आयुष
आयुष सुरक्षा पोर्टल
प्रविष्टि तिथि:
02 DEC 2025 9:50PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय ने 30 मई 2025 को "आयुष सुरक्षा" नामक एक आईटी-सक्षम ऑनलाइन पोर्टल शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य भ्रामक विज्ञापनों (एमएलए)/आपत्तिजनक विज्ञापनों (ओए) का पता लगाना और आयुष दवाओं से संबंधित प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (एडीआर) की रिपोर्ट करना है। इस पोर्टल में संदिग्ध प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की समय रहते पता लगाने और भ्रामक विज्ञापनों /आपत्तिजनक विज्ञापनों को कैप्चर करने के लिए एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड है, जिससे तत्क्षण नियामक कार्रवाई और व्यापक आंकड़े के विश्लेषण संभव हो सके।
यह पोर्टल राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम के अनुरूप है और तीन-स्तरीय फार्माकोविजिलेंस केंद्रों से आंकड़े को एकीकृत करता है तथा शिकायतों को संबंधित अधिकारियों को अग्रेषित करता है, जिनमें राज्य/केंद्र शासित प्रदेश लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आयुष) और केंद्र सरकार के निकाय जैसे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमओआईबी), केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए), भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम), होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीएच), भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई), भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) शामिल हैं, ताकि उनका समाधान किया जा सके।
नागरिक पोर्टल के माध्यम से भ्रामक विज्ञापनों /आपत्तिजनक विज्ञापनों और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की शिकायत कर सकते हैं और संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायतों पर की गई कार्रवाई का पता लगा सकते हैं। अब तक, पोर्टल पर आम जनता द्वारा 35 भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत दर्ज की गई है।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक समाधान की गई शिकायतों (जिनमें 35 भ्रामक विज्ञापन शामिल हैं) की संख्या अनुलग्नक-I में संलग्न है।
यह पोर्टल उपभोक्ताओं और आयुष स्वास्थ्य पेशेवरों को भ्रामक विज्ञापनों /आपत्तिजनक विज्ञापनों और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की रिपोर्ट करने तथा नियामक अधिकारियों को इनकी निगरानी करने की सुविधा प्रदान करता है। पोर्टल पर दर्ज सभी शिकायतों की समीक्षा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस केंद्र (एनपीवीसीसी) और आयुष मंत्रालय द्वारा की जा सकती है, जिससे नियामक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है।
नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए, पोर्टल का व्यापक प्रचार सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईईसी) सामग्री, जागरूकता शिविरों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से किया जा रहा है। फार्माकोविजिलेंस केंद्र भी स्वास्थ्य पेशेवरों सहित नागरिकों को पोर्टल के माध्यम से भ्रामक या आपत्तिजनक विज्ञापनों और दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्ट करने के लिए सक्रिय रूप से जागरूक कर रहे हैं।
आयुष मंत्रालय के अंतर्गत फार्माकोविजिलेंस का त्रिस्तरीय नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है, जिसमें एक राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस समन्वय केंद्र (एनपीवीसीसी), 5 मध्यवर्ती फार्माकोविजिलेंस केंद्र (आईपीवीसी) और 97 परिधीय फार्माकोविजिलेंस केंद्र (पीपीवीसी) शामिल हैं।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक समाधान की गई शिकायतों (जिनमें 35 भ्रामक विज्ञापन शामिल हैं) की संख्या निम्नलिखित है:
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क्रमांक
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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आज तक समाधान की गई शिकायतों की संख्या
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पुदुचेरी
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04
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केरल
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22
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ओडिशा
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145
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त्रिपुरा
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10
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महाराष्ट्र
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शून्य
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-
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गुजरात
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शून्य
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मणिपुर
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शून्य
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मिजोरम
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शून्य
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गोवा
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शून्य
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दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
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शून्य
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नागालैंड
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शून्य
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लक्षद्वीप
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शून्य
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लद्दाख
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शून्य
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-
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अरुणाचल प्रदेश
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शून्य
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-
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उत्तर प्रदेश
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शून्य
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झारखंड
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शून्य
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हरियाणा
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शून्य
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आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रताप राव जाधव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/एचएन/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2210465)
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