जल शक्ति मंत्रालय
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जल उपयोग दक्षता ब्यूरो (बीडब्ल्यूयूई), राष्ट्रीय जल मिशन, जल शक्ति मंत्रालय ने जयपुर में सिंचाई क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया

प्रविष्टि तिथि: 22 NOV 2025 9:12PM by PIB Delhi

हर बूंद को सुरक्षित रखने, हर किसान को सशक्त बनाने और भारत के जल-सुरक्षित भविष्य को मजबूत करने का एक सामूहिक आह्वान।

जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) के जल उपयोग दक्षता ब्यूरो (बीडब्ल्यूयूई) ने आज जयपुर स्थित सीसीएस एनआईएएम में सिंचाई क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया। यह सम्मेलन इस वर्ष देश भर में आयोजित किए जाने वाले चार क्षेत्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला है।

वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, सुश्री अर्चना वर्मा, अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, राष्ट्रीय जल मिशन, श्री सुमंत नारायण, संयुक्त सचिव, राष्ट्रीय जल मिशन और श्री पीयूष रंजन, निदेशक, बीडब्ल्यूयूई ने सम्मेलन को संबोधित किया।

उद्घाटन सत्र में बोलते हुए, एनडब्‍ल्‍यूएम के संयुक्त सचिव, श्री सुमंत नारायण ने सिंचाई दक्षता में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि भारत का लगभग 80-85% ताज़ा पानी कृषि कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है। उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने, जल की बर्बादी कम करने और सिंचाई क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए सूक्ष्म सिंचाई, प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों और नवीन सिंचाई पद्धतियों के महत्व पर बल दिया।

सुश्री अर्चना वर्मा (एएस एवं एमडी) ने हाल ही में प्रारंभ की गई एमसीएडी योजना पर जानकारी साझा की जिसका उद्देश्य दबावयुक्त पाइपों के माध्यम से सिंचाई में जल उपयोग दक्षता में सुधार लाना है। उन्होंने वर्तमान जल संकट की स्थिति की चर्चा की और सिंचाई क्षेत्र में जल संरक्षण प्रयासों और जल उपयोग दक्षता उपायों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सिंचाई के लिए जल के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समन्वित कार्य की आवश्यकता पर बल दिया।

इस सम्मेलन में लगभग 150 लोगों ने भाग लिया जिनमें केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों के अधिकारी शामिल थे, जैसे जल शक्ति मंत्रालय का कमांड एरिया डेवलपमेंट और जल प्रबंधन विंग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय; केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय भूजल बोर्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, जम्मू और कश्मीर और लेह राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेशों के सिंचाई और कृषि विभाग के अधिकारी (100), कृषि वैज्ञानिक (30), गैर सरकारी संगठन और प्रगतिशील किसान (20)। किसानों और गैर सरकारी संगठनों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया।

सिंचाई जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से नीतिगत मामलों, तकनीकी हस्तक्षेपों और सर्वोत्तम प्रणालियों पर चर्चा के लिए तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। मुख्य चर्चाएं राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और जम्मू और कश्मीर में लागू की जा रही पायलट एमसीएडी योजना के साथ-साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की "प्रति बूंद अधिक फसल" योजना के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई पर केंद्रित रही। इसके अतिरिक्त, सिंचाई के लिए जल उपयोग दक्षता बढ़ाने में स्वचालन और डिजिटल उपकरणों की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

राज्यों ने हरियाणा में "मेरा पानी मेरी विरासत" और "सही फसल", राजस्थान में सूक्ष्म सिंचाई विस्तार, लेह में हिम स्तूप, कर्नाटक में एससीएडीए प्रणाली, हिमाचल प्रदेश में पाइप से सिंचाई और उत्तराखंड में लिफ्ट सिंचाई जैसी विभिन्न सर्वोत्तम प्रणालियों को अन्य राज्यों के लिए प्रस्तुत किया। किसानों के अनुभवों और अपेक्षाओं को सुना गया और उनकी मांगों को पूरा करने के उपायों पर चर्चा की गई।

विचार-विमर्श में तकनीकी नवाचारों, मौजूदा नीति प्रावधानों के कार्यान्वयन और विभिन्न राज्यों में कृषि और सिंचाई में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने के माध्यम से सिंचाई में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

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पीके/केसी/पीपी/केके


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