प्रविष्टि तिथि:
08 OCT 2025 7:22PM by PIB Delhi
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव श्री एस. कृष्णन ने मवेशियों के स्वास्थ्य की निगरानी और दालों, चावल, सूखी लाल मिर्च की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी आधारित डेयरी समाधान के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) प्रबंधन सहित विभिन्न प्रयोगों के लिए सेंसर आधारित गंध निगरानी प्रणाली की शुरूआत की घोषणा की है।
एग्रीइनइक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसमें कृषि और पर्यावरण क्षेत्र में प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, विकास, परिनियोजन, प्रदर्शन और व्यावसायीकरण शामिल है। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन, उन्नत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक), कोलकाता द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में किया जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और उद्योगों की एजेंसियां भाग ले रही हैं। उपरोक्त सभी पाँच प्रौद्योगिकियों का विकास और परीक्षण इस कार्यक्रम के तहत किया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव की मौजूदगी में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) और उत्पाद लॉन्च का विवरण इस प्रकार है:
- सी-डैक (के), आईआईटी, खड़गपुर और आईसीएआर-एनडीआरआई, कल्याणी द्वारा विकसित इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित डेयरी समाधान की प्रौद्योगिकी का मेसर्स हैंडहोल्डर्स ग्लोबल, भुवनेश्वर को हस्तांतरण: इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित डेयरी समाधान दो प्रौद्योगिकियों का एक पैकेज है, जिसमें मवेशी स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली (गो-पी) और मास्टिटिस डिटेक्शन (एमएएसटी-डी) शामिल हैं। गो-पी मवेशियों के लिए पहनने योग्य कॉलर-माउंटेड आईपी67 रेटेड डिवाइस है, जो कृत्रिम गर्भाधान के लिए मवेशियों के 'तापमान' की स्थिति को भांपने के लिए वास्तविक समय में शारीरिक तापमान परिवर्तन की निगरानी करता है, जो मवेशी प्रजनकों के लिए एक प्रमुख ज़रुरत होती है। मास्टिटिस डिटेक्टर, संक्रमित मवेशियों में आयन सांद्रता का पता लगाकर मवेशी के दूध में मास्टिटिस संक्रमण की मौजूदगी का विद्युत रासायनिक रूप से पता लगा सकता है। यह स्वदेशी समाधान मवेशियों के स्वास्थ्य और दूध की गुणवत्ता को मापने के लिए तेज़, सटीक, मापनीय और लागत प्रभावी समाधान है।

2) सी-डैक (के), आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा विकसित बागवानी फसलों की गुणवत्ता विश्लेषण और आकलन प्रणाली के लिए प्रौद्योगिकी का मेसर्स एग्नेक्स्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, पंजाब को हस्तांतरण: पैकेज में दालों के गुणवत्ता विश्लेषण के लिए ग्रेन-एक्स प्रणाली, सूखी लाल मिर्च की गुणवत्ता के लिए सीटी-व्यू और चावल की गुणवत्ता के आकलन के लिए आरआईजीई-सेंस शामिल हैं।
a) ग्रेन-एक्स प्रणाली में एक बेंच-टॉप मिनी कन्वेराइज्ड सैंपल फीड सिस्टम शामिल है, जो वास्तविक समय में कंप्यूटर-नियंत्रित स्वचालित इमेज कैप्चरिंग और विश्लेषण के लिए एआई-आधारित डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग समाधान के साथ एकीकृत है। इस प्रणाली में कुशल संचालन के लिए उपयोगकर्ता-अनुकूल ग्राफिकल इंटरफ़ेस वाला फसल-विशिष्ट सॉफ़्टवेयर भी शामिल है। यह अपरिपक्व अनाज, क्षतिग्रस्त अनाज, बाहरी पदार्थ और शुद्ध अनाज जैसे उपस्थिति-आधारित गुणवत्ता मानकों को मापता है। यह समाधान कई फसलों, जैसे तुअर (साबुत), मूंग (साबुत), मसूर (साबुत), चना, ज्वार और गेहूँ पर भी काम करता है।

b) सीटी-वियु प्रणाली एक कन्वेयराइज्ड सेटअप है, जिसमें एक हॉपर जिसमें कंपन इकाई, एक कन्वेयर बेल्ट और विश्लेषण के लिए नमूनों की छवि लेने हेतु एक इमेजिंग इकाई जैसे ज़रुरी घटक शामिल हैं। गैरज़रुरी फ्रेम विश्लेषण से बचने के लिए, कन्वेयर बेल्ट को रंगीन रबर पट्टियों का उपयोग करके चार अलग-अलग फ्रेमों में बांटा गया है। यह एक उपयोगकर्ता-अनुकूल ग्राफ़िकल इंटरफ़ेस (जीयूआई) का उपयोग करता है, और सॉफ़्टवेयर विश्लेषित नमूनों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करता है, जिससे उपयोगकर्ता वास्तविक समय पर नतीजे प्राप्त कर सकते हैं या पिछले विश्लेषणों की रिपोर्ट आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
c) रिज सेंस प्रणाली, सार्वजनिक वितरण एजेंसियों (पीडीए) के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की बेहतर गुणवत्ता के लिए एक स्वदेशी मशीन विज़न-आधारित प्रणाली है। चावल की उम्र के निर्धारण के लिए पारंपरिक मिश्रित संकेतक विधि व्यक्तिपरक, असंगत, श्रम-गहन और प्रयोगशाला स्थितियों पर निर्भर है, जिससे वास्तविक समय की निगरानी अव्यावहारिक हो जाती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, रिज सेंस कंप्यूटर विज़न, एआई/एमएल एल्गोरिदम और स्वचालित रासायनिक विश्लेषण के तालमेल पर काम करता है, जिससे चावल की आयु के आकलन के लिए एक तेज़ और सटीक समाधान मिलता है।
3) सी-डैक (के) द्वारा विकसित, एमएसडब्ल्यू स्थलों के लिए सेंसर-आधारित गंध निगरानी उपकरण का शुभारंभ: सी-डैक, कोलकाता द्वारा विकसित यह सेंसर-आधारित गंध निगरानी उपकरण, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) स्थलों, औद्योगिक अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों और लैंडफिल क्षेत्रों में बदबू की चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित किया गया है। यह प्रणाली उच्च संवेदनशीलता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उन्नत सिग्नल कंडीशनिंग तकनीकों के साथ एक फोटोनाइजेशन डिटेक्टर (पीआईडी) और एक इलेक्ट्रोकेमिकल गैस सेंसर का इस्तेमाल करती है। यह एक सुगठित, कम लागत वाली और पोर्टेबल प्रणाली है। यह उपकरण गंध पैदा करने वाली गैसों की वास्तविक समय निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित करता है, जिससे पर्यावरण अनुपालन और जन स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों में मदद मिलती है।

बैठक के दौरान, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेंसर-आधारित नवाचारों के महत्व पर प्रकाश डाला, जो आम आदमी के रोज़मर्रा के जीवन में गहरा असर छोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि आज से हस्तांतरित और शुरू की गई स्वदेशी तकनीकें, जैसे मवेशी स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली, किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और आर्थिक लाभ बढ़ाने में मदद करेंगी। उन्होंने चावल की गुणवत्ता के आकलन के लिए रिज-सेंस प्रणाली और उत्सर्जन निगरानी के लिए ओडोरप्रवाह उपकरण के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत हेतु मापनीयता और दीर्घकालिक सफलता के लिए व्यापक रूप से चीज़ों को अपनाने, डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि, टिकाऊ, बाजार-उन्मुख मॉडल की ज़रुरत पर बल दिया।
उपरोक्त प्रौद्योगिकियों का टीओटी और उत्पाद लॉन्च एमईआईटीवाई, नई दिल्ली में एमईआईटीवाई सचिव श्री एस कृष्णन की मौजूदगी में किया गया। इस दौरान संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार (जेएस एंड एफए) एमईआईटीवाई, श्री राजेश सिंह, समूह समन्वयक (आर एंड डी-ई/सीसीबीटी), श्रीमती सुनीता वर्मा, वैज्ञानिक 'जी', एनएटीकॉम सेल, एमओईएफसीसी, श्री शरत कुमार पल्लेरला, सी-डैक के महानिदेशक श्री ई. मगेश, सी-डैक कोलकाता के केंद्र प्रमुख और निदेशक डॉ. सीएच ए एस मूर्ति, एमईआईटीवाई में वैज्ञानिक 'डी' डॉ ओम कृष्ण सिंह और टीओटी भागीदारों के प्रतिनिधि और एमईआईटीवाई, लाइन मंत्रालय और सी-डैक, कोलकाता के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद थे।
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