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वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र की स्थिति

प्रविष्टि तिथि: 02 DEC 2025 9:53PM by PIB Delhi

बदलते वैश्विक संदर्भों और पारंपरिक चिकित्सा (टीएम) तथा संबंधित साक्ष्यों की बढ़ती मांग को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत सरकार के मूलभूत सहयोग से 2022 में वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र (जीटीएमसी) की स्थापना की। विश्व स्वास्थ्य संगठन की पारंपरिक चिकित्सा रणनीति के अंतर्गत, वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र अनुसंधान और साक्ष्य जुटाने, स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने, जैव विविधता तथा समानता को बढ़ावा देने और नवाचार एवं प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करता है ताकि वैश्विक स्वास्थ्य और सतत विकास में पारंपरिक चिकित्सा के योगदान को अधिकतम किया जा सके। साथ ही, स्थानीय विरासतों, संसाधनों और अधिकारों का सम्मान करना इसका मार्गदर्शक सिद्धांत है।

इस केंद्र का रणनीतिक दृष्टिकोण प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को लोगों और पृथ्वी के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में एकीकृत करना है। यह वैश्विक स्तर पर साक्ष्य-आधारित पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) के लिए एक प्रमुख ज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करेगा। विश्व भर में स्थित पारंपरिक चिकित्सा के इस वैश्विक केंद्र (कार्यालय) के निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्य हैं:

आयुष सिस्टम को विश्व भर में स्थापित करना।

परंपरागत चिकित्सा से संबंधित वैश्विक स्वास्थ्य मामलों में नेतृत्व प्रदान करना।

पारंपरिक चिकित्सा की गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रभावशीलता, सुलभता और तर्कसंगत उपयोग सुनिश्चित करना।

प्रासंगिक तकनीकी क्षेत्रों, उपकरणों और कार्यप्रणालियों में मानदंड, मानक और दिशानिर्देश विकसित करना, डेटा एकत्र करना, विश्लेषण करना और प्रभाव का आकलन करना। विश्व स्वास्थ्य संगठन के पारंपरिक चिकित्सा सूचना विज्ञान केंद्र की परिकल्पना करना, जो मौजूदा पारंपरिक चिकित्सा डेटा बैंकों, आभासी पुस्तकालयों और शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से कार्य करता हो।

उद्देश्यों से संबंधित क्षेत्रों में विशिष्ट क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना और परिसर, आवासीय या वेब-आधारित माध्यमों से तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन अकादमी और अन्य रणनीतिक भागीदारों के साथ साझेदारी के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।

वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र की कार्य योजना पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान और साक्ष्य, पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन, पारंपरिक चिकित्सा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (पीएचसी) और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी), पारंपरिक चिकित्सा स्वदेशी ज्ञान और जैव विविधता तथा पारंपरिक चिकित्सा डिजिटल स्वास्थ्य अनुप्रयोगों पर केंद्रित है, साथ ही प्रभावी नेतृत्व और रणनीति, संचालन और प्रबंधन, तथा निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान केंद्रित करती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र में मेजबान और प्रमुख निवेशक के रूप में, भारत वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र के एजेंडे को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अकादमिक आदान-प्रदान और मानकीकरण प्रयासों को सुविधाजनक बनाने के लिए 25 देश-से-देश समझौता ज्ञापनों, 15 आयुष चेयर समझौता ज्ञापनों और 52 संस्थान-से-संस्थान समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्षेत्रीय और मुख्यालय विभागों के अंदर और उनके बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रगतिशील प्रयास किए हैं, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यों को अधिक दृश्यता, बहुविषयक विशेषज्ञता और क्षमता प्राप्त हुई है। वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के वरिष्ठ प्रबंधन, जिसमें बहुपक्षीय मामलों के महानिदेशक के दूत का कार्यालय भी शामिल है, के साथ मिलकर जी20 और ब्रिक्स सदस्यों के साथ संवाद स्थापित किया ताकि वैश्विक स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक विकास में पारंपरिक चिकित्सा की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता दी जा सके। वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र ने एक तकनीकी विशेषज्ञ नेटवर्क (टीईएन) के माध्यम से डब्ल्यूएचओ मुख्यालय और क्षेत्रीय एवं देश कार्यालय के सहयोगियों के बीच नियमित संपर्क के लिए एक तंत्र भी शुरू किया है।

जामनगर स्थित वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र ने वर्ष 2023 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के पहले पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी की, जिसका उद्देश्य सर्वोत्तम प्रथाओं और वैज्ञानिक प्रमाणों के अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान को सुगम बनाना था। वर्ष 2024 में, वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र ने कई कार्यक्रमों का सह-प्रायोजन किया, जिनमें जून में ब्राजील के साल्वाडोर में आयोजित जी20 स्वास्थ्य कार्य समूह का कार्यक्रम "सतत विकास लक्ष्यों और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की प्राप्ति के लिए पारंपरिक चिकित्सा" तथा अक्टूबर में कोलंबिया के कैली में आयोजित सोलहवें जैविक विविधता सम्मेलन (सीओपी16) के दौरान एक उच्च-स्तरीय पैनल शामिल हैं।

जहां तक ​​जामनगर स्थित वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र के बुनियादी ढांचे के पूरा होने का संबंध है, अक्टूबर 2025 तक कुल भौतिक प्रगति 79 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 40 प्रतिशत है।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रताप राव जाधव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एचएन/वाईबी


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