शिक्षा मंत्रालय
“सततता का सामंजस्य: परिपत्र अर्थव्यवस्था की दिशा में सतत विकास” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
प्रविष्टि तिथि:
06 OCT 2025 6:01PM by PIB Shimla
शिमला, 6 अक्टूबर 2025। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में आज “सततता का सामंजस्य: परिपत्र अर्थव्यवस्था की दिशा में सतत विकास (Harmonizing Sustainability: Navigating Circular Economy for Sustainable Growth)” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इस संगोष्ठी का आयोजन भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला द्वारा सारस्वत विश्वविद्यालय, राजकोट (गुजरात) के व्यवसाय प्रबंधन विभाग के सहयोग से किया गया है।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने की। इस अवसर पर प्रोफेसर के. एस. चंद्रशेखर, कुलपति, क्लस्टर विश्वविद्यालय, जम्मू ने उद्घाटन भाषण दिया और पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास के सामंजस्य पर अपने विचार रखे। श्री लव वर्मा, भा. प्र. से., पूर्व सचिव, भारत सरकार ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में परिपत्र अर्थव्यवस्था की अवधारणा को भारत की नीतियों के संदर्भ में रेखांकित किया।
संगोष्ठी की थीम का परिचय संगोष्ठी संयोजक प्रो. संजय जे. भयाणी, अधिष्ठाता एवं प्रोफेसर, व्यवसाय प्रबंधन विभाग, सारस्वत विश्वविद्यालय, राजकोट (गुजरात) ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा संसाधनों के अधिकतम उपयोग, पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय संतुलन के माध्यम से दीर्घकालिक सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सततता आज मानव सभ्यता की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किए बिना कोई भी अर्थव्यवस्था दीर्घकालिक रूप से सशक्त नहीं हो सकती।
संगोष्ठी के पहले दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए जिनमें देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। प्रथम सत्र में प्रो. जयेंद्रसिंह जाडव (गुजरात विश्वविद्यालय) ने “भारत में जलवायु वित्त का परिदृश्य” पर, प्रो. प्रीयेश सी. ए. (केरल) ने “भारत में जल तनाव और कृषि स्थिरता: एक संसाधन-कुशल मार्ग” पर अपने विचार रखे।
द्वितीय सत्र में प्रो. अश्विनकुमार एच. सोलंकी (सौराष्ट्र विश्वविद्यालय), प्रो. एस. एस. सोधा (गुजरात विश्वविद्यालय) और डॉ. अमित मिश्रा (मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर) ने क्रमशः कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, जलवायु वित्त और परिपत्र अर्थव्यवस्था पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
तृतीय सत्र में प्रो. एस. आर. जयश्री (केरल विश्वविद्यालय), डॉ. रिंकी दहिया (श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज, दिल्ली) तथा डॉ. ए. सी. वी. सुब्रह्मण्यम (बी.आई.टी.एस. पिलानी, हैदराबाद) ने साहित्य, उद्योग और एमएसएमई के दृष्टिकोण से सतत विकास पर विमर्श किया।
संगोष्ठी का उद्देश्य परिपत्र अर्थव्यवस्था के माध्यम से संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग, अपशिष्ट में कमी तथा नवीकरणीय विकास मॉडल को प्रोत्साहित करना है। तीन दिवसीय इस संगोष्ठी में विभिन्न विषयों पर कुल आठ तकनीकी सत्र और एक वैलेडिक्टरी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर के शिक्षाविद्, नीति विशेषज्ञ और शोधार्थी भाग ले रहे हैं। अंत में धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के सचिव श्री मेहरचंद नेगी ने किया। संचालन जनसंपर्क अधिकारी अखिलेश पाठक ने किया।
(रिलीज़ आईडी: 2175465)
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