सहकारिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

सहकारी समिति एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था

प्रविष्टि तिथि: 17 DEC 2024 4:27PM by PIB Delhi

6 जुलाई, 2021 को अपनी स्थापना के बाद से सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी समितियों को सशक्त बनाने और देश भर में सहकारी समितियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने में उनकी क्षमता का लाभ उठाने के लिए विभिन्न पहल और सुधार किए हैं। विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी के साथ सहकारिता मंत्रालय ने देश भर में सहकारी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और मजबूत करने के लिए विभिन्न पहल की हैं, जिनका विवरण अनुलग्नक-I में संलग्न है।

सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के लिए एनसीडीसी सहित सहकारिता मंत्रालय ने निम्नलिखित उपाय किए हैं

I. कम्प्यूटरीकरण के माध्यम से पैक्स को मजबूत करना -पैक्स को मजबूत करने के लिए भारत सरकार द्वारा कुल 2,516 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ क्रियाशील पैक्स के कम्प्यूटरीकरण की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसमें देश में सभी कार्यात्मक पैक्स को एक सामान्य ईआरपी आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाने के साथ ही उन्हें एसटीसीबी और डीसीसीबी के माध्यम से नाबार्ड के साथ जोड़ना शामिल है। परियोजना के तहत 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 67,930 पैक्स को मंजूरी दी गई है। ईआरपी सॉफ्टवेयर पर कुल 40,727 पैक्स को शामिल किया गया है और 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा हार्डवेयर की खरीद की गई है। इस परियोजना के तहत स्वीकृत और जारी की गई पीएसीएस राशि का राज्य-वार विवरण अनुलग्नक- II () में है।

II. कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबीएस) का कम्प्यूटरीकरण- दीर्घकालिक सहकारी ऋण संरचना को मजबूत करने के लिए, 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैले कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) की 1,851 इकाइयों के कम्प्यूटरीकरण की परियोजना को सरकार द्वारा मंजूरी दी गई है। नाबार्ड परियोजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है। अब तक 10 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्रस्ताव प्राप्त और स्वीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा हार्डवेयर की खरीद, डिजिटलीकरण और समर्थन प्रणाली की स्थापना के लिए भारत सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2023-24 और वित्त वर्ष 2024-25 में 8 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को 4.26 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी जारी की गई। कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) के कम्प्यूटरीकरण परियोजना के तहत एआरडीबी द्वारा अनुमोदित और जारी की गई राशि का राज्य-वार विवरण अनुलग्नक - II (बी) में है।

III. चीनी सहकारी मिलों को सुदृढ़ करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की ऋण योजना शुरू की गईः सरकार ने एनसीडीसी के माध्यम से इथेनॉल संयंत्र या सह-उत्पादन संयंत्र स्थापित करने या कार्यशील पूंजी या तीनों उद्देश्यों के लिए एक योजना शुरू की है। अब तक, मंत्रालय ने योजना के तहत एनसीडीसी को 750 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2022-23 में 500 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में 250 करोड़ रुपये) जारी किए हैं और 7.11.2024 तक, एनसीडीसी ने अब तक 58 सीएसएम को 8040.38 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

IV. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के तहत एक वैधानिक संगठन है जो देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों के विकास के लिए निगम प्रायोजित और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं को लागू करता है। एनसीडीसी द्वारा कार्यान्वित योजनाएं और कवर की गई गतिविधियां अनुलग्नक - II (सी) में संलग्न हैं।

एनसीडीसी ने सहकारी समितियों के विकास के लिए कुल मिलाकर 378544.60 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। पिछले 5 वर्षों के दौरान गतिविधियों के हिसाब से  और राज्य-वार संवितरण (खर्च) अनुलग्नक-III और अनुलग्नक-IV में संलग्न है। सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करने के लिए सरकार का दृष्टिकोण कृषि, डेयरी, हस्तशिल्प आदि जैसे क्षेत्रों में टिकाऊ, समावेशी और विकास-उन्मुख सहकारी समितियों के निर्माण पर केंद्रित है। कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के सहयोग से ग्रामीण भारत में रोजगार के व्यापक अवसर पैदा करने के लिए सहकारी मॉडल का लाभ उठाया जाता है।

अनुलग्नक-I

सहकारिता मंत्रालय की ओर से किए गए प्रमुख उपक्रमों की प्रगति

सहकारिता मंत्रालय ने 6 जुलाई, 2021 को अपनी स्थापना के बाद से 'सहकार-से-समृद्धि' के दृष्टिकोण को साकार करने और देश में प्राथमिक से शीर्ष स्तर की सहकारी समितियों तक सहकारी आंदोलन को सुदृढ़ करने और उसे बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं। अब तक किए गए उपक्रम और प्रगति की सूची इस प्रकार है :

ए. प्राथमिक सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से जीवंत और पारदर्शी बनाना
 

1. पीएसीएस (पैक्स) के लिए मॉडल उपनियम, जो उन्हें बहुउद्देशीय, बहुआयामी और पारदर्शी निकाय बनाते हैंः सरकार ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय स्तर के संघों, राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) आदि सहित सभी हितधारकों के परामर्श से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पीएसीएस (पैक्स) के लिए मॉडल उपनियम तैयार किए हैं। ऐसा करने से पैक्स को 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने, उनके संचालन में शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करने में सक्षम बनाता है। पीएसीएस की सदस्यता को अधिक समावेशी और व्यापक बनाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं, तािक महिलाओं और अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जा सके। अब तक 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने मॉडल उपनियमों को अपनाया है या उनके मौजूदा उपनियमों के अनुरूप हैं।
2. कम्प्यूटरीकरण के माध्यम से पीएसीएस को मजबूत बनानाः पैक्स को मजबूत करने के लिए भारत सरकार द्वारा कुल 2,516 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ क्रियाशील पैक्स के कम्प्यूटरीकरण की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसमें देश में सभी संचालित पैक्स को एक सामान्य ईआरपी आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाना, उन्हें एसटीसीबी और डीसीसीबी के माध्यम से नाबार्ड के साथ जोड़ना शामिल है। परियोजना के तहत 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 67,930 पीएसीएस को मंजूरी दी गई है। ईआरपी सॉफ्टवेयर पर कुल 40,727 पैक्स को शामिल किया गया है और 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा हार्डवेयर की खरीद की गई है।
3. छूटी हुई पंचायतों में नई बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मत्स्य पालन सहकारी समितियां :
भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में देश की सभी पंचायतों और गांवों को कवर करने के उद्देश्य से नई बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की योजना को मंजूरी दी है। इस पहल को नाबार्ड, एनडीडीबी, एनएफडीबी और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा समर्थन प्राप्त है। पहल के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए हितधारकों के लिए लक्ष्यों और समयसीमा का संकेत देते हुए 19.9.2024 को 'मार्गदर्शिका' का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार, 15.2.2023 को योजना की मंजूरी के बाद से देश भर में कुल 8,823 नए पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का पंजीकरण किया गया है।

4. सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी विकेन्द्रीकृत अनाज भंडारण योजना : सरकार ने एआईएफ, एएमआई, एसएमएएम, पीएमएफएमई आदि सरकार की विभिन्न योजनाओं को एकीकृत करके पैक्स स्तर पर अनाज भंडारण के लिए गोदामों, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य कृषि अवसंरचना बनाने की योजना को मंजूरी दी है। यह खाद्यान्न की बर्बादी और परिवहन लागत को कम करेगा। किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा और पैक्स स्तर पर ही विभिन्न कृषि आवश्यकताओं को पूरा करेगा। पायलट परियोजना के तहत 11 राज्यों के 11 पीएसीएस में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है।
5. ई-सेवाओं तक बेहतर पहुंच के लिए सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में पैक्स : पैक्स के माध्यम से बैंकिंग, बीमा, आधार नामांकन/अपडेशन, स्वास्थ्य सेवाएं, पैन कार्ड और आईआरसीटीसी/बस/हवाई टिकट आदि जैसी 300 से अधिक ई-सेवाएं प्रदान करने के लिए सहकारिता मंत्रालय, एमईआईटीवाई, नाबार्ड और सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अब तक 40,214 पैक्स ने ग्रामीण नागरिकों को सीएससी सेवाएं प्रदान करना शुरू कर दिया है।

6. पैक्स द्वारा नए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठनः सरकार ने उन ब्लॉकों में जहां अभी तक एफपीओ का गठन नहीं हुआ है या वे ब्लॉक जो किसी अन्य कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा कवर नहीं किए गए हैं वहां एनसीडीसी के सहयोग से पैक्स द्वारा 1,100 अतिरिक्त एफपीओ के गठन की अनुमति दी है। इसके अलावा एनसीडीसी द्वारा सहकारी क्षेत्र में 1,207 एफपीओ का गठन किया गया है। यह किसानों को आवश्यक बाजार संपर्क प्रदान करने और उनकी उपज के लिए उचित और लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में सहायक होगा।

7. खुदरा पेट्रोल/डीजल आउटलेट्स के लिए पीएसीएस को प्राथमिकता दी गईः सरकार ने खुदरा पेट्रोल/डीजल दुकानों के आवंटन के लिए पीएसीएस को संयुक्त श्रेणी 2 (सीसी2) में शामिल करने की अनुमति दी है। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 286 पीएसीएस ने खुदरा पेट्रोल/डीजल दुकानों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है।

8. पैक्स को थोक उपभोक्ता पेट्रोल पंपों को खुदरा दुकानों में बदलने की अनुमति दी गईः
मौजूदा थोक उपभोक्ता लाइसेंसधारी पैक्स को तेल विपणन कंपनियों द्वारा खुदरा दुकानों में बदलने के लिए एक बार का विकल्प दिया गया है। ओएमसी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार 4 राज्यों के 109 थोक उपभोक्ता पंप लाइसेंसधारी पैक्स ने खुदरा दुकानों में परिवर्तन के लिए सहमति दी है। इनमें से 45 पैक्स को ओएमसी से आशय पत्र (एलओआई) प्राप्त हुआ है।

9. अपनी गतिविधियों में विविधता लाने के लिए पैक्स एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए पात्र हैं: सरकार ने अब पैक्स को एलपीजी वितरकों के लिए आवेदन करने की अनुमति दे दी है। इससे पैक्स को अपनी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने और अपनी आय के स्रोत में विविधता लाने का विकल्प मिलेगा।

10. ग्रामीण स्तर पर जेनेरिक दवाओं तक पहुंच में सुधार के लिए पैक्स को पीएम भारतीय जन औषधि केंद्र बनाया गया: पैक्स को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों (पीएमबीजेके) के संचालन की अनुमति दी गई है जो उन्हें आय का अतिरिक्त स्रोत प्रदान करेगा। इसके साथ ही ग्रामीण नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं तक पहुंच को आसान बनाएगा। अब तक 4,470 पैक्स/सहकारी समितियों ने पीएमबीजेके के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। इनमें से 2,705 पीएसीएस को फार्मास्युटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) द्वारा प्रारंभिक मंजूरी दी गई है। 755 पैक्स को राज्य औषधि नियंत्रकों से दवा लाइसेंस प्राप्त हुआ है जो पीएम भारतीय जन औषधि केंद्रों के रूप में कार्य करने के लिए तैयार हैं।

11. प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) के रूप में पैक्स: देश में किसानों तक उर्वरक और संबंधित सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पैक्स को पीएमकेएसके संचालित करने में सक्षम बनाया गया है। भारत सरकार के उर्वरक विभाग और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, कुल 36,180 पैक्स पीएमकेएसके के रूप में कार्य कर रहे हैं।


12. पैक्स ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजनाओं (पीडब्ल्यूएस) का संचालन एवं रखरखाव करेगी: पैक्स को ग्रामीण क्षेत्रों में पीडब्ल्यूएस के संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) करने के लिए पात्र बनाया गया है। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 13 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा पंचायत/ग्राम स्तर पर ओ एंड एम सेवाएं प्रदान करने के लिए 1,227 पैक्स की पहचान/चयन किया गया है।

13. पैक्स स्तर पर पीएम-कुसुम का अभिसरण: पैक्स से जुड़े किसान सौर कृषि जल पंपों को अपना सकते हैं और अपने खेतों में फोटोवोल्टिक मॉड्यूल स्थापित कर सकते हैं।


14. बैंक मित्र सहकारी समितियों को घर-घर वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए माइक्रो-एटीएम : डेयरी और मत्स्य पालन सहकारी समितियों को डीसीसीबी और एसटीसीबी का बैंक मित्र बनाया जा सकता है। व्यापार करने में आसानी, पारदर्शिता और वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए इन बैंक मित्र सहकारी समितियों को 'डोर-स्टेप वित्तीय सेवाएं' प्रदान करने के लिए नाबार्ड के सहयोग से माइक्रो-एटीएम भी दिए जा रहे हैं। पहल के प्रभावी कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए 19 सितंबर 2024 को एक एसओपी शुरू की गई है। अब तक गुजरात में बैंक मित्र सहकारी समितियों को 7,446 माइक्रो-एटीएम वितरित किए जा चुके हैं।

15. दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों को रूपे किसान क्रेडिट कार्ड: डीसीसीबी/एसटीसीबी की पहुंच बढ़ाने और डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को आवश्यक नकदी उपलब्ध कराने के लिए सहकारी समितियों के सदस्यों को रुपे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) वितरित किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें तुलनात्मक रूप से कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सके और अन्य वित्तीय लेनदेन को सक्षम बनाया जा सके। पहल के प्रभावी कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए 19 सितंबर 2024 को एक एसओपी शुरू की गई है। अब तक गुजरात राज्य में 7,25,795 रुपे केसीसी वितरित किए जा चुके हैं।


16. मछली किसान उत्पादक संगठन (एफएफपीओ) का गठन : मछुआरों को बाजार संपर्क और प्रसंस्करण सुविधाएं प्रदान करने के लिए, एनसीडीसी ने प्रारंभिक चरण में 70 एफएफपीओ को पंजीकृत किया है। इसके अलावा, मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने 225.50 करोड़ रुपये के स्वीकृत परिव्यय के साथ एनसीडीसी को 1000 मौजूदा मत्स्य सहकारी समितियों को एफएफपीओ में परिवर्तित करने का काम आवंटित किया है।

17. श्वेत क्रांति 2.0: भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय ने रोजगार बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में सुधार के उद्देश्य से 'श्वेत क्रांति 2.0' की एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के प्रमुख उद्देश्यों में डेयरी सहकारी समितियों द्वारा दूध की खरीद में 50% की वृद्धि, संगठित डेयरी क्षेत्र द्वारा अभी तक कवर नहीं किए गए (वंचित) क्षेत्रों में डेयरी किसानों को बाजार तक पहुंच प्रदान करना और संगठित डेयरी क्षेत्र में डेयरी सहकारी समितियों की हिस्सेदारी को बढ़ावा देना शामिल है। सहकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से इस पहल के प्रभावी कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करने के लिए 19 सितंबर, 2024 को एक एसओपी बनाकर उसे लॉन्च किया।

18. आत्मनिर्भरता अभियान : सहकारिता मंत्रालय ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दालों (अरहर, मसूर और उड़द) के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (ईबीपी) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए इथेनॉल के उत्पादन के लिए मक्के के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की पहल शुरू की है। राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) इस पहल के तहत केंद्रीय नोडल एजेंसियां हैं और उन्होंने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों के पंजीकरण के लिए क्रमशः ई-समयुक्ति (एनसीसीएफ) और ई-समृद्धि (नेफेड) पोर्टल विकसित किए हैं। अरहर, उड़द और मसूर दालों के पूर्व-पंजीकृत किसानों के लिए, सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 100% उपज खरीदने की गारंटी दी है। यदि बाजार मूल्य एमएसपी से अधिक हो जाते हैं तो किसान अधिक लाभ के लिए खुले बाजार में अपनी उपज बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। इसी तरह दोनों एजेंसियां सभी तीन मौसमों-खरीफ, जैद और रबी में पूर्व-पंजीकृत किसानों से मक्के की 100% खरीद की गारंटी देती हैं। इस प्रकार इथेनॉल डिस्टिलरी को मक्के की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती है और साथ ही किसानों को मक्के की खेती के लिए प्रोत्साहित की जाती है। अब तक 15,38,704 किसान एनसीसीएफ के ई-समयुक्ति पोर्टल पर और 17,64,130 किसान नेफेड के ई-समृद्धि पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं।


बी शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों का सुदृढ़ीकरण


19. शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए नई शाखाएं खोलने की अनुमति दी गई हैः यूसीबी अब आरबीआई की पूर्व मंजूरी के बिना पिछले वित्त वर्ष में मौजूदा शाखाओं की संख्या के 10% (अधिकतम 5 शाखाएं) तक नई शाखाएं खोल सकते हैं।


20. यूसीबी को आरबीआई द्वारा अपने ग्राहकों को डोरस्टेप सेवाएं प्रदान करने की अनुमति दी गई हैः डोर स्टेप बैंकिंग सुविधा अब यूसीबी द्वारा प्रदान की जा सकती है। इन बैंकों के खाताधारक अब घर पर विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं जैसे कि नकद निकासी, नकद जमा, केवाईसी, पेंशनभोगियों के लिए डिमांड ड्राफ्ट और जीवन प्रमाण पत्र आदि।


21. सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों की तरह बकाया ऋणों का एकमुश्त निपटान करने की अनुमति दी गई है: बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के माध्यम से सहकारी बैंक अब उधारकर्ताओं के साथ तकनीकी बट्टे खाते में डालने के साथ-साथ निपटान की प्रक्रिया भी प्रदान कर सकते हैं।

 

22. यूसीबी को दिए गए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समय सीमा बढ़ाई गई: आरबीआई ने यूसीबी के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समयसीमा दो साल यानी 31 मार्च, 2026 तक बढ़ा दी है।

 

23. शहरी सहकारी बैंकों के साथ नियमित संपर्क के लिए आरबीआई ने एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की है: सहकारी क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने के लिए आरबीआई ने एक नोडल अधिकारी की भी नियुक्ति की है।

24. ग्रामीण और शहरी सहकारी बैंकों के लिए आरबीआई ने व्यक्तिगत आवास ऋण सीमा दोगुनी से अधिक की:

. शहरी सहकारी बैंकों की आवास ऋण सीमा अब 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 60 लाख रुपये कर दी गई है।


बी. ग्रामीण सहकारी बैंकों की आवास ऋण सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दिया गया है।
25. ग्रामीण सहकारी बैंक अब वाणिज्यिक अचल संपत्ति/आवासीय आवास क्षेत्र को ऋण देने में सक्षम होंगे, जिससे उनके व्यवसाय में विविधता आएगी : इससे न केवल ग्रामीण सहकारी बैंकों को अपने व्यवसाय में विविधता लाने में मदद मिलेगी, बल्कि आवास सहकारी समितियों को भी लाभ होगा।

26. सहकारी बैंकों के लिए लाइसेंस शुल्क में कमीः सहकारी बैंकों को 'आधार सक्षम भुगतान प्रणाली' (एईपीएस) में शामिल करने के लिए लाइसेंस शुल्क को लेनदेन की संख्या से जोड़कर कम कर दिया गया है। सहकारी वित्तीय संस्थान भी पूर्व-उत्पादन चरण के पहले तीन महीनों के लिए निःशुल्क सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसान अब बायोमीट्रिक्स के माध्यम से अपने घर पर बैंकिंग की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।

27. ऋण देने में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए गैर-अनुसूचित यूसीबी, एसटीसीबी और डीसीसीबी को सीजीटीएमएसई योजना में सदस्य ऋण संस्थान (एमएलआई) के रूप में अधिसूचित किया गया है: सहकारी बैंक अब दिए गए ऋणों पर 85 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज का लाभ उठा सकेंगे। साथ ही सहकारी क्षेत्र के उद्यम भी अब सहकारी बैंकों से बिना किसी गारंटी के ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

28. शहरी सहकारी बैंकों को शामिल करने के लिए शिड्यूलिंग मानदंडों की अधिसूचना: शहरी सहकारी बैंक जो 'वित्तीय रूप से सुदृढ़ और अच्छी तरह से प्रबंधित' (एफएसडब्लूएम) मानदंडों को पूरा करते हैं और पिछले दो वर्षों से टियर 3 के रूप में वर्गीकरण के लिए आवश्यक न्यूनतम जमा बनाए रखते हैं, अब भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की अनुसूची II में शामिल होने और 'अनुसूचित' दर्जा प्राप्त करने के लिए पात्र हैं।

29. आरबीआई ने स्वर्ण ऋण के लिए मौद्रिक सीमा दोगुनी कर दी: आरबीआई ने उन शहरी सहकारी बैंकों के लिए मौद्रिक सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी है जो पीएसएल लक्ष्य को पूरा करते हैं।

30. शहरी सहकारी बैंकों के लिए व्यापक संगठन: आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों और ऋण समितियों के राष्ट्रीय महासंघ (एनएएफसीयूबी) को यूसीबी क्षेत्र के लिए एक व्यापक संगठन (यूओ) के गठन के लिए मंजूरी दे दी है, जो लगभग 1,500 यूसीबी को आवश्यक आईटी बुनियादी ढांचा और परिचालन सहायता प्रदान करेगा।


सी आयकर अधिनियम में सहकारी समितियों को राहत

31. 1 से 10 करोड़ रुपये तक की आय वाली सहकारी समितियों के लिए अधिभार 12% से घटाकर 7% किया गया: इससे सहकारी समितियों पर आयकर का बोझ कम होगा और उनके पास अपने सदस्यों के लाभ के लिए कार्य करने हेतु अधिक पूंजी उपलब्ध होगी।

32. सहकारी समितियों के लिए एमएटी को 18.5% से घटाकर 15% किया गया: इस प्रावधान से अब सहकारी समितियों और कंपनियों के बीच समानता आ गई है।

33. आयकर अधिनियम की धारा 269एसटी के तहत नकद लेनदेन में राहत: आयकर अधिनियम की धारा 269एसटी के तहत सहकारी समितियों द्वारा नकद लेनदेन में कठिनाइयों को दूर करने के लिए सरकार ने स्पष्टीकरण जारी किया है कि एक सहकारी समिति द्वारा अपने वितरक के साथ एक दिन में किए गए 2 लाख रुपये से कम के नकद लेनदेन को अलग से माना जाएगा और उस पर आयकर जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।

34. नई विनिर्माण सहकारी समितियों के लिए कर में कटौती: सरकार ने निर्णय लिया है कि 31 मार्च, 2024 तक विनिर्माण गतिविधियां शुरू करने वाली नई सहकारी समितियों के लिए 30% प्लस अधिभार की पूर्व दर की तुलना में 15% की एक समान कम कर दर वसूली जाएगी। इससे विनिर्माण क्षेत्र में नई सहकारी समितियों के गठन को प्रोत्साहन मिलेगा।

35. पैक्स और पीसीएआरडीबी द्वारा नकद जमा और नकद ऋण की सीमा में वृद्धिः सरकार ने पीएसीएस और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (पीसीएआरडीबी) द्वारा नकद जमा और नकद ऋण की सीमा प्रति सदस्य 20,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी है। इस प्रावधान से उनकी गतिविधियों में सुविधा होगी, उनका व्यवसाय बढ़ेगा और उनकी समितियों के सदस्यों को लाभ होगा।

36. नकद निकासी में स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की सीमा में वृद्धि: सरकार ने स्रोत पर कर कटौती के बिना सहकारी समितियों की नकद निकासी की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कर दी है। इस प्रावधान से सहकारी समितियों के लिए स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की बचत होगी, जिससे सहकारी समिति की नकदी बढ़ेगी।


डी. सहकारी चीनी मिलों का पुनरुद्धार

37. चीनी सहकारी मिलों को आयकर से राहत: सरकार ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है कि सहकारी चीनी मिलों को अप्रैल, 2016 से किसानों को उचित और लाभकारी या राज्य सलाह मूल्य तक अधिक गन्ने का भुगतान करने पर अतिरिक्त आयकर नहीं देना होगा।


38. चीनी सहकारी मिलों के आयकर से संबंधित दशकों पुराने लंबित मुद्दों का समाधान: सरकार ने अपने केंद्रीय बजट 2023-24 में एक प्रावधान किया है। इसमें चीनी सहकारी समितियों को आकलन वर्ष 2016-17 से पहले की अवधि के लिए गन्ना किसानों को उनके भुगतान को व्यय के रूप में दावा करने की अनुमति दी गई है, जिससे 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी।


39. चीनी सहकारी मिलों को मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की ऋण योजना शुरू की गई : सरकार ने इथेनॉल संयंत्र या सह उत्पादन संयंत्र स्थापित करने या संचालन पूंजी या तीनों उद्देश्यों के लिए एनसीडीसी के माध्यम से एक योजना शुरू की है। अब तक मंत्रालय ने योजना के तहत एनसीडीसी को 750 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2022-23 में 500 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में 250 करोड़ रुपये) जारी किए हैं। 7.11.2024 तक एनसीडीसी ने अब तक 56 सीएसएम को 7790.00 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

40. इथेनॉल की खरीद में सहकारी चीनी मिलों को प्राथमिकता : इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (ईबीपी) के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा इथेनॉल की खरीद के लिए सहकारी चीनी मिलों को अब निजी कंपनियों के समान रखा गया है।

41. गुड़ पर जीएसटी 28% से घटाकर 5% किया गया: सरकार ने गुड़ पर जीएसटी को 28% से घटाकर 5% करने का निर्णय लिया है, जिससे सहकारी चीनी मिलें उच्च मार्जिन के साथ डिस्टिलरीज को गुड़ बेचकर अपने सदस्यों के लिए अधिक मुनाफा कमाने में सक्षम होंगी।


ई. राष्ट्रीय स्तर पर तीन नई बहु-राज्य सोसायटी


42. प्रमाणित बीजों के लिए नई राष्ट्रीय बहु-राज्य सहकारी बीज सोसायटी: सरकार ने एमएससीएस अधिनियम, 2002 के तहत एक नई शीर्ष बहु-राज्य सहकारी बीज सोसायटी की स्थापना की है। इसका नाम भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) है, जो एकल ब्रांड के तहत गुणवत्तापूर्ण बीज की खेती, उत्पादन और वितरण के लिए एक व्यापक संगठन है। बीबीएसएसएल ने अब तक रबी सीजन के दौरान 366 हेक्टेयर भूमि में गेहूं, सरसों और दालों (चना, मटर) के ब्रीडर बीज लगाए हैं। इसी प्रकार खरीफ सीजन के दौरान 148.26 हेक्टेयर भूमि में धान, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, ज्वार और ग्वार के ब्रीडर बीज लगाए गए हैं। अब तक 14,816 पैक्स/सहकारी समितियां बीबीएसएसएल की सदस्य बन चुकी हैं।


43. जैविक खेती के लिए नई राष्ट्रीय बहु-राज्य सहकारी जैविक सोसायटी : सरकार ने प्रमाणित और प्रामाणिक जैविक उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन के लिए एक प्रमुख संगठन के रूप में एमएससीएस अधिनियम, 2002 के तहत एक नई शीर्ष बहु-राज्य सहकारी जैविक सोसायटी की स्थापना की है, जिसका नाम राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) है। अब तक 3,772 पैक्स/सहकारी समितियां एनसीओएल की सदस्य बन चुकी हैं। एनसीओएल ने 'भारत ऑर्गेनिक्स ब्रांड' के तहत 13 उत्पाद लॉन्च किए हैं। इसमें साबुत गेहूं का आटा, मूंग धुली, मूंग साबुत, मूंग चिल्का दाल, टूटा मूंग, अरहर/तूर दाल, उड़द साबुत, उड़द दाल, मसूर साबुत, मसूर मलका, ब्राउन चना, राजमा, चना दाल शामिल हैं।


44. निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई राष्ट्रीय बहु-राज्य सहकारी निर्यात समिति : सरकार ने एमएससीएस अधिनियम, 2002 के तहत एक नई शीर्ष बहु-राज्य सहकारी निर्यात समिति की स्थापना की है, जिसका नाम राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीई एल) है, जो सहकारी क्षेत्र से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक संगठन है। अब तक 5,438 पैक्स/सहकारी समितियां एनसीईएल की सदस्य बन चुकी हैं। अब तक एनसीईएल ने 4,581.7 करोड़ रुपये के निर्यात मूल्य के साथ 11,62,728 मीट्रिक टन वस्तुओं (चावल, चीनी, प्याज, गेहूं, मक्का और जीरा) की कुल निर्यात मात्रा हासिल की है।


एफ. सहकारिता में क्षमता निर्माण


45. राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (एनसीसीटी) के माध्यम से प्रशिक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देना: अपनी पहुंच बढ़ाते हुए, एनसीसीटी ने 1,937 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं और अक्टूबर 2024 तक 1,09,021 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया।


जी. 'व्यापार करने में आसानी' के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग


46. केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय का कम्प्यूटरीकरण: बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय को कम्प्यूटरीकृत किया गया है, जो समयबद्ध तरीके से आवेदनों और सेवा अनुरोधों को संसाधित करने में सहायता करेगा।


47. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आरसीएस के कार्यालय के कम्प्यूटरीकरण की योजना: सहकारी समितियों के लिए 'व्यवसाय करने में आसानी' बढ़ाने और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पारदर्शी कागज रहित विनियमन के लिए एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए आरसीएस कार्यालयों के कम्प्यूटरीकरण के लिए एक केंद्र प्रायोजित परियोजना को सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को हार्डवेयर की खरीद, सॉफ्टवेयर के विकास आदि के लिए अनुदान दिया जाता है। अब तक भारत सरकार द्वारा 35 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।


48. कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) का कम्प्यूटरीकरण: दीर्घकालिक सहकारी ऋण संरचना को मजबूत करने के लिए 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैले कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) की 1,851 इकाइयों के कम्प्यूटरीकरण की परियोजना को सरकार द्वारा मंजूरी दी गई है। नाबार्ड परियोजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है। अब तक 10 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्रस्ताव प्राप्त और स्वीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा भारत सरकार की ओर से हार्डवेयर की खरीद, डिजिटलीकरण और समर्थन प्रणाली की स्थापना के लिए वित्त वर्ष 2023-24 और वित्त वर्ष 2024-25 में 8 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 4.26 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी दी गई है।

एच. अन्य पहल


49. प्रामाणिक और अद्यतन डेटा संग्रह के लिए नया राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस: देश भर में सहकारी समितियों से संबंधित कार्यक्रमों/योजनाओं के नीति निर्माण और कार्यान्वयन में हितधारकों की सुविधा के लिए राज्य सरकारों के सहयोग से देश में सहकारी समितियों का एक डेटाबेस तैयार किया गया है। अब तक 8 लाख से अधिक सहकारी समितियों का डेटा डेटाबेस में लिया जा चुका है।

50. बहु-राज्य सहकारी समितियां (संशोधन) अधिनियम, 2023: शासन को मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही बढ़ाने, चुनावी प्रक्रिया में सुधार और बहु राज्य सहकारी समितियों में 97वें संवैधानिक संशोधन के प्रावधानों को शामिल करने के लिए एमएससीएस अधिनियम, 2002 में संशोधन किया गया है।

51. सहकारी लोकपाल: बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (एमएससीएस) अधिनियम, 2002 में संशोधन के बाद, दिनांक 05.03.2024 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से उक्त अधिनियम की धारा 85ए के तहत सहकारी लोकपाल की नियुक्ति की गई है। लोकपाल कार्यालय पूरी तरह से क्रियाशील है और एमएससीएस के सदस्यों से उनकी जमा राशि, मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के कामकाज के न्यायसंगत लाभ या संबंधित सदस्य के व्यक्तिगत अधिकारों को प्रभावित करने वाले किसी अन्य मुद्दे के संबंध में शिकायतों या अपीलों से निपटता है।

52. सहकारी चुनाव प्राधिकरण (सीईए): बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (एमएससीएस) अधिनियम, 2002 में संशोधन के बाद, सभी एमएससीएस में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के आदेश के साथ, शासन और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए सहकारी चुनाव प्राधिकरण की स्थापना की गई है। 60 से अधिक एमएससीएस में चुनाव सफलतापूर्वक आयोजित किए गए हैं।

53. जीईएम पोर्टल पर सहकारी समितियों को 'खरीदार' के रूप में शामिल करना: सरकार ने सहकारी समितियों को जीईएम पर 'खरीदार' के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति दे दी है, जिससे वे लगभग 67 लाख विक्रेताओं से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद कर सकेंगे, जिससे किफायती खरीद और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। अब तक 574 सहकारी समितियां जीईएम पर खरीदार के रूप में शामिल हो चुकी हैं। अब तक 273.62 करोड़ रुपये की राशि के साथ 2,406 लेनदेन किए गए हैं।
54. अपनी सीमा और पहुंच बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) का विस्तार: एनसीडीसी ने विभिन्न क्षेत्रों में नई योजनाएं शुरू की हैं जैसे एसएचजी के लिए 'स्वयंशक्ति सहकार'; दीर्घकालिक कृषि ऋण के लिए 'दीर्घावधि कृषक सहकार' और डेयरी के लिए 'डेयरी सहकार' शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान एनसीडीसी द्वारा अब तक कुल 52,533 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की जा चुकी है।

55. गहरे समुद्र में चलने वाले ट्रॉलरों के लिए एनसीडीसी द्वारा वित्तीय सहायता: भारत सरकार के मत्स्य विभाग के साथ समन्वय कर एनसीडीसी गहरे समुद्र में चलने वाले ट्रॉलरों से संबंधित परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। एनसीडीसी ने महाराष्ट्र और गुजरात राज्य की मत्स्य पालन सहकारी समितियों के लिए कुल 44 गहरे समुद्र में चलने वाले ट्रॉलर की खरीद के लिए 25.95 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है।

56. सहारा समूह की सहकारी समितियों के निवेशकों को धन वापसी: सहारा समूह की सहकारी समितियों में रुपये जमा करने वालों को पारदर्शी तरीके से भुगतान करने के लिए एक पोर्टल शुरू किया गया है। उचित पहचान और उनकी जमा राशि और दावों के प्रमाण प्रस्तुत करने के बाद रकम की अदायगी शुरू हो चुकी है। अब तक 8.23 लाख आवेदकों को 1248.71 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

अनुलग्नक- II ()

कम्प्यूटरीकरण के माध्यम से पैक्स को सुदृढ़ बनाने की परियोजना के तहत पैक्स को मंजूरी और जारी की गई राशि का राज्यवार विवरण-

 

क्रम संख्या.

राज्य

स्वीकृत पैक्स की संख्या

भारत सरकार की ओर से जारी हिस्सा (करोड़ रुपये में)

1

आंध्र प्रदेश

2,037

18.67

2

अरुणाचल प्रदेश

14

0.27

3

असम

583

12.16

4

बिहार

4,495

32.95

5

छत्तीसगढ़

2,028

25.07

6

गोवा

58

0.45

7

हरियाणा

710

7.29

8

हिमाचल प्रदेश

1,789

16.88

9

झारखंड

1,500

18.54

10

कर्नाटक

5,491

55.64

11

मध्य प्रदेश

4,536

58.65

12

महाराष्ट्र

12,000

121.60

13

मणिपुर

232

2.55

14

मेघालय

112

1.23

15

मिजोरम

25

0.71

16

नगालैंड

231

2.82

17

पंजाब

3,482

25.52

18

राजस्थान

6,781

67.08

19

सिक्किम

107

2.08

20

तमिलनाडु

4,532

45.68

21

त्रिपुरा

268

5.59

22

उत्तर प्रदेश

5,686

53.58

23

पश्चिम बंगाल

4,167

30.54

24

उत्तराखंड

670

3.69

25

गुजरात

5,754

80.49

26

जम्मू और कश्मीर

537

8.62

27

पुदुचेरी

45

0.61

28

अंडमान और निकोबार

46

0.69

29

लद्दाख

10

0.12

30

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

4

0.12

31

चंडीगढ़

,

,

32

ओडिशा

,

,

33

तेलंगाना

,

,

34

केरल

,

,

कुल

67,930

699.89

 

अनुलग्नक- II(बी))

कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) के कम्प्यूटरीकरण परियोजना के तहत एआरडीबी द्वारा अनुमोदित और जारी की गई राशि का राज्यवार विवरण-

क्रम संख्या.

राज्य

स्वीकृत इकाइयों (एआरडीबी) की कुल संख्या

भारत सरकार द्वारा जारी कुल शेयर (वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25)

 

पुदुचेरी

2

389630

 

पंजाब

113

4675558

 

जम्मू और कश्मीर

51

2635731

 

त्रिपुरा

6

386765

 

उत्तर प्रदेश

342

12720267

 

कर्नाटक

207

8027519

 

तमिलनाडु

216

8192106

8

हरियाणा

90

0

 

हिमाचल प्रदेश

88

5610032

 

गुजरात

195

0

 

राजस्थान

 

0

 

पश्चिम बंगाल

 

0

 

केरल

 

0

 

कुल

1310

42637608

अनुलग्नक-II  (सी)

भाग : निगम प्रायोजित योजना

सहायता प्राप्त गतिविधियां :

एनसीडीसी सहकारी समितियों को उनके विकास के लिए ऋण (सावधि ऋण और निवेश ऋण दोनों) और सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करता है। ऋण घटक एनसीडीसी के स्वयं के फंड से प्रदान किया जाता है, जबकि पात्र सब्सिडी अन्य केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के समन्वय के बाद प्रदान की जाती है। एनसीडीसी द्वारा सहायता प्राप्त गतिविधियों की सूची इस प्रकार है:-

. विपणन;

बी. प्रसंस्करण;

सी. भंडारण;

डी. कोल्ड चेन;

. औद्योगिक;

एफ. सहकारी समितियों के माध्यम से आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं का वितरण;

जी. क्रेडिट एवं सेवा सहकारी समितियां/अधिसूचित सेवाएं;

एच. सहकारी बैंकिंग इकाई;

आई. कृषि सेवाएं;

जे. जिला योजना परियोजनाएं;

के. कमज़ोर वर्ग की सहकारी समितियां;

एक्स. सहकारी समितियों के कम्प्यूटरीकरण के लिए सहायता;

एएलएल. प्रचारात्मक एवं विकासात्मक कार्यक्रम।

एनसीडीसी के केंद्रित उत्पाद

. युवा सहकार - सहकारी उद्यम सहायता और नवाचार योजना: इस योजना का उद्देश्य नवगठित सहकारी समितियों को नए और/या नवीन विचारों के साथ प्रोत्साहित करना है।

ए- युवा सहकार - सहकारी उद्यम सहायता और नवाचार योजना: इस योजना का उद्देश्य नई और/या नवीन विचारों वाली नवगठित सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करना है।

बी- आयुष्मान सहकार: इस योजना में अस्पतालों, स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग शिक्षा, पैरामेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा और आयुष जैसी समग्र स्वास्थ्य प्रणालियों को कवर करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण है।

सी- नंदिनी सहकार: इस योजना का उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना और महिला सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं की उद्यमशीलता गतिशीलता का समर्थन करना है। यह महिलाओं के उद्यम, व्यवसाय योजना निर्माण, क्षमता विकास, ऋण और सब्सिडी, और/या अन्य योजनाओं की ब्याज छूट के महत्वपूर्ण इनपुट को एकत्रित करेगी।

डी- डेयरी सहकार: यह ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक, शासन) से जुड़ी गतिविधियों में उच्च परिणाम प्राप्त करने के लिए सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता का सहकारी डेयरी व्यवसाय केंद्रित ढांचा है। इसमें नई परियोजनाओं के लिए सहकारी समितियों द्वारा बुनियादी ढांचे का निर्माण और मौजूदा परियोजनाओं का आधुनिकीकरण और/या विस्तार शामिल है।

ई- डिजिटल सहकार: डिजिटल इंडिया के सिद्धांतों के अनुरूप, एनसीडीसी ने एनसीडीसी द्वारा सहायता और क्रेडिट लिंकेज के लिए डिजिटल रूप से सशक्त सहकारी समितियों के लिए केंद्रित वित्तीय सहायता ढांचे की कल्पना की है, जो भारत सरकार / राज्य / केंद्रशासित प्रदेश / ​​डिजिटल इंडिया में सक्रिय रूप से भाग ले रही सहकारी समितियों के उद्देश्य वाली एजेंसियों से अनुदान, सब्सिडी, प्रोत्साहन आदि के साथ मेल खाता है।

एफ- स्वयं शक्ति सहकार योजना: - महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ऋण/अग्रिम प्रदान करने के लिए कृषि ऋण सहकारी समितियों को एनसीडीसी की वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना।

जी- दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना: एनसीडीसी के दायरे में आने वाली गतिविधियों/वस्तुओं/सेवाओं के लिए कृषि ऋण सहकारी समितियों को दीर्घकालिक ऋण/अग्रिम देने के लिए एनसीडीसी की दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना।

भाग बी: एनसीडीसी द्वारा कार्यान्वित की जा रही एमओसी और अन्य मंत्रालयों/विभागों की योजनाएं

ए- सहकारी चीनी मिलों को मजबूत करने के लिए एनसीडीसी को सहायता अनुदान-सहकारिता मंत्रालय।

बी-कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई) भंडारण और भंडारण अवसंरचना के अलावा अन्य के लिए कृषि विपणन पर केंद्रीय क्षेत्र एकीकृत योजना (सीएसआईएसएएम) की उप-योजना - कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय।

सी- बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन (एम. आई. डी. एच.)-फसल कटाई के बाद एकीकृत प्रबंधन-कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय।

डी-कृषि अवसंरचना निधि योजना के तहत वित्तपोषण सुविधा के माध्यम से ब्याज छूट और ऋण गारंटी - कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय।

ई- राष्ट्रीय कृषि विस्तार और प्रौद्योगिकी मिशन (एनएमएईटी) के बीज और रोपण सामग्री (एसएमएसपी) के उप-मिशन के तहत बीज उत्पादन घटक को बढ़ावा देने के लिए सहायता।

एफ- पीएम मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) - मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय।

जी- पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (पीएमएफएमई) औपचारिकीकरण - खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय।

एच- 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन और संवर्धन की योजना - कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय।

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई)-खाद्य प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन योजना-खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय।

प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (पीएमकेएसवाई) - एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना योजना - खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय।

जे-राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) - जनजातीय कार्य मंत्रालय।

के- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) और राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) - पशुपालन और डेयरी विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय।

एल- पुनः संरेखित पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ), मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय।

अनुलग्नक-III

2019-20 से 2024-25 तक गतिविधि अनुसार खर्च  (10.12.2024 तक)

करोड़ रुपये में

क्र.सं.

गतिविधि

2019-20

2020-21

2021-22

2022-23

2023-24

2024-25
(10.12.2024 तक)

1

विपणन

15235.42

19576.38

26705.60

27984.74

52916.88

56336.79

 

इनपुट

462.24

29.41

74.05

46.96

2.75

 

2

प्रसंस्करण

 

 

 

 

 

 

2(ए)

चीनी मिल

1821.14

1542.44

1316.71

694.25

2176.31

2493.56

2(बी)

कपड़ा

129.32

96.40

24.94

104.25

44.35

107.41

2(सी)

अन्य प्रसंस्करण इकाइयां

 

 

 

 

 

 

 

i

खाद्यान्न

1.06

1.07

 

0.85

1.44

1.15

 

ii

रोपण फसलें

7.56

2.21

2.14

-

1.31

0.38

 

iii

फल सब्जी

1.03

0.14

0.05

-

0.12

0.16

 

iv

तिलहन

3.25

1.65

 

0.68

0.17

0.54

 

v

छोटे पैमाने के उद्योग

 

 

 

0

0.00

0.00

 

 

उप योग 2(सी)

12.89

5.07

2.19

1.53

3.04

2.23

 

 

कुल (2)

1,963.36

1,643.91

1,343.84

800.02

2223.70

2603.20

3

भंडारण

17.25

7.29

7.72

4.84

8.08

32.02

4

कोल्ड चेन

7.36

 

 

-

11.06

10.20

5

कमजोर वर्ग के लिए कार्यक्रम

 

 

 

 

 

 

 

i

मत्स्य सहकारी

163.63

119.18

168.76

298.91

41.33

22.42

 

ii

डेयरी/पशुधन

415.33

168.50

569.16

264.70

301.45

26.52

 

iii

मुर्गीपालन

4.61

 

 

-

0.00

0.00

 

iv

आदिवासी, एस/सी सहकारी

3.15

 

 

-

1.69

0.56

 

v

हथकरघा सहकारी

2.39

0.90

102.46

28.57

0.23

0.52

 

vi

पावरलूम

 

 

 

 

0.00

0.00

 

vii

महिला सहकारी

-

-

-

-

0.00

0.00

 

vii

कॉयर

80.00

 

30.00

-

0.00

0.00

 

viii

जूट

-

-

-

8.76

0.05

0.06

 

 

कुल (5)

669.11

288.57

870.38

600.94

344.75

50.08

6

सहकारी समितियों का कम्प्यूटरीकरण

36.52

30.87

25.06

45.02

0.42

0.00

7

सहकारी समितियां

3.39

0.89

2.69

1.40

4.13

0.00

8

आईसीडीपी

175.14

152.61

283.06

177.87

23.26

0.07

9

सी,आईसी एवं एससी

 

 

 

 

 

 

 

i

औद्योगिक सहकारी

 

 

 

-

0.00

0.00

 

ii

क्रेडिट एवं सेवा

9,129.28

2,996.23

4,894.20

11,322.30

5000.77

6256.93

 

कुल (9)

9,129.28

2,996.23

4,894.20

11,322.30

5000.77

6256.93

10

युवा सहकार

 

0.27

 

0.10

0.84

0.04

11

पी एंड डी

4.38

4.48

6.45

6.15

6.75

0.00

12

एफपीओ

 

2.32

8.04

38.25

48.33

38.08

13

एफएफपीओ

 

 

 

2.81

26.73

18.76

 

कुल योग (1 से 14)

27,703.43

24,733.24

34,221.08

41,031.40

60,618.47

65,346.17

 

अनुलग्नक-IV

2019-20 से 2024-25 तक राज्य-वार खर्च  (10.12.2024 तक)

करोड़ रुपये में

क्र.सं.

राज्य का नाम

2019-20

2020-21

2021-22

2022-23

2023-24

2024-25 (10.12.2024 तक)

1

अंडमान और निकोबार

10.28

-

 

0

1.69

0.56

2

आंध्र प्रदेश

405.62

603.98

2,831.59

9734.7

13,280.13

13,332.55

3

अरुणाचल प्रदेश

7.56

1.44

0.25

0.38

-

0.07

4

असम

14.34

5.59

3.57

17.48

0.89

1.71

5

बिहार

454.40

1,633.60

2,857.90

4053.75

815.83

5.49

6

चंडीगढ़

 

 

0.03

0.03

-

-

7

छत्तीसगढ़

5,500.35

12,000.07

12,400.87

8502.24

18,991.35

12,130.81

8

दमन और दीव

 

 

 

0

0.11

-

9

गोवा

0.11

0.19

 

0

-

0.03

10

गुजरात

118.34

52.25

37.40

370.8

586.99

259.75

11

हरियाणा

6,608.58

6,645.11

12,827.75

6655.24

9,887.36

12,380.50

12

हिमाचल प्रदेश

59.69

36.90

14.74

12.91

1.85

3.38

13

जम्मू एवं कश्मीर

-

-

0.13

0.58

0.71

0.75

14

झारखंड

8.25

0.92

1.79

4.63

2.54

27.77

15

कर्नाटक

151.67

170.69

164.49

112.54

261.35

430.98

16

केरल

363.89

303.54

371.85

704.74

275.89

582.34

17

लक्षद्वीप

 

 

 

 

 

0.02

18

मध्य प्रदेश

1,081.70

208.36

477.10

284.4

322.86

153.42

19

महाराष्ट्र

1,015.07

1,145.59

688.07

751.16

2,101.42

2,482.71

20

मणिपुर

4.79

-

0.04

30.38

6.60

0.39

21

मेघालय

-

57.80

0.04

0.14

0.22

0.12

22

मिजोरम

-

2.16

1.06

4.23

3.24

1.16

23

नगालैंड

13.37

6.07

0.17

1.2

0.67

0.50

24

ओडिशा

3.75

0.80

4.06

1.61

3.24

3.11

25

पंजाब

135.28

22.77

0.13

0.42

1,650.44

2,000.22

26

पुदुचेरी

 

 

 

0.06

-

-

27

राजस्थान

7,256.74

157.80

7.79

4.91

66.09

66.65

28

सिक्किम

 

 

-

0.14

0.22

0.05

29

तमिलनाडु

21.24

21.58

50.75

30.49

4.28

17.98

30

तेलंगाना

3,568.83

739.88

1,092.20

9304.97

12,174.11

20,982.02

31

त्रिपुरा

3.05

3.20

3.00

12.35

1.55

0.86

32

उत्तर प्रदेश

673.10

827.95

252.33

350.24

13.04

207.15

33

उत्तराखंड

12.34

17.22

80.36

10.5

149.13

3.88

34

पश्चिम बंगाल

128.35

59.13

44.16

63.36

4.96

2.69

35

दिल्ली + अन्य

82.74

8.61

7.46

10.82

9.71

266.55

 

कुल

27,703.43

24,733.24

34,221.08

41,031.40

60,618.47

65,346.17

सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बातें कहीं।

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एमजी/केसी/आरकेजे


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