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1965 के युद्ध विराम की स्मृति में

प्रविष्टि तिथि: 23 SEP 2025 5:00PM by PIB Delhi

23 सितंबर को 1965 के भारत-पाक युद्ध की समाप्ति पर हुए युद्ध विराम की 60वीं वर्षगांठ थी। यह एक ऐसा युद्ध था जिसने राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा में भारतीय वायु सेना के साहस, कौशल और रणनीतिक महत्व को दिखया।

यह युद्ध सितंबर 1965 की शुरुआत में ऑपरेशन जिब्राल्टर के अंतर्गत जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तान की घुसपैठ के बाद शुरू हुआ था। शुरुआती कठिनाइयों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद वायु सेना ने हवाई श्रेष्ठता बनाए रखी और कई मोर्चों पर सेना को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की। युद्ध के दौरान पाकिस्तान की हवाई क्षमताओं को बेअसर करना और उसकी परिचालन आज़ादी को सीमित करना वायु सेना की प्रमुख उपलब्धियाँ थीं। वायु सेना ने लाहौर, सरगोधा और पेशावर स्थित दुश्मन के हवाई ठिकानों पर तेज़ और सटीक हमले किये थे। इससे पाकिस्तानी वायु सेना की परिचालन क्षमता कमज़ोर हुई। वायुसेना प्रमुख भारतीय शहरों और सैन्य प्रतिष्ठानों को हवाई हमलों से बचाने में बेहद सफल रही। इससे सेना को निर्बाध रसद आपूर्ति सुनिश्चित हुई।

वायुसेना के प्रयासों में निकट हवाई सहायता, लड़ाकू विमानों का हमला, पाबंदी, अवरोधन और जवाबी हवाई अभियान शामिल थे। ये अभियान युद्ध की पूरी अवधि के दौरान चलाए गए। छंब सेक्टर में अभियान के शुरुआती चरण में बड़े हवाई हमलों से वायुसेना ने पाकिस्तान की आक्रामक कार्रवाई को करारा झटका दिया। युद्ध के दौरान वायुसेना ने पश्चिमी सेक्टर में लगभग चार हज़ार उड़ानें भरीं। पाकिस्तान में बमबारी के दौरान कुल लगभग 335 टन बम गिराए गए। पाकिस्तानी वायुसेना को अनुमानित 43 विमानों का नुकसान हुआ (इनमें से 18 हवाई युद्ध में और 25 जमीनी गोलाबारी में नष्ट हुए) इसके अलावा बड़ी संख्या में टैंक, वाहन, रेलवे वैगन, लोकोमोटिव और बीपीआई नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए।    

23 सितंबर 1965 को तड़के साढ़े तीन बजे युद्धविराम की घोषणा होने तक वायुसेना ने प्रसिद्ध हंटर्स, मिस्टियर्स और नैट विमानों के ज़रिए नज़दीकी हवाई सहायता प्रदान करते हुए कई उड़ान भरी थी। पायलटों और ग्राउंड क्रू ने बेजोड़ व्यावसायिकता का परिचय देते हुए भारत के आसमान की सुरक्षा की और राष्ट्र के युद्ध प्रयासों में निर्णायक योगदान दिया। 1965 के युद्ध में अपने वीरतापूर्ण योगदान के लिए वायुसेना के कर्मियों को चार महावीर चक्र और 43 वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

भारत द्वारा स्मरणोत्सव के एक और वर्ष के अवसर पर वायुसेना इन वीर योद्धाओं को सम्मानित करती है और उसी वीरता और सतर्कता की भावना के साथ राष्ट्र की रक्षा करने की प्रतिज्ञा की पुष्टि करती है।

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पीके/केसी/एसके


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