पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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आईसीएफआरई-एफआरआई द्वारा “जलवायु प्रतिरोधी शहरों में शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता” विषय पर क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन

आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून एवं हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा संयुक्त आयोजन

विषय: “जलवायु प्रतिरोधी शहरों के निर्माण में शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता की भूमिका”

100 से अधिक प्रतिभागियों ने सम्मेलन में भाग लिया

वरिष्ठ वन अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं नगर आयुक्त देहरादून ने रखे विचार

प्रविष्टि तिथि: 09 SEP 2025 5:03PM by PIB Dehradun

आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), देहरादून ने हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला के सहयोग से एक दिवसीय क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन का आयोजन किया। इस वर्ष के सम्मेलन का विषय था “जलवायु प्रतिरोधी शहरों के निर्माण में शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता की भूमिका”।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. डी.पी. खली, वैज्ञानिक ‘जी’ एवं समूह समन्वयक (अनुसंधान) के स्वागत भाषण से हुई। उद्घाटन सत्र में वन अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ. रेनू सिंह ने शहरी वानिकी के महत्व और सामुदायिक सहभागिता की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने अमृत, स्मार्ट सिटी मिशन एवं जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख किया।

डॉ. मनीषा थपलियाल, निदेशक, हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला ने शहरी हरियाली और नगर वन जैसी पहल पर विचार रखे। श्री जगदीश चंदर, पूर्व प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, हरियाणा ने घटते हरित आवरण पर चिंता जताई और परि-नगरीय क्षेत्रों में शहरी वनों की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. समीर सिन्हा, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, उत्तराखंड ने हाल की आपदाओं का उल्लेख करते हुए जीवनशैली में छोटे बदलाव कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की।

 

देहरादून की नगर आयुक्त श्रीमती नमामि बंसल ने शहर की चुनौतियों जैसे अतिक्रमण, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित आवरण में कमी पर चर्चा की और अपने विभाग द्वारा उठाए गए कदमों को साझा किया। डॉ. क्षमा गुप्ता, वैज्ञानिक, आईआईआरएस ने हरित छतों, शहरी हरित पार्कों और सामुदायिक वनभूमि की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए सुदूर संवेदन तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. वनीत जिस्टु, वरिष्ठ वैज्ञानिक, हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने अपने अनुभव साझा किए और संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2015 में अपनाए गए 17 वैश्विक लक्ष्यों में शहरी वानिकी को बढ़ावा देने पर विचार व्यक्त किए।

बैठक में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ वन अधिकारी, वैज्ञानिक, तकनीकी कर्मी और हितधारक शामिल थे। सम्मेलन में शहरी हरित क्षेत्रों के महत्व, जलवायु प्रतिरोधी शहरों के निर्माण और जनभागीदारी की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

सम्मेलन का समापन डॉ. पारुल भट्ट कोटियाल, प्रमुख एवं वैज्ञानिक ‘एफ’, वन पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन प्रभाग के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


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