इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
एनआईएक्सआई ने सार्वभौमिक स्वीकृति दिवस 2025 का सफलतापूर्वक समापन किया, जिसका उद्देश्य असंबद्ध लोगों को जोड़ना और विकसित भारत के लिए बहुभाषी इंटरनेट का निर्माण करना था
सार्वभौमिक स्वीकृति केवल तकनीकी मानकों के बारे में नहीं है, यह प्रत्येक नागरिक को, चाहे वह किसी भी भाषा या पृष्ठभूमि का हो, डिजिटल अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से भाग लेने के लिए सशक्त बनाने के बारे में है: श्री एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय
कार्यक्रम में एमएसएमई और उद्योगों पर सार्वभौमिक स्वीकृति के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और लाभों की खोज की गई
Posted On:
28 MAR 2025 6:38PM by PIB Delhi
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय इंटरनेट एक्सचेंज (एनआईएक्सआई) ने 28 मार्च 2025 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में सार्वभौमिक स्वीकृति दिवस पर हाइब्रिड कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का विषय था "असम्बद्ध को जोड़ना - विकसित भारत के लिए बहुभाषी इंटरनेट का निर्माण", जिसका उद्देश्य सार्वभौमिक स्वीकृति को अपनाने में तेजी लाना और भारत में अधिक समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना था।

वास्तव में सुलभ इंटरनेट प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी डिजिटल उपकरण और प्लेटफ़ॉर्म वर्तमान में उपयोग किए जा रहे डोमेन नामों और ईमेल पतों की विविध श्रेणी का समर्थन करें, चाहे भाषाई या संरचनात्मक भिन्नताएँ कुछ भी हों। समावेशी डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने में सार्वभौमिक स्वीकृति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव और एनआईएक्सआई के अध्यक्ष श्री एस. कृष्णन की उपस्थिति रही; साथ ही वैश्विक स्तर पर अन्य सरकारी अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
इंटरनेट शासन और लचीलेपन का महत्व
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन ने इस बात पर बल दिया कि “तेजी से डिजिटल-प्रथम दुनिया में, विशेष रूप से भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में यह आवश्यक है कि प्रौद्योगिकी बाधा न बने। सार्वभौमिक स्वीकृति केवल तकनीकी मानकों के बारे में नहीं है, यह प्रत्येक नागरिक को डिजिटल अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से भाग लेने के लिए सशक्त बनाने के बारे में है, चाहे वह किसी भी भाषा या पृष्ठभूमि का हो। हम यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रौद्योगिकी का लाभ उन लोगों तक भी पहुँचे जो डिजिटल रूप से जागरूक नहीं हैं, लोकतांत्रिक डिजिटल पहुँच को सरल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अंतरराष्ट्रीय डोमेन नाम (आईडीएन) और भाषा अनुवाद उपकरणों को बढ़ावा देने सहित हमारे प्रयासों का उद्देश्य डिजिटल विभाजन को पाटना और सुरक्षित, अधिक समावेशी ऑनलाइन वातावरण बनाना है।”
श्री एस. कृष्णन ने इंटरनेट गवर्नेंस और लचीलेपन के महत्व पर बल दिया और वैश्विक स्तर पर बहु-हितधारक दृष्टिकोण को आकार देने में भारत की भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "भारत का इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार एक अरब के करीब पहुंच रहा है, इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमारी आवाज़ सुनी जाए। हम मजबूत और लचीला डिजिटल बुनियादी ढांचा बनाने के लिए समर्पित हैं जो हमारी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करता है और चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों में भी देश के भीतर निर्बाध संचार को सक्षम बनाता है।"
समुदायों को सशक्त बनाना और वास्तविक डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना
यूनेस्को क्षेत्रीय कार्यालय के दक्षिण एशिया के निदेशक और प्रतिनिधि श्री टिम कर्टिस ने सार्वभौमिक स्वीकृति दिवस के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करने के लिए सार्वभौमिक स्वीकृति आवश्यक है कि हर कोई, चाहे उसकी भाषा कोई भी हो, डिजिटल दुनिया में पूरी तरह से भाग ले सके। ऑनलाइन भाषाई विविधता को अपनाकर, हम न केवल भाषाओं को संरक्षित कर रहे हैं बल्कि हम समुदायों को सशक्त बना रहे हैं और वास्तविक डिजिटल समावेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। वास्तविक समावेशी डिजिटल स्पेस सभी आवाज़ों का सम्मान करता है और उनका प्रतिनिधित्व करता है।"
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता को अनलॉक करना
एनआईएक्सआई के सीईओ डॉ. देवेश त्यागी ने सार्वभौमिक स्वीकृति दिवस 2025 कार्यक्रम में बोलते हुए कहा, “एनआईएक्सआई को इस पहल की अगुआई करने पर गर्व है। सार्वभौमिक स्वीकृति दिवस 2025 ने हितधारकों को एक साथ आने, अंतर्दृष्टि साझा करने और कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया है। हमारा ध्यान वास्तव में समावेशी इंटरनेट बनाने पर है, जहाँ भाषा अब कोई बाधा नहीं है। हमारा विश्वास है कि बहुभाषी इंटरनेट असंबद्ध लोगों को जोड़ने और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता को अनलॉक करने के लिए आवश्यक है।”
सार्वभौमिक स्वीकृति और डिजिटल समावेशिता को बढ़ावा देना
कार्यक्रम में सार्वभौमिक स्वीकृति के व्यापक दायरे की खोज करते हुए गहन चर्चाएँ की गईं। सत्रों में एमएसएमई और सामान्य रूप से उद्योगों पर सार्वभौमिक स्वीकृति के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, सार्वभौमिक स्वीकृति-अनुपालन व्यवसाय संचालित करने के लाभ और प्रभावी सार्वजनिक नीति को आकार देने में बहुभाषी इंटरनेट की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने देशी भाषाओं को अपनाने में अंतर की पहचान की और इन चुनौतियों को दूर करने के लिए नई पहलों का सुझाव दिया। इससे इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के सामने आने वाली बाधाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। पैनल ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के भीतर सार्वभौमिक स्वीकृति के महत्व को भी रेखांकित किया, विशेष रूप से सार्वभौमिक स्वीकृति के उपयोग के माध्यम से, सरकार नागरिकों को उनकी मूल भाषाओं में आवश्यक डिजिटल सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सक्षम करके उन्हें सशक्त बना सकती है।
पैनल ने सार्वभौमिक स्वीकृति अपनाने में भारत द्वारा किए गए ऐतिहासिक विकास जैसे कि “भाषिणी पोर्टल” और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहु-हितधारक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया। विभिन्न उद्योग नेताओं और तकनीकी उत्साही लोगों ने सार्वभौमिक स्वीकृति स्तर की अंतर-संचालन क्षमता को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रौद्योगिकी विकास मानकों आदि की मुख्य प्रणालियों में क्षमता निर्माण, दक्षताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस कार्यक्रम ने सार्वभौमिक स्वीकृति को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया और डिजिटल वातावरण बनाने के महत्व पर बल दिया जहां हर भारतीय अपनी पसंदीदा भाषा में इंटरनेट का पूरी तरह से उपयोग कर सके।
यूनेस्को और आईसीएएनएन ने इस कार्यक्रम का अच्छी तरह से समर्थन किया और उन्के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। यूनेस्को क्षेत्रीय कार्यालय दक्षिण एशिया के निदेशक और प्रतिनिधि श्री टिम कर्टिस; और एशिया प्रशांत, आईसीएएनएन उपाध्यक्ष, हितधारक जुड़ाव और एमडी श्री समीरन गुप्ता, यूनेस्को मुख्यालय में सूचना और डिजिटल समावेशन तक सार्वभौमिक पहुंच के अनुभाग प्रमुख श्री जैको डू टोइट प्रमुख वक्ताओं और प्रतिभागियों में शामिल रहे।
एनआईएक्सआई का परिचय:
19 जून 2003 को स्थापित, नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (एनआईएक्सआई) भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्वावधान में गैर-लाभकारी (धारा 8) कंपनी है। इसका काम भारत में इंटरनेट की पहुँच और अपनाने को बढ़ाना है, इसके लिए विभिन्न बुनियादी ढाँचे के पहलुओं को सुविधाजनक बनाना है ताकि इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र को आम जनता द्वारा प्रबंधित और उपयोग किया जा सके। एनआईएक्सआई के तहत चार सेवाओं में इंटरनेट एक्सचेंज पॉइंट बनाने के लिए इंटरनेट एक्सचेंज पॉइंट (IXPs), .in डोमेन डिजिटल पहचान स्थापित करने के लिए .IN रजिस्ट्री और IPv4 और IPv6 पतों को अपनाने के लिए IRINN शामिल हैं।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें: [https://nixi.in/](https://nixi.in/)
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