सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
कानून से लेकर वास्तविकता तक: दिव्यांगजनों के लिए समावेशी, प्रौद्योगिकी-संचालित सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है
प्रविष्टि तिथि:
08 JAN 2026 8:39PM by PIB Delhi
केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने दिव्यांगजनों के अधिकार (RPwD) अधिनियम, 2016 के अतंर्गत गठित केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड(सीएबी) की 8वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा, “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास दिव्यांग व्यक्तियों के रोजमर्रा के जीवन में समय पर सेवाओं, प्रभावी संस्थानों और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से होना चाहिए।” यह बैठक आज नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र में आयोजित की गई। मंत्री ने भारत सरकार की सुलभता, समावेशन और सशक्तिकरण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया, और इस बात पर जोर दिया कि प्रगतिशील कानूनों को ठोस परिणामों में बदलने में संवाद और सहकारी संघवाद आवश्यक है।
इस बैठक के दौरान, डॉ. वीरेंद्र कुमार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (Rights of Persons with Disabilities Act) के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने संस्थागत तंत्र को मजबूत करने, प्रशिक्षित कर्मियों की संख्या बढ़ाने और कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री ने सेवाओं की समय पर उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की बात कही और राज्यों से कहा कि वे दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूनिक डिसेबिलिटी आइडेंटिफिकेशन कार्ड(यूडीआईडी कार्ड) जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं। यह दिव्यांगता बोर्ड की बैठकों की संख्या बढ़ाकर, अधिसूचित अस्पतालों के नेटवर्क का विस्तार करके, पैनल में निजी विशेषज्ञों को शामिल करके और यूडीआईडी परियोजना के बारे में राज्यों में जागरूकता और निगरानी में सुधार लाकर हासिल किया जा सकता है। मंत्री जी ने यह भी उल्लेख किया कि सीएबी जैसे मंचों पर सार्थक चर्चा से मूल्यवान सुझाव आते हैं, जो बेहतर नीति निर्धारण और क्रियान्वयन में मदद करते हैं।

मंत्री जी ने जिन प्रमुख बातों पर बल दिया, उनमें यूआईडीएआई-यूडीआईडी एपीआई का एकीकरण और तमिलनाडु में 45,000 से अधिक दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान शामिल है, जिनका डेटा अब राज्य डेटाबेस के माध्यम से व्यवस्थित किया जा सकता है। उन्होंने निजी क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार देने वाले नियोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन को पुनः शुरू करने और सुगम्य भारत अभियान के तहत नई जागरूकता पहल करने के अनुरोध को स्वीकार किया। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने यह भी कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के लिए उपकरण और सहायक साधनों की खरीद/फिटिंग सहायता (एडीआईपी), कॉकलीयर इम्प्लांट कार्यक्रम और एक्सेसिबिलिटी पहल जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत निधियों का समय पर उपयोग महत्वपूर्ण है, और राज्यों द्वारा सक्रिय कदम उठाने से सेवा वितरण में तेज़ी आती है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संतुलित क्षेत्रीय विकास के दृष्टिकोण के तहत, विशेष रूप से लद्दाख, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में संयुक्त क्षेत्रीय केन्द्र(CRCs) के विस्तार पर भी चर्चा हुई।
केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री बी. एल. वर्मा ने सदस्यों का स्वागत किया और सीएबी की भूमिका को केन्द्र, राज्य और हितधारकों के बीच समन्वित कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने नीति के इरादे से क्षेत्र स्तर पर क्रियान्वयन में बदलाव पर जोर दिया और गुणवत्तापूर्ण सेवा वितरण, यूडीआईडी तंत्र को मजबूत करने, एडीआईपी योजना के तहत अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने, विशेष रूप से दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में, की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए एडीआईपी-एसएसए योजना के तहत करीबी समन्वय और एआईसी-एसआईपीडीए जैसी योजनाओं के तहत निधियों के समय पर उपयोग की आवश्यकता का भी उल्लेख किया।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की सचिव, डॉ. वी. विद्यावती, ने दोहराया कि सीएबी दिव्यांगता क्षेत्र में सर्वोच्च नीतियों को बनाने वाली संस्था है और RPwD अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि बैठक सिर्फ सामान्य समीक्षा तक सीमित नहीं थी; बल्कि इसमें यूडीआईडी में बाधाओं, सहायक उपकरणों, प्रधानमंत्री दिव्यांग शक्ति पहल के विस्तार और समावेशी शिक्षा, पुनर्वास, रोजगार और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) और उभरती तकनीकों की परिवर्तनकारी क्षमता पर भी ध्यान दिया गया। राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के बीच आपसी सीखने के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि अधिनियम का सार्थक और समान क्रियान्वयन एक साझा जिम्मेदारी है।
संयुक्त सचिव श्री राजीव शर्मा ने दिन के एजेंडा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बैठक का समापन इस उम्मीद के साथ हुआ कि चर्चाओं से ऐसे सुझाव मिलेंगे जिन पर काम किया जा सके और समावेशी, प्रौद्योगिकी-आधारित सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप बने, जिससे दिव्यांग व्यक्ति भारत के विकास मार्ग में पूरी तरह, आजादी से और सम्मान के साथ भागीदारी सुनिश्चित कर सके।

माननीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में दिव्यांगता पर केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड(सीएबी) की 8वीं बैठक संपन्न हुई, जिसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा; तमिलनाडु के माननीय मंत्री और सलाहकार बोर्ड के सदस्य; सांसद श्री ई.टी. मोहम्मद बशीर; दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की सचिव श्रीमती वी. विद्यावती; और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का समापन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के संयुक्त सचिव, श्री राजीव शर्मा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ किया गया।
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पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2213146)
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