पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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संसदीय प्रश्न: बड़ी आपदा के दौरान एशियाई शेरों का पुनर्वास

प्रविष्टि तिथि: 21 AUG 2025 6:00PM by PIB Delhi

वन्यजीवों और उनके आवासों का संरक्षण एवं प्रबंधन मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केन्द्र-  शासित प्रदेशों के प्रशासन की जिम्मेदारी है। केन्द्र सरकार ने ‘प्रोजेक्ट लायन’ शुरू किया है, जिसका उद्देश्य संरक्षण और पारिस्थितिकी-विकास को एकीकृत करके गुजरात में एशियाई शेरों के भौगोलिक पारिस्थितिकी-आधारित संरक्षण की परिकल्पना करना है। प्रोजेक्ट लायन के उद्देश्य इस प्रकार हैं:

a. शेरों की बढ़ती आबादी के प्रबंधन हेतु उनके आवासों को सुरक्षित और पुनर्स्थापित करना

b. आजीविका सृजन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ाना

c. शेरों की बीमारियों के निदान और उपचार संबंधित ज्ञान का एक वैश्विक केन्द्र  बनना

d. प्रोजेक्ट लायन पहल के जरिए समावेशी जैव विविधता संरक्षण

इसके अलावा, गुजरात के जूनागढ़ में एक ‘राष्ट्रीय रेफरल सेंटर- वन्यजीव’ की स्थापना की जा रही है, जो वन्यजीवों के स्वास्थ्य और रोग प्रबंधन से संबंधित विभिन्न पहलुओं के समन्वय एवं प्रशासन से जुड़े केन्द्र के रूप में कार्य करेगा।

इसके अलावा, गुजरात की राज्य सरकार ने किसी बड़ी आपदा की स्थिति में एशियाई शेरों के पुनर्वास हेतु निम्नलिखित उपाय किए हैं:

• गुजरात के मोरबी जिले के रामपारा और पोरबंदर जिले के सतविरदा में जीन पूल केन्द्र  स्थापित किए गए हैं।

• बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को एशियाई शेरों के दूसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है।

• गुजरात के जसधर, जामवाला, सिमर, अम्बार्डी, क्रंकच, जांजरदा, बाबरकोट, गेबर और सासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बचाव एवं पशु चिकित्सा उपचार केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

• एशियाई शेरों के संरक्षण हेतु आवास प्रबंधन, रोग की निगरानी, ​​पशु चिकित्सा संबंधी देखभाल, आईसीटी-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और पारिस्थितिकी-विकास जैसी विभिन्न गतिविधियां शुरू की गई हैं।

यह जानकारी केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/आर/एसएस  

 


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