राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी द्वारा देहरादून में भारत के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सहयोग से भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों के लिए मानवाधिकारों पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया


एनएचआरसी इंडिया के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री वी. रामसुब्रमण्यन ने इसका उद्घाटन करते हुए कहा, नागरिकों का संवैधानिक कर्तव्य है कि वे प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें और उसे बेहतर बनाएं तथा सरकार के प्रयासों का विस्तार करें

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के महासचिव श्री भरत लाल ने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए भारत के सशक्त संस्थागत ढांचे पर प्रकाश डाला और युवा अधिकारियों से वनवासी समुदायों का समावेश सुनिश्चित करने तथा उनके मानवाधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डॉ. जगमोहन शर्मा ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य पर्यावरणीय व्यवस्था में मानवीय गरिमा के सिद्धांत को एकीकृत करना और अधिकारियों को देश भर से संबंधित प्रमुख विधायी तथा सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों से लैस करना है

Posted On: 17 JUL 2025 8:39PM by PIB Delhi

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की वर्तमान में जारी पहल के एक हिस्से के रूप में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 2023 बैच के परिवीक्षार्थियों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज से देहरादून में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम करने वाले अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने और उनकी क्षमता निर्माण हेतु मार्गदर्शन करना है।

एनएचआरसी, इंडिया के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री वी रामसुब्रमण्यन ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 48ए के तहत, जहां एक तरफ सरकार पर्यावरण की रक्षा व सुधार करने तथा देश के वनों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा करने का प्रयास करती है, वहीं अनुच्छेद 51ए (जी) के तहत प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य भी है कि वह वनों, झीलों, नदियों तथा वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा व सुधार करे और जीवित प्राणियों के प्रति दया का भाव रखे।

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न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने मानवाधिकारों के विकास व उनके आसपास के अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के ऐतिहासिक विकास को रेखांकित किया। उन्होंने साइरस के चार्टर, मैग्ना कार्टा, बिल ऑफ राइट्स से लेकर अमरीकी संविधान में 12वें, 13वें तथा 14वें संशोधन, फ्रांसीसी क्रांति और 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा तक, दुनिया भर में मानवाधिकारों की मान्यता और प्रवर्तन में हुई तीव्र एवं स्थिर प्रगति का भी उल्लेख किया।

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इस संदर्भ में, न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने मानवाधिकारों को चार पीढ़ियों में वर्गीकृत करने पर भी विस्तार से चर्चा की: पहली पीढ़ी में नागरिक व राजनीतिक अधिकार शामिल हैं; दूसरी में सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक अधिकार समाहित हैं; तीसरी पीढ़ी, जिसे अक्सर सामूहिक अधिकार कहा जाता है तथा 1992 के रियो घोषणापत्र के बाद प्रमुखता मिली; और चौथी पीढ़ी, जिसमें 21वीं सदी की तीव्र तकनीकी प्रगति एवं वैश्विक चुनौतियों के जवाब में उभरते अधिकार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी, डिजिटल गोपनीयता और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में विकास से जटिल नैतिक चिंताएं उत्पन्न हो रही हैं, जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है।

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राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के महासचिव श्री भरत लाल ने अपने मुख्य भाषण में मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए भारत के सशक्त संस्थागत एवं संवैधानिक ढांचे पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार की अवधारणा देश की सभ्यतागत व सांस्कृतिक प्रकृति, सहानुभूति, करुणा, अहिंसा और मानवीय गरिमा में गहराई से निहित है। ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सताए गए समुदायों को शरण देने की भारत की परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने महात्मा गांधी, राजा राम मोहन राय और डॉ. बी. आर. अंबेडकर जैसी हस्तियों को मानवाधिकारों के शुरुआती सूत्रधारों के रूप में वर्णित किया। श्री भरत लाल ने लोगों के अधिकारों की रक्षा में मौलिक अधिकारों, नीति निर्देशक सिद्धांतों और अनुच्छेद 32 तथा 226 के तहत रिट जैसे न्यायिक उपकरणों की भूमिका को रेखांकित करते हुए मानव अधिकारों की रक्षा एवं न्याय सुनिश्चित करने में जनहित याचिका के महत्व पर बल दिया।

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श्री भरत लाल ने मानव अधिकार संरक्षण के लिए सर्वोच्च निकाय के रूप में एनएचआरसी, इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से बताया, जो अन्य राष्ट्रीय आयोगों तथा राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी) के साथ समन्वय भी करता है। यह अंग्रेजी के अलावा विभिन्न आधिकारिक भारतीय भाषाओं में सुलभ शिकायत तंत्र उपलब्ध कराता है। आयोग मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेता है और साथ ही मानवाधिकार उल्लंघनों की निगरानी करता है। आयोग समय-समय पर परामर्श भी जारी करता है। यह विशेष प्रतिवेदकों, कोर समूह के सम्मेलनों, खुली चर्चाओं और शिविरों में आयोजित बैठकों के माध्यम से जागरूकता एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र-स्तरीय गतिविधियों में भी संलग्न है। एनएचआरसी अपने आउटरीच कार्यक्रम के एक भाग के रूप में अनुसंधान अध्ययन एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित करता है और इंटर्नशिप कार्यक्रम भी संचालित करता है। भरत लाल ने युवा भारतीय वन सेवा अधिकारियों से आग्रह किया कि वे वन एवं वन्यजीवन के प्रबंधन में जनजातीय समुदायों तथा अन्य वनवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्हें यह पक्का करना होगा कि स्थानीय समुदाय वर्तमान में चल रहे संरक्षण प्रयासों में शामिल हों और स्थायित्व के लिए उनके अधिकारों का सम्मान किया जाए।

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इससे पहले, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक श्री जगमोहन शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पर्यावरण प्रशासन में मानवाधिकारों व सम्मान के सिद्धांत को एकीकृत करना और आईएफएस परिवीक्षार्थियों को देश भर से संबंधित प्रमुख विधायी तथा सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों से लैस करना है। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। जगमोहन शर्मा ने देश में हाशिए पर पड़े और असहाय लोगों के अधिकारों की रक्षा में एनएचआरसी की महत्वपूर्ण भूमिका का भी जिक्र किया।

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प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 विषय-आधारित सत्रों में फैला हुआ है, जिन्हें प्रतिष्ठित क्षेत्र विशेषज्ञों श्री राजीव जैन, पूर्व एनएचआरसी सदस्य; श्री राजीव कुमार, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त; श्री प्रशांत कुमार, सदस्य, सीएटी श्रीनगर; डॉ. एस. पी. यादव, महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट्स एलायंस (आईबीसीए); श्री आर. आर. रश्मि, पूर्व विशेष सचिव, एमओईएफसीसी; डॉ. सी. एन. पांडे, पूर्व पीसीसीएफ (एचओएफएफ), गुजरात; श्रीमती मीनाक्षी नेगी, पीसीसीएफ (एचओएफएफ), कर्नाटक; सुश्री सुनीता नारायण, महानिदेशक, विज्ञान व पर्यावरण केंद्र (सीएसई); श्री डी. के. निम, पूर्व संयुक्त सचिव, एनएचआरसी; और श्री फ्रैंकलिन एल. खोबुंग, संयुक्त सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संबोधित किया जा रहा है।

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पिछले महीने, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हैदराबाद स्थित एसवीपीएनपीए के सहयोग से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के परिवीक्षार्थियों के लिए इसी प्रकार का एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। इससे पहले, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष महानिदेशक श्री भरत लाल ने सुषमा स्वराज राष्ट्रीय विदेश सेवा संस्थान, नई दिल्ली में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय विदेश सेवा के परिवीक्षार्थियों को संबोधित किया और उन्हें मानवाधिकारों के विभिन्न आयामों के बारे में जागरूक किया। श्री भरत लाल ने नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज राष्ट्रीय विदेश सेवा संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विदेशी राजनयिकों के एक बैच को भी संबोधित किया, जिसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया। ऐसी गतिविधियों के साथ, एनएचआरसी युवा सिविल सेवकों के बीच उनकी सेवा के प्रारंभिक चरण के दौरान मानवाधिकार जागरूकता एवं संवेदनशीलता को विस्तार दे रहा है, जिससे स्थायी प्रभाव सुनिश्चित हो रहा है।

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