कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
कृषि अवसंरचना निधि के प्रदर्शन का मूल्यांकन
Posted On:
21 MAR 2025 4:58PM by PIB Delhi
2020-21 में शुरू किए गए कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) का उद्देश्य खेत पर भंडारण, रसद और प्रसंस्करण अवसंरचना का सहयोग करके फसल कटाई के बाद के प्रबंधन में अंतर को दूर करना है। गोदाम, कोल्ड स्टोर, ग्रेडिंग और प्रसंस्करण इकाइयों जैसी सुविधाएं सीधे बाजार तक पहुंच को बढ़ाती हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ती है। एआईएफ विभिन्न ऋण संस्थानों से 9 प्रतिशत ब्याज सीमा के साथ 1 लाख करोड़ रुपये के कुल ऋण की सुविधा प्रदान करता है, जो वर्ष 2032-33 तक जारी रहेगा। 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर सात वर्षों के लिए 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज छूट मिलती है। सीजीटीएमएसई के तहत 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी कवरेज उपलब्ध है, जिसका शुल्क सरकार वहन करती है।
कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं के कृषि उत्पादकता पर प्रभाव का आकलन करने के लिए सरकार बहु-स्तरीय निगरानी प्रणाली का उपयोग करती है। ये प्रणाली परियोजना परिणामों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग, पारदर्शिता और प्रभावी मूल्यांकन सुनिश्चित करते हैं। प्रमुख निगरानी रणनीतियों में शामिल हैं:
(i) एआईएफ ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) पोर्टल
एआईएफ पोर्टल परियोजनाओं की स्वीकृति से लेकर क्रियान्वयन तक की वास्तविक समय की ट्रैकिंग प्रदान करता है। यह परियोजना अनुमोदन, संवितरण और बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग पर डेटा एकत्र करता है ताकि जमीनी स्तर पर प्रभाव का आकलन किया जा सके। यह पोर्टल स्वचालित ऋण ट्रैकिंग के लिए विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ एकीकृत होता है।
(ii) एआईएफ परियोजनाओं की जियो-टैगिंग
एआईएफ परियोजनाओं की जियोटैगिंग से परियोजनाओं की भौतिक प्रगति और क्षेत्रीय वितरण की निगरानी संभव हो पाती है, जिससे उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
(iii) तृतीय-पक्ष मूल्यांकन और क्षेत्र सर्वेक्षण
स्वतंत्र एजेंसियां परियोजना के उपयोग, दक्षता और कृषि उत्पादकता पर प्रभाव का आकलन करने के लिए क्षेत्र मूल्यांकन करती हैं। ये सर्वेक्षण बाधाओं की पहचान करने और बेहतर निधि उपयोग के लिए सुधार सुझाने में मदद करते हैं। वर्ष 2023 के दौरान कृषि-आर्थिक अनुसंधान केंद्र (एईआरसी) पुणे ने रोजगार सृजन, कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी, बेहतर कृषि मशीनीकरण, बिचौलियों पर कम निर्भरता आदि जैसे विभिन्न मापदंडों में योजना के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए एक प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन किया था।
(iv) हितधारक परामर्श और प्रतिक्रिया प्रणाली
बैंकों और राज्य सरकारों के साथ नियमित बैठकें परियोजना की प्रभावशीलता पर वास्तविक समय की प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती हैं। कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं को नीतिगत हस्तक्षेप और निधि पुनर्आवंटन रणनीतियों के माध्यम से संबोधित किया जाता है।
(v) कृषि-तकनीक और एआई-आधारित एनालिटिक्स के साथ एकीकरण
सरकार एआईएफ द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं के उपज सुधार, कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी और किसानों के लिए मूल्य प्राप्ति पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए एआई और डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठा रही है। स्मार्ट एनालिटिक्स इस बात की जानकारी देते हैं कि कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और प्रोसेसिंग यूनिट किस तरह से आपूर्ति श्रृंखला दक्षता में सुधार कर रहे हैं।
(vi) जिला एवं राज्य स्तरीय निगरानी समितियां
राज्य और जिला स्तरीय नोडल एजेंसियां परियोजना कार्यान्वयन की देखरेख करती हैं और क्षेत्रीय कृषि आवश्यकताओं के साथ संरेखण सुनिश्चित करती हैं। समय-समय पर प्रदर्शन समीक्षा से बेहतर फंड उपयोग के लिए रणनीतियों को संशोधित करने में मदद मिलती है।
इन प्रणालियां के माध्यम से, एआईएफ के प्रदर्शन का निरंतर मूल्यांकन किया जाता है, जिससे कृषि में पारदर्शिता, दक्षता और प्रभाव-संचालित बुनियादी ढांचे का विकास सुनिश्चित होता है।
कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के लिए किए गए प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, इस योजना ने किफायती ऋण तक पहुँच में सुधार और महत्वपूर्ण कृषि अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करके फसल-पश्चात प्रबंधन अवसंरचना और व्यवहार्य कृषि परिसंपत्तियों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि एआईएफ-समर्थित परियोजनाओं ने आधुनिक भंडारण, कोल्ड चेन सुविधाओं और प्रसंस्करण इकाइयों की उपलब्धता में वृद्धि की है, जिससे फसल-पश्चात नुकसान में कमी आई है और किसानों के लिए मूल्य संवर्धन में वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, कस्टम हायरिंग सेंटर और कृषि-प्रसंस्करण सुविधाओं जैसी व्यवहार्य कृषि परिसंपत्तियों की स्थापना ने किसानों को साझा संसाधनों तक पहुँच प्रदान की है, आधुनिक तकनीकों के साथ कृषि मशीनीकरण में सुधार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप दक्षता में सुधार हुआ है जबकि बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है, जिससे अंततः उनकी आय और बाजार प्रतिस्पर्धा में वृद्धि हुई है।
एआई आधारित एप्लीकेशन का उपयोग करके एआईएफ के प्रभाव आकलन का अध्ययन किया गया, जो कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में किया गया एक अनूठा अध्ययन है। अध्ययन से पता चला है कि निर्मित बुनियादी ढांचे के कारण फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आई है, किसानों को कृषि उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ है, कृषि मशीनीकरण बढ़ा है, खेत स्तर पर रोजगार सृजन आदि हुआ है।
कृषि-आर्थिक अनुसंधान केन्द्र (एईआरसी), पुणे द्वारा प्रभाव आकलन अध्ययन पारंपरिक सर्वेक्षण पद्धति का उपयोग करके किया गया, जिसमें 8 राज्यों अर्थात् पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और राजस्थान के 500 लाभार्थियों से आंकड़े एकत्र किए गए।
सकारात्मक प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- भंडारण क्षमता में वृद्धि (औसतन 7 टीएमटी/भंडारण परियोजना)
- रोजगार सृजन (औसतन 11 अवसर/परियोजना)
- निवेश आकर्षित करना (औसतन ऋण राशि का 1.5 गुना)
- नये कृषि-बुनियादी ढांचे का सृजन (कुल परियोजनाओं का 70 प्रतिशत)
- किफायती ब्याज दर पर धन तक आसान पहुंच (अधिकतम 9 प्रतिशत)
- ग्रामीण क्षेत्रों में विकेन्द्रीकृत कृषि-बुनियादी ढांचे का निर्माण (97 प्रतिशत)
- कुल मिलाकर यह महसूस किया गया कि क्षेत्र में एआईएफ सुविधाओं के कारण किसानों को लाभ हुआ है और एआईएफ इकाइयों के उत्पादों/सेवाओं की मांग संतोषजनक रही है तथा इन इकाइयों से संतोषजनक आय हुई है।
- अधिकांश उत्तरदाताओं ने आवेदन प्रक्रिया को आसान माना तथा ऋणदाता बैंकों में एआईएफ योजना के बारे में जागरूकता के उच्च एवं संतोषजनक स्तर का खुलासा किया, तथा बैंकों से पूर्ण सहयोग की बात कही।
- उल्लेखनीय बात यह है कि अधिकांश इकाइयों की स्थापना के पीछे मुख्य कारण एआईएफ ऋण की उपलब्धता थी।
उत्तर पूर्वी राज्यों के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों के लिए एआईएफ योजना के तहत कोई विशेष आवंटन नहीं है। एक लाख करोड़ रुपये का यह लक्ष्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अस्थायी रूप से आवंटित किया गया है और इस तरह के धन का आवंटन प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से उत्पादन के कुल मूल्य के अनुपात के आधार पर निर्धारित किया गया है। एआईएफ योजना के तहत आवंटन केवल न्यूनतम है और राज्य आवंटन से अधिक कर सकते हैं। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अस्थायी आवंटन अनुलग्नक-I पर देखा जा सकता है।
क्रम संख्या
|
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
|
आवंटन करोड़ रुपये में
|
1
|
असम
|
2050
|
2
|
त्रिपुरा
|
360
|
3
|
अरुणाचल प्रदेश
|
290
|
4
|
नगालैंड
|
230
|
5
|
मणिपुर
|
200
|
6
|
मिजोरम
|
196
|
7
|
मेघालय
|
190
|
|
कुल योग
|
3516
|
यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
***
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