रेल मंत्रालय
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छत्तीसगढ़ में रेल का बड़े पैमाने पर अधोसंरचना विस्तार; बजट 22 गुना बढ़ा, मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी जानकारी

प्रविष्टि तिथि: 05 DEC 2025 5:40PM by PIB Raipur

छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का संकेत देते हुए रेल मंत्रालय ने संसद को अवगत कराया है कि राज्य के लिए बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है—वित्तीय वर्ष 2009–2014 के दौरान औसतन ₹311 करोड़ प्रतिवर्ष की तुलना में वित्तीय वर्ष 2025–2026 में यह बढ़कर ₹6,925 करोड़ हो गया है, जो कि बाइस गुना से अधिक की वृद्धि है। सांसद श्री राजीव शुक्ला द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राज्य में स्वीकृत परियोजनाओं, उनकी प्रगति और वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण सदन के समक्ष प्रस्तुत किया।


मंत्री ने बताया कि ट्रैक बिछाने की गति में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच केवल 32 किलोमीटर नया ट्रैक जोड़ा गया था, जो औसतन 6.4 किलोमीटर प्रतिवर्ष था। वहीं, वर्ष 2014 से 2025 के बीच 1,189 किलोमीटर नई रेल लाइनों का उद्घाटन किया गया, जो प्रतिवर्ष औसतन 108.1 किलोमीटर है—पहले की तुलना में पंद्रह गुना से अधिक।


1 अप्रैल 2025 तक, छत्तीसगढ़ में कुल 26 स्वीकृत परियोजनाएँ—जिनमें छह नई लाइनें और बीस दोहरी/मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ शामिल हैं—1,932 किलोमीटर लंबाई को कवर करती हैं, जिन पर ₹31,619 करोड़ की लागत स्वीकृत है। इनमें से 1,023 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है तथा मार्च 2025 तक कुल ₹16,325 करोड़ का व्यय किया जा चुका है।


हाल ही में पूर्ण की गई परियोजनाओं में प्रमुख रेल लाइन और क्षमता-वृद्धि कार्य शामिल हैं, जैसे—खरसिया–धरमजयगढ़ नई लाइन (100 किमी), रायपुर–तिटलागढ़ डबल लाइन (203 किमी), सल्का रोड–खोंगसरा डबल लाइन (26 किमी), दुर्ग–राजनांदगांव डबल लाइन (31 किमी), खोड़री–अनूपपुर डबल लाइन (72 किमी) जिसमें बिलासपुर फ्लाईओवर शामिल है, बिलासपुर–उरकुरा तृतीय लाइन (110 किमी), चांपा–झारसुगुड़ा तृतीय लाइन (152 किमी) और पेंड्रा रोड–अनूपपुर तृतीय लाइन (50 किमी)।


वर्तमान में जिन बड़े कार्यों पर काम चल रहा है, उनमें डालीराजहरा–रावघाट नई लाइन, रावघाट–जगदलपुर नई लाइन, गेवरा रोड–पेंड्रा रोड नई लाइन, धरमजयगढ़–कोरबा नई लाइन शामिल हैं। इसी तरह, कई दोहरीकरण और मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ भी प्रगति पर हैं, जैसे कि किरंदुल–जगदलपुर डबल लाइन, जगदलपुर–कोरापुट डबल लाइन, झारसुगुड़ा–बिलासपुर चौथी लाइन, राजनांदगांव–नागपुर तृतीय लाइन, बोरीडांड़–अंबिकापुर डबल लाइन और महत्वपूर्ण खरसिया–परमलकासा पाँचवीं और छठी लाइन परियोजना।


पिछले तीन वर्षों — 2022–2023, 2023–2024, 2024–2025 तथा चालू वित्तीय वर्ष 2025–2026 — के दौरान रेलवे ने कुल 61 सर्वेक्षण किए हैं, जिनमें 26 नई लाइन सर्वेक्षण और 35 दोहरीकरण सर्वेक्षण शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ में 5,755 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हैं।


मंत्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे परियोजनाओं की स्वीकृति एवं समयबद्ध पूर्णता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें यातायात मांग का अनुमान, आर्थिक व्यवहार्यता, भूमि अधिग्रहण, वन एवं वैधानिक स्वीकृतियाँ, उपयोगिता स्थानांतरण, भौगोलिक एवं स्थलाकृति परिस्थितियाँ, स्थानीय क़ानून-व्यवस्था स्थिति और परियोजना क्षेत्रों में काम करने योग्य महीनों की संख्या शामिल है। इन सभी कारकों का परियोजनाओं की समयसीमा और लागत पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।


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आरडीजे/केआरवी


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