550 किलामीटर से वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर तक) में 5,364 किलोमीटर हो गई है।
- रेलवे की आधारभूत अवसंरचना का विस्तार निरंतर गति से जारी है, जिसके अधीन मार्च 2025 तक रेल नेटवर्क ने 69,439 रूट किलोमीटर का विस्तार दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2026 में 3,500 किलोमीटर अतिरिक्त नेटवर्क विस्तार के लक्ष्य को निर्धारित किया है, और अक्टूबर 2025 तक 99.1 प्रतिशत विद्युतीकरण निर्माण-कार्य को पूरा किया गया है।
- भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार बन गया है, जिसमें हवाई अड्डों की संख्या वित्त वर्ष 2014 के 74 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 164 हो गई है।
- विद्युत क्षेत्र में क्षमता का निरंतर विस्तार दर्ज किया गया है। नवंबर 2025 तक संस्थापित क्षमता वर्ष-दर-वर्ष 11.6 प्रतिशत से बढ़कर 509.74 गीगावाट हो गई है। इसके साथ ही, मांग–आपूर्ति का अंतर वित्त वर्ष 2014 के 4.2 प्रतिशत से घटकर नवंबर 2025 तक शून्य हो गया है।
- विद्युत क्षेत्र के सुधारों ने ऐतिहासिक बदलाव प्रस्तुत किया है, जिसमें डिस्कॉम ने वित्त वर्ष 2025 में पहली बार 2,701 करोड़ रुपये का निवल लाभ (कर पश्चात्त निवल लाभ) दर्ज किया है। इसके साथ ही, एटी एंड सी नुकसान वित्त वर्ष 2014 के 22.62 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 15.04 प्रतिशत हो गई है।
- नवंबर 2025 तक कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की साझेदारी लगभग 49.83 प्रतिशत है। कुल नवीकरणीय ऊर्जा तथा संस्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है।
- टेली-डेंसिटी के संदर्भ में 86.76 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, और 5-जी सेवाएँ अब देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध हैं।
- जल जीवन मिशन के तहत, अक्टूबर 2025 तक 81 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल से स्वच्छ जल की सुविधा उपलब्ध है।
- अंतरिक्ष अवसंरचना में तेजी आई है, जिसके तहत भारत स्वायत्त सैटेलाइट डॉकिंग की उपलब्धि प्राप्त करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया है। इसके साथ ही, स्वदेशी मिशनों का विस्तार हुआ है और निजी क्षेत्र की साझेदारी में भी वृद्धि हुई है।
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन : सशक्त, प्रतिस्पर्धी और विकासशील भारत
- वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान (31 दिसंबर 25 तक), देश में कुल 38.61 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई है। इसमें 30.16 गीगावाट सौर ऊर्जा, 4.47 गीगावाट पवन ऊर्जा, 0.03 गीगावाट जैव-ऊर्जा तथा 3.24 गीगावाट जलविद्युत ऊर्जा शामिल हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य – उपलब्धियाँ और भविष्य की रूपरेखा
- आज भारत विश्व की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन कर रहा है, जिसके अंतर्गत 14.71 लाख विद्यालयों में 24.69 करोड़ छात्रों को शिक्षा प्रदान की जा रही है और इस व्यवस्था को 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक सहयोग प्रदान कर रहे हैं (यूडीआईएसई + 2024-25)।
- भारत ने अवसंरचना तथा शिक्षक क्षमता को सुदृढ़ करने करके विद्यालय नामांकन में उल्लेखनीय प्रगति की है। पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं ने शिक्षा तक पहुंच और समानता को बढ़ावा दिया है। सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) प्राथमिक स्तर (कक्षा I से V) में 90.9, उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा VI से VIII) में 90.3, माध्यमिक स्तर (कक्षा IX एवं X) में 78.7 तथा उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा XI एवं XII) में 58.4 है।
उच्च शिक्षा
- उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) की संख्या 2014-15 में 51,534 से बढ़कर जून 2025 तक 70,018 हो गई है, जिससे उच्च शिक्षा तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह वृद्धि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की संख्या में हुए महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाती है। 2014-15 से 2024-25 के बीच प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में देश में 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स हैं। इसके साथ ही जंज़ीबार और अबू धाबी में दो अंतरराष्ट्रीय आईआईटी परिसरों की स्थापना भी की गई है।
- एनईपी के अंतर्गत उच्च शिक्षा प्रणाली में अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं:
- राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ),जिसका उद्देश्य शैक्षणिक और कौशल-आधारित शिक्षण को मिश्रित करना है, जिसे 170 विश्वविद्यालयों द्वारा अपनाया गया है।
- एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के अंतर्गत 2,660 संस्थान शामिल किए गए हैं, जिनमें 4.6 करोड़ से अधिक आईडी जारी की जा चुकी हैं। इनमें क्रेडिट युक्त 2.2 करोड़ एपीएएआर (स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री) आईडी शामिल हैं।
- एनईपी के तहत 2035 तक 50 प्रतिशत जीईआर के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु 153 विश्वविद्यालयों ने लचीली प्रवेश–निकास व्यवस्था तथा द्विवार्षिक प्रवेश प्रणाली लागू की है।
स्वास्थ्य
- 1990 के बाद से, भारत ने मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में 86 प्रतिशत की कमी दर्ज की है, जो वैश्विक औसत 48 प्रतिशत से कहीं अधिक है। पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर (यू5एमआर) में 78 प्रतिशत की गिरावट हासिल की गई, जो 1990-2023 के दौरान वैश्विक स्तर पर 54 प्रतिशत की तुलना में 61 प्रतिशत की वैश्विक कमी और नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) में 70 प्रतिशत से अधिक की कमी है।
- पिछले दशक में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में 37 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जो 2013 में प्रति हजार जीवित जन्मों पर 40 से घटकर 2023 में 25 हो गई है।
रोजगार और कौशल विकास — उन्नत कौशल की ओर
- वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में कुल 56.2 करोड़ लोग (15 वर्ष और उससे अधिक आयु) कार्यरत थे, जो वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में लगभग 8.7 लाख नए रोजगारों के सृजन को दर्शाता है।
- वार्षिक औद्योगिक समीक्षा (एएसआई), जो संगठित विनिर्माण क्षेत्र को कवर करता है, वित्त वर्ष 2024 के परिणाम विनिर्माण क्षेत्र के लचीलेपन को उजागर करते हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में रोजगार में छह प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह वित्त वर्ष 2023 की तुलना में वित्त वर्ष 2024 में 10 लाख से अधिक नौकरियों की वृद्धि को दर्शाता है।
- लेबर संहिताओं में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक रूप से मान्यता दी है, जिससे सामाजिक सुरक्षा, कल्याण कोष और अन्य लाभों का दायरा सुनिश्चित हुआ है।
- जनवरी 2026 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का सफलतापूर्वक पंजीकरण किया जा चुका है और कुल पंजीकरणों में महिलाओं की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक है, जो देश की जेंडर आधारित कल्याण योजनाओं को मजबूती प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) एक एकीकृत मंच है, जो रोजगार चाहने वालों, नियोक्ताओं, प्रशिक्षण प्रदाताओं तथा करियर मार्गदर्शन और परामर्श एजेंसियों को आपस में जोड़ता है। इस पोर्टल से विभिन्न क्षेत्रों से 5.9 करोड़ से अधिक पंजीकृत रोजगार चाहने वाले और 53 लाख नौकरी प्रदाता जुड़े हैं तथा इस पर लगभग 8 करोड़ रिक्तियां हैं।
कौशल प्रणाली
- आईटीआई के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय योजना में स्मार्ट कक्षाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल सामग्री और उद्योग-संरेखित दीर्घकालिक और अल्पकालिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई सहित 1,000 सरकारी आईटीआई को अपग्रेड करने का प्रस्ताव है।
ग्रामीण विकास और सामाजिक प्रगति – भागीदारी से साझेदारी तक
- विश्व बैंक ने गरीबी रेखा को 2.15 यूएसडी से बढ़ाकर 3.00 यूएसडी प्रतिदिन कर दिया है, जिसे 2021 की कीमतों के अनुसार क्रय शक्ति समता के आधार पर समायोजित किया गया है। संशोधित आईपीएल के अनुसार, वर्ष 2022–23 में भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 5.3 प्रतिशत तथा निम्न-मध्यम आय वर्ग की गरीबी दर 23.9 प्रतिशत रही।
- समावेशी विकास लक्ष्य के महत्व को समझते हुए, सामान्य सरकार का सामाजिक क्षेत्र पर व्यय सामाजिक क्षेत्र के विकास के अनुरूप बना रहा है। वित्त वर्ष 22 के बाद से सामान्य सरकार के सामाजिक सेवाओं पर व्यय (एसएसई) में लगातार वृद्धि का रुझान देखा गया है।
- वित्त वर्ष 2025–26 (बजट अनुमान) में एसएसई सकल घरेलू उत्पाद का 7.9 प्रतिशत रहा, जो वित्त वर्ष 2024–25 (आरई) में 7.7 प्रतिशत तथा वित्त वर्ष 2023–24 में 7 प्रतिशत था।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति
- दिसंबर 2025 तक, स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन समीक्षा लगभग 3.44 लाख अधिसूचित गाँवों के लक्ष्य के मुकाबले 3.28 लाख गांवों में पूर्ण की जा चुकी है। लगभग 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। वर्ष 2023–24 के दौरान, अग्रणी उर्वरक कंपनियों ने अपने स्वयं के संसाधनों से स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1,094 ड्रोन वितरित किए, जिनमें से 500 ड्रोननमो ड्रोन दीदी योजनाके अंतर्गत प्रदान किए गए।
भारत में एआई (एआई) पारिस्थिति की तंत्र का विकास: आगे की राह"
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) को प्रतिष्ठा-आधारित प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा के बजाय ऐसे आर्थिक रणनीति के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका संकेन्द्र भारत की संरचनात्मक वास्तविकताओं जैसे पूँजी की उपलब्धता, ऊर्जा की सीमित आपूर्ति, संस्थागत क्षमता और बाज़ार की गहराई के अनुरूप ए.आई को अपनाने पर है, ताकि प्रौद्योगिकी के चयन, दीर्घकालिक विकास को सुदृढ़ करें और कमजोर निर्भरताएं उत्पन्न न हों।
शहरीकरण: भारत के शहरी तंत्र को नागरिकोन्मुख बनाना
- नमो भारत क्षेत्रीय त्वरित गति परिवहन प्रणाली यह दर्शाती है कि उच्च-गति क्षेत्रीय कनेक्टिविटी कैसे शहरी और उप-शहरी श्रम बाजारों को पुनः आकार दे सकती है। शहरों और उनके आस-पास के क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में तेजी से कमी लाकर, ऐसी प्रणालियां रोजगार तक पहुंच बढ़ाती हैं, बहु-केंद्रीय विकास का समर्थन करती हैं, और मुख्य महानगरीय क्षेत्रों पर दबाव को कम करती हैं। यह अनुभव महानगरीय क्षेत्रों में गतिशीलता, आवास और आर्थिक विकास को एकीकृत करने में क्षेत्रीय रेल की भूमिका को रेखांकित करता है।
आयात प्रतिस्थापन से सामरिक लचीलेपन और सामरिक अपरिहार्यता तक
- इस परिप्रेक्ष्य में, स्वदेशी अपरिहार्य और आवश्यक बन जाता है। यह विदेशी आघातों के सामने उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित करने और स्थायी राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करने के लिए रक्षात्मक और आक्रामक नीति उपकरण दोनों के रूप में कार्य करता है, जो आर्थिक संप्रभुता को सुदृढ़ करता है।
- 'स्वदेशी' से 'रणनीतिक लचीलेपन' और पुनः 'रणनीतिक अपरिहार्यता' के संदर्भ में क्रमिक विकास की अवसंरचना तैयार करता है। इसमें विवेक आधारित आयात प्रतिस्थापन राष्ट्रीय शक्ति में निवेश करता है और अंततः भारत को वैश्विक प्रणालियों के संदर्भ में इस तरह स्थापित करता है कि विश्व 'भारतीय उत्पाद खरीदने के बारे में सोचने' के बजाय' बिना सोचे भारतीय उत्पाद खरीदने' की दिशा में बढ़ा जाए।
- राष्ट्रीय इनपुट लागत न्यूनीकरण रणनीति प्रतिस्पर्धात्मकता' कोआधारभूत अवसंरचना के रूप में देखता है। यह रणनीति किफायती और विश्वसनीय संसाधनों को विनिर्माण, निर्यात और रोजगार के लिए मौलिक मानती है, जबकि बढ़े हुए संसाधन सम्बद्ध लागतों को सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर व्यापक और स्थायी दंड के रूप में देखती है।
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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई – 25
(रिलीज़ आईडी: 2219934)
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