शिक्षा मंत्रालय
आईआईटी रुड़की ने कमांड एरिया डेवलपमेंट (एम-सीएडी) के आधुनिकीकरण के लिए जल शक्ति मंत्रालय के साथ हाथ मिलाया
-महिलाओं की भागीदारी से सिंचाई दक्षता बढ़ाने की पहल
-ग्रामीण भारत में स्मार्ट जल प्रबंधन और नीति समर्थन पर फोकस
-आधुनिक सिंचाई समाधान से उत्तराखंड को मिलेगा लाभ
प्रविष्टि तिथि:
13 AUG 2025 2:52PM by PIB Dehradun
सिंचाई प्रथाओं में बदलाव और ग्रामीण स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (सीएडीडब्ल्यूएम) विंग ने आईआईटी रुड़की के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस साझेदारी का मकसद अनुसंधान, प्रशिक्षण और नीतिगत नवाचार के माध्यम से एम-सीएडी आधुनिकीकरण कार्यक्रम को मज़बूत करना है, ताकि पूरे देश में कृषि भूमि तक पानी पहुँचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। इससे किसानों को अधिक कुशल, टिकाऊ और भरोसेमंद सिंचाई पद्धतियाँ उपलब्ध होंगी।
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यह सहयोग खासकर उत्तराखंड के लिए अहम है, क्योंकि यहाँ पहाड़ी इलाकों, बिखरी हुई भूमि और बदलते मौसम के कारण कुशल जल प्रबंधन बहुत जरूरी है। इस साझेदारी से नए सिंचाई मॉडल विकसित और लागू किए जाएंगे, जो हिमालयी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के लिए उपयोगी होंगे।
समझौते के मौके पर जल शक्ति मंत्रालय की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने कहा—"भारत में सिंचाई आधुनिकीकरण प्रयासों का दस्तावेजीकरण, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तकनीक का विकास, और जल उपयोगकर्ता संघों व निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है।"
आईआईटी रुड़की में 2024 में स्थापित सतत ग्रामीण विकास केंद्र (सीएसआरडी) इस पहल को समर्थन देने के लिए अनुसंधान, नवाचार और प्रशिक्षण का केंद्र रहेगा। प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श (स्रिक) के कुलशासक प्रो. वी. के. मलिक ने कहा— "यह केंद्र ज्ञान निर्माण, मापनीय मॉडल तैयार करने और ग्रामीण विकास में जुड़े लोगों की क्षमता बढ़ाने के लिए परियोजनाओं में सहयोग करेगा।"
उत्तराखंड की विशेष भौगोलिक स्थिति और कृषि पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए, आईआईटी रुड़की पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों के लिए व्यावहारिक समाधान तैयार करेगा, जिससे दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सिंचाई तकनीक और समावेशी जल प्रबंधन का सीधा लाभ मिलेगा।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा— "यह साझेदारी राष्ट्रीय विकास और सामाजिक कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम चाहते हैं कि कमांड एरिया का आधुनिकीकरण हो, ग्रामीण समुदायों की भागीदारी बढ़े और नीतिगत निर्णय ठोस सबूतों पर आधारित हों। यह विकसित भारत@2047 के विज़न और जल शक्ति अभियान के लक्ष्यों के अनुरूप है, जो भविष्य के लिए जल सुरक्षा और कृषि को मजबूत करेगा।"

इस समझौते पर जल शक्ति मंत्रालय के सीएडीडब्ल्यूएम विंग के आयुक्त श्री अनुज कंवल और आईआईटी रुड़की के प्रो. विवेक के. मलिक ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान प्रो. आशीष पांडे, प्रो. कृतिका कोठारी और श्री अशोक के. जेफ सहित कई अधिकारी मौजूद रहे और इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल रहे।
यह समझौता अकादमिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने का एक अहम कदम है। यह ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और सतत विकास की ओर ले जाने के लिए आईआईटी रुड़की की बहुआयामी क्षमताओं का उपयोग करेगा। यह पहल किसानों को सशक्त बनाएगी, सिंचाई दक्षता बढ़ाएगी और समावेशी ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करेगी, जिससे विकसित भारत@2047 के लक्ष्य पूरे करने में मदद मिलेगी।
🚰🤝 #IITRoorkee और जल शक्ति मंत्रालय के #CADWM विंग ने ग्रामीण सिंचाई में बदलाव लाने के लिए हाथ मिलाया!
यह साझेदारी अनुसंधान, प्रशिक्षण और नीतिगत नवाचार के जरिए किसानों को टिकाऊ व कुशल सिंचाई समाधान देगी।#ViksitBharat2047 #JalShakti #RuralDevelopmentAsk pic.twitter.com/wavlz1WFVi
— PIB in Uttarakhand (@PIBDehradun) August 13, 2025
(रिलीज़ आईडी: 2156010)
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