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एम्स भोपाल में फार्माकोविजिलेंस पर सीएमई: उभरते उपचारों के दौर में मरीजों की सुरक्षा पर जोर

प्रविष्टि तिथि: 30 AUG 2025 2:32PM by PIB Bhopal

एम्स भोपाल ने मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए “फार्माकोविजिलेंस: उभरते उपचारों के दौर में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना” विषय पर एक सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम फार्माकोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जो कि फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI) के अंतर्गत मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर (RTC) के रूप में कार्य करता है। इस अवसर पर कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने किया। उन्होंने मरीजों की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य पेशेवरों के निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। सीएमई में 120 से अधिक स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया, जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, दंत चिकित्सक एवं विभिन्न मेडिकल, आयुष और फार्मेसी कॉलेजों, डेंटल कॉलेजों तथा भोपाल और विदिशा के एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पतालों के स्नातकोत्तर छात्र शामिल थे। यह कार्यक्रम फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया द्वारा प्रायोजित था। प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की सक्रिय रिपोर्टिंग करने वाले स्वास्थ्य पेशेवरों को ‘पेशेंट सेफ्टी चैंपियन’ के रूप में सम्मानित किया गया।

साथ ही, एम्स भोपाल के त्वचा रोग विभाग को ‘पेशेंट सेफ्टी चैंपियन ट्रॉफी’ प्रदान की गई। सीएमई में विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें त्वचा संबंधी प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की पहचान एवं प्रबंधन, फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया की भूमिका एवं कार्यप्रणाली तथा प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया रिपोर्टिंग की विधियां शामिल रहीं। कार्यक्रम में प्रतिभागियों की सहभागिता बढ़ाने के लिए एक क्विज़ और एम्स भोपाल में किए गए फार्माकोविजिलेंस कार्यों की प्रस्तुति भी आयोजित की गई। इस प्रकार, एम्स भोपाल लगातार ऐसे प्रयासों के माध्यम से फार्माकोविजिलेंस की मजबूत संस्कृति विकसित करने और बदलते उपचारों के दौर में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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(रिलीज़ आईडी: 2162588) आगंतुक पटल : 3