ग्रामीण विकास मंत्रालय
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नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए बन रहे हैं तीन हजार प्रधानमंत्री आवास

दुर्गम इलाकों में भी मात्र तीन माह में पूरे हुए सोडी हुंगी और दशरी बाई के मकान


छत्तीसगढ़ सरकार की पहल पर केंद्र सरकार ने स्वीकृत किए 15,000 विशेष पीएम आवास


नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास, विकास और पुनर्वास की नीति पर कार्य कर रही है सरकार – मुख्यमंत्री श्री साय

प्रविष्टि तिथि: 07 AUG 2025 10:37PM by PIB Raipur

छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के नक्सल प्रभावित दूरस्थ वन क्षेत्रों में निवासरत परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत विशेष परियोजना के तहत लगभग 3,000 पक्के मकानों का निर्माण किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार ने इस परियोजना के अंतर्गत ऐसे 15,000 आवास स्वीकृत किए हैं, जो प्रधानमंत्री आवास योजना की परंपरागत पात्रता शर्तों में नहीं आते थे। इनमें से अब तक पात्र पाए गए 5,000 में से 3,000 परिवारों को आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 2,111 परिवारों को प्रथम किस्त तथा 128 को दूसरी किस्त भी जारी कर दी गई है।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद समय पर पूर्ण हुए मकान

सुकमा जिले की ग्राम पंचायत गादीरास के आश्रित गांव ओईरास की श्रीमती सोडी हुंगी और कांकेर जिले के उलिया ग्राम पंचायत की श्रीमती दशरी बाई नुरूटी के मकान दुर्गम और विषम परिस्थितियों के बावजूद मात्र तीन माह में पूर्ण कर लिए गए हैं। मार्च 2025 में स्वीकृति के बाद मई में दोनों का निर्माण कार्य आरंभ हुआ था, जो जुलाई में पूर्ण हो गया।

सोडी हुंगी को मिली राहत

वर्ष 2005 में मुखबिरी के संदेह में नक्सलियों द्वारा पति की हत्या के बाद श्रीमती सोडी हुंगी का परिवार बरसों तक कच्चे झोपड़े में रहने को मजबूर था। विशेष परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत आवास के लिए उन्हें तीन किस्तों में कुल ₹1.35 लाख की सहायता दी गई। पंचायत द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और सतत निगरानी के चलते जुलाई में उनका पक्का मकान बनकर तैयार हुआ।

दशरी बाई का संकल्प

कांकेर की दशरी बाई के पति की नक्सल हिंसा में मृत्यु के बाद उनका परिवार भी कठिन परिस्थितियों में जी रहा था। दुर्गम क्षेत्र, बारिश और परिवहन के अभाव में निर्माण कार्य एक बड़ी चुनौती था। लेकिन पंचायत और प्रशासन की मदद से तीन माह में उनका पक्का मकान बनकर तैयार हुआ।

सबसे अधिक लाभ सुकमा को

अब तक विशेष परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत तीन हजार पीएम आवासों में से सर्वाधिक 984 सुकमा, 761 बीजापुर, 376 नारायणपुर, 251 दंतेवाड़ा, 214 बस्तर, 166 कोंडागांव, 146 कांकेर, 27 गरियाबंद, 25 बलरामपुर-रामानुजगंज और 23 मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया पुनर्वास की मजबूत नींव

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह विशेष परियोजना केवल ईंट-पत्थर के मकानों का निर्माण नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और स्थायित्व की नींव है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पुनर्वास, विकास और विश्वास की नीति पर कार्य कर रही है और सभी पात्र परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन देने के लिए कटिबद्ध है।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों और हिंसा पीड़ित परिवारों के लिए आवास निर्माण की यह पहल सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि सोडी हुंगी और दशरी बाई जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि संवेदनशील सरकार और सक्रिय प्रशासन मिलकर विकास की रोशनी दूरस्थ अंचलों तक पहुँचा सकते हैं।


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