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विश्व बैंक ने कम और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था में अवसंरचना में निजी निवेश के मामले में भारत को शीर्ष पांच देशों में शामिल किया है


हाई स्पीड कॉरिडोर में करीब 10 गुणा वृद्धि - वित्त वर्ष 2014 में 550 किलोमीटर से वित्त वर्ष 2026 में दिसंबर तक 5364 किलोमीटर  

भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार, हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 से बढ़कर 2025 में 164 हुई   

विश्व बैंक इंडेक्स 2024 के शीर्ष 100 बंदरगाहों में बेहतर आवाजाही समय के साथ भारत के 7 बंदरगाह

कुल नवीकरणीय ऊर्जा और सोलर क्षमता के मामले में भारत तीसरे स्थान पर

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 1:40PM by PIB Delhi

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि भारत की विकास रणनीति में अवसंरचना केंद्र में बना हुआ है। वित्त वर्ष 2015 से सार्वजनिक पूंजीगत व्यय सतत बढ़ रहा है। इस बदलाव का प्रमुख कारक पीएम गतिशक्ति के माध्यम से मल्टी मॉडल प्लानिंग को संस्थागत करना है। राष्ठ्रीय लॉजिस्टिक नीति और डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से आवाजाही की लागत और जोखिम कम हो रही है।

सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में सतत बढोतरी

वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार इस बदलाव में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में सतत बढ़ोतरी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार का पूंजीगत व्यय लगभग 4.2 गुना बढ़ गया है। यह वित्त वर्ष 2018 में 2.63 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 26 (बजट अनुमान) में 11.21 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि वित्त वर्ष 26 (बजट अनुमान) में प्रभावी पूंजीगत व्यय' 15.48 लाख करोड़ रुपए है। इसमें अवसंरचना विकास का मुख्य प्रेरक रहा है। अर्थव्यवस्था को तैयार करने में अवसंरचना का महत्वपूर्ण योगदान है।  

अवसंरचना वित्त पोषण परिदृश्य में बदलाव

2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार भारत के अवसंरचना वित्त पोषण परिदृश्य में बदलाव हो रहा है। यह बैंक ऋण की जगह विविधिकृत होता जा रहा है, वित्त वर्ष 20-25 के दौरान वाणिज्यिक क्षेत्र में एनबीएफसी ऋण 43.3 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से बढ़ा है। साथ ही, दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी जुटाने में इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स की भूमिका भी निरंतर बढ़ी है।

सार्वजनिक निजी भागीदारी

2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार विश्व बैंक ने कम और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था में अवसंरचना में निजी निवेश के मामले में भारत को शीर्ष पांच देशों में शामिल किया है। साथ ही दक्षिण एशिया में निजी अवसंरचना निवेश की 90 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत पीपीआई निवेश के मामले में शीर्ष पर है। यह मजबूत वैश्विक पहचान घरेलू बाजार में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति-पीपीपीएसी के स्वीकृत योजनाओं में साफ नजर आता है। 

कोर भौतिक अवसंरचना

राष्ट्रीय राजमार्ग की आधारभूत अवसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 60 प्रतिशत की बढोतरी के साथ वित्त वर्ष 2014 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर वित्तवर्ष 2026 (दिसंबर तक) 1,46,572 किलोमीटर हो गया है। साथ ही परिचालन वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर की लंबाई लगभग दस गुना बढ़कर वित्तवर्ष 2014 के 550 किलोमीटर से वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर तक) में 5,364 किलोमीटर हो गई है। सड़क और राजमार्ग क्षेत्र में प्रमुख पहलों और सुधारों में हाईस्पीड कॉरिडोर का विकास, इकनॉमिक नोड कनेक्टिविटी और शहरी घनत्व को कम करना ( एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में नई नीति के अंतर्गत रिंग रोड और बाईपास का निर्माण) शामिल है।

रेल अवसंरचना

2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार रेल अवसंरचना का विस्तार निरंतर गति से जारी है। इसके अंतर्गत मार्च 2025 तक रेल नेटवर्क 69,439 किलोमीटर तक पहुंच गया है। वित्तवर्ष 2026 के लिए 3,500 किलोमीटर अतिरिक्त रेल नेटवर्क के विस्तार का लक्ष्य  निर्धारित किया  गया है और अक्टूबर 2025 तक 99.1 प्रतिशत विद्युतीकरण निर्माण-कार्य को सम्पन्न किया गया है। हाल के वर्षों में रेलवे अवसंरचना में रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय किए गए हैं। इसमें नई लाइनों, दोहरीकरण और मल्टी ट्रैकिंग, रोलिंग स्टॉक ऑग्यूमेशन, सिंगल लाइनिंग और सुरक्षा संबंधित कार्य शामिल हैं। रेल क्षेत्र के महत्वपूर्ण अवसंरचना पहलों में इकनॉमिक रेलवे कॉरिडोर (3 कॉरिडोर कार्यक्रम-ऊर्जा, मिनरल और सिमेंट, बंदरगाह आवाजाही, उच्च घनत्व वाले यातायात मार्ग) मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल, समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर, स्टेशन पुनर्विकास (अमृत भारत स्टेशन योजना-1037 स्टेशनों का पुनर्विकास किया गया), सुरक्षा और तकनीक उन्नयन (कवच-आधुनिक रेल गाड़ी सुरक्षा प्रणाली, ट्रैक उन्नयन (110 किलोमीटर की निर्धारित स्पीड के लिए 78 प्रतिशत से अधिक ट्रैक का उन्नयन किया गया) और पीपीपी शामिल है।

नागर विमानन

2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार बन गया है इसमें हवाइअड्डों की संख्या में वित्तवर्ष 2014 में 74 से बढ़कर वित्तवर्ष 2025 में 164 तक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2025 में भारतीय हवाई अड्डों पर 412 मिलियन यात्री पहुंचे और वित्तवर्ष 2031 तक इसके बढ़कर 665 मिलियन तक पहुंचने की संभावना है। इसी तरह हवाई माल ढुलाई वित्तवर्ष 2015 के 2.53 एमएमटी से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 3.72 एमएमटी तक पहुंच गया है। यह बढोतरी कई महत्वपूर्ण नीतिगत पहलों के कारण हुई है। इसमें आरसीएस उड़ान, ग्रीन फील्ड हवाई अड्डा नीति, हवाई अड्डों का आधिनिकीकरण, क्षमता विस्तार, डिजिटल और तकनीकी पहल (डीजी यात्रा, उदार ड्रोन नीति) विधायी सुधार जैसे भारतीय वायुयान विधेयक 2024 और विमान वस्तुओं के हित संरक्षम विधेयक 2025 शामिल हैं।

पत्तन और पोत परिवहन

मैरिटाइम भारत विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 के अंतर्गत बंदरगाह की अवसंरचना को उन्नत करने नियामक ढांचे को बढ़ाने, परिचालन दक्षता में सुधार करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने में पर्याप्त प्रगति हुई है। इससे भारतीय पोत परिवहन औसत कंटेनर पोत टर्नआराउंड समय लगभग वैशविक सर्वोत्तम मानकों को प्राप्त कर रहा है। अब सात भारतीय बंदरगाह विश्व बैंक के' कंटेनर पोर्ट फॉर्मेंस इंडेक्स 2024  के शीर्ष 100 बंदरगाहों में शामिल हैं। पत्तन और पोत परिवहन क्षेत्र में हालिया विधायी सुधारों में मर्चेंट शिपिंग एक्ट 2025, कोस्टल शिपिंग एक्ट-2025, भारतीय बंदरगाह अधिनियम 2025, लदान बिल अधिनियम 2025 और समुद्री मार्ग से ढुलाई अधिनियम-2025 शामिल है।

देश ने अंतरदेशीय जल परिवहन में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। नवंबर 2025 तक 32 राष्ट्रीय जलमार्ग 5155 किलोमीटर तक फैले हुए हैं। इसमें 29 राष्ट्रीय जलमार्गों पर ढुलाई, 15 राष्ट्रीय जलमार्गों पर क्रूज संचालन और 23 राष्ट्रीय जल मार्गों पर यात्री सेवाएं काम कर रही हैं। 11 राष्ट्रीय जलमार्ग तीनों माध्यमों पर काम करते हैं। अंतर्देशीय जल परिवहन के माध्यम से ढुवाई में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। यह वितवर्ष 2013-14 के 18 एमएमटी से बढ़कर वित्त वर्ष 24-25 में 146  एमएमटी हो गई है।

2025-26 के आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश के पोत निर्माण और समुद्री इको-सिस्टम को पुनर्जीवित करने के लिए सितंबर 2025 में 69,725 करोड़ रुपए के व्यापक पैकेज को मंज़ूरी दी गई। इस पहल में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीकी रूप से उन्नत और टिकाऊ समुद्री क्षेत्र विकसित करने के लिए एक चार- स्तंभ दृष्टिकोण अपनाया गया।

ऊर्जा क्षेत्र

विद्युत : विद्युत क्षेत्र में क्षमता का निरंतर विस्तार हो रहा है। संस्थापित क्षमता वर्ष-दर-वर्ष 11.6 प्रतिशत से बढ़कर नवंबर 2025 तक 509.74 गीगावाट हो गई है। सरकार ने प्रत्येक घर में निर्बाध बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए राज्यों/वितरण उपयोगिताओं को हासिल करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। दीनदयाल ग्राम उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना-डीडीयूजीजेवाई के अंतर्गत शुरू की गई एकीकृत विद्युत विकास योजना और प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर  योजना के अंतर्गत विभिन्न राज्यों में वितरण अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। डीडीयूजीजेवाई के अंतर्गत लगभग 18374 गांवों का विद्युतीकरण किया गया है और सौभाग्य अवधि के दौरान 2.86 करोड़ घरों को बिजली मिली है। इसके परिणाम स्वरूप मांगआपूर्ति का अंतर वित्तवर्ष 2014 में 4.2 प्रतिशत से घटकर नवंबर 2025 तक शून्य हो गया है।

2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार वितरण उपयोगिताओं की वित्तीय स्थिरता और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए और राज्यों को और समर्थन देने के लिए वर्ष 2021 में 3.03 लाख करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ पुनरूद्धारित वितरण क्षेत्र योजना शुरू की गई। इसके परिणाम स्वरूप और कई अन्य पहलों की बदौलत ऊर्जा क्षेत्र सुधार में ऐतिहासिक बदलाव हुए हैं। डिस्कॉम ने वित्तवर्ष 2025 में पहली बार 2,701 करोड़ रुपए का निवल लाभ (कर पश्चात्त निवल लाभ- पैट) दर्ज किया है। इसके साथ ही, एटीएंडसी हानि वित्तवर्ष 2014 के 22.62 प्रतिशत से घटकर वित्तवर्ष 2025 में 15.04 प्रतिशत हो गई है। वितरण क्षेत्र को और सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने विद्युत संशोधन विधेयक 2026 का प्रस्ताव किया है। इसका उद्देश्य विद्युत क्षेत्र में दक्षता, प्रतिस्पर्धा और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देना है।

नवीकरणीय ऊर्जा

भारत का ऊर्जा परिदृश्य एक संरचनात्मक परिवर्तन से गुजर रहा है। इसमें नवंबर 2025 तक कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की साझेदारी लगभग 49.83 प्रतिशत है। कुल नवीकरणीय ऊर्जा तथा संस्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है। कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पिछले दशक में तीन गुना से अधिक बढ़ गई है। यह मार्च 2014 में 76.38 गीगावॉट से बढ़कर नवंबर 2025 तक 253.96 गीगावाट हो गई है।

आर्थिक समीक्षा के अनुसार हाल के वर्षों में भारतीय अवसंरचना रणनीति के आकार में बड़ा परिवर्तन हुआ है। गुणवत्ता और सतत सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, विकास के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में सामने आए हैं। सड़क, रेलवे, पोत परिवहन, नागर विमानन, ऊर्जा, डिजिटल और ग्रामीण अवसंरचना में समन्वित निवेश से क्षमता विकास हुआ है। इससे यात्रा समय में कमी, तेज ढुलाई आवाजाही, बेहतर लॉजिस्टिक प्रदर्शन और आवश्यक सेवाओं में सुलभ पहुंच हासिल हुई है। पीएम गतिशक्ति के माध्यम से एकीकृत योजनाओं के संस्थागत होने, वित्त में बड़े सुधारों, संपत्ति मौद्रीकरण और सार्वजनिक निजी साझेदारी से निजी निवेश के माध्यम से परियोजनाओं के तैयारियों और क्रियान्वयन को मजबूती मिली है।

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