औषधि विभाग
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फार्मेसियों द्वारा उपभोक्ताओं का शोषण

प्रविष्टि तिथि: 12 DEC 2025 4:20PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (डीपीसीओ, 2013) के प्रावधानों के अनुसार दवाओं की कीमतों की निगरानी करता है। डीपीसीओ, 2013 के तहत, किसी भी दवा के निर्माता को उसके कंटेनर के लेबल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) मुद्रित करना अनिवार्य है। इसके अलावा, किसी भी विक्रेता को किसी भी खुली मात्रा को उसके आनुपातिक मूल्य से अधिक कीमत पर बेचने की अनुमति नहीं है। एनपीपीए दवाओं की कीमतों की निगरानी करता है और डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों के अनुसार उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूलने वाली किसी भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करता है। यह कार्रवाई अधिक कीमत वसूलने के संबंध में प्राप्त संदर्भों के आधार पर की जाती है, जिसमें राज्यों में स्थापित मूल्य निगरानी और संसाधन इकाइयां और राज्य औषधि नियंत्रक (महाराष्ट्र राज्य सहित) शामिल हैं। ये संदर्भ अधिक कीमत वसूलने से संबंधित होते हैं, साथ ही खुले बाजार से खरीदे गए नमूने, बाजार डेटाबेस की रिपोर्ट और शिकायत निवारण चैनलों के माध्यम से दर्ज की गई शिकायतें भी इसमें शामिल हैं। एनपीपीए ने सूचित किया है कि महाराष्ट्र राज्य सहित पूरे देश से, प्रति यूनिट एमआरपी से काफी अधिक कीमत पर खुली या बिना पैक की हुई दवाओं की बिक्री के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एमके/एमबी


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