आयुष
केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) और राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान यूनानी चिकित्सा पद्धति में अनुसंधान को बढ़ावा देंगे
देश भर में सीसीआरयूएम के तहत 21 क्लिनिकल संस्थान/इकाइयां कार्यरत हैं
आयुष मंत्रालय आधुनिक चिकित्सा के साथ यूनानी सहित आयुष व्यवस्था के एकीकरण के लिए कई तरह की पहल कर रहा है
Posted On:
28 MAR 2025 6:33PM by PIB Delhi
चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) और बेंगलुरु में राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान (एनआईयूएम) की स्थापना की है। इसमें नई दवाओं के विकास के साथ-साथ वैज्ञानिक आधार पर नैदानिक परीक्षण भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 200 बिस्तरों वाले अस्पताल के साथ राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान का सैटेलाइट (उपग्रह) संस्थान भी स्थापित किया गया है। देश भर में सीसीआरयूएम के तहत कुल 21 क्लिनिकल संस्थान/इकाइयां काम कर रही हैं। सीसीआरयूएम और एनआईयूएम दोनों ने विभिन्न रोगों के लिए कई नैदानिक अनुसंधान अध्ययन किए हैं। इनमें गठिया, ब्रोन्कियल अस्थमा (श्वसनी अस्थमा), एनीमिया (खून की कमी), चिंता, अवसादग्रस्तता विकार, न्यूरो-डीजनरेटिव रोग, जीवनशैली संबंधी विकार जैसे उच्च रक्तचाप, मोटापा, डिस्लिपिडेमिया, मधुमेह और विभिन्न त्वचा रोग जैसे त्वचा का रंग कुछ स्थानों पर नष्ट हो जाना (विटिलिगो) आदि शामिल हैं।
यूनानी सहित आयुष व्यवस्था को आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकृत करने के लिए आयुष मंत्रालय कई तरह की पहल कर रहा है, जैसे :
i. आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएंडएफडब्ल्यू) द्वारा स्थापित स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के तहत आयुष वर्टिकल आयुष-विशिष्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की योजना, निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए एक समर्पित संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है। यह वर्टिकल सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य देखभाल, आयुष शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए रणनीति विकसित करने में दोनों मंत्रालयों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
ii. डीजीएचएस के तहत आयुष विभाग ने सामान्य मांसपेशियों (मस्कुलोस्केलेटल) के विकारों, उनकी रोकथाम और यूनानी प्रणाली सहित आयुष तंत्र के माध्यम से प्रबंधन पर मानक उपचार दिशानिर्देश (एसटीजी) प्रकाशित किए हैं। आयुष चिकित्सकों की क्षमता बढ़ाने के लिए आयुष वर्टिकल ने इन विकसित एसटीजी पर सभी राज्यों में केंद्रीय स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो (सीएचईबी) के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर का मास्टर प्रशिक्षण आयोजित किया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनका प्रभावी प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।
iii. आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएंडएफडब्ल्यू) ने एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रूप से केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में एकीकृत आयुष विभाग स्थापित किए हैं। इस पहल के तहत एकीकृत चिकित्सा विभाग की स्थापना की गई है। नई दिल्ली में स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एकीकृत चिकित्सा विभाग कार्यरत है।
iv. भारत सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी) और जिला अस्पतालों (डीएच) में आयुष सुविधाओं को एक साथ स्थापित करने की रणनीति अपनाई है। इससे मरीजों को एक ही स्थान पर विभिन्न चिकित्सा व्यवस्थाओं के लिए विकल्प उपलब्ध हो सके। आयुष डॉक्टरों/पैरामेडिकल की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। वहीं, आयुष अवसंरचना, उपकरण/फर्नीचर और दवाओं के लिए सहायता राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत आयुष मंत्रालय द्वारा साझा जिम्मेदारियों के रूप में निर्वहन किया जाता है।
v. देश में यूनानी चिकित्सा को स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की मुख्यधारा में शामिल करने के उद्देश्य से केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल, नई दिल्ली स्थित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) अस्पताल, नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयुष वेलनेस सेंटर, मुंबई स्थित जमशेदजी जीजीभॉय (जेजे) अस्पताल और केरल के कन्नूर में यूनानी के लिए विस्तार अनुसंधान केंद्र में पुनर्वास/विस्तार केंद्र के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान कर रहा है ताकि यूनानी उपचार सुविधा जनता के लिए सुलभ और सस्ती हो सके।
आयुष मंत्रालय ने आयुष के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना विकसित की है। इस योजना के अंतर्गत मंत्रालय आयुष उत्पादों और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारतीय आयुष औषधि निर्माताओं/आयुष सेवा प्रदाताओं को सहायता प्रदान करता है; आयुष चिकित्सा प्रणालियों के अंतरराष्ट्रीय प्रचार, विकास और मान्यता को सुगम बनाता है; हितधारकों के बीच संपर्क को बढ़ावा देता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुष का बाजार विकसित करता है; विदेशी देशों में आयुष अकादमिक पीठों की स्थापना के माध्यम से शिक्षाविदों और अनुसंधान को बढ़ावा देता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुष चिकित्सा प्रणालियों के बारे में जागरूकता और रुचि को बढ़ावा देने और उसे मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला/संगोष्ठी का आयोजन करता है।
केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) यूनानी चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल कर रही है। इनमें परिषद के 21 नैदानिक संस्थानों/इकाइयों द्वारा संचालित सामान्य ओपीडी, प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य ओपीडी, बुजुर्गों की चिकित्सा ओपीडी, गैर संचारी रोग क्लिनिक आदि के माध्यम से उपचार प्रदान करना शामिल है। परिषद आरोग्य, स्वास्थ्य मेलों, स्वास्थ्य शिविरों और प्रदर्शनियों आदि के माध्यम से यूनानी चिकित्सा को भी बढ़ावा दे रही है। सीसीआरयूएम क्लिनिकल मोबाइल अनुसंधान कार्यक्रम, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम, अनुसूचित जाति उपयोजना/जनजाति उपयोजना मोबाइल स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम आदि के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा दे रहा है।
सीसीआरयूएम लोगों तक पहुंच और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिए पूर्व-नैदानिक और नैदानिक अनुसंधान, दवा मानकीकरण अनुसंधान, मौलिक अनुसंधान आदि सहित विभिन्न अनुसंधान कार्यक्रम चला रहा है। पांच मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं और इलाज-बित तदबीर (आईबीटी) (यह एक समग्र उपचार पद्धति है जो रोगी के आवास, जीवनशैली और आहार संबंधी आदतों को संशोधित करके बीमारियों का इलाज करती है) पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित की जा रही है। मांसपेशियों से संबंधित (मस्कुलोस्केलेटल) विकारों पर मानक उपचार दिशानिर्देश भी विकसित किए गए हैं।
यूनानी चिकित्सा प्रणाली को मानकीकृत और विनियमित करने के लिए राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) ने नियमों को अधिसूचित किया और स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए योग्यता आधारित पाठ्यक्रम तैयार किए हैं।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने अपने अधीनस्थ कार्यालय के रूप में भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी (पीसीआईएमएंडएच) के लिए फार्माकोपिया आयोग की स्थापना की है। आयुष मंत्रालय की ओर से पीसीआईएमएंडएच आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी (एएसयूएंडएच) औषधियों के लिए दवाओं की एक सूची, जिसे अक्सर किसी स्वास्थ्य योजना या संस्थान द्वारा पसंद किया जाता है, जिन्हें विशिष्ट स्थितियों के उपचार के लिए सुरक्षित, प्रभावी और लागत प्रभावी माना जाता है (फॉर्मूलरी) को लेकर विनिर्देश और फार्माकोपियल मानक निर्धारित करता है, जो औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और नियम 1945 के अनुसार इसमें शामिल एएसयूएंडएच औषधियों के गुणवत्ता नियंत्रण (पहचान, शुद्धता और शक्ति) का पता लगाने के लिए आधिकारिक सार-संग्रह के रूप में कार्य करता है और भारत में निर्मित, बिक्री और भंडारण की जाने वाली एएसयूएंडएच औषधि के उत्पादन के लिए इन गुणवत्ता मानकों का अनुपालन अनिवार्य है।
आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथिक (एएसयूएंडएच) औषधियों के फार्माकोपिया और फॉर्मूलरी में शामिल गुणवत्ता मापदंडों को अनिवार्य नियामक मानकों के अनुरूप निर्धारित किया गया है, ताकि विश्व स्वास्थ्य संगठन और दुनिया भर में प्रचलित अन्य प्रमुख फार्माकोपिया द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप बनाया जा सके। इन फार्माकोपियल मानकों के कार्यान्वयन से यह सुनिश्चित होता है कि दवाएं स्थिरता, पहचान, शुद्धता और शक्ति के संदर्भ में सबसे बेहतर गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों के अनुसार औषधि उत्पाद प्रमाणन (सीओपीपी) योजना को आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (एएसयू) दवाओं तक विस्तारित किया गया है। यह योजना केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा प्रशासित है और आयुष मंत्रालय के सीडीएससीओ और संबंधित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के प्रतिनिधियों द्वारा आवेदक विनिर्माण इकाई के संयुक्त निरीक्षण के आधार पर प्रमाण पत्र दिया जाता है।
आयुष मंत्रालय ने एक केंद्रीय क्षेत्र योजना आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्त्पादन संवर्धन योजना (एओजीयूएसवाई) लागू की है। योजना के उद्देश्य निम्नानुसार हैं;
i. आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत की विनिर्माण क्षमताओं और पारंपरिक दवाओं और स्वास्थ्य संवर्धन उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना।
ii. आयुष औषधियों एवं सामग्रियों के मानकीकरण, गुणवत्ता विनिर्माण और विश्लेषणात्मक परीक्षण के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में पर्याप्त अवसंरचनात्मक एवं तकनीकी उन्नयन तथा संस्थागत गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना।
iii. आयुष औषधियों के प्रभावी गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा निगरानी और भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी के लिए केन्द्र और राज्य स्तर पर नियामक ढांचे को मजबूत करना।
iv. आयुष औषधियों एवं सामग्रियों के मानकों एवं गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए तालमेल, सहयोग एवं अभिसारी दृष्टिकोण विकसित करने को प्रोत्साहित करना।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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