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औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा

प्रविष्टि तिथि: 05 DEC 2025 7:00PM by PIB Delhi

आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) वर्तमान में पूरे देश में औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन पर केंद्रीय योजना लागू कर औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दे रहा है, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियों को समर्थन प्रदान किया जा रहा है:

सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियां जैसे प्रशिक्षण/कार्यशालाएं/संगोष्ठियां/सम्मेलन आदि।

औषधीय पौधों की आपूर्ति श्रृंखला में अग्रगामी एवं प्रतिगामी सहभागिता (एकीकृत घटक) जिसके अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियों को समर्थन दिया जाता है:

औषधीय पौधों की खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधा सामग्री तैयार करने के लिए अवसंरचना।

किसानों को जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियां।

औषधीय पौधों की विपणन क्षमता बढ़ाने, उपज का मूल्यवर्धन करने, लाभ बढ़ाने एवं नुकसान में कमी लाने के लिए फसल कटाई के बाद प्रबंधन एवं विपणन अवसंरचना का विकास।

कच्चे माल की गुणवत्ता की जांच एवं प्रमाणीकरण।

स्थानीय एवं बाहरी संरक्षण।

संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी)/ पंचायतों/ वन पंचायतों/ जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी)/ स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के साथ आजीविका संबंध।

अनुसंधान एवं विकास।

औषधीय पौधों से उत्पादित वस्तुओं का प्रचार, विपणन एवं व्यापार।

आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 की अवधि के दौरान पूरे देश में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों/सेमिनारों/कार्यशालाओं का आयोजन करने के लिए 1,161.96 लाख रुपये की 139 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की। इसके अलावा, एनएमपीबी देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित अपने क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र (आरसीएफसी) के माध्यम से, देश में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों/उत्पादकों को औषधीय पौधों की गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री (क्यूपीएम) प्रदान करता है। इसके अलावा, आरसीएफसी के माध्यम से समय-समय पर अच्छे कृषि पद्धतियों (जीएपी) और अच्छे क्षेत्र संग्रह पद्धतियों (जीएफसीपी) पर प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाता है।

औषधीय पौधों के व्यापार के लिए एक मंच प्रदान करने एवं बाजार तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, आयुष मंत्रालय के एनएमपीबी ने औषधीय पौधों/जड़ी-बूटियों के प्रचार एवं विपणन के लिए "ई-चरक" मोबाइल एप्लिकेशन एवं वेब पोर्टल की शुरुआत की है। ई-चरक एक ऐसा मंच है जो पूरे देश में औषधीय पौधों के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों, मुख्य रूप से किसानों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है। ई-चरक एप्लिकेशन विभिन्न स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध है और साथ ही पूरे भारत के 25 हर्बल बाजारों से 100 औषधीय पौधों का पाक्षिक बाजार मूल्य भी प्रदान करता है।

एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे पूरे देश में औषधीय पौधों सहित बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लागू किया जा रहा है।

एमआईडीएच योजना के अंतर्गत, अल्पावधि औषधीय पौधों, अर्थात् वह पौधे जो बारहमासी एवं वृक्ष प्रजाति के नहीं हैं, के क्षेत्रफल विस्तार के लिए सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। लागत मानदंडों एवं सहायता के स्वरूप का विवरण निम्नलिखित है:

क्रम सं.

घटक का नाम

लागत मानदंड

सहायता का स्वरुप

1

औषधीय पौधे (मुलेठी, शतावरी, कलिहारी, श्वेत मुसली, गुग्गल, मंजिष्ठा, कुटकी, अतीस, जटामांसी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, तुलसी, विदारीकंद, पिप्पली, चिरायता, पुष्करमूल आदि)

 

15 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर

सामान्य क्षेत्रों में 2 हेक्टेयर तक के क्षेत्र के लिए आनुपातिक आधार पर 40 प्रतिशत की सहायता, पौधरोपण सामग्री और आईएनएम/आईपीएम आदि के लिए सामग्री लागत को पूरा करने हेतु, 60:40 के अनुपात में 2 किस्तों में दी जाएगी।

उत्तर-पूर्व एवं हिमालयी राज्यों, अनुसूचित क्षेत्रों जिनमें जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) क्षेत्र, जीवंत गांव, अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप द्वीप समूह शामिल हैं, के मामले में, 2 हेक्टेयर तक के क्षेत्र के लिए आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत की सहायता प्रदान की जाएगी।

 

 

 

भारत सरकार ने पूरे देश में औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटियों की दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान करने के लिए व्यापक सर्वेक्षण एवं अध्ययन करवाया है। ये गतिविधियां मुख्य रूप से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गन भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) द्वारा संचालित की जाती हैं।

यह बताया गया है कि:-

भारत में औषधीय पौधों की लगभग 8,000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।

विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों में 5,250 से अधिक पौधों की प्रजातियों की पहचान की गई है और विभिन्न बीमारियों के लिए 9,567 से अधिक लोक दावे दर्ज किए गए है।

देश के विभिन्न वनस्पति भौगोलिक क्षेत्रों में जंगली पौधों के संसाधनों के सर्वेक्षण एवं अन्वेषण के माध्यम से, बीएसआई के वैज्ञानिकों ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की प्रजातियों की पहचान की है और ओडिशा, गुजरात, बिहार, उत्तराखंड की थारू और भोक्सा जनजातियों, पश्चिम बंगाल की लोध जनजातियों में पारंपरिक/औषधीय ज्ञान पर लगभग 2034 जातीय वनस्पति संबंधी जानकारियों का दस्तावेजीकरण किया है।

आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड अपनी 'औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन' के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत पूरे देश के सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों/अनुसंधान संस्थानों/संगठनों को औषधीय पौधों के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान गतिविधियों के लिए परियोजना आधारित वित्तीय सहायता प्रदान करता है। एनएमपीबी द्वारा पिछले पांच वर्षों में औषधीय पौधों के गुणों एवं प्रभावों पर समर्थित विशिष्ट परियोजनाओं का विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।

इसके अलावा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - औषधीय एवं सुगंधित पादप अनुसंधान निदेशालय (आईसीएआर-डीएमएपीआर), आनंद, गुजरात तथा औषधीय एवं सुगंधित पादपों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी-एमएपीबी), जिसका मुख्यालय आईसीएआर-डीएमएपीआर, आनंद में है, औषधीय पौधों के सभी पहलुओं, कृषि तकनीकों के विकास, फसल कटाई के बाद के प्रबंधन, भंडारण एवं प्रसंस्करण में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। एआईसीआरपी-एमएपीबी के पूरे देश में 28 केंद्र हैं, जिनमें छह स्वैच्छिक केंद्र शामिल हैं।

अनुलग्नक-I

पिछले पांच वर्षों की अवधि के दौरान पूरे देश में विभिन्न संगठनों को औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए समर्थित परियोजनाओं का विवरण:

क्रम सं.

वर्ष

परियोजना शीर्षक एवं संगठन का विवरण

स्वीकृत राशि

(लाखों में)

1

2020-21

परियोजना शीर्षक - ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के खिलाफ कैंसररोधी क्षमता वाले चयनित औषधीय पौधों से जैवसक्रिय यौगिकों का जैव सक्रियता आधारित आंशिक एवं पृथक्करण।

संगठन - पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, मन्नुथी, पिन कोड- 680651

 

 

21.382

2

2021-22

परियोजना शीर्षक - चूहों में स्तन कैंसर पर औषधीय पौधों के सहक्रियात्मक प्रभाव का इन विवो और इन विट्रो अध्ययन।

संगठन - हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय शाहपुर परिसर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, पिन कोड- 176206

 

 

40.10229

3

2021-22

परियोजना शीर्षक - बिल्वा की युवा जड़ों एवं पत्तियों के अर्क के जैवसक्रिय घटकों का अलगाव एवं मूल्यांकन, आईएल-2 इम्यूनोथेरेपी के लिए: इन विट्रो और इन विवो अध्ययन।

संगठन - स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, गाचीबोवली, हैदराबाद, तेलंगाना, पिन कोड- 500046

 

 

38.277419

4

2022-23

परियोजना शीर्षक - ऑस्टियोब्लास्टिक कोशिकाओं का उपयोग करके हर्बल पौधों के घटकों का पृथक्करण, लक्षण वर्णन एवं ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार पर उनका प्रभाव।

संगठन 1 - शारदा विश्वविद्यालय, प्लॉट नंबर 32, 34, नॉलेज पार्क III, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश-201310

संगठन 2 - एनआईसीपीआर आईसीएमआर, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, आई-7, सेक्टर-39, नोएडा, उत्तर प्रदेश, पिन कोड- 201301

 

 

 

20.0133

5

2022-23

परियोजना शीर्षक - सूजन आंत्र रोग (आईबीडी) में मेजर हिस्टोकम्पैटिबिलिटी कॉम्प्लेक्स (एमएचसी) पर फिकस फ्रूट पॉलीसेकेराइड की प्रतिक्रिया को समझना।

 

संगठन - भरथियार विश्वविद्यालय, कोयंबटूर, तमिलनाडु, पिन कोड- 641046

 

38.05252

6

2022-23

परियोजना शीर्षक - एच4आईआईई हेपेटोमा सेल लाइन में पीईपीसीके जीन अभिव्यक्ति एवं ग्लूकोनियोजेनेसिस को रोकने के लिए अकेशिया कैटेचू और रोडियोला इम्ब्रिकेटा का जैव परीक्षण निर्देशित अंशशोधन।

 

संगठन - राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान), सेक्टर 3, रोहिणी, नई दिल्ली, पिन कोड- 110085

 

22.2

7

2023-24

परियोजना शीर्षक - मल्टीड्रग प्रतिरोधी एसीनेटोबैक्टर बाउमानी के विरुद्ध वेलेरियाना वालिची के गैर-ध्रुवीय यौगिक का साइटोटॉक्सिक मूल्यांकन।

संगठन - एमिटी विश्वविद्यालय, सेक्टर–125, नोएडा, गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश,  पिन कोड-  201301।

 

 

18.338

 

यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रताप राव जाधव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एके / डीए


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