रक्षा मंत्रालय
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रक्षा मंत्रालय; वर्षांत समीक्षा - 2025

प्रविष्टि तिथि: 31 DEC 2025 4:25PM by PIB Delhi

रक्षा मंत्रालय के लिए साल 2025 इतिहास में एक स्वर्णिम और स्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज होगा। इस ‘सुधारों के वर्ष’ के दौरान देश ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में अभूतपूर्व और निर्णायक कदम उठाए। इसी वर्ष आतंकवाद के विरुद्ध राष्ट्रीय नीति में आए ठोस बदलावों का प्रभाव ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां पर सशस्त्र बलों ने अद्वितीय शौर्य, अटूट प्रतिबद्धता और अत्यंत सटीक रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान की। पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर और पड़ोसी देश की उकसावेपूर्ण गतिविधियों के विरुद्ध सीमाओं की प्रभावी रक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व व रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के दूरदर्शी मार्गदर्शन में भारत ने अपने शत्रुओं को स्पष्ट एवं निर्णायक संदेश दिया है कि देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता से किसी भी परिस्थिति में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ऑपरेशन के दौरान अत्याधुनिक ‘मेड-इन-इंडिया’ हथियार प्रणालियों का प्रभावी और सटीक उपयोग इस बात का ठोस प्रमाण है कि भारत ने रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। यह उपलब्धि आज के जटिल और संवेदनशील भू-राजनीतिक परिदृश्य में देश की रणनीतिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करने के लिए न केवल आवश्यक है, बल्कि भारत की बढ़ती सैन्य व तकनीकी क्षमता का स्पष्ट परिचायक भी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ऑपरेशन सिंदूर से लेकर मिशन सुदर्शन चक्र तक के दूरदर्शी विजन, रिकॉर्ड स्तर के रक्षा उत्पादन और निर्यात, सैनिकों को नवीनतम हथियारों एवं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित करने तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को अंतिम रूप देने की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों के साथ, वर्ष 2025 ने एक सुरक्षित, आत्मनिर्भर व समृद्ध भारत की सशक्त झलक प्रस्तुत की। यह वर्ष देश की रक्षा क्षमता, रणनीतिक आत्मविश्वास और वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक बनकर उभरा।

ऑपरेशन सिंदूर

यह अभियान 6–7 मई, 2025 की मध्यरात्रि को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के प्रत्युत्तर में आरंभ किया गया था, जिसमें 22 अप्रैल, 2025 को एक नेपाली नागरिक सहित 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा संचालित किए गए समन्वित एवं सटीक अभियानों के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया, जिनमें 100 से अधिक आतंकवादी, उनके प्रशिक्षक, हैंडलर तथा सहयोगी मारे गए। इनमें अधिकांश आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज़्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े थे। इस कार्रवाई में आतंकवादी ढांचे को अधिकतम क्षति पहुंचाई गई, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि नागरिकों को नुकसान न पहुंचे। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 28–29 जुलाई, 2025 को संसद में अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई न तो उकसावे की मंशा से और न ही किसी विस्तारवादी उद्देश्य से की गई, बल्कि इसे पूर्णतः आत्मरक्षा के अधिकार के अंतर्गत संचालित किया गया।

पाकिस्तान ने 10 मई, 2025 को लगभग रात 1 बज कर 30 मिनट पर मिसाइलों, ड्रोन, रॉकेट और अन्य लंबी दूरी के हथियारों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करते हुए भारतीय वायु सेना के ठिकानों, सेना के गोला-बारूद डिपो, हवाई अड्डों तथा सैन्य छावनियों पर व्यापक हमला किया। हालांकि, भारत की सशक्त वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन-रोधी तंत्र और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने इस हमले को पूरी तरह विफल कर दिया। दुश्मन किसी भी लक्ष्य को भेदने में असफल रहा और किसी भी महत्वपूर्ण सैन्य संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इस पाकिस्तानी हमले के प्रत्युत्तर में भारत की प्रतिक्रिया साहसिक, निर्णायक और अत्यंत प्रभावी रही। भारतीय वायु सेना ने पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान के हवाई अड्डों, कमान एवं नियंत्रण केंद्रों, सैन्य अवसंरचना व वायु रक्षा प्रणालियों को सटीक रूप से निशाना बनाया। चकलाल, सरगोधा, रफीकी, रहीमयार खान, जैकबाबाद, सुक्कुर तथा भोलारी जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर सफल हमले किए गए और सभी मिशन निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप पूर्ण किए गए। 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ से संपर्क कर सैन्य अभियानों को रोकने की अपील की। इसके पश्चात 12 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच औपचारिक वार्ता हुई, जिसमें आपसी सहमति से सैन्य अभियानों को रोकने का निर्णय लिया गया।

ऑपरेशन सिंदूर ने सैन्य अभियानों में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया, फिर चाहे वह ड्रोन युद्ध, बहु-स्तरीय हवाई रक्षा या इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की क्षमताएं हों। यह अभियान तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट समन्वय का भी सशक्त उदाहरण भी रहा। भारतीय वायु सेना ने निर्णायक हवाई प्रहार किए, वहीं थलसेना के जवान नियंत्रण रेखा पर पूरी मजबूती से डटे रहे और पाकिस्तान की हर उकसावेपूर्ण कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी और पाकिस्तान को यह साफ संदेश दिया कि भारत समुद्र से लेकर ज़मीन तक उसके हर महत्वपूर्ण अड्डे पर कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम व तैयार है। उन्होंने संसद को अवगत कराया कि ऑपरेशन सिंदूर को केवल रोका गया है, समाप्त नहीं किया गया। उनके शब्दों में, “यदि पाकिस्तान फिर से कोई कुटिल कृत्य करने का प्रयास करता है, तो भारत पहले से भी अधिक तीव्र और निर्णायक कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।”

मिशन सुदर्शन चक्र

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर लाल किला के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता का सशक्त प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित हथियारों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से इस अभियान ने आतंकी नेटवर्क और पाकिस्तान स्थित उनके बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया। यह एक नए युग की स्पष्ट घोषणा है—जहां पर भारत अब परमाणु ब्लैकमेल या किसी भी प्रकार की विदेशी धमकियों को स्वीकार नहीं करेगा और अपनी सुरक्षा व संप्रभुता की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने में पूर्णतः सक्षम तथा संकल्पबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने भारतीय नवप्रवर्तकों और युवाओं से आह्वान किया कि वे भारत में ही जेट इंजन के स्वदेशी विकास को गति दें, ताकि भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकी पूरी तरह स्वदेशी और आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही, उन्होंने दुश्मन की घुसपैठ को नाकाम करने और भारत की आक्रामक क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मिशन सुदर्शन चक्र की शुरुआत की घोषणा की। पौराणिक श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरित यह मिशन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो किसी भी खतरे का गतिशील, सटीक और शक्तिशाली प्रत्युत्तर सुनिश्चित करता है। इस पहल का उद्देश्य त्वरित एवं प्रभावी रक्षा प्रतिक्रियाओं को बढ़ाना तथा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को और सुदृढ़ करना है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 2035 तक सभी सार्वजनिक स्थलों को एक विस्तारित व राष्ट्रव्यापी सुरक्षा कवच के अंतर्गत लाया जाएगा, जिससे देश को व्यापक सुरक्षा मिलेगी और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था के प्रति भारत की वचनबद्धता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होगी।

रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन

वित्तीय वर्ष 2024–25 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर जाकर अब 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह उपलब्धि न केवल पिछले वित्तीय वर्ष 2023–24 के 1.27 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 18% की सशक्त वृद्धि को दर्शाती है, बल्कि वित्तीय वर्ष 2019–20 के 79,071 करोड़ रुपये के स्तर से लगभग 90% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी को भी रेखांकित करती है। कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की हिस्सेदारी लगभग 77% रही, जबकि इसमें निजी क्षेत्र का योगदान 23% रहा। वित्तीय वर्ष 2023–24 में निजी क्षेत्र की भागीदारी के 21% से बढ़कर 2024–25 में 23% होना, देश के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी लगातार बढ़ती और सुदृढ़ होती भूमिका का स्पष्ट संकेत है। सरकार ने 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जो भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

अब तक का सर्वाधिक रक्षा निर्यात

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का रक्षा निर्यात सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचते हुए 23,622 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह उपलब्धि वित्त वर्ष 2023–24 के 21,083 करोड़ रुपये की तुलना में 2,539 करोड़ रुपये, यानी 12.04% की उल्लेखनीय बढ़त को दर्शाती है। इस वृद्धि में निजी क्षेत्र और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। निजी क्षेत्र का योगदान 15,233 करोड़ रुपये रहा, जबकि डीपीएसयू ने 8,389 करोड़ रुपये का निर्यात किया। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2023–24 में निजी क्षेत्र और डीपीएसयू का योगदान क्रमशः 15,209 करोड़ रुपये तथा 5,874 करोड़ रुपये था, जो डीपीएसयू के निर्यात में तेज उछाल को रेखांकित करता है। सरकार ने 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

रिकॉर्ड रक्षा बजट

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर सशस्त्र बलों के माध्यम से 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय बजट 2025–26 में रक्षा मंत्रालय के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह आवंटन वित्त वर्ष 2024–25 के बजटीय अनुमान से 9.53% अधिक है और कुल केंद्रीय बजट का 13.45% है, जो वास्तव में सभी मंत्रालयों में सर्वाधिक है। कुल रक्षा बजट में से 1.80 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। आधुनिकीकरण बजट का लगभग 75% (1.12 लाख करोड़ रुपये) घरेलू स्रोतों से रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि इस घरेलू हिस्सेदारी का 25% (लगभग 28,000 करोड़ रुपये) घरेलू निजी उद्योगों से खरीद के लिए निर्धारित है।

डीएपी 2020 की समीक्षा

रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2025 को ‘सुधारों का वर्ष’ घोषित किए जाने के उपरांत रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)–2020 की व्यापक समीक्षा शुरू की है, ताकि इसे सरकार की वर्तमान नीतियों एवं कार्यक्रमों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस प्रक्रिया में सभी हितधारकों के साथ गहन और संरचित विचार-विमर्श सुनिश्चित करने के लिए महानिदेशक (अधिग्रहण) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। डीएपी की इस समीक्षा का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए सशस्त्र बलों की परिचालन आवश्यकताओं और आधुनिकीकरण को समयबद्ध ढंग से पूरा करना है। साथ ही, स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित प्रणालियों के माध्यम से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के समावेश को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता हासिल करना भी इसका केंद्रीय लक्ष्य है। यह पहल संयुक्त उद्यमों एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए भारत में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देगी और ‘मेक इन इंडिया’ को नई गति प्रदान करेगी। इसके अंतर्गत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के माध्यम से विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं को आकर्षित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। समग्र रूप से, इस समीक्षा का उद्देश्य भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण तथा रखरखाव, मरम्मत व नवीनीकरण (एमआरओ) केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसके साथ ही स्टार्टअप्स, नवप्रवर्तकों एवं निजी उद्योग पर विशेष फोकस रखते हुए सार्वजनिक तथा निजी दोनों क्षेत्रों में डिजाइन और विकास पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है।

रक्षा खरीद नियमावली 2025

रक्षा मंत्री द्वारा 23 अक्टूबर, 2025 को रक्षा खरीद नियमावली–2025 जारी की गई, जो 1 नवंबर, 2025 से प्रभावी हो गई है। यह नई नियमावली तीनों सेनाओं तथा रक्षा मंत्रालय के अधीन अन्य प्रतिष्ठानों द्वारा लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की राजस्व खरीद को अधिक सुचारू और प्रभावी ढंग से संपन्न करने में सहायक होगी। अद्यतन नियमावली में प्रक्रियाओं का सरलीकरण, कार्यप्रणाली में एकरूपता और निर्णय-निर्माण में गति पर विशेष जोर दिया गया है। इससे सशस्त्र बलों को उनकी परिचालन तत्परता के लिए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

तीसरी एलसीए एमके1ए उत्पादन लाइन और दूसरी एचटीटी-40 उत्पादन लाइन

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 17 अक्टूबर, 2025 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के नासिक स्थित संयंत्र में हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस एमके-1ए की तीसरी उत्पादन लाइन और हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 (एचटीटी-40) की दूसरी उत्पादन लाइन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संयंत्र में निर्मित पहले एलसीए एमके-1ए विमान को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। एचएएल ने रिकॉर्ड दो वर्षों में एलसीए एमके-1ए की तीसरी उत्पादन लाइन को पूर्णतः चालू कर दिया है। इस अत्याधुनिक लाइन में विमान के सभी प्रमुख मॉड्यूल—सेंटर फ्यूजलेज, फ्रंट फ्यूजलेज, रियर फ्यूजलेज, विंग्स और एयर इंटेक—के निर्माण हेतु 30 से अधिक संरचना असेंबली जिग्स स्थापित किए गए हैं। यह उत्पादन लाइन अब पूरी तरह कार्यशील है और प्रति वर्ष आठ विमानों के निर्माण में सक्षम है। इसके उद्घाटन के साथ ही एचएएल की कुल एलसीए उत्पादन क्षमता 24 विमान प्रतिवर्ष तक पहुंच गई है।

इसके अतिरिक्त, एचएएल ने नाशिक में एचटीटी-40 की दूसरी उत्पादन लाइन भी स्थापित की है। इस असेंबली कॉम्प्लेक्स में हवाई जहाज के ढांचे, पंख और नियंत्रण सतहों के निर्माण के लिए समर्पित संरचना असेंबली वर्कशॉप शामिल हैं।

एएमसीए निष्पादन मॉडल

रक्षा मंत्री ने भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने और एक सशक्त घरेलू एयरोस्पेस औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम का निष्पादन मॉडल मंजूर कर दिया है। इस मॉडल के तहत निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों को प्रतिस्पर्धी आधार पर समान अवसर प्रदान किए जाते हैं। कंपनियां स्वतंत्र रूप से, संयुक्त उद्यम के रूप में या संघों के रूप में बोली लगा सकती हैं। बोली लगाने वाली इकाई/बोलीदाता भारतीय कंपनी होनी चाहिए जो देश के कानूनों और विनियमों का पूर्ण पालन करती हो। यह पहल एएमसीए प्रोटोटाइप के विकास में स्वदेशी विशेषज्ञता, क्षमता और तकनीकी सामर्थ्य का उपयोग सुनिश्चित करेगी। इससे भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और यह कार्यक्रम रक्षा उत्पादन एवं नवप्रवर्तन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

प्रमुख डीएसी अनुमोदन

  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए कुल 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने 3 जुलाई, 2025 को स्वदेशी स्रोतों के माध्यम से लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये की पूंजीगत अधिग्रहण परियोजनाओं के लिए आवश्यकता स्वीकृति (एओएन) प्रदान की। इन स्वीकृतियों में बख्तरबंद रिकवरी वाहन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां, तीनों सेनाओं के लिए एकीकृत साझा सूची प्रबंधन प्रणाली तथा सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद शामिल है, जिससे सशस्त्र बलों की गतिशीलता बढ़ेगी, प्रभावी वायु रक्षा सुनिश्चित होगी, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन सुदृढ़ होगा और परिचालन तत्परता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त, लंगर वाली समुद्री सुरंग, बारूदी सुरंग अवरोधक पोत, सुपर रैपिड गन माउंट और पनडुब्बी स्वायत्त पोतों की खरीद के लिए भी एओएन प्रदान की गई है, जिससे नौसैन्य एवं व्यापारिक पोतों पर संभावित जोखिमों को कम करने में सहायता मिलेगी। स्वदेशी डिजाइन व विकास को और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से ये सभी स्वीकृतियां ‘बाय’ (भारतीय–स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित एवं निर्मित) श्रेणी के अंतर्गत प्रदान की गई हैं, जो भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को सशक्त बनाती हैं।
  • रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने 29 दिसंबर, 2025 को सशस्त्र बलों की क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लगभग 79,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें भारतीय सेना के लिए तोपखाना रेजिमेंटों हेतु लोइटर मुनिशन सिस्टम, लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट गोला-बारूद और इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (आईडीडीआईएस) एमकेII शामिल हैं। भारतीय नौसेना के लिए बोलार्ड पुल टग्स, हाई फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (मैनपैक) और हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को पट्टे पर लेने की स्वीकृति दी गई, जबकि भारतीय वायु सेना हेतु ऑटोमैटिक टेकऑफ एंड लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, एस्ट्रा एमकेII मिसाइलें, फुल मिशन सिमुलेटर तथा स्पाइस1000 लॉन्ग रेंज गाइडेंस किट को मंजूरी प्रदान की गई।
  • रक्षा अधिग्रहण परिषद 23 अक्टूबर, 2025 को ने लगभग 79,000 करोड़ रुपये की कुल लागत वाले विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें भारतीय सेना के नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-II, ग्राउंड बेस्ड मोबाइल ईएलआईएनटी सिस्टम व मटेरियल हैंडलिंग क्रेन से लैस हाई मोबिलिटी व्हीकल्स; भारतीय नौसेना के लिए लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स, 30 मिमी नौसैनिक सरफेस गन, एडवांस्ड लाइट वेट टॉरपीडो; इलेक्ट्रो ऑप्टिकल इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम तथा 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट हेतु स्मार्ट गोला-बारूद; और भारतीय वायु सेना के लिए कोलैबोरेटिव लॉन्ग रेंज टारगेट सैचुरेशन/डिस्ट्रक्शन सिस्टम एवं अन्य प्रस्ताव शामिल हैं।
  • परिषद ने 5 अगस्त, 2025 को लगभग 67,000 करोड़ रुपये की कुल लागत वाले विभिन्न पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन स्वीकृतियों में भारतीय सेना के लिए बीएमपी हेतु थर्मल इमेजर-आधारित ड्राइवर नाइट साइट शामिल है, जो युद्धक्षमता और रात में परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा। भारतीय नौसेना के लिए कॉम्पैक्ट ऑटोनॉमस सरफेस क्राफ्ट, ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर तथा बराक-1 प्वाइंट डिफेंस मिसाइल सिस्टम का उन्नयन स्वीकृत किया गया। भारतीय वायु सेना के लिए माउंटेन रडार और सक्षम/स्पाइडर हथियार प्रणाली के उन्नयन को मंजूरी दी गई। इसके अलावा, तीनों सेनाओं के लिए मध्यम ऊंचाई वाले लंबे समय तक उड़ान भरने वाले रिमोटली पायलटेड विमान (एमएएलई आरपीएएस) तथा सी17 और सी130जे बेड़े का रखरखाव स्वीकृत किया गया। साथ ही, एस400 लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के लिए व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध को भी मंजूरी दी गई, जिससे सभी तीनों सेनाओं की परिचालन तत्परता और क्षमता में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
  • रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 20 मार्च, 2025 को ने 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की आठ पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन स्वीकृतियों में भारतीय सेना के टी-90 टैंकों के लिए वर्तमान 1000 एचपी इंजन को 1350 एचपी इंजन में अपग्रेड करना शामिल है, जिससे टैंकों की शक्ति और गतिशीलता बढ़ेगी। भारतीय नौसेना के लिए वरुणस्त्र टॉरपीडो (लड़ाकू) को मंजूरी दी गई, जबकि भारतीय वायु सेना के लिए एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्ल्यूएंडसी) विमान प्रणाली को स्वीकृत किया गया। साथ ही, 'सुधार वर्ष' के तहत पूंजी अधिग्रहण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में समय-सीमा को कम करने के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए गए, जिससे यह प्रक्रिया तेज, अधिक प्रभावी और कुशल बन सके।

प्रमुख अनुबंध/समझौते

एलसीए एमके1ए: रक्षा मंत्रालय ने 25 सितंबर, 2025 को भारतीय वायु सेना के लिए 68 लड़ाकू विमानों और 29 दो सीटों वाले विमानों सहित 97 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) एमके1ए तथा संबंधित उपकरणों की खरीद के उद्देश्य से एचएएल के साथ 62,370 करोड़ रुपये से अधिक (करों को छोड़कर) की लागत पर एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 के दौरान शुरू होगी और छह वर्षों की अवधि में पूरी हो जाएगी। इन विमानों में 64% से अधिक स्वदेशी घटक होंगे, जिनमें जनवरी 2021 में हस्ताक्षरित पिछले एलसीए एमके1ए अनुबंध के अतिरिक्त 67 अतिरिक्त उपकरण शामिल किए गए हैं। उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (एईएसए) रडार, स्वयं रक्षा कवच तथा कंट्रोल सरफेस एक्चुएटर्स जैसी उन्नत स्वदेशी रूप से विकसित प्रणालियों का एकीकरण आत्मनिर्भरता पहलों को और मजबूत करेगा। एचएएल ने 7 नवंबर, 2025 को अमरीका की जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के साथ 97 एलसीए एमके1ए कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु 113 एफ404-जीई-आईएन20 इंजन और सहायक पैकेज की आपूर्ति के लिए एक समझौता किया। इंजनों की डिलीवरी 2027 से 2032 के बीच होगी।

राफेल-एम: अप्रैल 2025 में, भारत और फ्रांस की सरकारों ने भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल विमान (22 सिंगल-सीटर व चार दो-सीटर) की खरीद हेतु एक अंतर-सरकारी समझौते (आईजीऐ) पर हस्ताक्षर किए। इसमें प्रशिक्षण, सिम्युलेटर, संबंधित उपकरण, हथियार और प्रदर्शन-आधारित लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। इसमें भारतीय वायु सेना के मौजूदा राफेल बेड़े के लिए अतिरिक्त उपकरण भी समाहित हैं। आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप, समझौते में भारत में स्वदेशी हथियारों के एकीकरण के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी सम्मिलित है। इसमें भारत में राफेल ढांचे के उत्पादन संयंत्र के साथ-साथ विमान इंजन, सेंसर और हथियारों के रखरखाव, मरम्मत व नवीनीकरण के लिए सुविधाओं की स्थापना का भी समावेशन है। इन विमानों की डिलीवरी 2030 तक पूरी हो जाएगी और चालक दल को फ्रांस व भारत में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

एलसीएच प्रचंड: रक्षा मंत्रालय ने 28 मार्च, 2025 को एचएएल के साथ 156 लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड की आपूर्ति, प्रशिक्षण और अन्य संबंधित उपकरणों के लिए 62,700 करोड़ रुपये (करों को छोड़कर) के दो अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। पहला अनुबंध भारतीय वायु सेना को 66 एलसीएच की आपूर्ति के लिए और दूसरा भारतीय सेना को 90 एलसीएच की आपूर्ति हेतु है। इन हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति तीसरे वर्ष से शुरू होगी और अगले पांच वर्षों में पूरी की जाएगी। ये अनुबंध उच्च ऊंचाई पर सशस्त्र बलों की युद्ध क्षमता को बढ़ाएंगे। इस हेलीकॉप्टर में बड़ी संख्या में ऐसे पुर्जे हैं, जिन्हें भारत में डिजाइन व निर्मित किया गया है और इस खरीद प्रक्रिया के दौरान 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री प्राप्त करने की योजना है। रक्षा मंत्रालय ने 28 मार्च, 2025 को एचएएल के साथ 156 लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड की आपूर्ति, प्रशिक्षण और अन्य संबंधित उपकरणों के लिए 62,700 करोड़ रुपये (करों को छोड़कर) के दो अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। पहला अनुबंध भारतीय वायु सेना को 66 एलसीएच की आपूर्ति और दूसरा भारतीय सेना को 90 एलसीएच सौंपे जाने के लिए है। इन हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति तीसरे वर्ष से शुरू होगी और अगले पांच साल में पूरी की जाएगी। ये अनुबंध उच्च ऊंचाई पर सशस्त्र बलों की युद्ध क्षमता को बढ़ाएंगे। इस हेलीकॉप्टर में बड़ी संख्या में ऐसे पुर्जे हैं, जिन्हें भारत में डिजाइन व निर्मित किया गया है और इस खरीद प्रक्रिया के दौरान 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री प्राप्त करने की योजना है।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड: इन अनुबंधों पर शक्ति सॉफ्टवेयर के उन्नयन; भारतीय नौसेना हेतु नई पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों और कैडेट प्रशिक्षण जहाजों के ईओएन-51 (इलेक्ट्रो ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम); भारतीय तटरक्षक बल के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो; तथा भारतीय सेना के वायु रक्षा फायर कंट्रोल रडार खरीदने के उद्देश्य से हस्ताक्षर किए गए थे।

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड: भारतीय नौसेना के लिए मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।

बख्तरबंद वाहन निगम लिमिटेड: भारतीय सेना के लिए टैंक-72 ब्रिज लेइंग टैंक और नाग मिसाइल सिस्टम (एनएएमआईएस) के ट्रैक संस्करण हेतु अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।

इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव लिमिटेड: भारतीय सेना के पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए एरिया डेनियल मुनिशन (एडीएम) टाइप-1 (डीपीआईसीएम) हेतु एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।

मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड: भारतीय सेना के पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए हाई एक्सप्लोसिव प्री फ्रैगमेंटेड (एचईपीएफ) एमके-1 (एनहैंस्ड) रॉकेटों की खरीद हेतु एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।

निजी क्षेत्र:इन अनुबंधों के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण स्वदेशी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग परियोजनाएँ शामिल हैं। इनमें भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ 155 मिमी/52 कैलिबर एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) की खरीद; तीनों सेनाओं के लिए एसीई लिमिटेड और जेसीबी इंडिया लिमिटेड के साथ रफ टेरेन फोर्कलिफ्ट ट्रक; फोर्स मोटर्स लिमिटेड और महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के साथ सशस्त्र बलों हेतु 5,000 हल्के वाहनों की आपूर्ति शामिल है। इसके अतिरिक्त, सैफ्रान के साथ हैमर स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड एयरटूग्राउंड हथियार के उत्पादन व दो उच्चसटीक, युद्धसिद्ध प्रणालियों—सिग्मा30एन डिजिटल रिंग लेजर जाइरो इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (जिसका उपयोग तोपखाने, वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों तथा रडार में किया जाता है) और सीएम3एमआर डायरेक्ट फायरिंग साइट (जो तोपखाने और एंटीड्रोन प्रणालियों के लिए डिज़ाइन की गई है)—के स्थानीय निर्माण हेतु संयुक्त उद्यम सहयोग समझौता किया गया है। साथ ही, भारत फोर्ज लिमिटेड और पीएलआर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ सीक्यूबी कार्बाइन, तथा इटली की वास सबमरीन सिस्टम्स एस.आर.एल. के साथ 48 भारी वजन वाले टॉरपीडो की खरीद व एकीकरण भी इन अनुबंधों का हिस्सा हैं, जो सशस्त्र बलों की मारक क्षमता एवं स्वदेशीकरण को और सुदृढ़ करेंगे।

ब्रह्मोस एकीकरण एवं परीक्षण सुविधा केंद्र

रक्षा मंत्री ने 11 मई, 2025 को लखनऊ में ब्रह्मोस एकीकरण एवं परीक्षण सुविधा केंद्र का आभासी उद्घाटन किया, जो उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे का एक महत्वपूर्ण घटक है। उद्घाटन के पांच महीने के भीतर ही, इस सुविधा केंद्र में निर्मित मिसाइलों के पहले बैच को रवाना कर दिया गया। ब्रह्मोस सुविधा केंद्र में असेंबली, एकीकरण और परीक्षण की पूरी प्रक्रिया उच्चतम तकनीकी मानकों के अनुरूप की जाती है। अपनी पहली मिसाइल खेप के प्रेषण के साथ, उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' पहल में एक प्रमुख भागीदार के रूप में उभरा है। लखनऊ इकाई इस गलियारे में पहली ऐसी इकाई है, जो संपूर्ण विनिर्माण एवं परीक्षण प्रक्रिया का प्रबंधन स्वदेशी रूप से करती है, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता और औद्योगिक विकास दोनों को मजबूती मिलती है।

डीपीएसयू भवन

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 10 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के नौरोजी नगर स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (डीपीएसयू) भवन का उद्घाटन किया। रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा विकसित यह भवन सभी 16 डीपीएसयू के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करता है, जहां 'संगच्छध्वं संवदध्वं' (एक साथ आगे बढ़ें, एक साथ संवाद करें) के आदर्श वाक्य के तहत सहयोग, नवाचार व तालमेल को बढ़ावा दिया जाता है। आधुनिक सम्मेलन कक्षों, सिमुलेशन सुविधाओं और एक प्रदर्शनी क्षेत्र से सुसज्जित यह भवन डीपीएसयू की शक्तियों को मजबूत करने तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के समक्ष भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करने में सहायक होगा। उद्घाटन के बाद, चार डीपीएसयू - मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड, इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड - को मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा प्राप्त होने पर सम्मानित किया गया।

एयरो इंडिया 2025

एशिया के सबसे बड़े एयरो शो - एयरो इंडिया 2025 - का 15वां संस्करण 10 से 14 फरवरी, 2025 तक कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित येलाहांका वायुसेना स्टेशन में आयोजित किया गया। इस संस्करण की थीम 'अरबों अवसरों का मार्ग' थी। इसने विदेशी एवं भारतीय कंपनियों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने और स्वदेशीकरण प्रक्रिया को गति देने के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखला में नए रास्ते तलाशने हेतु एक मंच प्रदान किया। पांच दिवसीय इस आयोजन में वैश्विक ओईएम, रक्षा नवप्रवर्तक, स्टार्ट-अप, एमएसएमई, सशस्त्र बलों के प्रतिनिधि व नीति निर्माता एक साथ आए, जिससे एयरोस्पेस एवं रक्षा उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई। रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन, सीईओ गोलमेज सम्मेलन, इंडिया पवेलियन, आईडेक्स पवेलियन, मंथन, समर्थ्या, द्विपक्षीय बैठकें और सेमिनार भारत के एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र में रक्षा सहयोग तथा निवेश को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किए गए थे।

रक्षा कूटनीति

एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 26 जून, 2025 को चीन के किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए सदस्य देशों से सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आतंकवाद के खतरे को समाप्त करने हेतु एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित हैं, जिनका मूल कारण बढ़ती कट्टरता, उग्रवाद एवं आतंकवाद है। श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि शांति एवं समृद्धि आतंकवाद और गैर-राज्य अभिकर्ताओं तथा आतंकवादी समूहों के हाथों में सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के साथ कायम नहीं रह सकती। ऐसे खतरों से निपटने के लिए निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है। रक्षा मंत्री ने कहा कि जो लोग अपने संकीर्ण व स्वार्थी उद्देश्यों के लिए आतंकवाद का समर्थन, पोषण और उपयोग करते हैं, उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ देश सीमा पार आतंकवाद को नीति का साधन मानते हैं व आतंकवादियों को शरण देते हैं और ऐसे दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। एससीओ को ऐसे देशों की आलोचना करने में संकोच नहीं करना चाहिए। श्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत की शून्य सहिष्णुता नीति आतंकवाद के प्रति ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शित हुई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी निंदनीय कृत्यों के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों एवं प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना और उन्हें न्याय के कटघरे में लाना अनिवार्य है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद का हर कृत्य आपराधिक एवं अनुचित है, चाहे उसकी प्रेरणा कुछ भी हो, कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा भी किया गया हो। उन्होंने कहा कि एससीओ के सदस्यों को इस बुराई की स्पष्ट निंदा करनी चाहिए। श्री सिंह ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से लड़ने के भारत के अडिग संकल्प की पुष्टि की।

भारत-चीन: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 26 जून, 2025 को चीन के किंगदाओ में आयोजित दक्षिण एशियाई रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डोंग जून के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर गहन चर्चा की। श्री राजनाथ सिंह ने द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और स्थायी सहयोग तथा तनाव कम करने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना के माध्यम से जटिल मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सीमा प्रबंधन और सीमांकन के मुद्दे पर स्थापित तंत्र को पुनर्जीवित करने और इसके स्थायी समाधान को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। रक्षा मंत्री ने एशिया और विश्व में स्थिरता सुनिश्चित करने, सर्वोत्तम पारस्परिक लाभ प्राप्त करने तथा अच्छे पड़ोसी संबंध बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि 2020 के सीमा गतिरोध के बाद पैदा हुए विश्वास के अभाव को जमीनी स्तर पर कार्रवाई करके दूर करना आवश्यक है। दोनों मंत्रियों ने सैनिकों की वापसी, तनाव कम करने, सीमा प्रबंधन और सीमांकन से संबंधित मुद्दों पर प्रगति हासिल करने के लिए मौजूदा तंत्रों के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर परामर्श जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

एडीएमएम-प्लस: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 1 नवंबर, 2025 को मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस में भाग लिया। उन्होंने मंच को संबोधित करते हुए कहा कि कानून के शासन, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन पर भारत का जोर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन तथा हवाई उड़ान की स्वतंत्रता के लिए भारत की वकालत किसी एक देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सभी क्षेत्रीय हितधारकों के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए है। श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि आसियान के साथ भारत की रणनीतिक भागीदारी लेन-देन पर आधारित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक व सिद्धांत-आधारित है, जो इस साझा विश्वास पर टिकती है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र खुला, समावेशी और किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त रहना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कुआलालंपुर में आयोजित दूसरी भारत-आसियान रक्षा मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में भी आसियान के रक्षा मंत्रियों से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान, मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की तथा क्षेत्रीय स्तर पर नई दिल्ली के साथ रक्षा सहयोग को और गहरा करने की इच्छा व्यक्त की।

भारत-अमरीका: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 31 अक्टूबर, 2025 को कुआलालंपुर में आयोजित 12वें रक्षा मंत्रालय-प्लस सम्मेलन के दौरान अमरीकी युद्ध मंत्री श्री पीट हेगसेथ से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में जारी प्रगति की सराहना की तथा इसके सभी स्तंभों पर पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने मौजूदा रक्षा मुद्दों एवं चुनौतियों की समीक्षा की और रक्षा उद्योग तथा प्रौद्योगिकी सहयोग पर विचार-विमर्श किया। पीट हेगसेथ ने दोहराया कि भारत, अमरीका के लिए प्राथमिकता वाला देश है और वे एक स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों नेताओं ने ‘अमरीका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी के ढांचे’ पर हस्ताक्षर किए, जो पहले से ही मजबूत रक्षा सहयोग में एक नए युग की शुरुआत करेगा। यह ढांचा अगले दस वर्षों में साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने का नया अध्याय शुरू करता है तथा रक्षा सहयोग को गहरा करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण एवं नीतिगत दिशा प्रदान करता है। रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ढांचा भारत-अमरीका रक्षा संबंधों के संपूर्ण क्षेत्र को नीति निर्देश देगा। उन्होंने कहा, “यह हमारे बढ़ते रणनीतिक अभिसरण का संकेत है और साझेदारी के एक नए दशक की शुरुआत करेगा। रक्षा हमारे द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ बना रहेगा। एक स्वतंत्र, खुले और नियमों से बंधे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने में हमारी साझेदारी महत्वपूर्ण है।”

भारत-रूस: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री श्री आंद्रेई बेलोसोव ने 4 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली में भारत-रूस अंतर-सरकारी सैन्य एवं तकनीकी सहयोग आयोग (आईआरआईजीसी-एम एंड एमटीसी) के 22वें सत्र की सह-अध्यक्षता की। दोनों पक्षों ने दोहराया कि द्विपक्षीय संबंध गहरे विश्वास, साझा सिद्धांतों और आपसी सम्मान पर आधारित हैं। श्री राजनाथ सिंह ने 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता निर्माण के लिए भारत सरकार के दृढ़ संकल्प को व्यक्त किया, ताकि स्थानीय उत्पादन और निर्यात दोनों को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर भी जोर दिया। रूसी रक्षा मंत्री ने आपसी विश्वास पर आधारित दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि दोनों देश कई वर्षों की मित्रता और रणनीतिक सहयोग से जुड़े हुए हैं। रूसी रक्षा मंत्री ने कहा कि रूसी रक्षा उद्योग रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग देने के लिए तत्पर है। अंत में, दोनों रक्षा मंत्रियों ने 22वीं आईआरआईजीसी-एम एंड एमटीसी बैठक के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, जिसमें चल रहे और भावी सहयोग क्षेत्रों पर प्रकाश डाला गया। रक्षा मंत्री और उनके रूसी समकक्ष की मुलाकात इससे पहले 27 जून, 2025 को किंगदाओ में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई थी। एस-400 प्रणालियों की आपूर्ति, एसयू-30 एमकेआई के उन्नयन और महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों की त्वरित खरीद बैठक के कुछ प्रमुख निष्कर्ष थे।

भारत-जापान: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 5 मई, 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में जापान के रक्षा मंत्री श्री जेन नाकातानी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की और इस संबंध में वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों मंत्रियों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के रक्षा एवं सुरक्षा स्तंभों की समीक्षा की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय शांति में योगदान देने के प्रति अपनी वचनबद्धता की पुष्टि की।

भारत-ऑस्ट्रेलिया: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 9 अक्टूबर, 2025 को कैनबरा में ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री श्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ व्यापक वार्ता की। यह बैठक भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में संयुक्त अनुसंधान सहित विभिन्न क्षेत्रों में रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। वार्ता के परिणामस्वरूप तीन महत्वपूर्ण समझौतों—सूचना साझाकरण समझौता, पनडुब्बी खोज एवं बचाव सहयोग पर समझौता ज्ञापन तथा संयुक्त स्टाफ वार्ता की स्थापना हेतु संदर्भ शर्तों—पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के दौरान श्री राजनाथ सिंह ने भारत के स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद व वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते, आतंकवाद एवं व्यापार एक साथ नहीं हो सकते तथा पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सभी रूपों के विरुद्ध एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करने का आह्वान किया।

भारत-मालदीव: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 8 जनवरी, 2025 को नई दिल्ली में मालदीव के रक्षा मंत्री श्री मोहम्मद गस्सान मौमून के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और द्विपक्षीय रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं की व्यापक समीक्षा की। वार्ता के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत-मालदीव व्यापक आर्थिक एवं समुद्री सुरक्षा साझेदारी के संयुक्त दृष्टिकोण को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया।

भारत-इंडोनेशिया: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री श्री शफरी शम्सोएद्दीन ने 27 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली में आयोजित तीसरे भारत–इंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों के संवाद की सह-अध्यक्षता की। इस संवाद के दौरान दोनों देशों ने अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की पुनः पुष्टि करते हुए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और अधिक गहरा करने पर सहमति जताई। बैठक के प्रमुख परिणामों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व सुरक्षा पर साझा रणनीतिक दृष्टिकोण, रक्षा सहयोग एवं रक्षा उद्योग साझेदारी, सैन्य-से-सैन्य गतिविधियों का विस्तार, समुद्री सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग, रक्षा प्रौद्योगिकी, पनडुब्बी क्षमताओं तथा चिकित्सा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों एवं मानवीय प्रयासों के लिए सहयोग शामिल रहे।

भारत-मोरक्को: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और उनके मोरक्को समकक्ष श्री अब्देलतीफ लौदियी ने 22 सितंबर, 2025 को रबात में द्विपक्षीय बैठक की, जहां दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता बढ़ती साझेदारी के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा प्रदान करता है और रक्षा उद्योग, संयुक्त अभ्यास, सैन्य प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण में सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। रक्षा मंत्री ने रबात स्थित भारतीय दूतावास में एक नए रक्षा विंग के उद्घाटन की भी घोषणा की।

भारत-नीदरलैंड्स: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 18 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के रक्षा मंत्री श्री रुबेन ब्रेकेलमैन्स से मुलाकात की। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, सूचना आदान-प्रदान, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और नई एवं उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा की। दोनों रक्षा मंत्रियों ने जहाज निर्माण, उपकरण व अंतरिक्ष क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया और दोनों देशों के कौशल, प्रौद्योगिकी तथा पैमाने में मौजूद पूरकता को अधिकतम करने पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसऔर संबंधित प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने के साथ-साथ संबंधित रक्षा प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थानों तथा संगठनों को जोड़ने पर भी चर्चा की।

भारत-ब्राजील: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 15 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में ब्राजील के उपराष्ट्रपति श्री गेराल्डो अल्कमिन और रक्षा मंत्री श्री जोस म्यूसियो मोंटेइरो फिल्हो के साथ बैठक की। दोनों नेताओं ने रक्षा संबंधी चल रही गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की और संयुक्त कार्य के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की, जिसमें रक्षा उपकरणों के सह-विकास व सह-उत्पादन के अवसरों की खोज भी शामिल है।

भारत-अफ्रीका: रक्षा राज्य मंत्री ने 13 अप्रैल, 2025 को तंजानिया के दार एस सलाम का दौरा किया और तंजानिया की रक्षा एवं राष्ट्रीय सेवा मंत्री डॉ. स्टेरगोमेना लॉरेंस टैक्स के साथ आईएनएस चेन्नई पर सवार होकर भारतीय नौसेना की पहली पहल, अफ्रीका-भारत प्रमुख समुद्री सहभागिता अभ्यास (एआईकेईएमई) के बंदरगाह चरण का उद्घाटन किया। भारत और तंजानिया द्वारा सह-आयोजित एआईकेईएमई में कोमोरोस, जिबूती, केन्या, मेडागास्कर, मॉरीशस, मोज़ाम्बिक, सेशेल्स तथा दक्षिण अफ्रीका ने भाग लिया। यह अभ्यास भाग लेने वाले देशों की एक स्वतंत्र, खुले एवं सुरक्षित हिंद महासागर के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रक्षा राज्य मंत्री ने अरुशा में स्थापित हथियार प्रशिक्षण सिम्युलेटर सुविधा के डिजिटल उद्घाटन और रक्षा एक्सपो के उद्घाटन में भी भाग लिया। रक्षा एक्सपो में भारत की 22 कंपनियों ने अपने प्रमुख उत्पादों का प्रदर्शन किया।

भारत-संयुक्त अरब अमीरात: रक्षा राज्य मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 17 नवंबर, 2025 को दुबई में अपने यूएई समकक्ष श्री मोहम्मद मुबारक अल मजरूई के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने संस्थागत तंत्रों को सुदृढ़ करने, रक्षा प्रदर्शनियों में भागीदारी और प्रशिक्षण सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद के महत्व पर बल दिया तथा संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास व सह-उत्पादन की संभावनाओं को सक्रिय रूप से तलाशने का आग्रह किया। रक्षा राज्य मंत्री दुबई एयर शो में भाग लेने के उद्देश्य से दुबई में थे, जहां उन्होंने इंडिया पवेलियन का उद्घाटन किया। इस पवेलियन में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), डीआरडीओ, कोरेल टेक्नोलॉजीज, दंताल हाइड्रोलिक्स, इमेज सिनर्जी एक्सप्लोरर, एसएफओ टेक्नोलॉजीज सहित कई रक्षा स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों ने अपने उत्पादों एवं क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इसी दौरान, दुबई एयर शो में हवाई प्रदर्शन के समय एक तेजस लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी, जिसमें विंग कमांडर नमांश स्याल ने अपने प्राणों की आहुति दी।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया, क्योंकि वे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए। 15 जुलाई, 2025 को, उन्होंने अपने ऐतिहासिक 18 दिवसीय मिशन की सफल समाप्ति के बाद पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी की। यह मिशन 25 जून, 2025 को शुरू हुआ था। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने प्रवास के दौरान, ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने एक्सिओम-4 क्रू और एक्सपेडिशन 73 के साथी सदस्यों के साथ मिलकर काम किया, जो अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग में भारत के बढ़ते नेतृत्व का प्रतीक है। उन्होंने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में मांसपेशियों के पुनर्जनन, शैवाल और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि, फसलों की जीवन क्षमता, सूक्ष्मजीवों की उत्तरजीविता, अंतरिक्ष में संज्ञानात्मक प्रदर्शन और सायनोबैक्टीरिया के व्यवहार जैसे विषयों पर अग्रणी प्रयोग किए। ये अध्ययन मानव अंतरिक्ष उड़ान एवं सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण विज्ञान की वैश्विक समझ को गहरा करेंगे और भारत के भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। इस सफल मिशन ने अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की वैश्विक स्थिति को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया है। यह भारत की अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान महत्वाकांक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन शामिल हैं।

राष्ट्रपति - राफेल उड़ान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 29 अक्टूबर, 2025 को हरियाणा के अंबाला स्थित वायुसेना स्टेशन पर राफेल विमान में उड़ान भरी और भारतीय वायु सेना के दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बन गईं। इससे पहले, उन्होंने 2023 में सुखोई 30 एमकेआई में उड़ान भरी थी। सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति ने लगभग 30 मिनट तक उड़ान भरी और लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद वायुसेना स्टेशन लौट आईं। विमान को 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी ने उड़ाया। विमान समुद्र तल से लगभग 15000 फीट की ऊंचाई पर लगभग 700 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ा।

राष्ट्रपति - गोताखोरी अभियान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 28 दिसंबर, 2025 को पश्चिमी तट पर पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर में एक समुद्री यात्रा की। दो घंटे से अधिक की इस यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति को भारत की समुद्री रणनीति में पनडुब्बी शाखा की भूमिका और राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में इसकी परिचालन क्षमताओं व योगदान के बारे में जानकारी दी गई। राष्ट्रपति ने परिचालन प्रदर्शन देखे और चालक दल से बातचीत की, उनके समर्पण, प्रतिबद्धता एवं निस्वार्थ सेवा की भावना की सराहना की। उन्होंने स्वदेशी पनडुब्बी को भारतीय नौसेना की व्यावसायिक उत्कृष्टता, युद्ध तत्परता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बाद पनडुब्बी में उड़ान भरने वाली दूसरी राष्ट्रपति हैं। इससे पहले, नवंबर 2024 में राष्ट्रपति ने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर भारतीय नौसेना द्वारा किए गए एक परिचालन प्रदर्शन को देखा था।

मिग-21 को सेवामुक्त करना

भारतीय वायु सेना के दिग्गज लड़ाकू विमान मिग-21 को छह दशकों से अधिक की शानदार सेवा के बाद 26 सितंबर, 2025 को चंडीगढ़ में सेवामुक्त कर दिया गया। इस समारोह में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह उपस्थित थे। गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में छह मिग-21 विमानों को औपचारिक रूप से सेवामुक्त करने के साथ ही इस विमान की परिचालन सेवा का समापन हुआ।

ऑपरेशन सागर बंधु

भारतीय सशस्त्र हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में भारत के एक प्रमुख सुरक्षा साझेदार के रूप में उभरने के ठोस प्रमाण स्वरूप, बल सागर बंधु अभियान के तहत चक्रवात दितवाह से प्रभावित श्रीलंका के क्षेत्रों में व्यापक मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) कार्य संचालित कर रहे हैं। कोलंबो में तैनात भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि ने अल्प सूचना पर राहत सामग्री पहुंचाकर त्वरित सहायता प्रदान की, जबकि जहाजों पर तैनात हेलीकॉप्टरों ने श्रीलंकाई नौसेना के समन्वय से हवाई निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों में सहयोग करते हुए नागरिकों को सुरक्षित निकाला। भारतीय वायु सेना के संसाधन अनुरोध मिलने के एक घंटे के भीतर रवाना होने के लिए तैयार थे और 9 दिसंबर, 2025 तक 424 भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस लाया जा चुका है। अब तक 335 टन राहत एवं बचाव सामग्री, दवाएं, भीष्म कैप्सूल, पैरा फील्ड अस्पताल और बेली ब्रिज प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाए गए हैं। एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा 264 फंसे हुए लोगों—जिनमें विभिन्न राष्ट्रीयताओं के नागरिक, गंभीर रूप से घायल मरीज, गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु शामिल थे—को सुरक्षित निकाला गया, जबकि राहत प्रयासों के समर्थन में श्रीलंकाई सेना के 57 सैनिकों को भी हवाई मार्ग से भेजा गया। भारतीय वायु सेना ने 10 भारी परिवहन विमानों के माध्यम से 80 चिकित्सा एवं पैरामेडिकल कर्मियों के साथ एक पूर्ण फील्ड अस्पताल, 48 कर्मियों की आर्मी इंजीनियर टास्क फोर्स, 4 बेली ब्रिज और एनडीआरएफ के 80 विशेषज्ञ तैनात किए। फील्ड अस्पताल में अब तक 2,200 से अधिक मरीजों का उपचार किया जा चुका है और इंजीनियर टास्क फोर्स ने बाधित सड़क संपर्क बहाल करने के लिए बेली ब्रिज का निर्माण प्रारंभ कर दिया है, जबकि किसी भी आकस्मिक आवश्यकता के लिए एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर कोलंबो में स्टैंडबाय पर तैनात है। प्रारंभिक सहायता के बाद भारतीय नौसेना ने राहत एवं बचाव प्रयासों को और सुदृढ़ करने के लिए पांच अतिरिक्त युद्धपोत—एक अपतटीय गश्ती पोत, तीन लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटीज और एक लैंडिंग शिप टैंक—तैनात किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप अब तक भारतीय नौसेना के सात जहाज प्रभावित क्षेत्रों में 1,044 टन राहत सामग्री पहुंचा चुके हैं।

सैन्य कार्य विभाग

ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के अटूट संकल्प का एक सशक्त प्रमाण है - यह निर्णायक नेतृत्व, संयुक्त अभियानीय तालमेल और पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों द्वारा की जा रही क्रूर हत्याओं से अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के राष्ट्र के दृढ़ संकल्प का एक साहसिक प्रदर्शन है। भारतीय सशस्त्र बलों ने सटीकता और व्यावसायिकता के साथ पाकिस्तान के आतंकी ढांचे के केंद्र में भेदते हुए एक सुनियोजित व निर्णायक प्रहार किया। इस ऑपरेशन ने अद्वितीय बहु-क्षेत्रीय क्षमता का प्रदर्शन किया और इसे थल, जल तथा वायु के पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ साइबर, अंतरिक्ष एवं सूचना युद्ध के उभरते क्षेत्रों में एक साथ अंजाम दिया गया।

रणनीतिक दूरदर्शिता और सैन्य बलों के संयम के साथ, ऑपरेशन सिंदूर ने क्षमता विकास पर भारत के निरंतर ध्यान को उजागर किया, जिसमें खुफिया प्रभुत्व से लेकर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी व संयुक्त परिचालन तत्परता तक शामिल हैं। यह ऑपरेशन सरकार के सभी अंगों के निर्बाध समन्वय के माध्यम से राष्ट्र की इच्छाशक्ति के क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण था। युद्ध में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और हथियार प्रणालियों की सफलता 'आत्मनिर्भरता' की सफलता का प्रमाण थी।

इस ऑपरेशन ने दुनिया को एक स्पष्ट संदेश दिया: भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा, और जो भी इसका समर्थन करेंगे, उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह ऑपरेशन भारत के सैन्य इतिहास में एक निर्णायक क्षण और सैन्य सटीकता व राष्ट्रीय संकल्प के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा।

भारतीय सेना

उत्तरी मोर्चे पर स्थिति

  • उत्तरी सीमाओं पर स्थिति स्थिर लेकिन संवेदनशील बनी हुई है। साल 2024 में देपसांग तथा डेमचोक में हुए समझौते के बाद, 2025 में उत्तरी सीमाओं के सामने और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में पीएलए की तैनाती में कमी देखी गई। पीएलए ने उत्तरी सीमाओं के सामने और प्रशिक्षण क्षेत्रों में सामरिक/परिचालनात्मक गहराई में 10 संयुक्त शस्त्र ब्रिगेड के आकार की सेनाएं तैनात रखीं। बीएमपी (संयुक्त सशस्त्र बल) का समग्र स्वरूप 2024 से अपरिवर्तित रहा। एलएसी के साथ सभी क्षेत्रों में भारतीय सेना की तैनाती मजबूत, सुव्यवस्थित और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
  • नई पीढ़ी के उपकरणों की तैनाती और उत्तरी सीमाओं पर रुद्र ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी तथा भैरव बटालियन जैसी नई बल गुणक इकाइयों की तैनाती से हमारी रक्षा तैयारियों को मजबूत किया गया है। उत्तरी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे, संपर्क और आवास व्यवस्था में भी सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
  • भारत व चीन के बीच राजनीतिक, राजनयिक एवं सैन्य स्तर पर द्विपक्षीय बातचीत से उत्तरी सीमाओं पर सकारात्मक विकास हुआ और स्थिरता आई है। हमारी सैन्य कार्रवाई सुनियोजित है और हमारा दृष्टिकोण 'पारस्परिक और समान' सुरक्षा के सिद्धांत का पालन करते हुए शांति एवं स्थिरता प्राप्त करने के उद्देश्य से पीएलए की गतिविधियों का जवाब देना है।
  • वर्ष के दौरान, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर आपसी चिंताओं को दूर करने के लिए संचार के विभिन्न माध्यमों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया। इस वर्ष मार्च और जुलाई 2025 में क्रमशः परामर्श व समन्वय कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 33वीं तथा 34वीं बैठकों के साथ संबंधों में नए सिरे से जुड़ाव देखने को मिला, जिसके बाद 19 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की 24वीं वार्ता हुई। अगस्त 2025 में तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए माननीय प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक विकास को और मजबूती मिली। 25-26 अक्टूबर 2025 को पश्चिमी क्षेत्र (पूर्वी लद्दाख) में आयोजित 23वीं कोर कमांडर स्तरीय बैठक (सर्वोत्तम सैन्य कमांडर स्तर की बैठक) के दौरान भी संबंधों की रचनात्मक चर्चा परिलक्षित हुई। जमीनी स्तर पर, चिंताओं के मुद्दों को हल करने के लिए सभी क्षेत्रों में पीएलए के साथ सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण वातावरण में सीमा कर्मियों की बैठकें जारी रहीं।
  • भारतीय सेना के अथक प्रयासों के कारण जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जनता ने विकास का मार्ग चुना है और सरकार एवं भारतीय सेना द्वारा संचालित सभी पहलों में बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से भाग ले रही है। 'समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण' के परिणामस्वरूप हिंसा का स्तर कम हुआ है, विरोध प्रदर्शन सीमित हुए हैं और पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं हुई है। 10 और 12 मई 2025 को हुई डीजीएमओ वार्ता के बाद स्थिति स्थिर बनी हुई है, हालांकि इसमें अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, एलसी और आईबी सेक्टर के माध्यम से गुप्त रूप से आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के पाकिस्तानी प्रयासों में वृद्धि हुई है।
  • वर्ष 2023-24 के दौरान पाकिस्तान द्वारा पुंछ–राजौरी क्षेत्र को परोक्ष युद्ध के केंद्र के रूप में सक्रिय करने के प्रयासों को ध्यान में रखते हुए, 2025 के लिए अपने उद्देश्य स्पष्ट रूप से परिभाषित किए गए। इनमें एक मजबूत व प्रभावी घुसपैठ-रोधी ग्रिड को बनाए रखना; मध्य एवं उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवादियों को खदेड़ने और निष्क्रिय करने के लिए लगातार, लक्षित अभियानों का संचालन; तथा विकास और सामान्य स्थिति को प्रोत्साहित करने वाला अनुकूल वातावरण तैयार कर स्थानीय स्तर पर आतंकवादियों की भर्ती को हतोत्साहित करना प्रमुख लक्ष्य रहे।
  • साल 2019 से भीतरी इलाकों में सुरक्षा स्थिति में निरंतर और ठोस सुधार देखने को मिला है। इसके बावजूद, प्रशिक्षण शिविरों की सक्रियता, प्रक्षेपण अड्डों पर आतंकवादियों की निरंतर मौजूदगी और घुसपैठ के लगातार प्रयास पाकिस्तान की परोक्ष युद्ध रणनीति को आगे बढ़ाने की मंशा को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। पाकिस्तान घुसपैठ संभावित क्षेत्रों का दुरुपयोग करते हुए न केवल ड्रोन के माध्यम से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के प्रयास करता है, बल्कि बड़ी संख्या में आतंकवादियों की घुसपैठ की साजिशें भी रचता रहा है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थिति

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति स्थिर बनी हुई है और पिछले एक वर्ष में इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है। भारतीय सेना, असम राइफल्स व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के निरंतर प्रयासों, जैसे कि उग्रवाद-विरोधी (सीआई)/आतंकवाद-विरोधी (सीटी) अभियानों, संवेदनशील क्षेत्रों पर नियंत्रण तथा सरकार के समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से हिंसा में कमी आई है और उग्रवादी गतिविधियों के लिए उपलब्ध शेष स्थान भी कम हो गया है। सरकार की समवर्ती गतिशील पहलों के साथ-साथ कनेक्टिविटी, सीमावर्ती अवसंरचना और सामाजिक-आर्थिक विकास पर जोर देने से इस क्षेत्र में बहुक्षेत्रीय विकास के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण हुआ है।
  • सेना और असम राइफल्स ने लक्षित नियंत्रण/संयम अभियानों के माध्यम से हिंसा के स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जनवरी 2025 से अब तक 26 उग्रवादियों को मार गिराया गया है और 1024 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 111 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है तथा 542 हथियार बरामद किए गए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए निरंतर नियंत्रण/संयम अभियानों ने धीरे-धीरे उग्रवादी समूहों को सक्रिय होने का अवसर देने से इनकार कर दिया है।
  • मणिपुर में आंतरिक सुरक्षा स्थिति में 2025 में सुधार हुआ है। 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, जिससे विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और राज्य में हिंसा को समाप्त करने की दिशा में केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने में मदद मिली है। सुरक्षा बलों का प्रयास लूटे गए हथियारों की बरामदगी, राष्ट्रीय राजमार्गों को खोलने और स्थानीय समुदायों में विश्वास बहाल करने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों को लागू करने पर केंद्रित है। जुलाई 2025 में इम्फाल में डूरंड कप का शांतिपूर्ण आयोजन, 20-24 मई 2025 के बीच उखरुल में शिरुई लिली महोत्सव, 4 सितंबर 2025 को कुकी विद्रोही समूहों के साथ सैन्य अभियान के निलंबन का नवीनीकरण और 13 सितंबर 2025 को माननीय प्रधानमंत्री की यात्रा, ये सभी इस वर्ष शांति एवं स्थिरता के मजबूत संकेत हैं। जिरीबाम-इम्फाल रेलवे लाइन पर प्रगति स्थिर है और मणिपुर के विकास में एक अन्य मील का पत्थर साबित होने की ओर अग्रसर है।

भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा

भारत-म्यांमा सीमा (आईएमबी) म्यांमा सेना और प्रतिरोध बलों के बीच लगातार झड़पों के कारण संवेदनशील बनी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप म्यांमा के 44,298 नागरिक सीमा पर आ गए हैं। भारतीय सुरक्षा बलों ने यह सुनिश्चित किया है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र म्यांमा से उत्पन्न अस्थिरता से सुरक्षित रहे। यह उन्नत निगरानी, ​​मजबूत खुफिया नेटवर्क और सक्रिय सीमा नियंत्रण के माध्यम से हासिल किया गया है। म्यांमा सेना तथा स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संपर्क ने आईएमबी पर स्थिरता बनाए रखने में और योगदान दिया है।

ड्रोन विरोधी अभियान

इस वर्ष ड्रोन घुसपैठ की कुल 791 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नौ तथा पंजाब और राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 782 घटनाएं शामिल हैं। पश्चिमी मोर्चे पर स्पूफर तथा जैमर के प्रभावी उपयोग के कारण ड्रोन से उत्पन्न खतरे को काफी हद तक नियंत्रित और निष्क्रिय किया जा सका। इस अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में हमारी सेनाओं ने कुल 237 ड्रोन मार गिराए, जिनमें युद्ध सामग्री से लैस पांच ड्रोन, नशीले पदार्थों से लैस 72 ड्रोन तथा बिना किसी पेलोड के 161 ड्रोन शामिल थे, जिससे शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को समय रहते विफल किया जा सका।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास

  • उत्तरी सीमाओं पर विशेष ध्यान देते हुए अग्रिम इलाकों में सड़कों, पुलों, सुरंगों और विमानन अड्डों सहित महत्वपूर्ण अवसंरचना के विकास के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 27,300 किलोमीटर लंबी कुल 470 सड़कों का निर्माण किया जाना है। पिछले पांच वर्षों में, रक्षा मंत्रालय द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों को राष्ट्रीय विकास परियोजनाओं (जीएस) के निर्माण हेतु लगभग 23,625 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है, जिससे अग्रिम क्षेत्रों में लगभग 4,595 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण संभव हो पाया है। विशेष रूप से उत्तरी सीमाओं के साथ अग्रिम संपर्क स्थापित करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्तमान अवधि में लगभग 1,125 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
  • सड़क निर्माण कार्य विभाग (बीआरओ) की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। इनमें डीपीआर तैयार करने में सुधार, उपकरणों का आधुनिकीकरण, नवीनतम तकनीक का समावेश, ईपीसी (अनुपालन प्रक्रिया परमिट) पद्धति को सुदृढ़ करना, वैधानिक स्वीकृतियों में तेजी लाना और संगठन के कैडर की समीक्षा शामिल है।
  • पूंछ - त्रिस्टार - बनाली - साधना दर्रा - पी गली - जेड गली - एसपीजी - राजधन - गुरेज - काओबल गली - सोनमर्ग तक लगभग 717 किलोमीटर की ट्रांस-कश्मीर कनेक्टिविटी के विकास को एनएचडीएल (पक्की सड़कों) के विनिर्देशों के अनुसार विकास के लिए अनुमोदित किया गया है, जिसमें साधना दर्रा, पी गली, जेड गली तथा राजधन दर्रे पर सुरंगों का प्रस्ताव है। यह परियोजना रक्षा मंत्रालय (जीएस) के अनुदान से बीआरओ द्वारा चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित की जाएगी। इसके विकास से आगे की कनेक्टिविटी, अंतर-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और अंतर-घाटी कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी।
  • उत्तरी सीमाओं के साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक हर मौसम में संपर्क बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। सात सुरंगों की पहचान की गई है और नवंबर 2024 में कैबिनेट सचिवालय द्वारा बीआरओ द्वारा डीपीआर तैयार करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। निर्माण पूरा होने के बाद, ये सुरंगें हर मौसम में संपर्क प्रदान करके हमारी सेनाओं की गतिशीलता को बढ़ाएंगी, जिससे सर्दियों में सामान जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, रसद संबंधी महंगे हवाई अभियानों को कम किया जा सकेगा और साथ ही दूरदराज के क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी।
  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बुनियादी ढांचे के विकास को भी उचित प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कॉरिडोर में मौजूदा संचार लाइनों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करने के उपाय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के परामर्श से चल रहे हैं। कॉरिडोर में भीड़भाड़ कम करने के लिए आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कर ली गई हैं और अनुमान तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, बल संरक्षण और कमान नियंत्रण इकाइयों के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

 

परिचालन कार्य

सशस्त्र बलों की युद्धक कार्रवाई तत्परता को सुगम बनाने के लिए व्यापक अवसंरचना विकास कार्य चल रहा है। परियोजनाओं में सैनिकों के आवास, आराम की सुविधाएं और अग्रिम क्षेत्रों में तैनात उपकरणों व सैन्य साजो सामान के संचालन में सहायता हेतु तकनीकी अवसंरचना शामिल हैं। पैदल मार्गों, परिचालन मार्गों और हेलीपैडों के निर्माण के माध्यम से दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों तक अग्रिम संपर्क को मजबूत करना प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक है। दूरस्थ दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की युद्ध तत्परता को सुगम बनाने के लिए बल संरक्षण अवसंरचना के निर्माण को गति प्रदान की गई है।

त्रि-सैन्य तालमेल

संयुक्तता और एकीकरण:ऑपरेशन सिंदूर ने स्पष्ट रूप से सिद्ध कर दिया है कि सैन्य संयुक्तता समय की अनिवार्य आवश्यकता है। भविष्य की जटिल चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने और तीनों सेनाओं के बीच निर्बाध तालमेल सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण एकीकरण अब अपरिहार्य हो चुका है। भारतीय सेना की परिचालन रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में संयुक्तता और एकीकरण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विशेष जोर दिया है। अब तक 29% लक्ष्यों की प्राप्ति तथा 35% संयुक्त सिद्धांतों के पूर्ण होने के साथ यह आवश्यक हो गया है कि सभी संयुक्तता और एकीकरण गतिविधियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। सहयोगी सेनाओं के साथ आपसी संबंधों को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि क्षमताओं और योग्यताओं में वृद्धि हो सके। समकालीन चुनौतियों एवं बहु-क्षेत्रीय अभियानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संयुक्त और एकीकृत संरचनाओं के अनुरूप अधिकतम परिचालन लाभ सुनिश्चित करने हेतु प्रयास पूरी गंभीरता से जारी हैं। इस दिशा में एक समग्र एकीकरण रोडमैप तैयार कर रक्षा मंत्री को प्रस्तुत किया गया है। ये गतिविधियां परिचालन तत्परता पर केंद्रित हैं, जिनमें क्षमता विकास, रखरखाव, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन और कानूनी पहलू शामिल हैं। संयुक्तता और एकीकरण का दायरा केवल तीनों सेनाओं तक सीमित न होकर अन्य सरकारी एजेंसियों तथा विभागों तक भी विस्तारित किया जा रहा है, ताकि समग्र राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूती मिले। इसके साथ ही, सर्वोत्तम वैश्विक कार्यप्रणालियों को अपनाने और सुरक्षा संबंधी सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

 

एम्फेक्स-2025

भारतीय नौसेना के साथ द्विवार्षिक संयुक्त अभ्यास, एम्फेक्स-2025, 12 से 31 जनवरी 2025 के बीच विशाखापत्तनम और कारवार में आयोजित किया गया था। इस अभ्यास में दक्षिणी कमान की एक पूर्व इन्फैंट्री बटालियन समूह ने भाग लिया था, जिसमें एक मैकेनाइज्ड प्लाटून भी शामिल थी।

त्रि-सैन्य अभ्यास

भारतीय नौसेना के तत्वावधान में 3 से 13 नवंबर, 2025 तक त्रि- सैन्य अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। गुजरात और राजस्थान सेक्टर में तैनात भारतीय सेना के लगभग 30,000 सैनिकों ने बेहतर समन्वय, एकीकृत प्रतिक्रिया तथा आपसी सहभागिता के लिए इस अभ्यास में भाग लिया। यह अभ्यास 13 नवंबर, 2025 को गुजरात तट पर माधवपुर बीच (पोरबंदर) में संयुक्त अभियान सहित एक महत्वपूर्ण अभ्यास के साथ समाप्त हुआ।

संयुक्त कमांडरों का सम्मेलन 2025

‘सुधारों का वर्ष – भविष्य के लिए परिवर्तन’ विषय पर आधारित संयुक्त कमांडरों का सम्मेलन (सीसीसी) 2025 15 से 17 सितंबर 2025 तक कोलकाता स्थित पूर्वी कमान मुख्यालय में आयोजित किया गया। यह सम्मेलन भारतीय सेना के नेतृत्व में आंतरिक रक्षा विभाग मुख्यालय के तत्वावधान में संपन्न हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया, जिन्होंने तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताते हुए इस दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ने का आह्वान किया। रक्षा मंत्री के साथ हुई व्यापक चर्चाओं में संयुक्तता, आपसी सहभागिता, प्रौद्योगिकी-आधारित युद्ध तथा अंतरिक्ष, साइबर और विशेष अभियानों जैसे उभरते क्षेत्रों में सुधारों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। सीसीसी 2025 ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारतीय सशस्त्र बलों को अधिक चुस्त, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार बनाए रखने हेतु निरंतर सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित किया। सम्मेलन का समापन संयुक्त सैन्य अंतरिक्ष सिद्धांत के विमोचन तथा भारतीय सशस्त्र बलों को बहु-क्षेत्रीय खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अधिक एकीकृत, लचीला और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने हेतु एक व्यापक रोडमैप जारी करने के साथ हुआ।

तीनों सेनाओं की संयुक्त महिला समुद्री यात्रा

रक्षा मंत्री द्वारा 11 सितंबर 2025 को मुंबई के प्रतिष्ठित गेटवे ऑफ इंडिया से वर्चुअल मोड में 10 सदस्यीय दल (भारतीय सेना की 5, भारतीय वायु सेना की 4 और भारतीय नौसेना की 1) के साथ 'तीन सेनाओं की संयुक्त महिला समुद्री यात्रा अभियान' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। सितंबर 2025 से जून 2026 के बीच, दल पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए लगभग 25,000 समुद्री मील की दूरी तय करेगा।

 

संयुक्त सेना प्रशिक्षण संस्थान (जेएसटीआई)

'लीड सर्विस' की अवधारणा के आधार पर, तीनों सेनाओं के कर्मियों को एक ही संस्थान में चुनिंदा क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए जेएसटीआई स्थापित किए जा रहे हैं। भारतीय सेना (आईए) चार जेएसटीआई अर्थात् रासायनिक, जैविक, विकिरण और परमाणु (सीबीआरएन), खुफिया, कानून व संगीत में आगे है। छह जेएसटीआई के गठन की प्रक्रिया चल रही है। भारतीय सेना के अधीन सभी चार जेएसटीआई पहले ही संस्थागत रूप ले चुके हैं और पाठ्यक्रम संचालित करना शुरू कर चुके हैं।

 

क्षमता विकास, आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता

  • वर्ष 2025 में क्षमता संबंधी किसी भी कमी को दूर करने और विशिष्ट प्रौद्योगिकी को शामिल करने के उद्देश्य से आपातकालीन खरीद के दो चरणों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। मौजूदा उग्रवाद-विरोधी/आतंकवाद-विरोधी ग्रिड को मजबूत करने के लिए 1,958.80 करोड़ रुपये की 13 योजनाओं हेतु अनुबंध किए गए। मौजूदा परिचालन संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ड्रोन/काउंटर ड्रोन, हथियार प्रणालियां, सटीक गोला-बारूद, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, निगरानी प्रणाली आदि विशिष्ट प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आपातकालीन खरीद के लिए स्वीकृति दी गई। कुल 29 क्षमता विकास योजनाओं के लिए पहले ही अनुबंध किए जा चुके हैं और दिसंबर 2025 में 16 अन्य योजनाओं के लिए अनुबंध किए जाने की संभावना है।
  • भारतीय सेना ने आत्मनिर्भरता की परिकल्पना के अंतर्गत एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की है, जिसके तहत 'भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा भारतीय सेना हेतु गोला-बारूद निर्माण' योजना के अंतर्गत 10 वर्षों की दीर्घकालिक आवश्यकता में गोला-बारूद की खरीद प्रक्रिया चल रही है, ताकि सभी प्रकार के गोला-बारूद के लिए कम से कम एक स्वदेशी स्रोत स्थापित किया जा सके। समन्वित और सक्रिय प्रयासों तथा अन्य एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से 175 में से 159 (लगभग 91%) गोला-बारूद प्रकारों का स्वदेशीकरण किया जा चुका है।
  • ऑपरेशन सिंदूर के मद्देनजर, रक्षा बलों को आपातकालीन खरीद शक्तियां प्रदान की गईं। आपातकालीन खरीद से संबंधित विवरण इस प्रकार हैं:

 

  •  आपातकालीन शक्तियां राजस्व 2025: आपातकालीन विद्युत राजस्व के अंतर्गत खरीद की कुल सीमा 9,100 करोड़ रुपये है। इसमें से 1,680 करोड़ रुपये परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए उपकरण/सामान की खरीद हेतु फील्ड आर्मी को आवंटित किए गए हैं। शेष 7,420 करोड़ रुपये केंद्रीय खरीद के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। 10 नवंबर 2025 तक, आपातकालीन विद्युत राजस्व 2025 का संपूर्ण बजट उपयोग किया जा चुका है। केंद्रीय खरीद के बजट का 78% गोला-बारूद की खरीद में उपयोग किया गया है, जबकि फील्ड फॉर्मेशन के बजट का 80% ड्रोन, काउंटर ड्रोन और लोइटर एम्युनिशन/कामिकेज ड्रोन प्राप्त करके स्ट्राइक क्षमता के निर्माण में उपयोग किया गया है।
  •  आपातकालीन खरीद VI पूंजी 2025: छठे पूंजी वर्ष 2025 के आपातकालीन खरीद के लिए 58 योजनाओं की योजना बनाई गई है। इनमें से कुल 29 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनमें से 19 घरेलू योजनाएं 4,577.33 करोड़ रुपये की और 10 विदेशी योजनाएं 2,496.90 करोड़ रुपये की (कुल 7,074.24 करोड़ रुपये) की हैं।
  •  विदेशी खरीद पर होने वाला व्यय लगातार घट रहा है और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, रक्षा मंत्रालय (वित्त) द्वारा भारतीय स्वदेशीकरण को आवंटित घरेलू बनाम विदेशी भुगतान का अनुपात 87:13 है। भारतीय स्वदेशीकरण द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने की संभावना है। वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2024-25 तक स्वदेशीकरण का विवरण नीचे सारणीबद्ध किया गया है:-

 

वित्तीय वर्ष

व्यय

कुल

(करोड़ रुपये में)

अनुपात

स्वदेशी

(करोड़ रुपये में)

विदेशी

(करोड़ रुपये में)

2021-22

17,290.96

2,940.15

20,231.11

6:1

2022-23

20,018.07

11,696.95

31,715.02

2:1

2023-24

21,607.65

1,471.77

23,079.42

15:1

2024-25

33,549.35

1,707.18

35,256.53

19:1

 

गोला-बारूद निर्माण में आत्मनिर्भरता

  • भारत सरकार की पहल 'भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद निर्माण' के तहत भारतीय उद्योग जगत को 32 प्रकार के गोला-बारूद के लिए दीर्घकालिक अनुबंध प्रस्तावित किए गए हैं। इन पर 12 खरीद मामलों (कैलिबर/प्लेटफ़ॉर्म के आधार पर वर्गीकृत) के तहत 15,899 करोड़ रुपये की राशि के साथ काम चल रहा है। 5,696 करोड़ रुपये के चार आर्डर डीपीएसयू और निजी कंपनियों को सौंपे जा चुके हैं तथा और शेष अन्य मूल्यांकन के उन्नत चरणों में हैं और अगले छह से बारह महीनों के दौरान इनके पूर्ण होने की संभावना है। इनमें से अधिकांश गोला-बारूद का स्वदेशीकरण 2027-28 तक होने की संभावना है।
  • भारतीय सेना (आईए) ने आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अगले 10 वर्षों का एक स्पष्ट और चरणबद्ध रोडमैप तैयार किया है। इसके अंतर्गत पहले चरण (2025–26) में प्रमुख प्लेटफॉर्मों के लिए आयात पर निर्भर 32 प्रकार के गोला-बारूद के स्वदेशीकरण पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें निजी उद्योग की भागीदारी भी शामिल है और जिसकी अनुमानित लागत 15,899 करोड़ रुपये है। दूसरे चरण (2026–27) में विक्रेता आधार का विस्तार करने तथा आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों से प्रभावित भंडार को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से भारतीय उद्योग के माध्यम से उत्पादन हेतु पांच अतिरिक्त प्रकार के गोला-बारूद की पहचान की गई है। तीसरे चरण (2027 और आगे) में पहले दो चरणों से प्राप्त अनुभव, विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं के आधार पर स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि भारतीय बौद्धिक संपदा अधिकारों पर आधारित अगली पीढ़ी के उच्च-प्रौद्योगिकी गोला-बारूद का विकास किया जा सके, जो घरेलू आवश्यकताओं के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धी हो। इस आत्मनिर्भर परियोजना का उद्देश्य गोला-बारूद के भंडार को वांछित स्तर तक बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और देश को आत्मनिर्भर बनाना है, साथ ही प्रत्येक प्रकार के गोला-बारूद के लिए कम से कम दो स्रोत विकसित करना, महत्वपूर्ण तकनीकों को स्वदेश में प्राप्त करना तथा मजबूत विनिर्माण बुनियादी ढांचा एवं उत्पादन क्षमता स्थापित करना है।
  • भारतीय सेना के पास गोला-बारूद का एक विशाल और विविध भंडार है, जिसमें वर्तमान में सेवा में मौजूद 175 प्रकार के गोला-बारूद शामिल हैं, जो पुराने प्लेटफार्मों के लिए प्रयुक्त गोला-बारूद से लेकर उन्नत सटीक निर्देशित गोला-बारूद तक फैले हुए हैं। डीआरडीओ, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) और निजी उद्योग के साथ समन्वित प्रयासों तथा घनिष्ठ सहयोग के परिणामस्वरूप 159 प्रकार के गोला-बारूद, अर्थात लगभग 90.85 प्रतिशत का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण किया जा चुका है। इन्हें अब स्वदेशी स्रोतों से प्राप्त किया जा रहा है, जिनमें 110 प्रकार एकल स्रोत से तथा 49 प्रकार एक से अधिक स्वदेशी स्रोतों से उपलब्ध हैं।
  • विशेष वस्त्र एवं पर्वतारोहण उपकरण (एससीएमई) का स्वदेशीकरण, जो 20 से 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए अधिकृत है, भारतीय सेना का एक प्रमुख फोकस क्षेत्र रहा है। दिसंबर 2021 में आयात खरीद पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद आयातित वस्तुओं की खरीद पूरी तरह बंद कर दी गई है और विभिन्न पहलों के माध्यम से युद्धस्तर पर स्वदेशीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। एससीएमई के अंतर्गत कुल 57 वस्तुएं अधिकृत हैं, जिनमें से 53 वस्तुओं का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण किया जा चुका है, जबकि शेष चार वस्तुएं परीक्षण एवं स्वदेशीकरण के उन्नत चरण में हैं, जिनकी प्रक्रिया के 2026 के अंत तक पूर्ण होने की संभावना है।
  • मिशन स्वायत प्रयोग: स्वायत्त हथियार प्रणाली (एडब्ल्यूएस) एक सैन्य तकनीक है, जो प्रत्यक्ष मानवीय हस्तक्षेप के बिना लक्ष्यों का चयन और उन पर हमला कर सकती है। वांछित घातक भार क्षमता एवं उपयुक्त मानवीय नियंत्रण के साथ स्वदेशी एडब्ल्यूएस के विकास के उद्देश्य से, मिशन स्वायत प्रयोग 23-25 ​​अप्रैल 2025 को बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया था ताकि एडब्ल्यूएस में स्वदेशी क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके और इसके सैन्यीकरण के लिए एक रोडमैप तैयार किया जा सके।
  • ड्रोन निर्माण: 515 आर्मी बेस वर्कशॉप तथा चुनिंदा कोर ज़ेड वर्कशॉप/ईएमई बटालियनों ने आंतरिक विशेषज्ञता और विषय विशेषज्ञों (एसएमई) के सहयोग से एक सशक्त एवं विश्वसनीय ड्रोन निर्माण क्षमता स्थापित की है। ये सैन्य सुविधाएं अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित हैं और ड्रोनों की गुणवत्ता से संबंधित सभी आवश्यक मानकों को पूरा करती हैं। अब तक ईएमई इकाइयों द्वारा कुल 819 ड्रोन का निर्माण किया जा चुका है, जिनमें 193 निगरानी ड्रोन, 337 आत्मघाती/सशस्त्र/हथियारबंद ड्रोन तथा 289 प्रथम पायलट दृश्य (एफपीवी) ड्रोन शामिल हैं।
  • डिजिटलीकरण और स्वचालन: भारतीय सेना (आईए) समय डेटा विश्लेषण और स्वायत्त प्रणालियों के माध्यम से परिचालन दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से एआई-संचालित निर्णय-निर्माण क्षमताओं को तेजी से अपनाने की दिशा में अग्रसर है। इसके तहत भारतीय सेना उपकरणों के लिए एआई-आधारित निवारक रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की मांग का पूर्वानुमान, परिवहन एवं सड़क स्थान प्रबंधन के लिए एआई मॉडल तथा एआई-आधारित आपूर्ति श्रृंखला मानचित्रण प्रणालियों के विकास व उपयोग में उल्लेखनीय प्रगति की जा रही है।
  • सैन्य कूटनीति: जनवरी-नवंबर 2025 के दौरान एफएफसी के साथ आयोजित प्रमुख संयुक्त अभ्यासों का विवरण नीचे सारणीबद्ध किया गया है:-

संयुक्त अभ्यास

भागीदारी

दिनांक (2025)

एकुवेरिन-XIII (त्रि-सेवा)

भारत-मालदीव

02-15 फरवरी

 

चक्रवात-III (एकल सेवा)

भारत-मिस्र

10-23 फरवरी

धर्म संरक्षक-VI

(एकल सेना)

भारत-जापान

24 फरवरी -09 मार्च

खंजर-XII

भारत-किर्गिस्तान

10-23 मार्च

टाइगर ट्रायम्फ

(त्रि-सेना अभ्यास)

भारत-अमरीका

01-14 अप्रैल

डस्टलिक

भारत-उज़्बेकिस्तान

15-28 अप्रैल

आईएमबीएएक्स

भारत-म्यांमा

22-27 अप्रैल

नोमैडिक एलीफैंट

भारत-मंगोलिया

29 मई-13 जून

अभ्यास शक्ति

भारत-फ्रांस

19 जून-02 जुलाई

अभ्यास बोल्ड कुरूक्षेत्र

भारत-सिंगापुर

28 जुलाई-04 अगस्त

अभ्यास ब्राइट स्टार

भारत-मिस्र

28 अगस्त-10 सितंबर

अभ्यास युद्ध अभ्यास

भारत-अमरीका

01-14  सितंबर

अभ्यास मैत्री

भारत-थाईलैंड

01-14  सितंबर

अभ्यास ज़ापद

भारत-रूस

10-16  सितंबर

अभ्यास इंद्र, 13वां संस्करण

भारत-रूस

03-15  अक्टूबर

अभ्यास ऑस्ट्राहिंद

भारत-ऑस्ट्रेलिया

13-26  अक्टूबर

अभ्यास मित्र शक्ति

भारत-श्रीलंका

10-23  नवंबर

अभ्यास विनबैक्स

भारत-वियतनाम

10-29  नवंबर

अभ्यास अजेय वॉरियर

भारत-ब्रिटेन

17-30  नवंबर

संरचित वार्ताएं: वर्तमान समय में, भारतीय सेना कार्मिक वार्ता के माध्यम से 19 देशों की सेनाओं के साथ संपर्क में है। अब तक, वर्ष 2025 में निम्नलिखित देशों के साथ सेना स्तरीय वार्ताएं आयोजित की जा चुकी हैं:

देश

आयोजन की तिथि

(2025 में)

बाहर

वियतनाम

22-24  अप्रैल

सऊदी अरब

23-24  अप्रैल

इंडोनेशिया

08-10  जुलाई

फ्रांस

30  सितंबर - 01  अक्टूबर

ऑस्ट्रेलिया

29-31  अक्टूबर

 

देश में

इज़राइल

03  फरवरी

सिंगापुर

03-05  मार्च

जापान

06-07  मार्च

संयुक्त अरब अमीरात

29  जुलाई

मालदीव

26  अगस्त

म्यांमा

09-10  सितंबर

ओमान

21-23  अक्टूबर

श्रीलंका

18-20  नवंबर

  • संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा में योगदान: अब तक भारत संयुक्त राष्ट्र के 72 शांति अभियानों में से 53 में भाग ले चुका है और 2,97,000 से अधिक कर्मियों का योगदान दे चुका है, जबकि संयुक्त राष्ट्र के जनादेश की रक्षा करते हुए 164 भारतीय शांति सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। शांति स्थापना के प्रति भारत का दृष्टिकोण माननीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिपादित 5S—सम्मान (Respect), संवाद (Communication), सहयोग (Cooperation), समृद्धि (Prosperity) और शांति (Shanti)—के सिद्धांतों से निर्देशित है, जो वैश्विक शांति एवं स्थिरता के प्रति देश की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • वर्तमान में भारतीय सेना (आईए) लगभग 5,000 सैन्य कर्मियों को पांच इन्फैंट्री बटालियन, 11 गठित इकाइयों तथा स्टाफ अधिकारियों और सैन्य पर्यवेक्षकों के साथ डीआरसी, दक्षिण सूडान, अबेई, पश्चिमी सहारा, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, अदीस अबाबा, लेबनान, सीरिया, इज़राइल व साइप्रस में स्थित 10 संयुक्त राष्ट्र मिशनों में तैनात किए हुए है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में जारी वित्तीय संकट और कर्मियों की संख्या में कटौती के कारण वर्दीधारी कर्मियों की कुल संख्या घटकर लगभग 4,100 रह जाने की संभावना है। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की पीड़ा को कम करने के उद्देश्य से महिला सहभागिता दल (एफईटी), महिला मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं तथा सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) के अधिकारियों को विभिन्न मिशनों में तैनात किया गया है, जबकि प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक भी शांति सैनिकों व स्थानीय आबादी के शारीरिक एवं मानसिक कल्याण के लिए योग सत्र संचालित करने हेतु दल का अभिन्न हिस्सा हैं।

 

राष्ट्र निर्माण में योगदान

मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर)

  • अपनी व्यापक परिचालन प्रतिबद्धताओं के बावजूद, भारतीय सेना आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में देश को मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) प्रदान करने में सदैव अग्रणी भूमिका निभाती रही है। वर्ष 2025 के दौरान, भारतीय सेना ने इंजीनियर टास्क फोर्स सहित 141 कॉलम तैनात कर देश के 10 राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किए। इन अभियानों के तहत 28,293 नागरिकों का सफलतापूर्वक बचाव किया गया, लगभग 7,318 लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान की गई तथा 2,617 से अधिक नागरिकों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई गई। वर्ष 2025 में संचालित प्रमुख अभियानों में म्यांमा में ऑपरेशन ब्रह्मा (मार्च 2025), उत्तराखंड में धारली बचाव अभियान (अगस्त 2025), दीमापुर बाढ़ राहत अभियान (जुलाई 2025), जम्मू-कश्मीर के चिसोट/किश्तवार जिले में बाढ़ राहत अभियान (अगस्त 2025) तथा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के पूह क्षेत्र में व्यापक राहत अभियान शामिल हैं।
  • अपनी राष्ट्र-निर्माण की भूमिका को सुदृढ़ करते हुए, भारतीय सेना ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में ऑपरेशन सद्भावना के अंतर्गत ‘सैन्य-नागरिक कार्रवाई परियोजनाओं’ का प्रभावी संचालन कर रही है। लगभग 150 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट के साथ, ऑपरेशन सद्भावना सरकार के ‘जीवंत ग्राम’ कार्यक्रम को भी सक्रिय रूप से समर्थन प्रदान करती है। यह पहल सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा मानव संसाधन विकास पर केंद्रित है।
  • मणिपुर में रेलवे मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) की टुकड़ियां तैनात की गई हैं। प्रादेशिक सेना की मौजूदगी के कारण परियोजना में तीव्र प्रगति हुई है और खोंगसांग (मणिपुर) तक नियमित ट्रेन सेवा उपलब्ध है। परियोजना के 2027 तक पूरा होने की संभावना है।

महिला सशक्तिकरण

  • भारतीय सेना महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जो लैंगिक समानता एवं समावेशिता के प्रति राष्ट्र की दृढ़ वचनबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। विगत वर्षों में, सेना ने दीर्घकालिक संरचनात्मक बाधाओं को दूर करते हुए महिलाओं को उन विविध भूमिकाओं में सेवा करने के अवसर प्रदान किए हैं, जो पूर्व में उनके लिए प्रतिबंधित थीं। नीतिगत सुधारों, नेतृत्व के सशक्त अवसरों तथा रणनीतिक समावेशन के माध्यम से, भारतीय सेना सक्रिय रूप से ऐसा सक्षम वातावरण विकसित कर रही है, जहां महिलाएं न केवल उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें, बल्कि प्रभावी नेतृत्व भी प्रदान कर सकें। लैंगिक समानता पर आधारित भविष्य को सुदृढ़ करने हेतु यह आवश्यक है कि प्रारंभिक एवं आधारभूत संस्थान सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका के अनुरूप प्रतिभा-आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए तत्पर हों। इसी दिशा में, शैक्षणिक वर्ष 2021–22 से देश भर के सभी 33 सैनिक विद्यालयों में 10 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में अधिकारी कैडेट प्रवेश के लिए प्राथमिक संस्थान के रूप में कार्य करने हेतु, शैक्षणिक सत्र 2022–23 से राष्ट्रीय सैन्य विद्यालयों में भी छात्राओं को प्रवेश की अनुमति प्रदान की गई है। इसी क्रम में, अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) में महिला अधिकारी कैडेटों के लिए प्रति वर्ष 120 रिक्तियां निर्धारित की गई हैं, जो सशस्त्र बलों में महिलाओं की सुदृढ़ एवं सतत भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

• भारतीय सेना महिलाओं को नेतृत्व पदों पर सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है, उन्हें कमान संभालने और नेतृत्व करने के अवसर प्रदान कर रही है। महिला अधिकारियों को इकाइयों/बटालियनों की कमान संभालने के लिए विचार किया जा रहा है और नियुक्त किया जा रहा है, जो सेना में नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण मानदंड है। 119 महिला अधिकारियों को सेना इकाइयों की कमान संभालने की कठिन जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • भारतीय सेना में उच्च पदों पर पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है, जैसे लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर, वीएसएम, जो डीजीएमएस (सेना) के पद पर हैं और लेफ्टिनेंट कर्नल व कर्नल के पदों पर भी कार्यरत हैं। ये महिलाएं महत्वपूर्ण रणनीतिक और परिचालन निर्णयों में योगदान दे रही हैं। महिला अधिकारियों ने एएफएमएस के शीर्ष चार पदों को संभाला है, जो एएफएमएस के लैंगिक सशक्तिकरण के दृष्टिकोण का प्रमाण है। सेना डाक सेवा का नेतृत्व एक महिला मेजर जनरल कर रही हैं।
  • महिला अधिकारियों को उनके पुरुष समकक्षों के समान स्टाफ कॉलेज परीक्षा में बैठने के समान अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। महिला अधिकारियों को कर्नल (सिलेक्शन ग्रेड) रैंक के लिए भी विचार किया जा रहा है और उन्हें कमान संबंधी नियुक्तियां दी जा रही हैं। मई 2021 से, महिलाओं को सैन्य पुलिस कोर में ऑपरेशन ऑफिसर के रूप में और अब अग्निवीर के रूप में भर्ती किया गया है। भारतीय सेना संयुक्त कमांडर ऑफिसर तथा ऑपरेशन ऑफिसर कैडर में महिलाओं के व्यापक प्रतिनिधित्व की तलाश कर रही है और अन्य सशस्त्र बलों/सेवाओं में भी धीरे-धीरे महिलाओं को भर्ती करने की योजना बना रही है।
  • वर्ष 2024 में, महिला अधिकारियों की संगठनात्मक आवश्यकताओं और कैरियर संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ भारतीय सेना की परिचालन दक्षता बनाए रखने के लिए, विशेष चयन बोर्डों (लेफ्टिनेंट कर्नल से कर्नल) में चयनित महिला अधिकारियों के लिए भविष्य कैरियर प्रगति नीति लागू की गई थी। विशेष चयन बोर्ड संख्या 3 (लेफ्टिनेंट कर्नल से कर्नल) के संचालन के बाद, अगला चयन बोर्ड (कर्नल से ब्रिगेडियर) भारतीय सेना के सभी अधिकारियों पर लागू मौजूदा नीति प्रावधानों के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
  • 1 सितंबर 2025 से सेवाओं में कमीशन प्राप्त करने वाली महिला अधिकारी अब अपने पुरुष समकक्षों की तरह ही क्षेत्र में तैनात तोपखाना/ एएडी/ इंजीनियर/ सिग्नल इकाइयों के साथ 78 सप्ताह का अटैचमेंट कर रही हैं।

सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का रोडमैप

सेना ने 2024 में महिला कैडेटों की वार्षिक भर्ती को 80 से बढ़ाकर 144 रिक्तियां (80% की वृद्धि) कर दिया है। इससे बल में अधिकारियों के स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है। भारतीय सेना युद्ध क्षमता को बनाए रखते हुए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रगतिशील कदम उठा रही है। 2023 में 'भारतीय सेना में महिला अधिकारियों की भर्ती' के अध्ययन द्वारा शस्त्र एवं सेवाओं में लगभग 8,100 महिला अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। संयुक्त राष्ट्र सशस्त्र बल (जेएजी) विशेष प्रवेश योजना के लिए चयन प्रक्रिया 2026 से शुरू होगी।

 

भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता एवं क्षमता विकास की दिशा में अपना दृढ़ और उद्देश्यपूर्ण अभियान जारी रखते हुए 2025 में 12 जहाजों/पनडुब्बियों को कमीशन किया तथा कई यार्डक्राफ्ट की डिलीवरी की। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना की मजबूत और सक्रिय तैनाती ने पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े को अपने तटों के करीब संचालन करने के लिए मजबूर कर दिया। अभियानों/प्रमुख सामरिक संयुक्त अभ्यासों और चल रहे संघर्षों से मिले सबक के आधार पर कई सैद्धांतिक और परिचालन अवधारणाओं में संशोधन/अद्यतन किए गए हैं, साथ ही प्रौद्योगिकी समावेशन दर्शन को भी अद्यतन किया गया है। नौसेना के प्रमुख सैद्धांतिक दस्तावेज - भारतीय समुद्री सिद्धांत - को संशोधित किया गया और सार्वजनिक रूप से जारी किया गया। भारतीय नौसेना युद्ध के लिए तैयार, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य के लिए तैयार रहने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

 

युद्धपोत निर्माण

भारत में अब तक 177 से अधिक जहाजों/पनडुब्बियों का निर्माण व सेवा में शामिल होना संभव हो चुका है। नौसेना रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर घरेलू जहाज निर्माण उद्योग के विकास को गति प्रदान कर रही है। भारतीय नौसेना देश में जहाज निर्माण क्षेत्र के विकास का प्रमुख स्तंभ बनी हुई है। नौसेना में शामिल किए जाने वाले सभी 52 युद्धपोत भारत में ही निर्मित किए जा रहे हैं, 75 और जहाजों व पनडुब्बियों के ऑर्डर अंतिम चरण में हैं। हथियारों, सेंसरों और उपकरणों में स्वदेशीकरण को बढ़ाने पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

 

इस वर्ष कुल 12 जहाजों को सौंपा गया है, जिनका विवरण इस प्रकार है:

  • पी15बी परियोजना का चौथा और अंतिम जहाज, आईएनएस सूरत, 15 जनवरी 2025 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में प्रधानमंत्री द्वारा कमीशन किया गया। आईएनएस सूरत सबसे तेजी से निर्मित स्वदेशी युद्धपोत (फ्रिगेट और उससे ऊपर) है, जिसे लॉन्च से लेकर डिलीवरी तक केवल 31 महीनों में तैयार किया गया।
  • पी17ए स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला का पहला जहाज, आईएनएस नीलगिरी, 15 जनवरी 2025 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में प्रधानमंत्री द्वारा कमीशन किया गया। आईएनएस नीलगिरी, भारतीय नौसेना के प्रमुख युद्धपोत डिजाइन संगठन, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा निर्देशित 100वां स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया नौसैनिक प्लेटफॉर्म है।
  • पी75 परियोजना की छठी और अंतिम पनडुब्बी, आईएनएस वाघशीर, 15 जनवरी 2025 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में प्रधानमंत्री द्वारा कमीशन की गई। आईएनएस वाघशीर के कमीशन होने के बाद, परियोजना 75 की सभी छह पनडुब्बियों को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है।
  • पी75 परियोजना की छठी और अंतिम पनडुब्बी, आईएनएस वाघशीर को 15 जनवरी 2025 को मुंबई के नौसेना गोदी में प्रधानमंत्री द्वारा कमीशन किया गया। आईएनएस वाघशीर के कमीशन होने के बाद, परियोजना 75 की सभी छह पनडुब्बियों को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है और कमीशन कर दिया गया है।
  • कोलकाता स्थित जीआरएसई द्वारा निर्मित आईएनएस अर्नाला 8 मई 2025 को सौंपी गई और 18 जून 2025 को कमीशन की गई।
  • आईएनएस तमाल को 1 जुलाई 2025 को रूस के कलिनिनग्राद स्थित यंतर शिपयार्ड में कमीशन किया गया।
  • विशाखापत्तनम स्थित एचएसएल द्वारा निर्मित आईएनएस निस्तार 8 जुलाई 2025 को सौंपी गई और 18 जुलाई 2025 को कमीशन की गई।
  • पी17ए स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला का दूसरा जहाज आईएनएस उदयगिरि, 1 जुलाई 2025 को एमडीएल द्वारा भारतीय नौसेना को सौंपा गया और 26 अगस्त 2025 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में नौसेना द्वारा इसे कमीशन किया गया।
  • मेसर्स जीआरएसई द्वारा निर्मित पी17ए स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला का पहला जहाज, आईएनएस हिमगिरि, 30 जुलाई 2025 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया और 26 अगस्त 2025 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में नौसेना द्वारा इसे कमीशन किया गया।
  • कोलकाता स्थित जीआरएसई द्वारा निर्मित आईएनएस एंड्रोथ 13 सितंबर 2025 को सौंपा गया और 6 अक्टूबर 2025 को कमीशन किया गया।
  • सर्वेक्षण पोत (बड़े) परियोजना का तीसरा पोत, आईएनएस इक्षक, जीआरएसई द्वारा 14 अगस्त 2025 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया और नौसेना प्रमुख द्वारा 6 नवंबर 2025 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में इसका शुभारंभ किया गया।
  • एएसडब्ल्यू शैलो वाटरक्राफ्ट का पहला पोत, आईएनएस माहे, सीएसएल द्वारा 23 अक्टूबर 2025 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया और सेना प्रमुख द्वारा 24 नवंबर 2025 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में इसका शुभारंभ किया गया।
  • डीएससी परियोजना का पहला पोत - ए20 - 16 सितंबर 2025 को सौंपा गया और 16 दिसंबर 2025 को इसका शुभारंभ किया गया।

 

इस साल कुल पांच युद्धपोत लॉन्च किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • दूसरा जहाज उत्कर्ष 13 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया।
    • तवस्या 22 मार्च 2025 को लॉन्च किया गया।
  • आठवां जहाज अजय 21 जुलाई 2025 को लॉन्च किया गया।
  • तीसरा जहाज डीएससी ए22 12 सितंबर 2025 को लॉन्च किया गया।
  • छठा जहाज मगदला (पूर्व में सीएसएल) 18 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया गया।

 

इस वर्ष कुल तीन यार्डक्राफ्ट वितरित किए गए हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:

  • गोला-बारूद सह टॉरपीडो सह मिसाइल बार्ज की 8वीं, 9वीं और 10वीं बार्ज क्रमशः 6 जनवरी 2025, 12 मार्च 2025 तथा 22 अप्रैल 2025 को एमएसएमई शिपयार्ड को सौंपी गईं।
  • मिसाइल सह गोला-बारूद बार्ज परियोजना की 7वीं और 8वीं बार्ज सेकॉन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, विशाखापत्तनम द्वारा क्रमशः 7 जनवरी 2025 और 4 मार्च 2025 को एमएसएमई शिपयार्ड को सौंपी गईं।
  • 6 x 25 टन बोलार्ड पुल टग परियोजना की तीसरी, चौथी, 5वीं और 6वीं बोलार्ड पुल टग क्रमशः 12 फरवरी 2025, 26 मार्च 2025, 27 जून 2025 और 4 सितंबर 2025 को कोलकाता के टीटागढ़ रेल सिस्टम लिमिटेड द्वारा सौंपी गईं।

प्रमुख अभ्यास

ट्रोपेक्स 25:

  • भारतीय नौसेना का द्विवार्षिक एकीकरण स्तरीय परिचालन तत्परता अभ्यास (ट्रोपेक्स-25) जनवरी से मार्च 2025 तक आयोजित किया गया। तीन महीने तक चलने वाला यह अभ्यास कई चरणों में, बंदरगाह और समुद्र दोनों में आयोजित किया गया, जिसमें युद्ध अभियानों, साइबर व इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर अभियानों, संयुक्त कार्य-प्रणाली चरण के दौरान वास्तविक हथियार अभ्यास तथा संयुक्त अभ्यास के विभिन्न पहलुओं को एकीकृत किया गया। इस अभ्यास में कई जहाजों, पनडुब्बियों, विमानों, आईसीजी जहाजों, भारतीय वायु सेना के विमानों और भारतीय सेना के सैनिकों ने भाग लिया। इस अभ्यास का उद्देश्य भारतीय नौसेना के मुख्य युद्ध कौशल को प्रमाणित करना और एक चुनौतीपूर्ण समुद्री वातावरण में राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा हितों की रक्षा व संरक्षण के लिए एक समन्वित, एकीकृत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था। अभ्यास 'तैयार' के हिस्से के रूप में भारतीय नौसेना की परिचालन, सामग्री और लॉजिस्टिक्स तैयारियों का आकलन करना भी शामिल था।
  • त्रि-सैन्य अभ्यास 2025 का आयोजन 3 से 13 नवंबर 2025 तक गुजरात में/के आसपास किया गया, जिसमें भारतीय नौसेना (आईएन) ने नेतृत्व किया और भारतीय सेना (आईए), भारतीय वायु सेना (आईएएफ), बीएसएफ तथा आईसीजी की व्यापक भागीदारी रही। टीएसई-2025 पहला ऐसा अभ्यास है, जिसमें सभी सेनाओं और संगठनों को प्रारंभिक योजना चरण से ही शामिल किया गया था। इस अभ्यास का उद्देश्य सेनाओं के बीच समन्वय और सहक्रिया को बढ़ाना था और यह भविष्य के त्रि-सैन्य अभ्यासों की योजना के लिए एक आधारशिला साबित हुआ।
  • अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ भारत और अमरीका की रक्षा बलों के बीच एक त्रि-सैन्य आपदा जोखिम निवारण (एचएडीआर) अभ्यास है। इस पहल का उद्देश्य संयुक्त आपदा जोखिम निवारण (एचएडीआर) परिदृश्य में भारतीय और अमरीकी रक्षा बलों के बीच आपसी सहभागिता तथा तालमेल विकसित करना है। अभ्यास का पिछला संस्करण 1 से 15 अप्रैल 2025 तक विशाखापत्तनम/काकीनाडा नौसेना एन्क्लेव में आयोजित किया गया था।
  • जलप्रहार अभ्यास भारतीय सेना के पैदल सैनिकों को जल-थलीय प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के जल-थलीय संयंत्रों के साथ-साथ भारतीय सेना के सैनिक और उपकरण भी भाग लेते हैं। इस वर्ष, यह अभ्यास अक्टूबर 2025 के पहले सप्ताह में विशाखापत्तनम/काकीनाडा में आयोजित किया गया था।

 

भारतीय नौसेना की प्रमुख परिचालन तैनाती के कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेने के लिए आईएनएस इम्फाल को तैनात किया गया था और यह 1 मार्च 2025 को पोर्ट लुइस, मॉरीशस पहुंचा। 29 कर्मियों और 25 सदस्यीय बैंड सहित भारतीय नौसेना की परेड टुकड़ी ने दो एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों के साथ 12 मार्च 2025 को पोर्ट लुइस में आयोजित राष्ट्रीय दिवस परेड में भाग लिया।
  • आईएनएस तमाल को 1 जुलाई 2025 को रूस के कैलिनिनग्राद में कमीशन किए जाने के बाद, इसने अपनी पहली समुद्री यात्रा पूरी की और 10 सितंबर 2025 को कारवार में प्रवेश किया। इस यात्रा के दौरान, जहाज ने रूस, मोरक्को, इटली, ग्रीस, सऊदी अरब और ओमान के बंदरगाहों का दौरा किया, जिसके बाद मेजबान नौसेनाओं के साथ पैसेज एक्सरसाइज (पासेक्स) में भाग लिया।
  • भारतीय नौसेना के जहाज शक्ति, सतपुरा, दिल्ली और किल्टन को 16 जुलाई से 3 अगस्त 2025 तक पूर्वी बेड़े के परिचालन तैनाती के लिए तैनात किया गया था। इस तैनाती के दौरान, जहाजों ने सिंगापुर, वियतनाम और फिलीपींस के बंदरगाहों का दौरा किया तथा मेजबान नौसेनाओं के साथ पासेक्स/ द्विपक्षीय अभ्यास में भी भाग लिया।
  • भारतीय नौसेना का जहाज कदमत पापुआ न्यू गिनी के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए पोर्ट मोरेस्बी (30 अगस्त - 7 सितंबर 2025) में तैनात किया गया था। तैनाती के दौरान जहाज ने इंडोनेशिया, फिजी और ऑस्ट्रेलिया के बंदरगाहों का भी दौरा किया।
  • भारतीय नौसेना का जहाज त्रिकंद 25/03 के दीर्घकालिक प्रशिक्षण तैनाती (डब्ल्यूएफओडी) के लिए तैनात किया गया था। जहाज ने मिस्र के अलेक्जेंड्रिया में/के पास (01-11 सितंबर 2025) आयोजित एक्स ब्राइट स्टार अभ्यास में भाग लिया और ग्रीस के सलामिस खाड़ी में/के पास (13-18 सितंबर 2025) हेलेनिक नौसेना के साथ अपना पहला द्विपक्षीय अभ्यास किया। तैनाती के दौरान जहाज ने साइप्रस, इटली और ओमान के बंदरगाहों का भी दौरा किया।
  • भारतीय नौसेना का जहाज सह्याद्री 25/03 के दीर्घकालिक प्रशिक्षण (ईएफओडी) के लिए तैनात किया गया है। जहाज ने 2-5 अक्टूबर 2025 तक मलेशिया के केमामन बंदरगाह का दौरा किया।
  • प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की इकाइयां, सुजाता, शार्दुल व आईसीजीएस वीरा, 10 जनवरी से 11 मार्च 2025 तक दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में दीर्घकालिक प्रशिक्षण तैनाती के लिए तैनात की गईं और सिंगापुर, कंबोडिया, इंडोनेशिया तथा थाईलैंड के बंदरगाहों का दौरा किया।
  • प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के जहाज तीर, शार्दुल, सुजाता और सारथी को 25 अगस्त से 9 अक्टूबर 2025 तक दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी के प्रशिक्षण के लिए तैनात किया गया था। इन जहाजों ने सेशेल्स, मॉरीशस, रीयूनियन, मोज़ाम्बिक और केन्या में बंदरगाहों का दौरा किया।

विदेशी नौसेनाओं के साथ अभ्यास

कई नौसैनिक जहाजों और विमानों ने 25 जनवरी से अब तक 18 द्विपक्षीय, 8 बहुपक्षीय, 31 समुद्री साझेदारी अभ्यासों, 4 समन्वित गश्ती (कॉर्पोटेशन) तथा 12 संयुक्त अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) निगरानी अभ्यासों में भाग लिया है। इनमें से कुछ अभ्यासों में फ्रांसीसी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी) शामिल है, जिसमें चार्ल्स डी गॉल, एफएनएस जैक्स शेवेलियर, एफएनएस प्रोवेंस, एफएनएस डुगुए ट्रौइन, एफएनएस सीन, एफएनएस फोर्बिन और एफएनएस अलसैस शामिल हैं। सीएसजी ने 3 से 9 जनवरी 2025 तक भारत का दौरा किया। 9 जनवरी 2025 को प्रस्थान के समय, भारतीय नौसेना के जहाज मोरमुगाओ ने फ्रांसीसी नौसेना के जहाजों प्रोवेंस और जैक्स शेवेलियर के साथ गोवा तट पर पासेक्स अभ्यास किया। इस अभ्यास में सीएसजी के साथ भारतीय वायु सेना के विमानों द्वारा लार्ज फोर्स एंगेजमेंट (एलएफई) में भी भाग लिया गया।

 

संयुक्त समुद्री बल (सीएमएफ)

  • इस अवधि के दौरान, ओमान तट से दूर, समुद्री नियंत्रण और टोही विमान (आईएनपी पी8आई) ने सीएमएफ अभियानों के समर्थन में चार उड़ानें भरीं। भारतीय नौसेना के जहाज तारकश ने सीटीएफ 150 और सीटीएफ 151 द्वारा संयुक्त रूप से संचालित केंद्रित अभियान 'एएनजेडएसी टाइगर' में भाग लिया, जो 27 मार्च से 4 अप्रैल 2025 तक ओमान तट से दूर चला। इस अभियान के दौरान, तरकश ने एफवी सीना अल बुरादी पर चढ़कर 2500 किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थ जब्त किए। इस अभियान ने नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियानों के संचालन में अंतर-संचालनीयता को बढ़ाया और भाग लेने वाली नौसेनाओं के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत किया।
  • रॉयल न्यूजीलैंड नौसेना ने 15 जनवरी 2025 से पाकिस्तान नौसेना से सीटीएफ 150 की कमान संभाली। 4 जनवरी 2025 से सीटीएफ 150 रेनबो स्टाफ के हिस्से के रूप में पांच भारतीय नौसेना के अधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया गया है। बहरीन स्थित सीएमएफ मुख्यालय में भारतीय नौसेना कर्मियों की यह पहली प्रतिनियुक्ति थी, जिसका उद्देश्य सीएमएफ के साथ कार्यात्मक संबंधों को मजबूत करना था।
  • आईएनएस शार्दुल ने 15 से 22 फरवरी, 2025 तक इंडोनेशिया के बाली में आयोजित 5वें बहुराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास कोमोडो 25 में भाग लिया, जिसकी मेजबानी इंडोनेशियाई नौसेना ने की थी। इस अभ्यास के दौरान जहाज ने अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा, समुद्र और बंदरगाह में समुद्री गश्ती व टोही विमान (एचएडीआर) अभ्यास तथा सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों में भाग लिया।
  • आईएन पी8आई (समुद्री गश्ती और टोही विमान) ने 14 से 16 फरवरी, 2025 तक इंडोनेशिया के बाली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा के दौरान फ्लाईपास्ट में भाग लिया।
  • भारतीय नौसेना के जहाज रणवीर ने 10 से 12 मार्च, 2025 तक उत्तरी बंगाल की खाड़ी में आईएमबीएल के पास आईएन-बीएन द्विपक्षीय अभ्यास बोंगोसागर के 5वें संस्करण में भाग लिया और बीएन के साथ समन्वित गश्त की।
  • भारतीय नौसेना और फ्रांसीसी नौसेना के बीच द्विपक्षीय अभ्यास वरुणा का आयोजन 19 से 22 मार्च 2025 तक गोवा के तट पर किया गया। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के कैरियर बैटल ग्रुप (सीबीजी) तथा फ्रांसीसी नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी) ने भाग लिया और उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध एवं वायु रक्षा अभ्यास किए।
  • भारतीय नौसेना और रूस के बीच द्विपक्षीय अभ्यास इंद्रा का आयोजन 25 से 29 मार्च 2025 तक चेन्नई के तट पर किया गया। इस अभ्यास ने दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग और आपसी सहभगिता को मजबूत किया।

एचएडीआर और एसएआर

  • हिंद महासागर क्षेत्र सूचना संलयन केंद्र (आईएफसी - आईओआर) में 4 जनवरी 2025 को मलेशियाई संपर्क अधिकारी के माध्यम से प्राप्त सूचना के आधार पर, मलेशियाई ध्वज वाले नौकायन पोत बिट (जिसमें 5 चीनी चालक दल के सदस्य सवार थे) को कैंपबेल बे, अंडमान और निकोबार के पास तैनात मिशन इकाई आईएनएस किर्च द्वारा 1000 लीटर ईंधन प्रदान किया गया, क्योंकि उसका ईंधन कम हो रहा था।
  • ओमान तट के पास एक ईरानी नाव के अनुरोध पर 7 मार्च 2025 को मिशन द्वारा तैनात भारतीय जहाज तरकश ने एक घायल चालक दल के सदस्य (पाकिस्तानी नागरिक) को चिकित्सा सहायता प्रदान की, आरओ संयंत्र की मरम्मत की और जहाज पर ताजे पानी की आपूर्ति बहाल की।
  • भारतीय नौसेना के जहाज चेन्नई ने 23 अप्रैल 2025 को सोमालिया के एयल से लगभग 550 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में स्थित मार्शल द्वीप समूह के ध्वजांकित तेल टैंकर एमवी इनविक्टस पर सवार एक नाविक को चिकित्सा सहायता प्रदान की। जहाज पर आग लगने के कारण तृतीय डिग्री के जलने से घायल चालक दल के सदस्य को आवश्यक चिकित्सा सहायता दी गई।
  • म्यांमार और थाईलैंड में आए विनाशकारी भूकंप के बाद, 28 मार्च 2025 को भारतीय नौसेना का पहला जहाज 30 टन राहत सामग्री लेकर घटना के 12 घंटे के भीतर म्यांमा के यांगून के लिए रवाना हुआ, जिससे 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' के रूप में राष्ट्र की प्रतिबद्धता को बल मिला। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत, पांच भारतीय नौसेना के जहाज सतपुरा, सावित्री, कर्मुक, एलसीयू 52 तथा घड़ियाल को आपदा राहत एवं बचाव कार्य (एचएडीआर) सहायता प्रदान करने के लिए तैनात किया गया और उन्होंने लगभग 512 टन राहत सामग्री पहुंचाई।
  • ओमान के दुक्म से लगभग 385 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में संकटग्रस्त एक समुद्री पोत के बारे में 4 अप्रैल 2025 को मिली सूचना के आधार पर मिशन द्वारा तैनात नौसेना पोत त्रिकंद ने एक पाकिस्तानी नागरिक को चिकित्सा सहायता प्रदान की, जिसके दाहिने हाथ की तीन उंगलियों में गंभीर फ्रैक्चर और घाव थे। पोत के चिकित्सा दल ने तीन घंटे तक चली सर्जरी की, जिसमें टांके लगाना और स्प्लिंट लगाना शामिल था, जिससे रोगी की स्थिति स्थिर हो गई और अंग विच्छेदन से बचा जा सका। इसके अतिरिक्त, चालक दल को चिकित्सा सामग्री भी प्रदान की गई।

चिकित्सा निकासी

  • मुंबई से लगभग 50 समुद्री मील दक्षिण में स्थित ईरानी नौसेना के जहाज बुशहर पर सवार एक ईरानी कैडेट को तीव्र अपेंडिसाइटिस होने के कारण 19 फरवरी 2025 को चिकित्सा सहायता हेतु अस्पताल ले जाने का अनुरोध ईरान की ओर से प्राप्त हुआ। पास में तैनात आईसीजीएस आरुष को तुरंत भेजा गया और उसने कैडेट को 20 फरवरी 2025 को मुंबई पहुंचाया। मरीज का मुंबई स्थित आईएनएचएस अश्विनी में सफलतापूर्वक इलाज किया गया और उसे 25 फरवरी 2025 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
  • पनामा ध्वज वाले मालवाहक पोत एमवी हीलान स्टार (आईएमओ नंबर 9587984) पर सवार तीन चालक दल के सदस्यों को गंभीर रूप से झुलस जाने के कारण चिकित्सा सहायता (मेडिकल इवैक्यूएशन) के लिए 21 मार्च 2025 को एमआरसीसी (एमबीआई) से अनुरोध प्राप्त हुआ। पोत गोवा से लगभग 185 समुद्री मील उत्तर पश्चिम में स्थित था। आईएनएस विक्रांत से एक सी किंग हेलीकॉप्टर भेजा गया और चालक दल को गोवा में आईएनएस हंसा ले जाया गया। इसके बाद, घायल चालक दल के सदस्यों को आगे के चिकित्सा उपचार के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
  • भारतीय जहाज शारदा और एक सी किंग हेलीकॉप्टर ने 13 जून 2025 को सिंगापुर के ध्वज वाले एमवी ईगल वेराक्रूज पर सवार एक भारतीय चालक दल के सदस्य (मल के माध्यम से रक्तस्राव के कारण बेहोश) को चिकित्सा सहायता प्रदान की। नाविक को आगे के चिकित्सा उपचार के लिए सी किंग हेलीकॉप्टर द्वारा कोच्चि ले जाया गया।

 

असैन्य अधिकारियों को सहायता

  • असम सरकार के अनुरोध पर 9 जनवरी 2025 को भारतीय नौसेना की एक गोताखोर टीम को उमरांगसो, दीमा हसाओ जिला (असम) में कोयला खदान में फंसे 11 खनिकों के बचाव हेतु तैनात किया गया। इस अभियान के दौरान टीम ने एनडीआरएफ, सेना के पैरा सेफ्टी बल तथा स्थानीय प्रशासन के साथ घनिष्ठ समन्वय में नौ घंटे गोताखोरी एवं छह घंटे आरओवी (रेस्क्यू इंटरवेंशन) संचालन किया। मिशन की समाप्ति के पश्चात गोताखोर टीम को 13 जनवरी 2025 को वापस बुला लिया गया।
  • तेलंगाना राज्य प्रशासन के अनुरोध पर 23 फरवरी 2025 को श्रीशैलम नहर के बाएं किनारे स्थित सुरंग ढहने की घटना में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए भारतीय नौसेना के छह सदस्यीय गोताखोर दल को तैनात किया गया, जिसे 28 फरवरी 2025 को वापस बुला लिया गया।
  • गोवा के पोंडा स्थित बांदारा नदी में डूबे एक पर्यटक के पार्थिव शरीर की बरामदगी में 2 जून 2025 को भारतीय नौसेना के गोताखोर दल ने राज्य प्रशासन को सहायता प्रदान की।
  • इसके अतिरिक्त, 1 जून 2025 को, भारतीय नौसेना के गोताखोर दल ने एर्नाकुलम नहर, कोच्चि से एक विदेशी प्रशिक्षु अधिकारी (तंजानिया)—जो भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला के पूर्व छात्र थे—का पार्थिव शरीर बरामद किया। आवश्यक चिकित्सा एवं कानूनी प्रक्रियाओं के उपरांत पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग से तंजानिया भेजा गया।
  • विशाखापत्तनम स्थित ईस्ट इंडिया पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (ईआईपीएल) में मेथनॉल टैंक पर बिजली गिरने से लगी आग पर काबू पाने के लिए 7 सितंबर 2025 को भारतीय नौसेना का एक सी किंग हेलीकॉप्टर तैनात किया गया। हेलीकॉप्टर द्वारा कई उड़ानों में पानी एवं फोम गिराकर अथक प्रयासों के बाद आग पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त किया गया।
  • 13 सितंबर 2025 को, उत्तरी गोवा के जिला कलेक्टर के अनुरोध पर, भारतीय नौसेना की एक पांच सदस्यीय गोताखोर टीम को आगाकैम, तिसवाड़ी स्थित जुआरी नदी में लापता व्यक्ति की खोज के लिए तैनात किया गया। व्यापक खोज अभियान के पश्चात 14 सितंबर 2025 को शव बरामद कर आगे की कार्रवाई हेतु नागरिक पुलिस को सौंप दिया गया।

 

स्वदेशीकरण परियोजनाएं

विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत स्वदेशीकरण परियोजनाओं के लिए हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों और संपन्न हुए अनुबंधों का विवरण नीचे दिया गया है:

  • स्वदेशीकरण निदेशालय वर्तमान में डीपीएम दिशानिर्देशों के अनुरूप कुल 17 परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रहा है। इनमें से 16 परियोजनाओं के लिए अनुबंध सफलतापूर्वक संपन्न किए जा चुके हैं, जबकि 1 परियोजना अनुबंध संपन्न होने की प्रक्रिया के अंतिम चरण में है।
  • भारतीय उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत 113 स्टार्टअप्स के माध्यम से कुल 98 समस्या विवरणों पर कार्य किया जा रहा है। इन समस्या विवरणों में 36 डीआईएससी, 4 प्राइम, 8 एडीटीआई, 1 इंडस-एक्स तथा 49 ओपन चैलेंज श्रेणियों के अंतर्गत हैं। कुल 113 स्टार्टअप्स में से 98 स्टार्टअप्स के साथ 76 परियोजनाओं के लिए अनुबंध संपन्न किए जा चुके हैं।
  • भारतीय नौसेना के प्लेटफार्मों पर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को समाहित करने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीडीएफ) योजना के अंतर्गत 33 परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। इनमें से 13 परियोजनाओं के लिए 48.41 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से अनुबंध संपन्न हो चुके हैं। दो परियोजनाएं अनुबंध संपन्न होने के चरण में हैं, 6 परियोजनाओं के लिए अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) तैयार करने की प्रक्रिया जारी है तथा 12 परियोजनाएं आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) चरण में हैं।
  • भारतीय नौसेना डीएपी 2020 के अध्याय-III के अंतर्गत कुल 50 ‘मेक’ परियोजनाओं का संचालन कर रही है। विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत इनका विवरण निम्नानुसार है:
  • वर्तमान में, 'मेक-II' श्रेणी के अंतर्गत 29 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। 15 परियोजनाओं के लिए अनुमोदन (एओएन) प्राप्त हो चुका है। 13 परियोजनाओं के लिए प्रोटोटाइप विकास अनुबंध संपन्न हो चुके हैं और 2 परियोजनाएं ईओआईचरण में हैं। शेष 14 परियोजनाएं व्यवहार्यता अध्ययन/एआईपी चरण के विभिन्न चरणों में हैं।
  • 'मेक I' के अंतर्गत, 4 परियोजनाओं के लिए अनुमोदन (एओएन) प्राप्त हो चुका है और 4 परियोजनाएं व्यवहार्यता अध्ययन/एआईपी चरण के विभिन्न चरणों में हैं। 'मेक III' के अंतर्गत कोई परियोजना नहीं है।
  • 13 संयुक्त सैन्य परियोजनाएं (जिनमें से 11 'मेक II', 1 'मेक III' और 1 'मेक I' संयुक्त परियोजनाएं हैं) भारतीय नौसेना तथा भारतीय वायु सेना के नेतृत्व में संचालित की जा रही हैं।

 

अनुसंधान एवं विकास मार्ग के अंतर्गत परियोजनाएं

अनुसंधान एवं विकास मद के अंतर्गत डीएफपीडीएस-2021 के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से उपयोग उद्योग एवं शिक्षा जगत के साथ जुड़ने और उत्पाद विकास तथा समस्या समाधान के लिए उनकी क्षमता का लाभ उठाने के लिए किया जा रहा है। भारतीय नौसेना उद्योग, आईआईटी और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ कई परियोजनाओं पर काम कर रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा बल (एनएचक्यू) के विभिन्न व्यावसायिक निदेशालयों और कमांड स्तर की इकाइयों द्वारा कुल 154 मामलों पर प्रगति चल रही है। 112.63 करोड़ रुपये के 89 अनुबंध पहले ही संपन्न हो चुके हैं।

 

विदेशी सहयोग

  • क्षेत्र के नौ अलग-अलग देशों के 44 कर्मियों को लेकर रवाना हुए आईएनएस सुनायना को 2025 से अप्रैल से मई तक अफ्रीका के पूर्वी तट पर आईओएस सागर के रूप में तैनात किया गया था। इस तैनाती के दौरान, जहाज ने तंजानिया, मोजाम्बिक, मॉरीशस, सेशेल्स व मालदीव में सद्भावना यात्राएं कीं और मेजबान नौसेनाओं के साथ द्विपक्षीय अभ्यास में भाग लिया।
  • अफ्रीका-भारत प्रमुख समुद्री सहयोग (एआईकेईएमई) 2025 का उद्घाटन 13 अप्रैल 2025 को दार एस सलाम, तंजानिया में किया गया, जो 'महासागर' की व्यापक राष्ट्रीय परिकल्पना के तहत भारतीय और अफ्रीकी देशों के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस आयोजन में कुल नौ अफ्रीकी देशों (कोमोरोस, जिबूती, केन्या, मेडागास्कर, मॉरीशस, मोज़ाम्बिक, सेशेल्स, दक्षिण अफ्रीका और तंजानिया) ने भाग लिया।

 

महिलाओं का सशक्तिकरण और कल्याण

महिलाओं के उत्थान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, भारतीय नौसेना ने पनडुब्बियों को छोड़कर सभी शाखाओं एवं विशिष्टताओं में महिलाओं को अधिकारी और अग्निवीर के रूप में शामिल होने के लिए खोल दिया है। भारतीय नौसेना देश के कार्यबल की जीवंत 'नारी शक्ति' का लाभ उठाने के लिए अग्निपथ योजना का उपयोग करने वाली पहली सेवा बन गई है।

 

भारत सरकार की पहल – डिजिटल इंडिया का कार्यान्वयन

  • आर्म्ड फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड एक त्रि-सैन्य परियोजना है, जिसमें भारतीय नौसेना अग्रणी सेवा है। इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं द्वारा उपयोग किए जा रहे मौजूदा कागज-आधारित पहचान पत्रों को प्रतिस्थापित करना है। इस परियोजना का लक्ष्य रक्षा प्रतिष्ठानों में एक मजबूत और प्रौद्योगिकी-आधारित भौतिक सुरक्षा अवसंरचना स्थापित करना है। नौसेना में कार्यरत 90,000 से अधिक सेवा/डीएससी कर्मियों और रक्षा नागरिकों को एएफएसएसी के लिए नामांकित किया जा चुका है।
  • भारत सरकार के 'मिशन कर्मयोगी' के तहत, सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल लागू किए गए हैं। एक कदम आगे बढ़ते हुए, नौसेना मुख्यालय/डीसीपी, कर्मयोगी भारत के समन्वय से, नौसेना के कर्मियों के लिए विशेष रूप से अनुकूलित डोमेन-विशिष्ट ई-लर्निंग पाठ्यक्रम अपलोड करने की प्रक्रिया में है।

 

भारतीय वायु सेना

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी सर्वांगीण क्षमता का प्रदर्शन किया और अंतरिक्ष शक्ति बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध रही। इस ऑपरेशन ने सटीक और त्वरित सैन्य परिणामों को निर्णायक रूप से आकार देने की भारतीय वायु सेना की क्षमता को प्रदर्शित किया। चल रही तकनीकी क्रांति को ध्यान में रखते हुए, भारतीय वायु सेना ने 'लड़ने की तरह प्रशिक्षण' के सिद्धांत का पालन करते हुए नवाचार एवं अनुकूलनशीलता पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें अंतर-सेवा सहयोग और संयुक्त योजना पर बल दिया गया है। नई प्रणालियों, हथियारों व उपकरणों का सफल एकीकरण और उपयोग, रसद, रखरखाव एवं आत्मनिर्भरता पर भारतीय वायु सेना के निरंतर ध्यान का प्रमाण है।

 

वायु रक्षा

भारतीय हवाई क्षेत्र की सक्रिय निगरानी के लिए रडार तैनात किए गए थे। लड़ाकू विमानों द्वारा संचालित हवाई निगरानी चौकियों (ओआरपी) पर चौबीसों घंटे कर्मियों की तैनाती थी। इसके अतिरिक्त, असामान्य हवाई गतिविधि (धीमी गति से चलने वाले विमानों) से निपटने के लिए परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों द्वारा भी हवाई निगरानी चौकियां (ओआरपी) बनाए रखी गईं। अप्रैल और मई 2025 के महीनों के दौरान वायु रक्षा अभियानों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिसका विवरण इस प्रकार है:

  • एकीकृत वायु कमान एवं नियंत्रण प्रणाली ने त्रुटिहीन रूप से कार्य किया और देश के सभी सेंसरों से प्राप्त हवाई निगरानी डेटा को एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह डेटा आकाशतीर और आईएमएसएएस के माध्यम से क्रमशः सेना तथा भारतीय वायु सेना को उपलब्ध कराया गया। इस एकीकृत डेटा ने देश भर में हवाई स्थिति का सटीक आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पश्चिमी मोर्चे पर निर्बाध एवं प्रभावी वायु रक्षा गतिविधियों को सुनिश्चित किया।
  • देश भर से प्राप्त सी-यूएएस उपकरणों को अल्पकाल में सीमाओं पर तैनात किया गया। ये स्वदेशी सी-यूएएस उपकरण अभियान के दौरान प्रभावी साबित हुए और पश्चिमी मोर्चे पर इनका व्यापक उपयोग किया गया, जिससे भारतीय वायु सेना के ठिकानों को गंभीर क्षति से बचाया जा सका।
  • लेह-सरसावा-दिल्ली-जयपुर-उदयपुर-अहमदाबाद-भावनगर-दीव को जोड़ने वाली रेखा के पश्चिम में स्थित संयुक्त उपयोगकर्ता भारतीय वायु सेना हवाई अड्डों (जेयूए) सहित कुल 32 हवाई अड्डों को 7 मई 2025 से सभी नागर उड़ानों के लिए बंद घोषित कर दिया गया था। इस रेखा के पश्चिम में स्थित सभी 25 अंतरराष्ट्रीय मार्गों को भी सभी असैन्य यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। 7 से 9 मई 2025 तक नागरिक गैर-अनुसूचित उड़ानें/उड़ान प्रशिक्षण संगठन की उड़ानें/साहसिक या मनोरंजक हवाई गतिविधियां/किसी भी प्रकार की हवाई सर्वेक्षण गतिविधि भी प्रतिबंधित थी। इसे 12 मई 2025 से सामान्य कर दिया गया।

 

नक्सल-रोधी टास्क फोर्स के अभियान

दक्षिण बस्तर (विशेष रूप से कोरागट्टलू पहाड़ियों) में 21 अप्रैल से 10 मई 2025 के बीच भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा बड़े पैमाने पर नक्सल-रोधी अभियान चलाए गए। इन अभियानों के दौरान, भारतीय वायु सेना ने 2609 सैनिकों, 158 टन सामान और 18 घायलों को एयरलिफ्ट किया। हेलीकॉप्टर अभियानों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की जमीनी कार्रवाई के लिए जीवन रेखा का काम किया, जिसमें 31 नक्सलियों को मार गिराया गया। गोला-बारूद, भोजन और पानी जैसी महत्वपूर्ण आपूर्ति नक्सल प्रभावित पहाड़ियों पर सैनिकों तक पहुंचाई गई। सैनिकों की तैनाती और वापसी साथ-साथ की गई। अग्रिम क्षेत्रों से जमीनी स्तर तक सुरक्षित और प्रभावी अभियानों ने इन अभियानों में सीएपीएफ की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

अंतर्राष्ट्रीय अभ्यास/एयरलिफ्ट

  • हिंद महासागर क्षेत्र (गोवा तट के पास) में 9 जनवरी, 2025 को भारतीय वायु सेना और फ्रांसीसी नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 'चार्ल्स डी गॉल' पर तैनात विमानों के बीच एक हवाई अभ्यास आयोजित किया गया। इसमें भारतीय वायु सेना और फ्रांसीसी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के लड़ाकू विमानों तथा अन्य सहायक विमानों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, 9 जनवरी 2025 को गोवा तट के पास फ्रांसीसी सीएसजी के साथ एक अभ्यास में 2 आईएल-78 विमानों ने एएआर (एएआर) और 1 सी-130 विमान ने एसएआर (एसएआर) की भूमिका निभाई। एएआर अभ्यास भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों (6 स्क्वाड्रन के 4 जग और 22 स्क्वाड्रन के 4 एसयू-30) के लिए किया गया। 78 स्क्वाड्रन और 87 स्क्वाड्रन से एक-एक एयरक्रू ने 8 जनवरी 2025 को फ्रांसीसी टीम के साथ हुए इस अभ्यास में भाग लिया।
  • एक सी-295 विमान का उपयोग भारतीय सेना के दल और माल को मालदीव ले जाने के लिए किया गया, ताकि वे एकुवेरिन अभ्यास में भाग ले सकें। भारतीय सेना के दल (45 कर्मी तथा 2.0 टन भार) की तैनाती 1 फरवरी 2025 को हुई और तैनाती 16 फरवरी 2025 को हुई।
  • दो आईएल-78 विमानों ने 3 से 6 फरवरी 2025 तक ट्रोपेक्स (संयुक्त कार्य-प्रक्रिया चरण) में भाग लिया। इनका उपयोग भारतीय वायु सेना के विमानों को वायु-संरक्षण (एएआर) प्रदान करने के लिए किया गया। एक आईएल-78 ने 18 फरवरी से 2 मार्च 2025 तक सुलूर से संचालन करते हुए अभ्यास के मुख्य चरण में भाग लिया। दूसरे आईएल-78 ने 24 फरवरी से 2 मार्च 2025 तक गोवा से संचालन करते हुए अभ्यास के मुख्य चरण में भाग लिया। भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना दोनों के विमानों के लिए वायु-संरक्षण (एएआर) किया गया।
  • एक सी-17 विमान को अभ्यास धर्म गार्जियन-25 में भाग लेने के लिए जापान में भारतीय सेना की टुकड़ी को एयरलिफ्ट करने का कार्य सौंपा गया था। भारतीय सेना की टुकड़ी (120 कर्मी और 22.0 टन भार) की तैनाती 22-24 फरवरी 2025 को की गई थी। इसकी प्रक्रिया 8-10 मार्च 2025 को समाप्त हुई।
  • भारतीय वायु सेना ने 31 मार्च से 11 अप्रैल 2025 तक ग्रीस के आंद्राविदा में आयोजित अभ्यास इनियोचोस-25 में सफलतापूर्वक भाग लिया। 24 अप्रैल 2025 को जामनगर से काहिरा (पश्चिम) तक 8 स्क्वाड्रन के 4 एसयू-30 विमानों की ढुलाई के लिए वायु-संचालन सहायता हेतु 2 आईएल-78 विमानों का उपयोग किया गया। इनमें से 1 आईएल-78 ने अबू धाबी से पुल टैंकर के रूप में और 1 आईएल-78 ने नालिया से पुश टैंकर के रूप में परिचालन किया। 21 मार्च से 26 मार्च 2025 तक आदमपुर से आंद्राविदा, ग्रीस तक भार और अभ्यास दल की एयरलिफ्ट के लिए 2 सी-17 विमानों का इस्तेमाल हुआ।
  • भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त अभ्यास 'दुस्तलिक-2025' का आयोजन 15 से 28 अप्रैल 2025 तक एफटीएन औंध, पुणे में किया गया। इस अभ्यास में एमआई-17 और गरुड़ ने भाग लिया।
  • भारतीय वायु सेना ने 1 से 14 अप्रैल 2025 तक विशाखापत्तनम में आयोजित अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ (अमरीकी वायु सेना के नेतृत्व में त्रि-सैन्य एचएडीआर अभ्यास) में भाग लिया। इस अभ्यास में सी-130जे और एमआई-17 वी5 विमानों के साथ गरुड़ और रैपिड एयर मेडिकल टीम ने भी भाग लिया। भारतीय वायु सेना ने दो एसएमईई (एसएमई) अभ्यासों में भी भाग लिया।
  • भारतीय वायु सेना ने 17 अप्रैल से 12 मई 2025 तक संयुक्त अरब अमीरात के अल-धाफरा में आयोजित अभ्यास डेजर्ट फ्लैग-10 में मिग-29 और जगुआर विमानों के साथ-साथ 159 भारतीय वायु सैनिकों के साथ सफलतापूर्वक भाग लिया।
  • भारत और अमरीका की वायु सेनाओं के बीच संयुक्त विशेष बल अभ्यास 'अभ्यास टाइगर क्लॉ 25' का आयोजन 26 मई से 9 जून 2025 तक उत्तर भारत के विभिन्न स्थानों पर किया गया। यह भारत और अमरीका के बीच पहला स्वतंत्र वायु सेना विशेष बल अभ्यास था। भारतीय वायु सेना और अमरीका की वायु सेना के सी-130 जेट विमानों द्वारा कुल 113 छलांगें लगाई गईं।
  • भारतीय सेना ने 27 अगस्त 2025 से 19 सितंबर 2025 तक अमरीका में आयोजित युद्धाभ्यास में भाग लिया। भारतीय सेना की टुकड़ी और 50 कर्मियों एवं 24 टन भार वाले कार्गो को उतारने तथा ले जाने के लिए एक सी-17 विमान का उपयोग किया गया। सैनिकों को लाना और वापस ले जाना 21 सितंबर 2025 को पूरा हुआ।
  • भारत की त्रि-सेना टुकड़ी ने 28 अगस्त 2025 से 10 सितंबर 2025 तक मिस्र में आयोजित अभ्यास 'एक्स ब्राइट स्टार' में भाग लिया। भारतीय वायु सेना ने एसयू-30 एमकेआई और सी-130-जे विमानों के साथ 227 कर्मियों को शामिल किया। सी-130-जे विमानों ने हवाई संचालन (स्थैतिक रेखा और कॉम्बैट फ्री फॉल) के अभ्यास में भाग लिया। टुकड़ी की तैनाती और वापसी के लिए दो आईएल-78, दो सी-17 और एक आईएल-76 विमानों को तैनात किया गया था।
  • भारतीय वायु सेना ने 2 सितंबर 2025 को हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात और फ्रांस के साथ एक्स डेजर्ट नाइट 25.1 अभ्यास में भाग लिया।

 

राष्ट्रीय अभ्यास

  • येलाहांका से गोवा तक एएफएसओडी टीम को एयरलिफ्ट करने के लिए 3 मार्च 2025 को एक आईएल-76 विमान का उपयोग किया गया। एसएसी के दो एएन-32 विमानों ने गोवा में अभ्यास में भाग लिया और 5 मार्च 2025 को अगाटी और 6 मार्च 2025 को कवरत्ती में एयर लैंडिंग ऑपरेशन किए। 8 मार्च 2025 को एक सी-17 विमान द्वारा एएफएसओडी टीम को येलाहांका वापस उतारा गया।
  • भारतीय वायु सेना ने परिचालन उत्कृष्टता और संयुक्त तैयारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पश्चिमी क्षेत्र में 28 अक्टूबर से 11 नवंबर 2025 तक अभ्यास महागुजराज-25 का संचालन किया।

 

राष्ट्रीय स्तर पर एचएडीआर अभियान

  • बेहद कम समय की सूचना पर 7 जनवरी 2025 को एक सी-130 विमान ने भारतीय नौसेना के गोताखोरों की टीम को विशेषज्ञ उपकरणों के साथ विशाखापत्तनम से कुंभिरग्राम तक एयरलिफ्ट किया। टीम और 3 टन के उपकरणों को फिर एमआई-17 विमान द्वारा कुंभिरग्राम से असम के दीमा हासो जिले के उमरांगशो स्थित दुर्घटनास्थल तक एयरलिफ्ट किया गया। एक अन्य एमआई-17 विमान ने 8 जनवरी 2025 को एक भारी-भरकम पंप को ऑपरेटरों सहित कुंभिरग्राम से दुर्घटनास्थल तक एयरलिफ्ट किया। 8/9 जनवरी 2025 की रात को एक सी-130 विमान ने कोल इंडिया लिमिटेड, चंद्रपुर के 4 टन के भारी-भरकम सक्शन पंप को छह ऑपरेटरों सहित नागपुर से कुंभिरग्राम तक एयरलिफ्ट किया। इसके बाद एमआई-17 विमान ने 9 जनवरी 2025 को दो शटल में उपकरणों को कुंभिरग्राम से दुर्घटनास्थल तक पहुंचाया।
  • हकीमपेट से श्री सलेम तक 23 फरवरी 2025 को एनडीआरएफ के तीन कर्मियों की टीम को एयरलिफ्ट करने के लिए दो चेतक हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया गया। एनडीआरएफ के कर्मियों को ले जाने के लिए एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर येलाहांका में स्टैंडबाय पर रखा गया था। केरल एसडीआरएफ के दो कुत्तों और उनके चार हैंडलरों को कोच्चि से हकीमपेट तक 5 मार्च, 2025 की सुबह एएन-32 विमान द्वारा एयरलिफ्ट किया गया। इसके बाद उन्हें दो चेतक हेलीकॉप्टरों द्वारा डोमेलपेटा सुरंग स्थल पर स्थित हेलीपैड तक पहुंचाया गया।
  • उत्तराखंड के 'माणा' में 28 फरवरी 2025 को एक भीषण त्रासदी घटी, जब एक ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर बीआरओ के एक श्रमिक शिविर पर गिर गया। बचाव अभियान के तहत, भारतीय वायु सेना ने 28 फरवरी 2025 से 3 मार्च 2025 के बीच विभिन्न परिवहन विमानों एवं हेलीकॉप्टरों जैसे कि डीओ-228, एमआई-17 और चीता को तैनात किया। डीओ-228 का उपयोग डीआईबीओडीएस उपकरण और संचालकों को दिल्ली से देहरादून ले जाने के लिए किया गया। एमआई-17 हेलीकॉप्टर देहरादून/गौचर से जोशीमठ के बीच संचालित हुए और चीता हेलीकॉप्टर जोशीमठ तथा माणा के बीच संचालित हुए। बचाव अभियान के दौरान भारतीय वायु सेना ने डीआईबीओडीएस संचालकों सहित 90 एनडीआरएफ/एसडीआरएफ/आईटीबीपी कर्मियों, 5 घायलों, 2 शवों और 2.15 टन भार को एयरलिफ्ट करने में सहायता प्रदान की।
  • असम के तिनसुकिया जिले में फंसे 14 लोगों को बचाने के लिए 1 जून 2025 को भारतीय वायु सेना के एमआई-17 1V का इस्तेमाल हुआ।
  • बागडोगरा से छतेन तक एनडीआरएफ के 30 कर्मियों और 1.7 टन राहत सामग्री को एयरलिफ्ट करने के लिए 3 जून 2025 को भारतीय वायु सेना के एमआई-17 V5 का उपयोग किया गया।

 

घायलों को निकालना

  • केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के एक नागरिक मरीज को 22 अप्रैल 2025 को लेह से चंडीगढ़ एयरलिफ्ट किया गया।
  • त्रिवेणी ऑपरेशन के दौरान अप्रैल 2025 में चार घायलों को निकालने के मिशन चलाए गए।
  • केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर सरकार के अनुरोध पर, 19 घायलों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई गई।
  • 33 असम राइफल्स के दिवंगत राइफलमैन (जीडी) रणजीत सिंह कश्यप और एक जेसीओ के पार्थिव शरीर को 22 सितंबर 2025 को रायपुर से जगदलपुर एयरलिफ्ट करने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई गई।

 

एचएडीआर अभियान (अंतर्राष्ट्रीय)

  • 81 स्क्वाड्रन के एक सी-17 विमान का उपयोग 10 मार्च 2025 को थाईलैंड के मैसोट से 286 भारतीयों को एयरलिफ्ट करने के लिए किया गया था। इन भारतीयों को विदेश मंत्रालय द्वारा म्यांमा (दक्षिण पूर्व एशिया साइबर धोखाधड़ी रैकेट) से बचाया गया था। एयरलिफ्ट की व्यवस्था निकटतम एयरबेस मैसोट, थाईलैंड से हिंडन तक की गई थी। अगले दिन, 11 मार्च 2025 को, एक अन्य सी-17 विमान का उपयोग 266 भारतीयों के अगले समूह को एयरलिफ्ट करने के लिए किया गया। भारतीय वायु सेना ने हिंडन पहुंचने के बाद विस्थापितों के वितरण के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की टीमों को प्रशासनिक सहायता प्रदान करना भी सुनिश्चित किया।
  • ईरान-इजराइल युद्ध के बाद भारतीय प्रवासियों को निकालने के लिए भारतीय वायु सेना के सी-17 विमानों का उपयोग किया गया। पहले सी-17 विमान ने 23-24 जून 2025 को जॉर्डन से 171 यात्रियों को एयरलिफ्ट किया, जबकि दूसरे सी-17 ने मिस्र से 264 यात्रियों को एयरलिफ्ट किया। तीसरे सी-17 ने 24 से 25 जून 2025 के बीच मिस्र से 224 यात्रियों को एयरलिफ्ट किया।
  • 24 मई 2025 को चिकित्सा आपात स्थिति के कारण भारतीय वायु सेना के सी-130 विमान का उपयोग काठमांडू से दिल्ली तक भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी को एयरलिफ्ट करने के लिए किया गया।
  • म्यांमा भूकंप के बाद सी-130 और सी-17 विमानों ने 177 टन राहत सामग्री और 198 कर्मियों को हड्डियांक रक्षा (एचएडीआर) अभियानों के लिए एयरलिफ्ट किया।

 

त्रि-सैन्य एकीकरण

  • भारतीय वायु सेना की निरीक्षण एवं सुरक्षा शाखा तीनों सेनाओं के लिए समान विमानन मानकों को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। इसने 'वायु दल के लिए वर्गीकरण एवं उपकरण रेटिंग योजना' पर त्रि-सैन्य आदेश के रूप में समान विमानन मानकों का पहला ढांचा प्रकाशित करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
  • तीनों सेनाओं के लिए एक समान एयरोस्पेस सुरक्षा संगठन के गठन की प्रक्रिया को 26 जुलाई, 2024 को मंजूरी दी गई थी। भारतीय वायु सेना के एक-एक अधिकारी की भारतीय सेना और भारतीय नौ सेना के उड़ान सुरक्षा निदेशालयों में क्रॉस पोस्टिंग 3 मार्च 2025 को प्रभावी कर दी गई है। भारतीय सेना और भारतीय नौ सेना से पारस्परिक पोस्टिंग निकट भविष्य में प्रभावी की जाएगी।
  • मुख्यालय आईडीएस के अधीन प्रधान रखरखाव अधिकारी समिति (पीएमओसी) के तत्वावधान में साझा परिसंपत्तियों के लिए रखरखाव और रसद प्रबंधन के अंतर-सैन्य एकीकरण को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी संदर्भ में, रखरखाव और सूची प्रबंधन (वायु परिसंपत्तियां) के अंतर-सेवा एकीकरण पर डीएमए कार्य निर्देश 2/2024 - संरक्षण समन्वय, सीडीएस तथा सचिव डीएमए की सहमति से 11 मार्च 2024 को जारी किया गया है।
  • भारतीय वायु सेना की निरीक्षण एवं सुरक्षा शाखा साझा विमानन मानकों को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। साझा विमानन मानकों के ढांचे के अंतर्गत एईबी, एयरकैट्स और जीईबी टीमों द्वारा तीनों सेनाओं में संयुक्त परीक्षाएं आयोजित करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय सेना और भारतीय तटरक्षक बल के पायलटों के लिए संयुक्त सिम्युलेटर प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिससे आपसी सहभागिता एवं सहयोग को बढ़ावा मिला। इसके अतिरिक्त, साझा सेवा शब्दावलियों की स्थापना की गई है, जो उड़ान परीक्षणों के कुशल संचालन को सक्षम बनाती हैं और सेवाओं के बीच समग्र तालमेल को बढ़ाती हैं।
  • संयुक्त संचार आर्किटेक्चर (जेसीए) पर त्रि-सैन्य लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एप्लीकेशन (टीएलएमएमए) और त्रि-सैन्य लॉजिस्टिक्स एंड मेंटेनेंस मैनेजमेंट एप्लीकेशन (टीएलएमएमए) के संचालन प्रयासों के माध्यम से एमएम ईआरपी तथा आईएम ईआरपी के एकीकरण की दिशा में प्रयास जारी हैं।
  • मुख्यालय आईडीएस ने अग्रणी सेवा के रूप में भारतीय वायु सेना को त्रि-सेवाओं में सामान्य गोला-बारूद भंडारण की कार्यप्रणाली को अंतिम रूप देने के लिए एक बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। पर्यावरण नियंत्रण की आवश्यकता न होने वाले भारतीय वायु सेना के वायु शस्त्र भंडारों को भारतीय वायु सेना के गोला-बारूद डिपो में भंडारण के लिए प्रस्तावित किया गया था।

स्वदेशीकरण/आत्मनिर्भरता अभियान

  • रक्षा मंत्रालय ने सरकार की आत्मनिर्भरता पहल को बढ़ावा देने और आयात कम करने के उद्देश्य से स्वदेशीकरण के लिए 509 वस्तुओं की पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां (पीआईएल) जारी की हैं। भारतीय वायु सेना से संबंधित 138 वस्तुओं में से, रखरखाव शाखा से संबंधित 27 वस्तुएं चौथी और पांचवीं पीआईएल में शामिल हैं। इन 27 वस्तुओं में से 13 वस्तुओं का स्वदेशीकरण हो चुका है और शेष 14 वस्तुएं स्वदेशीकरण के विभिन्न चरणों में हैं।
  • पिछले एक दशक में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के परिणामस्वरूप लगभग 76,000 प्रकार के स्पेयर पार्ट्स का स्वदेशीकरण हुआ है। उत्पादन वर्ष 2024-25 के दौरान 1,482 स्पेयर पार्ट्स का स्वदेशीकरण किया गया है और चालू वर्ष में अब तक 328 प्रकार के स्पेयर पार्ट्स का स्वदेशीकरण किया गया है। 2024-25 के लिए कुल विदेशी मुद्रा (एफई) बचत लगभग 406.15 करोड़ रुपये है। वर्तमान साल में अब तक 317.33 करोड़ रुपये की एफई बचत हासिल की गई है।
  • भारतीय वायु सेना (आईएएफ) अपनी नवोन्मेषी पहल 'मेहर बाबा प्रतियोगिता' (एमबीसी) के माध्यम से मानवरहित और स्वायत्त हवाई वाहनों के क्षेत्र में विशिष्ट प्रौद्योगिकी विकास कर रही है। एमबीसी भारतीय उद्योग, शिक्षा जगत और उपयोगकर्ताओं के बीच एक साझा मंच प्रदान करके उनकी खाई को पाटने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। इस प्रतियोगिता का पहला संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें एक भारतीय स्टार्टअप को झुंड ड्रोन-सक्षम प्रणाली के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया गया। प्रतियोगिता का दूसरा संस्करण 29 जुलाई 2024 को संपन्न हुआ और एयरो इंडिया-2025 में विजेताओं को आरआरएम श्री संजय सेठ द्वारा सम्मानित किया गया। आईएएफ द्वारा प्रत्येक टीम को 2 करोड़ रुपये से अधिक की विकास निधि भी प्रदान की गई। इस प्रतियोगिता के दो सफल संस्करणों के बाद, एमबीसी-3 की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य 'आत्मनिर्भरता' को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करना है।
  • भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए आरपीए/ड्रोन/एसएएम सिस्टम में एक कुशल और मजबूत रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में सफलता हासिल की है। मेहर बाबा प्रतियोगिता-I के शीर्ष पांच विजेताओं को तीनों सेनाओं से 800 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं, जबकि शीर्ष 20 टीमों को 200 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं। इन टीमों ने 700 से अधिक लोगों को उच्च वेतन वाली नौकरियां प्रदान की हैं। इसके अलावा, प्रतिभागियों को विभिन्न संगठनों से रसद, चिकित्सा, कृषि आदि क्षेत्रों में उपयोग के लिए इसी तरह के ड्रोन की डिलीवरी के ऑर्डर भी मिले हैं। इस प्रतियोगिता ने प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप, 2030 तक भारत को ड्रोन हब बनाने के लिए स्वदेशी ड्रोन उद्योग के विकास को गति प्रदान की है।

 

भारतीय वायु सेना द्वारा आईजीए/ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से आत्मनिर्भरता के प्रयास

  • वर्तमान में, विदेशी ओईएम के साथ संयुक्त उद्यम/सहयोग परियोजना के तहत तीन मेक-III परियोजनाएं विभिन्न चरणों में चल रही हैं। भारतीय वायु सेना ने अंतर्राष्ट्रीय सशस्त्र अनुबंध (आईजीए) के तहत भारत में विनिर्माण/संसाधन निर्माण के लिए 223 प्रकार के स्पेयर पार्ट्स की पहचान की है। इसके लिए दो संयुक्त उद्यम और एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। रूसी/सोवियत मूल के शस्त्रों और रक्षा उपकरणों से संबंधित स्पेयर पार्ट्स, घटकों, उपकरणों व अन्य सामग्रियों के संयुक्त विनिर्माण में पारस्परिक सहयोग पर एक आईजीए पर 4 सितंबर 2019 को व्लादिवोस्तोक में आयोजित 20वें भारत-रूस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। आईजीए रूस के ढांचे के तहत हासिल की गई प्रगति और किए गए प्रयासों का विवरण नीचे दिया गया है:
  • भारतीय वायु सेना ने भारत में विनिर्माण/उत्पादन के लिए 223 प्रकार के स्पेयर पार्ट्स की पहचान की है। इन 223 प्रकारों में से, हैदराबाद स्थित स्पेस एरा ने 24 प्रकारों के लिए पीजेएससी क्रेट के साथ संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) बनाया है। स्पेस एरा, हैदराबाद को 207 करोड़ रुपये का आपूर्ति आदेश दिया गया है। 159 वस्तुओं में से 146 वस्तुओं का संयुक्त प्राप्ति निरीक्षण (जेआरआई) पूरा हो चुका है और जेआरआई के दौरान 13 वस्तुएं अनुपयोगी पाई गईं।
  • मैग्नम एयरोस्पेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और रुबिन एविएशन कॉर्पोरेशन के साथ संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) के तहत आईएल सीरीज, एमआई-17 सीरीज और एएन-32 विमानों के पहियों, ब्रेक तथा हब के 76 प्रकार के स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति की जाएगी। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) आईजीए दिशानिर्देशों के तहत आवश्यक स्पेयर पार्ट्स के लिए आपूर्ति आदेश देने की प्रक्रिया में है।
  • एसयू-30 के तीन घटकों (एयर टू एयर हीट एक्सचेंजर, कंबाइंड कंट्रोल पैनल और डिहाइड्रेटर) के लिए समझौता ज्ञापन पर 15 अगस्त 2023 को मैग्नम एविएशन लिमिटेड तथा पीजेएससी यूएसी के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। एचएएल ने सूचित किया है कि कंबाइंड कंट्रोल पैनल और डिहाइड्रेटर का स्वदेशीकरण किया गया है। रूसी ओईएम और मैग्नम एविएशन लिमिटेड के बीच एयर टू एयर हीट एक्सचेंजर के लिए संयुक्त उद्यम प्रगति पर है।
  • रूस के लिए एसयू-30 विमान श्रृंखला की दस इकाइयों के लिए निविदा अनुरोध (आरएफपी) 22 जनवरी 2024 को एए, मॉस्को और डीपीओ (आईसीई-1) को रूसी ओईएम के साथ साझा करने के लिए भेजा गया था। एए मॉस्को ने सूचित किया है कि आरएफपी दिनांक 12 फरवरी 2024 के एए/एमओएस/जेवी (आईजीए) के माध्यम से एनएएससी और ओईएम (पीजेएससी यूएसी) को जारी किया गया है। रूसी ओईएम की प्रतिक्रिया प्रतीक्षित है।

राष्ट्र निर्माण

  • भारतीय वायु सेना को 26 जनवरी 2025 तक 7,50,000 वृक्षारोपण का लक्ष्य दिया गया था। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत निर्धारित समय के भीतर इसे पूरा कर लिया गया है।
  • असम के माननीय राज्यपाल और तीन अधिकारियों को एलजीबीआई हवाई अड्डे गुवाहाटी से लखीमपुर, नारायणपुर एचएस फील्ड तक ले जाने के लिए 2 अप्रैल 2025 को एमआई-17 विमान उपलब्ध कराया गया था।
  • जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के माननीय राज्यपाल को 17 अप्रैल 2025 को जम्मू से 4 आरआर हेलीपैड, भदेरवाह जिला डोडा तक और वापस लाने के लिए एमआई-17 हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराया गया था।
  • भारतीय वायु सेना ने 21 जुलाई 2025 को परम पावन 14वें दलाई लामा और उनके दल को सिंधु घाट, लेह से पदुम, ज़ांस्कर तक और लौटने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा प्रदान की, जिसकी वापसी 26 जुलाई 2025 को हुई।
  • लद्दाख के माननीय उपराज्यपाल तथा उनके दल को लेह से पदुम तक और वापस लाने के लिए 114 एचयू के तीन चीतल हेलीकॉप्टर 20 सितंबर 2025 को उपलब्ध कराए गए थे।

 

13 बैंकों के साथ समझौता ज्ञापन

वायु सैनिकों, राष्ट्रीय सुरक्षा कर्मियों (एनसीएस), अग्निवीरवायु, भारतीय वायु सेना के पूर्व सैनिकों, वीर नारियों तथा उनके परिवारों को प्रदान किए जाने वाले ‘रक्षा वेतन पैकेज’ (डीएसपी) बैंक खातों के अंतर्गत उपलब्ध अतिरिक्त लाभों को सुदृढ़ एवं उन्नत करने के उद्देश्य से 13 बैंकों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पहल के अंतर्गत सामान्य बचत बैंक खातों को डीएसपी खातों में परिवर्तित करने हेतु एक विशेष अभियान भी संचालित किया गया। इसके परिणामस्वरूप, कई बैंकों द्वारा डीएसपी खातों से जुड़ी सुविधाओं को और अधिक विस्तारित एवं सुदृढ़ किया गया है। इनमें वायु दुर्घटना बीमा के अंतर्गत मृत्यु कवर, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर, स्थायी एवं आंशिक दिव्यांगता कवर, मृतक कर्मियों के आश्रित बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता, एयर एम्बुलेंस सुविधा, बालिका विवाह सहायता, नियमित चिकित्सा जांच तथा चिकित्सा बीमा जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल हैं।

 

खरीद/समावेशन

  • आयरलैंड वायु सेना ने एयरबस डिफेंस एंड स्पेस से सी-295 मेगावाट विमान का अनुबंध किया है। दो स्क्वाड्रन इस विमान से लैस हो चुके हैं। पहला स्वदेशी निर्मित सी-295 विमान 2026 में डिलीवर होने की संभावना है। सी-295 सिम्युलेटर भी चालू हो चुका है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के पूंजीगत बजट के लिए 64,811.68 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसमें से पूंजीगत अधिग्रहण के लिए 59,646.83 करोड़ रुपये और पूंजीगत कार्यों के लिए 5,164.85 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।
  • वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के राजस्व बजट के लिए 55,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसमें से 24,000 करोड़ रुपये वेतन मद के लिए और 31,000 करोड़ रुपये वेतन के अतिरिक्त (ओटीएस) मद के लिए हैं।

 

मुख्यालय एकीकृत रक्षा कार्मिक

रक्षा बलों के मध्य समन्वय एवं एकीकरण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आंतरिक रक्षा विभाग (आईडीएस) मुख्यालय द्वारा निरंतर और ठोस प्रयास किए गए हैं। विशेष रूप से, चल रहे ऑपरेशन सिंदूर और विभिन्न संयुक्त अभ्यासों से प्राप्त अनुभवों एवं सीखों का समग्र विश्लेषण किया गया है तथा उन्हें क्रियान्वित करने अथवा क्रियान्वयन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की जा रही है। समन्वय एवं एकीकरण को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु उठाए गए अनेक बुनियादी व संरचनात्मक कदमों पर विशेष बल दिया गया है। इनमें आठ नए संयुक्त सिद्धांत/नियमावलियों का प्रकाशन, सभी रक्षा बलों द्वारा अनिवार्य अनुपालन के लिए कई संयुक्त आदेशों एवं निर्देशों का जारी किया जाना, रक्षा खरीद नियमावली–2025 का प्रकाशन, साइबर एवं अंतरिक्ष क्षेत्रों पर विशेष ध्यान के साथ बहु-क्षेत्रीय संचालन (एमडीओ) को बढ़ावा देना तथा शिक्षा जगत और उद्योग (एमएसएमई सहित) के साथ रक्षा बलों के बीच अधिक सशक्त सहभागिता एवं तालमेल स्थापित करना शामिल है।

 

क्षमता विकास/आत्मनिर्भरता

  • भारत की व्यापक रणनीतिक परिकल्पना में सशस्त्र बल शक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन हैं, जिसे विजन इंडिया 2047 में व्यक्त किया गया है। सशस्त्र बल विजन 2047 का केंद्र बिंदु सशस्त्र बलों को एक आधुनिक, चुस्त, आत्मनिर्भर व तकनीकी रूप से श्रेष्ठ बल में रूपांतरित करना है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा एवं योजना बनाने में सक्षम हो और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सके। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, सशस्त्र बल विजन 2047 को दो भागों में तैयार किया गया है; इस दस्तावेज का पहला भाग निकट भविष्य में सार्वजनिक किया जाएगा।
  • तीनों सेनाओं व केंद्रीय निगम के पूंजी अधिग्रहण मामलों में आरएफआई, एसक्यूआर और एसओसी के विभिन्न चरणों में समानता एवं आपसी सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रगति की गई है। 1 जनवरी 2025 से अब तक 350 पूंजी अधिग्रहण मामलों की जांच की जा चुकी है और उन पर प्रगति जारी है।
  • आपातकालीन खरीद पर एक विस्तृत अध्ययन किया गया है ताकि आपातकालीन खरीद के माध्यम से दूर की जा रही महत्वपूर्ण परिचालन कमियों को उजागर किया जा सके। यह अध्ययन 2019-2025 तक की सभी आपातकालीन खरीदों के लिए प्रमुख अधिग्रहणों, फोकस क्षेत्रों और वार्षिक अधिग्रहण योजना (एएपी) के साथ संरेखण को शामिल करता है।
  • रक्षा यंत्र एप्लिकेशन का उपयोग पूंजी अधिग्रहण योजनाओं के डेटाबेस को बनाए रखने और अपडेट करने के साथ-साथ तीनों सेवाओं के पूंजी अधिग्रहण एवं क्षमता विकास से संबंधित रुझानों के विश्लेषण के लिए किया जाता है। इस एप्लिकेशन का उपयोग सेवा खरीद बोर्ड (एसपीबी) की कार्रवाई के डिजिटलीकरण के लिए भी किया जा रहा है। वर्तमान में, कुछ पूर्व-कार्यकारी गतिविधियां, जैसे कि सेवा मुख्यालयों द्वारा ई-एसओसी का अद्यतन, एसपीबी के एजेंडा बिंदुओं के साथ ऑनलाइन बैठक सूचनाओं का आदान-प्रदान, बैठक के मसौदा और अंतिम कार्यवृत्त जारी करना, रक्षा यंत्र नेटवर्क का उपयोग करके ऑनलाइन की जाती हैं। यह एप्लिकेशन प्रत्येक सेवा को अन्य सहयोगी सेवाओं द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी प्रदान करता है, जिससे संयुक्तता व एकीकरण को बढ़ावा मिलता है।
  • रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन, विकास एवं निर्माण को प्रोत्साहित करने हेतु कई नीतिगत पहल व सुधार किए गए हैं। इन पहलों में रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी-2020) के तहत घरेलू स्रोतों से खरीद (भारतीय-आईडीडीएम) श्रेणी की पूंजीगत वस्तुओं की खरीद को प्राथमिकता देना शामिल है।
  • पूंजीगत खरीद हेतु वार्षिक अधिग्रहण योजना का निर्माण मुख्यालय आईडीएस द्वारा सेना, नौसेना, वायु सेना और संयुक्त स्टाफ संगठनों (जेएसओ) से प्राप्त सुझावों के आधार पर किया जाता है। वर्ष 2025-27 की अवधि के लिए वार्षिक अधिग्रहण योजना मुख्यालय आईडीएस द्वारा तैयार की गई थी और इसे 22 मई 2025 को प्रकाशित किया गया था।
  • पिछले तीन वर्षों में, विभिन्न उपकरणों की इष्टतम आवश्यकता निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययनों को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन दिया गया है। अनुकूलन और संयुक्त क्षमता विकास प्राप्त करने के लिए प्रमुख पूंजीगत अधिग्रहणों को ओआरएसए अध्ययन के माध्यम से निर्देशित किया जा रहा है। जनवरी से नवंबर 2025 की अवधि के दौरान दो ओआरएसए अध्ययन पूरे किए गए हैं, जिससे क्षमता विकास और सरकारी खजाने की बचत में योगदान मिला है।

 

संयुक्तता और एकीकरण/त्रि-सैन्य तालमेल

संचालन व खुफिया, क्षमता विकास, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, परिचालन रसद, प्रशिक्षण, रखरखाव सहायता, मानव संसाधन, प्रशासन और कानूनी विभागों के अंतर्गत संयुक्तता तथा एकीकरण को बढ़ाने के लिए 197 कार्यक्रमों की पहचान की गई है।

  • तीनों सेनाओं के लिए समान क्षेत्रों में संयुक्त प्रशिक्षण को बेहतर बनाने हेतु संयुक्त सेना प्रशिक्षण संस्थानों (जेएसटीआई) की स्थापना की गई है। जेएसटीआई 'लीड सर्विस' अवधारणा पर कार्य करते हैं और पांच जेएसटीआई पहले ही कार्य करना शुरू कर चुके हैं। इनमें पुणे में खुफिया (सेना के नेतृत्व में), पुणे के एफसीबीआरएनपी में सीबीआरएन (सेना के नेतृत्व में), नई दिल्ली में कानून (सेना के नेतृत्व में), पचमढ़ी में संगीत (सेना के नेतृत्व में) और मुंबई में खानपान (नौसेना के नेतृत्व में) शामिल हैं। बेंगलुरु के सूचना युद्ध विद्यालय में जेएसटीआई (साइबर) के लिए उन्नत साइबर युद्ध पर दो संयुक्त पायलट पाठ्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, मल्टी डोमेन ऑपरेशंस (एमडीओ) के तत्वावधान में त्रि-सैन्य उन्नत साइबर युद्ध पाठ्यक्रम भी एमसीटीई/मुख्यालय सेना प्रशिक्षण कमान में आयोजित किया गया है। जेएसटीआई साइबर को अंतिम रूप देने का कार्य उन्नत चरण में है। इसके अतिरिक्त, जेएसटीआई एमआरएसएएम, हेलीकॉप्टर उड़ान प्रशिक्षण और रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) मरम्मत व रखरखाव प्रशिक्षण की स्थापना के लिए अध्ययन प्रगति पर हैं।
  • 148वें एनडीए कोर्स के अंतर्गत 30 मई 2025 को एनडीए से 17 महिला कैडेट पास आउट हुईं। वहीं, 149वें एनडीए कोर्स की 15 महिला कैडेट 30 नवंबर 2025 को स्नातक हुईं।
  • प्रौद्योगिकी के विकास और हाइब्रिड खतरों से प्रेरित युद्ध की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, जिसमें निरंतर अनुकूलन एवं समकालीन संघर्षों से सीखे गए सबक की आवश्यकता होती है, रक्षा बलों के अधिकारियों को भविष्य के युद्धों में कुशलतापूर्वक लड़ने के उद्देश्य से तैयार करने हेतु एक भविष्यात्मक युद्ध पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। यह पाठ्यक्रम युद्ध प्रबंधन और संचालन (एमडीओ) में अंतर्विषयक विशेषज्ञता को भी बढ़ावा देता है। चार सप्ताह के इस कार्यक्रम में, पद-भेद रहित यह पाठ्यक्रम कठोर अकादमिक और व्यावहारिक मॉड्यूल के माध्यम से संयुक्तता व एकीकरण को मजबूत करता है।
  • रण संवाद को युद्ध, युद्धकला और युद्ध लड़ने के तरीकों पर युद्ध के अभ्यासकर्ताओं के बीच होने वाली चर्चाओं के रूप में परिकल्पित किया गया है। यह इस बात पर केंद्रित है कि भविष्य में युद्ध किस प्रकार लड़ा जाएगा और तदनुसार किन सिद्धांतों को विकसित करने की आवश्यकता है, किन क्षमताओं का निर्माण करने की आवश्यकता है और हमारी युद्धकला अवधारणाओं, उपकरणों, प्रशिक्षण एवं संगठन में किस प्रकार संशोधन/रूपांतरण की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में, मुख्यालय आईडीएस और आर्मी वॉर कॉलेज (एडब्ल्यूसी), महू द्वारा 23-27 अगस्त 2025 को 'रण संवाद' नामक एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में मित्र देशों (एफएफसी) के एफडीए (युद्ध प्रशिक्षक) ने भाग लिया, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, बुरुंडी, फ्रांस, जर्मनी, मलेशिया, मंगोलिया, नीदरलैंड, ओमान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, अमरीका, वियतनाम और जाम्बिया शामिल थे।

 

स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास

  • राष्ट्रीय अनुसंधान संगठनों के साथ समग्र राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण के रूप में अनुसंधान सहयोग से सेवाओं को इन संगठनों के पास उपलब्ध विशेषज्ञता का उपयोग करके प्रौद्योगिकी को अपनाने में काफी सुविधा होगी। तदनुसार, मुख्यालय आईडीएस वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और आईआईटी/एनआईआईटी के साथ सहयोग को आगे बढ़ा रहा है। अनुसंधान एवं विकास सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर सीएसआईआर और मुख्यालय आईडीएस के बीच 23 नवंबर 2023 को तथा डीएसटी के साथ 21 मार्च 2025 को हस्ताक्षर किए गए थे।
  • रक्षा विभाग मुख्यालय के तत्वावधान में स्वदेशीकरण निदेशालय, मेसर्स केपीएमजी द्वारा 'भारतीय रक्षा उद्योग का डिजिटल डेटाबेस' विकसित करने का समन्वय कर रहा है। इस डेटाबेस में रक्षा सेवाओं द्वारा आवश्यक वस्तुओं के निर्माण/आपूर्ति में शामिल कंपनियों/फर्मों के उत्पादों और संपर्क विवरणों को एक संरचित प्रारूप में संग्रहित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य भारत के रक्षा उद्योग, अनुसंधान एवं विकास, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को एक साथ लाकर रक्षा क्षेत्र में क्षमताओं का मानचित्रण व विकास करना है।

 

तकनीकी परिप्रेक्ष्य और क्षमता रोडमैप 2025

टीपीसीआर-2025 में 15 वर्षों की अवधि के लिए सभी सेवाओं की तकनीकी आवश्यकताओं और क्षमता रोडमैप की रूपरेखा दी गई है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के रक्षा उद्योगों हेतु समान अवसर प्रदान करना है। यह दस्तावेज भारतीय रक्षा उद्योग को प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास, मानव संसाधन और अवसंरचना विकास के लिए संसाधनों के आवंटन की योजना बनाने में सहायता करता है। टीपीसीआर-2025 को रक्षा मंत्रालय द्वारा त्रि-सैन्य संगोष्ठी 'रण संवाद' के दौरान जारी किया गया था और यह रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

 

वैश्विक उद्योग सहयोग

भारतीय उद्योगों के लिए सभी प्रकार के सैन्य प्रणालियों व प्लेटफार्मों के डिजाइन, विकास और निर्माण हेतु नीतिगत ढांचे के लागू होने के बाद, भारत की अपनी आवश्यकताओं और निर्यात को पूरा करने के लिए विदेशी उद्योगों के साथ सह-विकास, प्रौद्योगिकी साझाकरण एवं भारत में विनिर्माण हेतु सहयोग को प्रोत्साहित किया गया है। तदनुसार, उद्योग-सेवा समन्वय को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, भारत में विनिर्माण तथा भारत से निर्यात पर बल देने वाले संयुक्त उद्यमों को सुगम बनाने के लिए कुल 28 वैश्विक उद्योग बैठकें आयोजित की गईं।

 

असैन्य-सैन्य समन्वय

ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल यह दिखाया कि संयुक्त प्रयास से विजय कैसे संभव है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, विशिष्ट तकनीकों को अपनाने तथा भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सशक्त नागरिक-सैन्य समन्वय की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। थिंक टैंक, सैन्य मुख्यालयों और संबंधित रक्षा मंत्रालय विभागों के सहयोग से नागरिक-सैन्य समन्वय पर एक विस्तृत अध्ययन किया गया है।

 

बुनियादी ढांचा एवं तकनीकी विकास

मिलिट्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में छात्रों के लिए सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने हेतु रोबोटिक्स, एआई हब, ड्रोन लैब और अंडरवाटर रिसर्च सेंटर पर आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।

 

सैन्य कूटनीति और विदेशी प्रशिक्षण/अभ्यास

चालू वर्ष में 12 मित्र देशों के सैन्य प्रतिनिधिमंडलों ने भारत का दौरा किया। आयोजित प्रशिक्षण दौरों में निम्नलिखित शामिल हैं:

क्रमांक

प्रतिनिधिमंडल

यात्रा की अवधि

1

अल्जीरिया

05-12 Feb 25

2

आर्मेनिया

11-12 Mar 25

3

ऑस्ट्रेलिया

16-20 Nov 25

4

कैमरून

03-12 Jul 25

5

जर्मनी

13-20 Dec 25

6

इंडोनेशिया

23-27 Feb 25

7

जापान

08-13 Jun 25

8

मंगोलिया

25-31 May 25

9

नीदरलैंड्स

22-27 Jun 25

10

फिलीपींस

27-31 Oct 25

11

श्रीलंका

04-14 Aug 25

12

ब्रिटेन

10-11 Sep 25

  • वर्ष 2025 में मित्र देशों के 98 अधिकारियों को सशस्त्र बल प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है/दिया जा रहा है। तीनों सेनाओं के 175 अधिकारी मित्र देशों में क्षमता संवर्धन, विशिष्ट प्रौद्योगिकी और कैरियर पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं/प्राप्त करेंगे।
  • 25 अक्टूबर को भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों के पहले संवाद के लिए रक्षा मंत्री की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने 9 अक्टूबर 2025 को रक्षा सूचना विश्लेषणात्मक सहयोग पर कार्यान्वयन समझौते (आईए) पर हस्ताक्षर किए। रक्षा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान पर केंद्रित इस पहले समझौते पर रक्षा मंत्री की उपस्थिति में रक्षा विभाग मुख्यालय की ओर से सीआईएससी द्वारा हस्ताक्षर किए गए।
  • अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ भारत और अमरीकी रक्षा बलों के बीच प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला एक संयुक्त द्विपक्षीय त्रि-सेना जल थल नभ आपदा जोखिम निवारण अभ्यास है। यह अभ्यास 1 से 13 अप्रैल 2025 तक विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया था। अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ का यह पहला संस्करण था, जिसमें दोनों देशों के साइबर प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
  • एक्सरसाइज ब्राइट स्टार एक बहुपक्षीय अभ्यास है, जिसकी मेजबानी मिस्र 1980 से कर रहा है। इस अभ्यास में 27 अगस्त से 10 सितंबर 2025 तक भारतीय त्रि-सैन्य दल ने भाग लिया था।
  • दिवंगत जनरल बिपिन रावत, प्रथम सीडीएस (नागरिक रक्षा विभाग) के सम्मान में स्थापित तीसरा युवा विनिमय कार्यक्रम 13 से 26 अक्टूबर 2025 तक आयोजित किया गया था, जिसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया के 15 युवा सैन्य अधिकारियों ने एक-दूसरे से सीखा तथा प्रमुख सेवा संस्थानों, नागरिक सुरक्षा उपक्रमों एवं निर्माताओं के दौरे व बातचीत के माध्यम से एक-दूसरे से सीखा।

 

सीडीएस और सीआईएससी सहित उच्च सैन्य नेतृत्व द्वारा मित्र देशों की यात्राओं का विवरण नीचे दिया गया है:

  • सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने 4 से 7 मार्च 2025 तक ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। इस दौरान, सीडीएस ने ऑस्ट्रेलिया के सीडीएफ एडमिरल डेविड जॉनस्टन से बातचीत की और ऑस्ट्रेलिया की चीफ ऑफ सर्विसेज कमेटी द्वारा उन्हें जानकारी दी गई। चर्चा का मुख्य विषय ऑस्ट्रेलिया को रक्षा निर्यात, रणनीतिक और परिचालन संबंधी जानकारी साझा करना, हवाई क्षेत्र की जानकारी तथा इंडोनेशिया के साथ त्रिपक्षीय सहयोग सहित रणनीतिक हितों का विस्तार करना था।
  • इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज ने 30 मई से 1 जून 2025 तक सिंगापुर में 22वें शांगरी-ला संवाद का आयोजन किया। सीडीएस को 'भविष्य की चुनौतियों के लिए रक्षा नवाचार समाधान' विषय पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया था। विशेष सत्रों के अलावा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, ब्रिटेन और अमरीका के गणमान्य व्यक्तियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित की गईं।
  • सीडीएस ने 27 से 30 अक्टूबर 2025 तक इंडोनेशिया का दौरा किया, जिसके दौरान इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री, इंडोनेशियाई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग के साथ बातचीत हुई। दोनों देशों का क्षेत्रीय और समुद्री सुरक्षा पर एक समान दृष्टिकोण है और उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
  • सीआईएससी एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित आठवें वार्षिक रक्षा संवाद में भाग लेने के लिए प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में 5-6 जून 2025 को श्रीलंका का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के गणमान्य व्यक्तियों, जैसे रक्षा सचिव, वायु सेना कमांडर और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के कमांडेंट के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।
  • सीआईएससी ने डार्विन में आयोजित चीफ ऑफ जॉइंट ऑपरेशंस कॉन्क्लेव में भाग लेने के लिए 26-27 जुलाई 2025 को ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। इस कॉन्क्लेव में नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय रणनीतिक वार्ताओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें सैन्य तैयारी, आपसी सहभागिता, हाइब्रिड खतरे से निपटने की क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे पहलुओं को शामिल किया गया।
  • सीआईएससी के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 26-28 अगस्त 2025 को थाईलैंड के हुआ हिन में आयोजित इंडो-पैसिफिक चीफ्स ऑफ डिफेंस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। इस सम्मेलन का उद्देश्य रक्षा सहयोग को व्यापक बनाना, समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना, पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान को गहरा करना और हिंद-प्रशांत  क्षेत्र में साझेदारी के नए क्षेत्रों का पता लगाना था। सम्मेलन में व्याख्यान और भाग लेने वाले देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ताएं शामिल थीं।
  • 25-26 सितंबर 2025 को नेप्यीताव में आयोजित दूसरे भारत-म्यांमा वार्षिक रक्षा वार्ता के लिए रक्षा सचिव के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में सीआईएससी ने म्यांमा का दौरा किया। इस यात्रा का उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को बढ़ाना था।
  • डीजी डीआईए व डीसीआईडीएस (अंतर्राष्ट्रीय) के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने 24-26 सितंबर 2025 को जापान का दौरा किया और 18वें इंडो-पैसिफिक इंटेलिजेंस चीफ्स कॉन्फ्रेंस (आईपीआईसीसी) में भाग लिया। आईपीआईसीसी में भाग लेने के अलावा, इस अवसर का लाभ उठाते हुए 12 देशों - ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, मालदीव, मंगोलिया, नेपाल, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाईलैंड, ब्रिटेन और अमरीका के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं की गईं। इस मंच का उपयोग पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को उजागर करने के लिए भी किया गया।

मित्र देशों के उच्च सैन्य नेतृत्व द्वारा भारत की यात्राओं का विवरण नीचे दिया गया है:

  • थाईलैंड के रक्षा प्रमुख जनरल सोंगवित नूनपैकदी ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ 21-24 जनवरी 2025 तक भारत का दौरा किया, जिसमें रक्षा उद्योग का भ्रमण भी शामिल था।
  • अल्जीरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के प्रतिनिधि और चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सईद चनेगृह ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ 5-12 फरवरी 2025 तक भारत का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को भारत की विविध रक्षा विनिर्माण क्षमताओं से अवगत कराने के लिए औद्योगिक दौरे आयोजित किए गए।
  • मलावी रक्षा बल के कमांडर जनरल पॉल वैलेंटिनो फिरी ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ 16-18 फरवरी 2025 तक भारत का दौरा किया और चीफ ऑफ स्टाफ से बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय का दौरा किया और भारतीय प्रशिक्षण संस्थानों और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
  • कजाखिस्तान के रक्षा उप मंत्री और सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल सुल्तान कमालतदिनोव ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ 10 से 14 अगस्त 2025 तक भारत का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल को स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमता से परिचित कराने के लिए विभिन्न औद्योगिक दौरे और बैठकें आयोजित की गईं।
  • सऊदी अरब के शाही सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल फैयाद बिन हमीद अल-रुवैली ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ 2 से 4 दिसंबर 2025 तक भारत का दौरा किया। 3 दिसंबर 2025 को मानेकशॉ सेंटर में गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। रक्षा सहयोग, सैन्य अभ्यास और रसद सहायता से संबंधित पारस्परिक हित के मामलों पर चर्चा की गई।

एचएडीआर अभियान एवं अभ्यास

सहयोग और समन्वय के उद्देश्य से रक्षा बलों के विभिन्न चिकित्सा प्रतिष्ठानों के चिकित्सा अधिकारियों ने एनडीएमए द्वारा आयोजित संयुक्त एचएडीआर अभ्यासों में भाग लिया है। ये अभ्यास राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर एसडीआरएफ/यूटीडीआरएफ और एनडीआरएफ की भागीदारी से आयोजित किए जाते हैं। साथ स्थित इकाइयों/अस्पतालों के चिकित्सा अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में अभ्यासों में भाग लेने के लिए नामित किया गया था। 25 जनवरी से 25 नवंबर के बीच 32 एचएडीआर अभ्यास आयोजित किए गए।

 

अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण अभ्यास

  • कोबरा गोल्ड अभ्यास का 44वां संस्करण 4 फरवरी से 5 मार्च 2025 तक थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित किया गया। इसमें तीनों सेनाओं के 21 कर्मियों के दल ने भाग लिया।
  • भारत-मालदीव आपदा जोखिम न्यूनीकरण अभ्यास 5 से 7 मई, 2025 तक मालदीव में आयोजित किया गया। भारतीय नौसेना इस अभ्यास की प्रमुख एजेंसी थी और तीनों सेनाओं के दल ने इसमें भाग लिया।
  • दो अधिकारियों ने क्रमशः 28-30 अक्टूबर 2025 को आयोजित समन्वित प्रतिक्रिया अभ्यास और 31 अक्टूबर से 1 नवंबर 2025 तक आयोजित एचएडीआर पर एडीएमएम प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह के अभ्यास में सिंगापुर में भाग लिया।
  • जनवरी 2025 से अब तक मुख्यालय आईडीएस द्वारा समन्वित और देश में संचालित एचएडीआर अभियानों/गतिविधियों का विवरण निम्नलिखित है:-

दिनांक

एचएडीआर ऑप्स

6 जनवरी

असम के उमरांगसो स्थित कोयला खदान में बचाव अभियान

24 जनवरी

गोवा के बिचोलिम में स्थित अमथाने बांध पर भारतीय गोताखोर दल द्वारा नागरिक प्राधिकरण को सहायता

22 फरवरी

तेलंगाना सुरंग ढहना

28 फरवरी

उत्तराखंड में माणा हिमस्खलन

28 मार्च

म्यांमा में भूकंप

जून

इजराइल से भारतीय नागरिकों का बचाव

2 जुलाई

हिमाचल प्रदेश के मंडी में बाढ़ राहत सहायता

5 अगस्त

धराली/उत्तरकाशी में अचानक आई बाढ़

13 अगस्त

होजिस लुंगपा नाले, पूह में अचानक आई बाढ़

14 अगस्त

कठुआ

 

जम्मू-कश्मीर के किस्तवाड़ में बादल फटा

18 अगस्त

नांदेड़, महाराष्ट्र में बाढ़ राहत अभियान

22 अगस्त

राजस्थान में बाढ़ राहत

23 अगस्त

थराली/उत्तरकाशी में बादल फटा

 

 

26 अगस्त

वैष्णो देवी में भूस्खलन

जम्मू में बाढ़ राहत कार्य

पठानकोट के मामून सेक्टर में बाढ़ राहत कार्य

 

27 अगस्त

तेलंगाना के मेडक में बाढ़ राहत अभियान

पंजाब में राहत अभियान

29-30 अक्टूबर

चक्रवात मोंथा

04 नवंबर

तूफान मेलिसा, जमैका

06-07 नवंबर

म्यांमार से भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी, थाईलैंड के माई सोट के रास्ते

जनवरी 2025 से नवंबर 2025 तक मुख्यालय आईडीएस द्वारा जारी संयुक्त सिद्धांत/प्राथमिक पुस्तकें/प्रकाशन निम्नलिखित हैं:

संयुक्त सिद्धांत/प्रारंभिक गाइड

प्रकाशन विवरण

साइबरस्पेस संचालन के लिए संयुक्त सिद्धांत

(जेपी 2.01 (यू)) (यूएनसीएलएएस)

 

 

 

सीओएससी द्वारा 07 अगस्त 2025 को जारी किया गया

जल थल नभ अभियानों के लिए संयुक्त सिद्धांत (जेपी 2.02 (यू)) (यूएनसीएलएएस)

एकीकृत लॉजिस्टिक्स के लिए संयुक्त प्रारंभिक मार्गदर्शिका (जेपी 2.03)

रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय (सीडीएम) में सीडीएस द्वारा 09 अगस्त 2025 को जारी किया गया

हवाई और हेलीकॉप्टर आधारित अभियानों के लिए संयुक्त सिद्धांत (जेपी 2.04)   

 

 

 

रण संवाद के दौरान सीओएससी द्वारा 27 अगस्त 2025 को जारी किया गया

विशेष बलों के अभियानों के लिए संयुक्त सिद्धांत (जेपी 2.05)

बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए संयुक्त सिद्धांत (जेपी 2.06)

संयुक्त सैन्य अंतरिक्ष सिद्धांत (जेपी 2.07)

माननीय रक्षा मंत्री द्वारा 16 सितंबर 2025 को जारी किया गया

संयुक्त सेवा स्टाफ कर्तव्य नियमावली (जेएसएसडी) खंड I और II

 

उप प्रमुख समिति द्वारा 17 अप्रैल 2025 को जारी किया गया

 

सैन्य अभियंता सेवाएं

सरकार की कार्यकुशलता बढ़ाने, व्यापार सुगम बनाने, मेक इन इंडिया, जीवन स्तर में सुधार लाने और पारदर्शिता लाने की परिकल्पना के अनुरूप, बड़ी संख्या में नियामक/प्रक्रियात्मक दस्तावेजों में संशोधन किया गया है। कुछ प्रमुख संशोधन निम्नलिखित हैं:

  • डीएमए द्वारा एमईएस परियोजनाओं में नई निर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने की मंजूरी के बाद, एमईएस ने निर्माण समय को कम करने, गुणवत्ता मानकों में सुधार करने और कई परियोजनाओं में बेहतर फिनिश सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एनसीटी (गैर-संचार तकनीक) को शामिल करने का कार्य शुरू किया है। वर्तमान में, लगभग 1900 करोड़ रुपये की कुल 96 परियोजनाएं योजना/निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं।
  • एमईएस के लिए इंजीनियरिंग सलाहकारों की भर्ती संबंधी संशोधित नीति को ई-इन-सी. शाखा द्वारा 28 फरवरी 2025 को जारी किया गया है।
  • 100 करोड़ रुपये से अधिक की एमईएस परियोजनाओं में बीआईएम को अपनाने संबंधी सलाह को ई-इन-सी शाखा द्वारा 10 मार्च 2025 को जारी किया गया है।
  • एमईएस कार्यों में उपयोग के लिए सीएमपीटी (कंप्यूटर मैनेजमेंट पैटर्न) की मंजूरी संबंधी नीति में संशोधन को ई-इन-सी शाखा द्वारा 17 अप्रैल 2025 को जारी किया गया है।

सेना प्रमुख कई ई-गवर्नेंस अनुप्रयोगों के कार्यान्वयन में प्रगति कर रहे हैं। मौजूदा वेब अनुप्रयोगों के अतिरिक्त, सेना प्रमुख ने 21 अगस्त 2025 को निम्नलिखित अनुप्रयोगों का शुभारंभ किया:

  • ई-एमबी एप्लिकेशन को कार्यों/सेवाओं के लिए मात्रा बिलों की डिजिटल रिकॉर्डिंग हेतु विकसित किया गया है, जिससे ठेकेदारों को भुगतान का आधार बनता है।
  • एमईएस इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग एंड आर्बिट्रेशन मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, एक अग्रणी क्लाउड-आधारित मध्यस्थता प्रबंधन प्रणाली है, जिसे एमईएस में मध्यस्थों की नियुक्ति, मध्यस्थता कार्यवाही की निगरानी से लेकर निर्णय के कार्यान्वयन/चुनौती तक की संपूर्ण मध्यस्थता प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए विकसित किया गया है।
  • दंत चिकित्सा सेवाओं में बढ़ते ग्राहकों, आकांक्षाओं और आधुनिक तकनीकी प्रगति के समावेश को देखते हुए फील्ड अस्पताल में डेंटल प्लाटून के लिए आवास के वेतनमान में संशोधन हेतु डीएमए के समक्ष एक मामला उठाया गया था। डेंटल लैब को विधिवत शामिल करते हुए और दंत चिकित्सा सेवाओं के लिए उन्नत मानदंडों को लागू करने के बाद इस संशोधन को 17 सितंबर 2025 को अनुमोदित व प्रकाशित किया गया।

ऊर्जा संरक्षण पहल

स्थिरता और हरित कार्य प्रणालियों के लिए एमईएस की प्रतिबद्धता अटूट रही है। एमईएस ने 128 केंद्रों पर 140 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं, जिससे प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो रही है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 59 केंद्रों पर 20 मेगावाट की रूफटॉप सौर परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

पूर्ण की गई परियोजनाएं

  • तीनों सेवाओं के लिए विभिन्न स्थानों पर परिचालन अवसंरचना का कार्य कुल 1041.47 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष के दौरान पूरा किया गया।
  • विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण अवसंरचना संबंधी कार्य 20.73 करोड़ रुपये के खर्च से पूरे किए गए।
  • स्वास्थ्य देखभाल और सहायक सुविधाओं से संबंधित कार्य 42.79 करोड़ रुपये की लागत से पूरे हुए।

प्रगति पर परियोजनाएं

  • थल सेना भवन: इस परियोजना के लिए 747.84 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। वर्तमान में परियोजना 80% पूरी हो चुकी है और इसके शीघ्र पूर्ण होने की संभावना है।
  • तेजपुर स्थित 155 बेस अस्पताल के लिए तकनीकी आवास: इस परियोजना के लिए 112.82 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। वर्तमान में परियोजना 98% पूरी हो चुकी है।
  • वायु सेना स्टेशन पालम में बोइंग 777 विमानों की व्यवस्था: इस परियोजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति राशि 195.34 करोड़ रुपये थी। वर्तमान में परियोजना 72% पर काम हो चुका है।

भारतीय तटरक्षक बल

ऑपरेशन सिंदूर

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर भारत के पश्चिमी तट पर संसाधनों को तैनात किया और निगरानी तेज कर दी, जिससे तटीय रक्षा/सुरक्षा मजबूत हुई तथा संवेदनशील क्षेत्रों में शत्रुतापूर्ण समुद्री खतरों/इरादों के खिलाफ कार्रवाई में योगदान दिया गया। भारतीय तटरक्षक बल ने खाड़ी क्षेत्र के लिए संबंधित हितधारकों के साथ मिलकर जमीनी बलों की तैनाती के उद्देश्य से आवश्यक निगरानी/तैयारी बनाए रखी।

तस्करी विरोधी और नशीले पदार्थों पर नियंत्रण अभियान

  • भारतीय तटरक्षक बल 29 जनवरी 2025 को भारत-श्रीलंका सीमावर्ती हवाई अड्डे (आईएमबीएल) के पास से 60 लाख रुपये मूल्य का 53.62 किलोग्राम गांजा जब्त किया। पकड़े गए नशीले पदार्थों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क विभाग को सौंप दिया गया।
  • भारतीय तटरक्षक बल के एक जहाज ने 12 फरवरी 2025 को तमिलनाडु के मुथुपेट्टई से 10 लाख रुपये मूल्य का 2000 किलोग्राम सूखा अदरख पकड़ा। खेप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए तमिलनाडु पुलिस को दे दिया गया।
  • डीआरआई से मिली सूचना के आधार पर 5 मार्च 2025 को आईसीजी ने कन्याकुमारी के पास टगबोट टीबी श्वे लिन योन तथा डंब बार्ज (कोमारको 2101) (जिसमें 9 चालक दल के सदस्य थे) को रोका और 32.94 करोड़ रुपये मूल्य के हशीश तेल के 29 पैकेट (29.950 किलोग्राम) से भरे दो संदिग्ध बैग बरामद किए। इसके अलावा, पोत से 10 मोबाइल फोन व एक सैटेलाइट फोन भी जब्त किए गए। टगबोट, बार्ज और चालक दल को माल सहित आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए तूतीकोरिन में डीआरआई को सौंप दिया गया।
  • आईसीजी ने 12 और 13 अप्रैल 2025 को गुजरात एटीएस के साथ संयुक्त अभियान में गुजरात तट से 1800 करोड़ रुपये मूल्य का 307.50 किलोग्राम मादक पदार्थ पकड़ा। जब्त की गई खेप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए एटीएस को दे दिया गया।
  • भारत-श्रीलंका सीमावर्ती सीमा (आईएमबीएल) से 21 अप्रैल 2025 को आईसीजी ने 302 किलोग्राम तेंदू के पत्ते जब्त किए। इस खेप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए रामेश्वरम सीमा शुल्क विभाग को सौंपा गया।
  • आईसीजी ने 6 मई 2025 को भारत-श्रीलंका सीमा रेखा (आईएमबीएल) के पास मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाया और दूसरे द्वीप (धुंशकोडी के पास) से 155 किलोग्राम तेंदू के पत्ते जब्त किए। पकड़ी गई खेप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए रामेश्वरम सीमा शुल्क विभाग को दे दिया गया।
  • आईसीजी ने मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाया और 11 सितंबर 2025 को तीसरे द्वीप (धुंशकोडी) से 96 किलोग्राम तेंदू के पत्ते तथा 118 किलोग्राम सूखा अदरख जब्त किया। इस खेप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क विभाग को सौंप दिया गया।

शिकार विरोधी अभियान

  • आईसीजी ने 25 फरवरी की सुबह अवैध शिकार विरोधी अभियान चलाया, जिसमें सुरक्षा बलों ने लैंडफॉल द्वीप/खाड़ी से दो पारंपरिक नावों के साथ म्यांमा के पांच अवैध शिकारियों को पकड़ा और 400 किलोग्राम समुद्री खीरा जब्त किया। पकड़ी गई नावों एवं अवैध शिकारियों को आगे की जांच/निपटान के लिए अंडमान और निकोबार में डिगलीपुर पुलिस को सौंप दिया गया।
  • आईसीजी सी-428 ने गश्त के दौरान रटलैंड (अंडमान और निकोबार) से 11 मार्च 2025 को 15 समुद्री मील पश्चिम में म्यांमा के मछली पकड़ने वाले जहाज अधिनियम 1981 के उल्लंघन के आरोप में 14 चालक दल के सदस्यों सहित एक म्यांमा की मछली पकड़ने वाली नाव को गिरफ्तार किया। पकड़ी गई मछली पकड़ने वाली नाव को अंडमान और निकोबार पुलिस को सौंपा गया।
  • आईसीजी ने 30 मार्च 2025 को अवैध शिकार विरोधी अभियान चलाया और तमिलनाडु के उचपुल्ली बीच से 80 लाख रुपये मूल्य का 200 किलोग्राम अवैध समुद्री खीरा जब्त किया। खेप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क/सीएसजी को सौंप दिया गया।
  • आईसीजी ने 13 अप्रैल 2025 को भी अवैध शिकार विरोधी अभियान चलाया और मंडपम से 58 लाख रुपये मूल्य का 145 किलोग्राम अवैध समुद्री खीरा जब्त किया। जब्त की गई खेप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए रामेश्वरम वन विभाग को दे दिया गया।
  • आईसीजी ने शिकार विरोधी अभियान 24 अप्रैल 2025 को चलाया और उत्तरी मंडपम के पास से 150 किलोग्राम समुद्री खीरा (60 लाख रुपये मूल्य का) से भरे 7 बोरे जब्त किए। जब्त की गई खेप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए वन विभाग, मंडपम को सौंप दिया गया।
  • आईसीजी ने शिकार विरोधी अभियान 24 अगस्त 2025 को भी संचालित किया तथा अंडमान और निकोबार के पैगेट द्वीप के पास से म्यांमार की एक नाव से 350 किलोग्राम अवैध समुद्री खीरा (35 लाख रुपये मूल्य का) जब्त किया। इस खेप और नाव को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया।
  • भारतीय समुद्री सीमा (आईएमबीएल) गश्ती पर तैनात आईसीजी पोत ने 7 सितंबर 2025 को सागर द्वीप के पास 115वें स्थान (66.5 समुद्री मील) पर भारतीय जलक्षेत्र में अवैध मछली पकड़ने के आरोप में बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौका (बीएफबी) 'मेयर डोया' को उसके 13 चालक दल सदस्यों सहित पकड़ा। बीएफ और उसके 13 चालक दल सदस्यों को फ्रेजरगंज लाया गया तथा आगे की कार्रवाई के लिए समुद्री पुलिस को सौंप दिया गया।
  • आईसीजीएस अरुणा आसफ अली ने 9 सितंबर 2025 को सूचना के आधार पर एक समन्वित समुद्री-हवाई अभियान में पूर्वी द्वीप के पास म्यांमा की एक नौका को रोका और 3 शिकारियों को पकड़ा। समूह के अन्य 6 शिकारियों को 11 सितंबर 2025 को अंडमान और निकोबार पुलिस ने पूर्वी द्वीप से पकड़ा।
  • भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल (आईएमबीएल) पर तैनात आईसीजी जहाजों ने 15, 16, 17 और 19 नवंबर 2025 को भारतीय ईजेड के भीतर अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में 4 बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं (अमेना गोनी, मेयर दुआ, नूर-ए-मदीना, अदीब) तथा उनके 107 चालक दल के सदस्यों को पकड़ा। इन सभी नौकाओं और चालक दल को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए फ्रेजरगंज स्थित समुद्री पुलिस को सौंप दिया गया।
  • दक्षिण मंडपम के पास मछली पकड़ने वाली नौकाओं की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर आईसीजीएस मंडपम और सीमा शुल्क की एक संयुक्त टीम ने 2 नवंबर 2025 को एक अन्य अभियान चलाया। संयुक्त अभियान के दौरान भारतीय मछली पकड़ने वाली नौका के साथ 85 बोरियों में कुल 1400 किलोग्राम समुद्री खीरा जब्त किया गया। इस समुद्री खीरे सहित आईएफडी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए वन विभाग, मंडपम को सौंप दिया गया है। खेप का कुल मूल्य लगभग 6.5 करोड़ रुपये आंका गया है।

खोज एवं बचाव

2025 के लिए एसएआर डेटा इस प्रकार है:

मिशन

103

बचाई गई जानें

76

हवाई यात्रा

49

जहाजी दौरे

156

चिकित्सा निकासी

15

तटीय सुरक्षा

आईसीजी द्वारा किए गए तटीय सुरक्षा प्रयासों से संबंधित आंकड़े नीचे सारणीबद्ध हैं:

विषय

संबंधी आंकड़े

(25 जनवरी से प्रभावी)

टिप्पणियां

तटीय सुरक्षा अभ्यास/अभियान

15/34

सभी हितधारकों द्वारा समन्वित प्रतिक्रिया

समुद्र में बोर्डिंग अभियान

18,613

 

सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम

1,594

 

मासिक अभ्यास 'सजग'

36

मछुआरों की पहचान संबंधी जांच

संयुक्त तटीय गश्ती (जेसीपी)

791 जहाज गश्ती अभियान

1582 समुद्री पुलिस कर्मी जुड़े


असैन्य अधिकारियों को सहायता

  • मुंबई तट पर भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन समारोह के दौरान, सीजीआर मुख्यालय (पश्चिम) ने 27 जुलाई से 6 अगस्त 2025 तक 'ऑपरेशन उत्सव' चलाया, जिसका उद्देश्य निगरानी करना और उत्सव के दौरान बचाव एवं राहत कार्य में सहायता प्रदान करना था। इस अवधि के दौरान बचाव और राहत कार्य में सहायता के लिए आईसीजी के जहाजों तथा विमानों को तैनात किया गया था।
  • आईसीजी ने भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाओं के विसर्जन समारोह के दौरान सुरक्षा और बचाव एवं राहत कार्य में सहायता के लिए 26-27 जून 2025 और 5-8 जुलाई 2025 तक ओडिशा के पुरी तट पर तथा 27 जून 2025 से 8 जुलाई 2025 तक पश्चिम बंगाल के दीघा तट पर 'ऑपरेशन उत्सव' चलाया।

सेवास्थापन

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आठ नई पीढ़ी के अदम्य श्रेणी के तीव्र गश्ती पोतों की श्रृंखला में से तीन पोतों को इस वर्ष भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया। पहला पोत (अदम्य) 19 सितंबर, 2025 को पारादीप में, दूसरा पोत (अक्षर) 4 अक्टूबर, 2025 को कराईकल में और तीसरा पोत (अमूल्य) 19 दिसंबर, 2025 को गोवा में सेवास्थापन किया गया। ये पोत भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया कार्यक्रमों के अनुरूप रक्षा क्षेत्र में भारत की निरंतर प्रगति को रेखांकित करते हैं।

राष्ट्रीय स्तर के अभ्यास एवं बैठकें

  • राष्ट्रीय स्तर के अभ्यास का 10वां संस्करण 25 अक्टूबर को चेन्नई के तट पर आयोजित किया गया, जिसमें तेल रिसाव से निपटने की राष्ट्रीय स्तर की तैयारियों और समन्वय क्षमताओं को मजबूत दिखाया गया। इस अभ्यास में 29 देशों के हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भाग लिया।
  • 27वीं राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना एवं तैयारी बैठक 5 अक्टूबर, 2025 को चेन्नई में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता महानिदेशक परमेश शिवमणि, डीजीआईसीजी ने की। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों, केंद्रीय और राज्य सरकारी विभागों तथा तेल प्रबंधन एजेंसियों के प्रतिनिधियों सहित 116 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • 23वें संस्करण की बोर्ड बैठक 10 नवंबर 2025 को आयोजित की गई। इस सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना, तैयारियों में सुधार करना, मामलों की समीक्षा करना, मानक परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को अद्यतन करना और समुद्र में जीवन बचाने के लिए भारत की एकीकृत प्रतिक्रिया को मजबूत करना था। बैठक में विभिन्न सदस्य एजेंसियों के हितधारकों/प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक के दौरान, विभिन्न श्रेणियों के लिए राष्ट्रीय समुद्री-समुद्री आपदा सुरक्षा पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

जहाज दौरे

  • आईसीजी जहाज शौनक को 24 दिसंबर से 25 फरवरी तक सिंगापुर, जापान व इंडोनेशिया में द्विपक्षीय वार्ता और आगंतुक देशों के तटरक्षकों के साथ संयुक्त अभ्यास के लिए तैनात किया गया था। आईसीजी जहाज ने 7 से 11 जनवरी 2025 तक योकोहामा, जापान का दौरा किया और आईसीजी-जेसीजी संयुक्त अभ्यास में भाग लिया। इसके अलावा, आईसीजी जहाज शौनक ने चल रही विदेशी तैनाती के हिस्से के रूप में 27 से 30 जनवरी 2025 तक जकार्ता, इंडोनेशिया में भी दौरा किया।
  • भारत और संयुक्त अरब अमीरात तथा ओमान के बीच बढ़ते समुद्री सहयोग के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में आईसीजी जहाज शोर ने विदेशी तैनाती के तहत 25 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात व ओमान का दौरा किया। इस दौरे के दौरान, आईसीजी शोर ने इन देशों के तटरक्षक बलों/समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पेशेवर बातचीत और संयुक्त अभ्यास किए। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में एक सप्ताह के प्रवास के दौरान, आईसीजी शोर ने दो प्रमुख रक्षा प्रदर्शनियों, नौसेना रक्षा प्रदर्शनी एवं सम्मेलन (एनएवीडीईएक्स) और अंतर्राष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी (आईडीईएक्स-2025) में भाग लिया। इसके अलावा, अपतटीय गश्ती पोत ने 25 फरवरी के अंत में मस्कट, ओमान का दौरा किया और रॉयल ओमान पुलिस तटरक्षक बल (आरओपीसीजी) के साथ संपर्क स्थापित किया। इस दौरे के दौरान, जहाज ने आरओपीसीजी के साथ क्षमता निर्माण, समुद्री बचाव और सुरक्षा निगरानी (एसएआर) तथा संयुक्त प्रशिक्षण आयोजित किए। इस ओएसडी ने भारत की समुद्री क्षमताओं को प्रदर्शित करने के अलावा कई उद्देश्यों की पूर्ति की; इसने देश की 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) गतिविधियों को आगे बढ़ाया।
  • आईसीजी जहाज सचेत को 25 मार्च को जिबूती और सूडान में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) मिशन पर भेजा गया था। इस खेप में महत्वपूर्ण औषधियां, जीवन रक्षक दवाएं और आवश्यक चिकित्सा उपकरण शामिल थे, जिनका उद्देश्य जिबूती व सूडान में स्थानीय स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को सहायता प्रदान करना तथा तत्काल चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करना था। इस मिशन ने अफ्रीकी देशों के साथ भारत की व्यापक राजनयिक पहुंच और रक्षा सहयोग को रेखांकित किया, जिससे द्विपक्षीय संबंध मजबूत हुए तथा समुद्री सद्भावना में वृद्धि हुई। यह अभियान 'वसुधैव कुटुंबकम' (विश्व एक परिवार है) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है और हिंद महासागर क्षेत्र तथा उससे परे मानवीय एवं आपदा राहत प्रयासों में देश के नेतृत्व को सुदृढ़ करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत, आईसीजीएस सक्षम को 6 मार्च से 4 अप्रैल 2025 तक सेशेल्स, मेडागास्कर और कोमोरोस के विदेशी मिशन पर तैनात किया गया था। इस मिशन का उद्देश्य समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना, अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करना और भारत के पुनीत सागर अभियान के अनुरूप वैश्विक स्तर पर पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना था। 10 एनसीसी कैडेट और एक स्थायी प्रशिक्षक (पीआई) स्टाफ को जहाज पर भेजा गया, जिससे उन्हें विभिन्न संस्कृतियों के आदान-प्रदान में भाग लेने तथा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सहयोग का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का अनूठा अवसर मिला। इसके अतिरिक्त, असम राइफल्स के 10 अधिकारियों/कर्मियों को भी जहाज पर भेजा गया। उनकी भागीदारी का उद्देश्य अंतर-एजेंसी तालमेल को मजबूत करना और मित्र देशों के तटरक्षक बलों तथा समुद्री एजेंसियों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गतिविधियों का अनुभव प्रदान करना था। इस पहल से समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में भारत और मेजबान देशों के बीच ज्ञान साझा करने, अंतर-संचालनीयता बढ़ाने तथा राजनयिक संबंधों को मजबूत करने में मदद मिली।
  • आईसीजी जहाज सचेत ने 8 सितंबर से 2 नवंबर 2025 तक पूर्वी अफ्रीकी देशों जैसे केन्या, दक्षिण अफ्रीका, मोज़ाम्बिक और तंजानिया का दौरा किया। इस दौरान उसने इन देशों के तटरक्षक बलों/समुद्री एजेंसियों के साथ पेशेवर वार्ता व संयुक्त अभ्यास किए।
  • आईसीजीएस सारथी, प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के हिस्से के रूप में 25 अगस्त से 6 अक्टूबर 2025 तक सेशेल्स, मॉरीशस, रीयूनियन, मोज़ाम्बिक और केन्या में तैनात रहा।

संयुक्त अभ्यास

जेसीजी का प्रशिक्षण पोत इत्सुकुशिमा अपने वैश्विक महासागर यात्रा प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत 7 से 12 जुलाई 2025 तक चेन्नई पहुंचा। इसके अलावा, आईसीजी और जेसीजी ने परिचालन तालमेल को बढ़ावा देने के लिए 12 जुलाई 2025 को संयुक्त पासेक्स अभ्यास किया। इस दौरान जेसीजी के दल ने आईसीजी के कार्यों को समझने के लिए क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया केंद्र (आरएमपीआरसी) और अन्य आईसीजी प्रतिष्ठानों का दौरा किया।

स्वदेश वापसी अभियान

  • भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं (आईसीजी) और बांग्लादेशी तटरक्षक बल (बीसीजी) ने 5 जनवरी 2025 को मछुआरों की स्वदेश वापसी का अभियान चलाया। बांग्लादेश से 6 भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं और 95 मछुआरों को भारत वापस लाया गया, जबकि भारत से 2 बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं तथा 90 मछुआरों को बांग्लादेश वापस भेजा गया।
  • श्रीलंका से 26 सितंबर 2025 को एक भारतीय मछली पकड़ने वाली नौका और चार मछुआरों को भारत वापस पहुंचाया गया।
  • श्रीलंका से 3 भारतीय मछुआरों और एक भारतीय मछली पकड़ने वाली नौका को 17 नवंबर 2025 को भारत ले जाया गया।

आईसीजी ने सरकार के स्वच्छ भारत अभियान और प्रधानमंत्री के 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के समर्थन में 20 सितंबर 2025 को सभी तटीय राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस 25 (आईसीसी-25) का आयोजन किया। देश भर में कुल 26,092 स्वयंसेवकों ने भाग लिया और भारत के समुद्र तटों को पुनर्स्थापित व संरक्षित करने के लिए 34,948 किलोग्राम प्लास्टिक तथा अन्य कचरा एकत्र किया। इस व्यापक अभियान में देश भर के 66 तटीय स्थानों को शामिल किया गया, जो तटीय स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बड़ी सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)

वर्ष 2025 में डीआरडीओ की कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर 120) का पहला उड़ान परीक्षण 29 दिसंबर, 2025 को चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। रॉकेट का परीक्षण इसकी अधिकतम 120 किलोमीटर की रेंज के लिए किया गया, जिसमें सभी निर्धारित उड़ान संबंधी गतिविधियां प्रदर्शित हुईं। एलआरजीआर ने लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा। इसे सेवा में मौजूद पिनाका लॉन्चर से प्रक्षेपित किया गया, जो इसकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है और एक ही लॉन्चर से विभिन्न रेंज के पिनाका वेरिएंट को प्रक्षेपित करने की क्षमता प्रदान करता है।
  • डीआरडीओ ने 31 दिसंबर, 2025 को लगभग 10:30 बजे ओडिशा तट से दूर एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलों का सफल प्रक्षेपण किया। यह उड़ान परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के भाग के रूप में किया गया था। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज द्वारा तैनात ट्रैकिंग सेंसरों द्वारा पुष्टि की गई कि दोनों मिसाइलों ने निर्धारित प्रक्षेप पथ का अनुसरण किया और सभी उड़ान उद्देश्यों को पूरा किया। प्रभाव बिंदुओं के पास तैनात जहाज पर स्थापित टेलीमेट्री प्रणालियों द्वारा अंतिम घटनाओं की पुष्टि की गई।
  • वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) ने 12 मार्च, 2025 को एलसीए एएफ एमके1 प्रोटोटाइप लड़ाकू विमान से एस्ट्रा बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (बीवीआरएएम) का सफल परीक्षण प्रक्षेपण किया। परीक्षण फायरिंग में मिसाइल ने उड़ते हुए लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा।
  • डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने 26 मार्च, 2025 को स्वदेशी रूप से विकसित वर्टिकल-लॉन्च्ड शॉर्ट-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (वीएलएसआरएसएएम) का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण जमीन पर स्थित वर्टिकल लॉन्चर से बहुत कम दूरी और कम ऊंचाई पर तेज गति वाले हवाई लक्ष्य के ऊपर किया गया। इससे मिसाइल प्रणाली की सीमा के निकट कम ऊंचाई पर मार करने की क्षमता सिद्ध हुई।
  • डीआरडीओ और भारतीय सेना ने 3 और 4 अप्रैल, 2025 को तेज गति वाले हवाई लक्ष्यों के खिलाफ मध्यम दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइल के सेना संस्करण के चार सफल उड़ान परीक्षण किए। मिसाइलों ने हवाई लक्ष्यों को रोककर उन्हें नष्ट कर दिया और सीधे निशाने पर लगीं। ये उड़ान परीक्षण हथियार प्रणाली के परिचालन अवस्था में किए गए थे।
  • एसयू-30 एमकेआई विमान से 8 से 10 अप्रैल, 2025 के बीच लंबी दूरी की ग्लाइड बम (एलआरजीबी) 'गौरव' के परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में लगभग 100 किलोमीटर की मारक क्षमता और सटीक निशाना लगाने की क्षमता सफलतापूर्वक प्रदर्शित की गई। एलआरजीबी 'गौरव' 1,000 किलोग्राम श्रेणी का ग्लाइड बम है, जिसे डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला डीआरडीएल ने नवनिर्मित अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट परीक्षण सुविधा में 1,000 सेकंड से अधिक समय तक सक्रिय शीतलित स्क्रैमजेट सबस्केल कंबस्टर का जमीनी परीक्षण करके हाइपरसोनिक हथियार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल एक ऐसी श्रेणी का हथियार है, जो ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक (> 6100 किमी प्रति घंटा) की गति से लंबे समय तक यात्रा कर सकता है और एयर ब्रीथिंग इंजन द्वारा संचालित होता है।
  • डीआरडीओ ने 3 मई, 2025 को मध्य प्रदेश के श्योपुर परीक्षण स्थल से स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट द्वारा विकसित इस एयरशिप को लगभग 17 किलोमीटर की ऊंचाई तक उपकरण युक्त पेलोड के साथ लॉन्च किया गया।
  • डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं विकसित मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (एमआईजीएम) का कम विस्फोटक क्षमता के साथ सफल युद्धक परीक्षण किया। एमआईजीएम को आधुनिक स्टील्थ जहाजों और पनडुब्बियों के खिलाफ भारतीय नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • आईएनएस कवारत्ती से विस्तारित रेंज पनडुब्बी रोधी रॉकेट (ईआरएएसआर) के उपयोगकर्ता परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। ईआरएएसआर पूरी तरह से स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट है, जिसका उपयोग पनडुब्बियों से निपटने के लिए किया जाता है और इसे भारतीय नौसेना के जहाजों के आंतरिक नियंत्रण क्षेत्र (आईआरएल) से दागा जाता है। इसमें उच्च सटीकता और स्थिरता के साथ व्यापक रेंज आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दोहरे रॉकेट मोटर का विन्यास है।
  • भारतीय सेना के लिए आकाश हथियार प्रणाली के उन्नत संस्करण, आकाश प्राइम द्वारा लद्दाख में उच्च ऊंचाई पर दो हवाई उच्च गति मानवरहित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई।
  • डीआरडीओ ने एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया, जो एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिसमें सभी स्वदेशी त्वरित प्रतिक्रिया सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलें (क्यूआरएसएएम), उन्नत बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) मिसाइलें और एक उच्च-शक्ति लेजर-आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) शामिल हैं।
  • पूर्ण परिचालन परिदृश्य के तहत 24 सितंबर 2025 को रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर प्रणाली से मध्यम दूरी की अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया गया। अपनी तरह का यह पहला प्रक्षेपण विशेष रूप से डिजाइन किए गए रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर से किया गया, जो बिना किसी पूर्व शर्त के रेल नेटवर्क पर चलने में सक्षम है। यह क्रॉस-कंट्री गतिशीलता प्रदान करता है और कम दृश्यता में भी कम प्रतिक्रिया समय में प्रक्षेपण करने की क्षमता रखता है।
  • डीआरडीओ ने 16 नवंबर 2024 को भारत की पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह हाइपरसोनिक मिसाइल सशस्त्र बलों के लिए 1,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक विभिन्न पेलोड ले जाने के लिए तैयार की गई है।
  • डीआरडीओ ने 2 दिसंबर 2025 को नियंत्रित वेग पर लड़ाकू विमान बचाव प्रणाली का सफल उच्च गति रॉकेट-स्लेड परीक्षण किया। परीक्षण ने कैनोपी विच्छेदन, इजेक्शन अनुक्रमण और पूर्ण चालक दल बचाव को मान्य किया। इस जटिल गतिशील परीक्षण ने भारत को उन्नत आंतरिक बचाव प्रणाली परीक्षण क्षमता वाले देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल कर दिया है।

रक्षा मंत्रालय में 2025 को सुधार वर्ष घोषित किया गया था। रक्षा विभाग द्वारा किए गए कुछ प्रमुख सुधार निम्नलिखित हैं:

  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास में स्टार्टअप और लघु व मध्यम उद्यमों सहित भारतीय उद्योगों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने हेतु सरलीकृत और उद्योग-अनुकूल डीआरडीओ खरीद नियमावली 2025 (पीएम-2025) का एक नया संस्करण जारी किया गया है।
  • डीआरडीओ ने बाहरी और आंतरिक समिति की सिफारिशों के आधार पर अपने परियोजना प्रबंधन “परियोजना निर्माण एवं प्रबंधन निर्देश (डीपीएफएम)” की व्यापक समीक्षा भी की है। डीपीएफएम-2025 दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दे दिया गया है और डीआरडीओ के प्रयोगशालाओं/संस्थानों द्वारा उपयोग के लिए जारी कर दिया गया है।
  • डीआरडीओ रोडमैप रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए एक 10 वर्षीय योजना है, जो उन्नत प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास के साथ-साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह रोडमैप निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, जिसमें विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और उन्हें रक्षा उत्पादों में एकीकृत करने के लिए निजी संस्थाओं को वित्त पोषण प्रदान करने की पहल शामिल है। इसके अलावा, डीआरडीओ ने अपनी परियोजनाओं, प्रौद्योगिकियों और क्षमताओं को 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ संरेखित किया है, जिनमें आत्मनिर्भरता, रक्षा आधुनिकीकरण व तकनीकी आत्मनिर्भरता शामिल हैं।
  • संशोधित डीआरडीओ प्रक्रियाएं 2025 के लिए तैयार की गई हैं, जिनमें डीआरडीओ द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी को उत्पादन के उद्देश्य से रक्षा उद्योग को हस्तांतरित करने हेतु विभिन्न प्रपत्र, टेम्पलेट और चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका शामिल हैं, जिससे व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा मिलता है।
  • समर एक प्रमाणन प्रणाली है, जिसे डीआरडीओ ने क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) के सहयोग से विकसित किया है। यह रक्षा विनिर्माण उद्यमों की क्षमताओं का मूल्यांकन एवं संवर्धन करने के लिए एक मानदंड के रूप में कार्य करती है। समर पहल का उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करके और डीआरडीओ द्वारा विकसित प्रणालियों के लिए उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करके रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
  • डीआरडीओ इन उभरते स्टार्टअप्स के साथ सुगम संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से एक नई नीति ला रहा है। इस पहल का लक्ष्य स्टार्टअप्स के साथ जुड़ने और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए उनके नवोन्मेषी विचारों का लाभ उठाने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है।
  • डीआरडीओ में आईटी अवसंरचना और नेटवर्क मौजूद हैं, जिनमें संगठन भर में सुरक्षित इंट्रानेट के लिए डीआरडीओ रैपिड ऑनलाइन नेटवर्क एक्सेस (ड्रोना) और संगठन भर में सुरक्षित इंटरनेट हेतु सेंट्रल इंटरनेट एक्सेस गेटवे (सीआईएजी) शामिल हैं। परिचालन दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से डीआरडीओ पूरे संगठन में एक ईआरपी प्रणाली लागू कर रहा है। इससे विभिन्न प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण संभव होगा, डेटा प्रबंधन में सुधार होगा और निर्णय लेने में सुविधा होगी। प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अनुबंध भी जारी कर दिया गया है।

नई पहल

  • लखनऊ स्थित डीटीटीसी में औद्योगिक कर्मचारियों के कौशल विकास का कार्य किया गया, जिसमें 500 से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया और 30 सेमिनार एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए।
  • वैज्ञानिक और तकनीकी कैडर की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है तथा इसका विज्ञापन जारी किया गया है।
  • वैज्ञानिक 'बी' के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण हेतु पॉइंट्स कार्यक्रम की अवधि 2 वर्ष के लिए बढ़ा दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप पुणे स्थित डीआईएटी से रक्षा प्रौद्योगिकी में एम.टेक की डिग्री प्राप्त की जा सकेगी।
  • इंटर्नशिप/अप्रेंटिसशिप योजना के तहत 5,000 से अधिक छात्रों को विभिन्न डीआरडीओ प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षित किया गया है।

एयरो इंडिया 2025 के अवसर पर रक्षा मंत्री द्वारा अनुमोदित ‘डीआरडीओ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नीति–2025’ और ‘निर्यात हेतु डीआरडीओ उत्पाद–2025’ के संकलन को औपचारिक रूप से जारी किया गया। इसके साथ ही, डीआरडीओ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नीति–2025 के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु विस्तृत प्रक्रिया भी तैयार कर प्रकाशित की गई है। अब तक भारतीय उद्योगों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए लगभग 2,200 लाइसेंसिंग समझौते किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 250 समझौते चालू वर्ष के दौरान संपन्न किए गए हैं। रक्षा उद्योग के साथ निरंतर और संरचित संवाद को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से डीआरडीओ द्वारा उद्योग अंतःक्रिया समूह (आईआईजी) का गठन भी किया गया है। इसके अंतर्गत, डीआरडीओ की सभी प्रयोगशालाओं में प्रत्येक माह के पहले और तीसरे बुधवार को खुले सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनके माध्यम से रक्षा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया जाता है, रक्षा उद्योग को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है तथा उनकी समस्याओं (यदि कोई हों) का समाधान किया जाता है। खुले सत्रों के दौरान यदि कोई मुद्दा या चिंता अनसुलझी रह जाती है, तो उसे प्रत्येक माह के अंतिम शुक्रवार को डीआरडीओ मुख्यालय के साथ आयोजित बैठक में उठाया जाता है। इसके अतिरिक्त, डीआरडीओ द्वारा उद्योग जगत को सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से 350 से अधिक विशेष परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें इंटरनेट पर रक्षा परीक्षण पोर्टल पर अपलोड किया गया है। भारतीय रक्षा उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए डीआरडीओ ने विभिन्न एजेंसियों के साथ अनेक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए हैं। डीआरडीओ द्वारा विकसित प्रणालियों के लिए डिजिटल उत्पादन कार्यक्रम (डीसीपीपी) की कुल संख्या 145 है, जिनके अंतर्गत 107 उत्पादन एजेंसियां कार्यरत हैं।

पूर्व सैनिक कल्याण विभाग

पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए वर्ष के दौरान लिए गए प्रमुख नीतिगत निर्णय, हालिया पहल/उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

  • सशस्त्र सेना ध्वज दिवस कोष से वित्त पोषित निम्नलिखित कल्याणकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले लाभों को 1 नवंबर 2025 से दोगुना कर दिया गया है। गरीबी अनुदान को 4,000 रुपये से बढ़ाकर 8,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, शिक्षा अनुदान को दो आश्रित बच्चों या स्नातकोत्तर अध्ययन कर रही विधवाओं तक के लिए 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है और विवाह अनुदान को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये प्रति लाभार्थी कर दिया गया है।
  • वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना के तहत 16,380 लाभार्थियों को 55.06 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई।
  • पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने केंद्रीय सैनिक बोर्ड के माध्यम से पहली बार 29 और 30 सितंबर 2025 को दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में विकसित भारत के निर्माण की विषय-वस्तु पर भारत भर के सभी राज्य और जिला सैनिक बोर्डों के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, राज्य सैनिक बोर्डों के निदेशकों और सभी जिला सैनिक अधिकारियों को दो दिवसीय सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था, ताकि आगे की रणनीति पर चर्चा की जा सके और संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई गई नवोन्मेषी गतिविधियों एवं सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा किया जा सके। रक्षा मंत्री ने दस सबसे प्रगतिशील राज्य सैनिक बोर्डों को सम्मानित किया और सभी सैनिक बोर्डों से पूर्व सैनिकों की बेहतरी एवं कल्याण के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।
  • पूर्व सैनिकों और अन्य श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए नकद रहित स्वास्थ्य सुविधा, पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) हेतु वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 10,928 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। यह ईसीएचएस के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजटीय आवंटन है। इस सुविधा से सूचीबद्ध अस्पतालों के लंबित बिलों और व्यक्तिगत दावों के निपटान में भी मदद मिली।
  • ईसीएचएस के भौगोलिक कवरेज को बढ़ाने और अधिक दबाव वाले ईसीएचएस पॉलीक्लिनिकों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए वर्ष 2024-25 के दौरान 23 नए ईसीएचएस पॉलीक्लिनिकों की स्थापना और 50 मौजूदा ईसीएचएस पॉलीक्लिनिकों के उन्नयन को मंजूरी दी गई। कुल 1,357 अतिरिक्त संविदात्मक कर्मचारियों की नियुक्ति स्वीकृत की गई। अब तक 12 नए पॉलीक्लिनिक चालू हो चुके हैं और शेष 11 नए पॉलीक्लिनिक वर्ष 2025-26 के दौरान चालू हो जाएंगे।
  • विभाग ने 29 अगस्त 2025 को प्रशिक्षण के दौरान सेवा संबंधी चोटों के कारण चिकित्सकीय रूप से सेवामुक्त किए गए अधिकारी कैडेटों को ईसीएचएस चिकित्सा लाभ प्रदान करना शुरू किया। अब इन सेवामुक्त अधिकारी कैडेटों को मानक एकमुश्त ईसीएचएस सदस्यता शुल्क का भुगतान किए बिना निःशुल्क ओपीडी, आईपीडी और निदान सेवाएं प्राप्त होंगी। यह लाभ एक बार के मानवीय उपाय के रूप में दिया जा रहा है, न कि किसी मिसाल के तौर पर मिलता है।
  • सरकार ने 15 अगस्त 2025 को ईसीएचएस लाभार्थियों को अधिकृत स्थानीय केमिस्टों (एएलसी) के माध्यम से अनुपलब्ध (एनए) दवाओं की होम डिलीवरी के लिए एक पायलट परियोजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य घर पर आवश्यक दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना और विशेषकर अकेले रहने वाले बुजुर्ग और बीमार पूर्व सैनिकों के लिए पॉलीक्लिनिक के बार-बार चक्कर लगाने के बोझ को कम करना है। इन दवाओं की होम डिलीवरी के लिए डाक विभाग और सामान्य सेवा केंद्रों का उपयोग किया जा रहा है।
  • सरकार ने 28.04.2025 को सभी श्रेणियों के पॉलीक्लिनिकों के लिए अनुपलब्ध (एनए) जीवन रक्षक दवाओं और अधिकृत स्थानीय औषधि विक्रेताओं (एएलसी) से आपातकालीन दवाओं की खरीद हेतु मासिक मौद्रिक सीमा को दोगुना कर दिया है। टाइप ए और टाइप बी ईसीएचएस पॉलीक्लिनिकों के लिए मासिक मौद्रिक सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। टाइप सी पॉलीक्लिनिकों हेतु सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दी गई है। टाइप डी पॉलीक्लिनिकों की सीमा अब 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई है।
  • विभाग ने बेहतर मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने व दवाओं पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से 21.04.2025 को रक्षा मंत्री की उपस्थिति में ईसीएचएस और मुख्यालय सुरक्षा सेवा विंग (एसएसडब्ल्यू), राजयोग शिक्षा एवं अनुसंधान फाउंडेशन ऑफ ब्रह्मा कुमारिस के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे।
  • पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए कल्याणकारी सेवाओं में सुधार लाने हेतु 26 अगस्त 2025 को क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। क्यूसीआई नीति मूल्यांकन, डिजिटल रूपांतरण और प्रभाव आकलन में सहायता करेगा। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि सभी हितधारकों के डेटा तक पहुंच हो, जिनमें सैनिक बोर्ड और सूचीबद्ध अस्पताल शामिल हैं। इस सहयोग का उद्देश्य डिजिटल उपकरणों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विश्लेषण के माध्यम से पहुंच को बढ़ाना है। यह भारत भर में 63 लाख पूर्व सैनिक कल्याण योजना (ईसीएचएस) लाभार्थियों के लिए सेवाओं की बेहतर डिलीवरी में सहायक होगा।
  • स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता बढ़ाने और ईसीएचएस के तहत अधिक संख्या में निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध करने के लिए, सूचीबद्ध किए जाने वाले अस्पतालों की संख्या पर लगी सीमा को हटा दिया गया है। यह उपाय ऑनलाइन सूचीबद्धकरण प्रक्रिया के साथ मिलकर, अधिक पारदर्शिता और चिकित्सा सेवाओं की आसान डिलीवरी सुनिश्चित करेगा।
  • पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) के माध्यम से 2024-25 के दौरान कुल 67,316 पूर्व सैनिकों (ईएसएम) को पुनर्वास दिया गया है। इनमें से लगभग 48,959 को सुरक्षा एजेंसियों में रोजगार मिला है। वर्ष के दौरान आयोजित रोजगार मेलों के माध्यम से कुल 13,715 ईएसएम को रोजगार के प्रस्ताव दिए गए। इसका उद्देश्य कॉरपोरेट क्षेत्र में ईएसएम के पुन: रोजगार को सुगम बनाना और स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है।
  • प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत पूर्व सैनिकों को सामान्य प्रोत्साहनों (मासिक खरीद के 15% की दर से 5 लाख रुपये) के अतिरिक्त 2 लाख रुपये का एकमुश्त विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य देश भर में जेनेरिक दवाओं की फार्मेसियां ​​स्थापित करना है ताकि सभी को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। पूर्व सैनिक इसके लिए जारी किए गए 'पात्रता प्रमाण पत्र' के माध्यम से इसका लाभ उठा सकते हैं।
  • डीजीआर द्वारा प्रायोजित ड्रोन प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 2024-25 में आईआईटी रोपड़, आईआईटी गुवाहाटी और एनएसटीआई हैदराबाद में 145 जेसीओ/ओआर समकक्ष पूर्व सैन्य कर्मियों के लिए शुरू किए गए थे। 2025-26 में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जा रहा है, जिसमें पहले से अधिक संस्थानों को शामिल किया जाएगा, इस पहल से पूर्व सैन्य कर्मियों के 720 रिक्त पदों को भरा जा सकेगा।
  • डीजीआर और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के बीच 14.10.2025 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत सीआईएल की सहायक कंपनियों में कोयला लोडिंग तथा परिवहन कंपनियों में पूर्व सैनिकों को रोजगार दिया जाएगा। यह योजना पूर्व सैनिकों और सशस्त्र बलों के कर्मियों की विधवाओं/आश्रितों को पुनर्वास एवं कल्याण के अवसर प्रदान करेगी।

स्पर्श: भारत का सबसे बड़ा डिजिटल पेंशन प्लेटफॉर्म

डिजिटल इंडिया की एक प्रमुख पहल 'सही पेंशनभोगी को सही समय पर सही पेंशन' सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, पेंशन प्रशासन प्रणाली - रक्षा (स्पर्श) देश का पहला संपूर्ण डिजिटल पेंशन प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। प्रयागराज स्थित पीसीडीए (पेंशन) के माध्यम से रक्षा लेखा विभाग (डीएडी) द्वारा संचालित, स्पर्श ने नवंबर 2025 तक भारत और नेपाल भर में 31.69 लाख रक्षा पेंशनभोगियों को अपने साथ जोड़ा है। यह 45,000 से अधिक एजेंसियों द्वारा प्रबंधित एक खंडित प्रणाली को एक एकीकृत, पारदर्शी व जवाबदेह डिजिटल ढांचे से प्रतिस्थापित करता है।

प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

पुराने सिस्टम से संबंधित 94.3% विसंगतिपूर्ण मामलों का समाधान हुआ: पिछली प्रणाली से स्थानांतरित किए गए 6.43 लाख विसंगतिपूर्ण मामलों में से 6.07 लाख मामलों को पेंशनभोगियों के अधिकारों को प्रभावित किए बिना सामान्य कर दिया गया है।

बुजुर्गों और तकनीकी रूप से कम जानकार पेंशनभोगियों के लिए व्यापक पहुंच: देशभर में 284 स्पर्श पहुंच कार्यक्रम और 194 रक्षा पेंशन समाधान कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में आयोजित इन कार्यक्रमों के दौरान 8,000 से अधिक शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया गया।

बढ़ी हुई पारदर्शिता और शिकायत निवारण: पेंशनभोगी अब अपनी पेंशन की पूरी जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं और आसानी से सुधार संबंधी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों के निवारण का औसत समय अप्रैल 2025 में 56 दिन से घटकर नवंबर 2025 में 17 दिन हो गया है और प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, डीएडी ने 73% संतुष्टि स्कोर प्राप्त किया है, जिससे यह मंत्रालयों/विभागों में 5वें स्थान पर है।

डीएलसी 4.0 अभियान: रक्षा एवं पेंशनभोगी विभाग (डीओपी एंड पीडब्ल्यू) के राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) 4.0 अभियान (1-30 नवंबर, 2025) के तहत, डीएडी ने 202 कार्यालयों, 4.63 लाख सामान्य सेवा केंद्रों तथा 14 सहयोगी बैंकों को सक्रिय किया है, जिन्हें 27 नोडल अधिकारियों का सहयोग प्राप्त है। 30 नवंबर, 2025 तक रक्षा पेंशनभोगियों के लिए 20.94 लाख डीएलसी जारी किए जा चुके हैं - जो सभी विभागों में सबसे अधिक है।

वितरण: वित्त वर्ष 2024-25 में, रक्षा पेंशन बजट के तहत 1,57,681 करोड़ रुपये का वितरण स्पर्श के माध्यम से वास्तविक समय के आधार पर किया गया। जुलाई 2024 में लागू ओआरओपी-III के तहत, मात्र 15 दिनों में 20.17 लाख लाभार्थियों को 1,224.76 करोड़ रुपये का त्वरित वितरण संभव हुआ।

सीमा सड़क संगठन

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ विकास सरकार की एक प्रमुख प्राथमिकता रहा है, क्योंकि यह सैन्य गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स के निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित कर रक्षा तैयारियों को सशक्त बनाता है। इसके साथ ही, यह पहल पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित कर दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति प्रदान करती है। इसी क्रम में, चालू वर्ष के दौरान रक्षा मंत्री द्वारा विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की कुल 175 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है।
  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 7 दिसंबर, 2025 को लद्दाख से एक साथ उद्घाटन की गई 125 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया, जो अब तक का सबसे अधिक संख्या में एक साथ किया गया उद्घाटन है। ये परियोजनाएं दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर तथा सात राज्यों अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल एवं मिजोरम में विस्तृत हैं। कुल परियोजनाओं में 28 सड़कें, 93 पुल और 4 विविध परियोजनाएं शामिल हैं, जिन्हें लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण किया गया है। यह रक्षा मंत्रालय के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक लागत वाली एकमुश्त उद्घाटन परियोजनाएं हैं। इन परियोजनाओं में दारबुक–श्योक–दौलत बेग ओल्डी (डीएसडीबीओ) सड़क पर स्थित श्योक सुरंग भी शामिल है, जो इस रणनीतिक क्षेत्र में सभी मौसमों में निर्बाध एवं विश्वसनीय संपर्क सुनिश्चित करेगी तथा सैन्य और असैन्य दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगी।
  • रक्षा मंत्री ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के 66वें स्थापना दिवस के अवसर पर 7 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल माध्यम से राष्ट्र को 50 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं समर्पित कीं। इन परियोजनाओं में 30 पुल, 17 सड़कें तथा 3 अन्य निर्माण कार्य शामिल हैं। लगभग 1,879 करोड़ रुपये की कुल लागत से निर्मित ये परियोजनाएं छह सीमावर्ती राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, मिज़ोरम, पश्चिम बंगाल तथा राजस्थान में फैली हुई हैं। ये परियोजनाएं दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा, संपर्क और समग्र विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
  • पिछले दो वर्षों के दौरान, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की कुल 356 अवसंरचना  परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की गई हैं, जो रणनीतिक अवसंरचना विकास के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाती हैं।

पीके/केसी/एनके


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