पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण और प्रबंधन पर परामर्श कार्यशाला

प्रविष्टि तिथि: 16 SEP 2025 5:30PM by PIB Jaipur

शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी), जोधपुर एवं अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एवं एनवायरनमेंट (एट्री) के संयुक्त तत्वाधान में, राजस्थान के खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए रोडमैप विकसित करने हेतु परामर्श-कार्यशाला का आयोजन 16 सितम्बर, 2025 को आफरी में किया गया | कार्यशाला के मुख्य अतिथि, डॉ. सुमंत व्यास, निदेशक काजरी रहे । अपने उद्बोधन में डॉ. व्यास ने थार मरुस्थल को प्रगतिशील पारिस्थितिकी तंत्र बताते हुए कहा कि आर्थिक गतिविधियों से खुले पारिस्थितकी तंत्र में हो रही क्षति पशुधन,चरागाहों एवं ओरण-गोचर क्षेत्रों के संरक्षण एवं समुचित विकास से ही संभव है । डॉ. आशुतोष कुमार त्रिपाठी, निदेशक आफरी ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि इस कार्यशाला में सभी के सहयोग, संवाद एवं जिम्मेदारी से खुले पारिस्थितिकी तंत्र के सतत विकास का मार्ग प्रशस्त होगा । डॉ.अबी तमीम वनक, निदेशक, पालिसी डिजाईन केंद्र, एट्री ने राजस्थान के खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को जीवंत एवं आजीविका हेतु महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसमें जैवविविधता व आजीविका  संरक्षण के साथ ही क्षमता में पुनरावृत्ति हेतु एकीकृत प्रयासों से जलवायु के दुष्प्रभावों का शमन संभव है । डॉ तरुण कान्त, वैज्ञानिक-जी एवं कार्यक्रम समन्वयक ने अपने स्वागत संबोधन में सभी का स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यशाला द्वारा खुले पारिस्थितिक तंत्र के लिये विभिन्न संस्थानों, संगठनों के साझा प्रयासों से वांछित लक्ष्यों की प्राप्ति संभव है ।

कार्यशाला का शुभारम्भ गणमान्य अतिथियों द्वारा घासरोपण व वृक्षारोपण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ | अतिथियों ने एट्री के सेंटर फॉर पालिसी डिजाईन द्वारा “सैंड एंड ग्रास्सेज ऑफ़-गोल्ड: वैल्यूइंग राजस्थान ओपन नेचुरल इकोसिस्टम फॉर पीपुल, क्लाइमेट एंड बायोडाइवर्सिटी” पर  पालिसी ब्रीफ लांच किया । साथ ही आफरी अनुसंधान कार्यों पर जारी पेम्फलेट्स का विमोचन किया ।

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में आफरी की वैज्ञानिक श्रीमती भावना शर्मा तथा विभिन्न क्षेत्रों से आये विषय विशेषज्ञों डॉ. चन्दन सिंह, बी एस आई, डॉ. सुजीत नरवरे, मोहिबुद्दीन, प्रिंसिपल प्रोजेक्ट एसोसिएट, विल लीजे, कोह्लेर-रोलेफसन,  जुगत सिंह, अंशुल ओझा, संजय सिंह, मोती कुमावत एवं डिम्पल ने व्याख्यान प्रस्तुत किए। कार्यशाला का संचालन मीता सिंह तोमर ने किया।

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