सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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पूर्वोत्तर राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं

प्रविष्टि तिथि: 27 NOV 2024 5:00PM by PIB Delhi

अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) परियोजनाओं (निर्माणाधीन, 2024-25 के दौरान पूर्ण, स्वीकृत लेकिन अभी शुरू होना बाकी) का राज्यवार विवरण निम्नानुसार है:

 

क्रम.

संखंया

राज्य का नाम

निर्माणाधीन परियोजनाओं का विवरण

वर्ष 2024-25 के दौरान पूरी की गई परियोजनाओं का विवरण

स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण

जो अभी तक शुरू नहीं हुई

संख्या

लंबाई

(किमी)

लागत (रु. में)

करोड़)

संख्या

लंबाई

(किमी)

लागत (रु. में)

करोड़)

संख्या

लंबाई

(किमी)

लागत (रु. में)

करोड़)

1

अरूणाचल

प्रदेश

33

604

7828

3

53

471

35

1238

27344

2

नागालैंड

34

713

9502

1

23

365

0

0

0

3

मणिपुर

35

753

10355

3

26

188

5

115

1717

4

त्रिपुरा

16

302

7098

1

9

5

1

36

727

 

कुल

118

2372

34783

8

111

1029

41

1389

29788

निर्माणाधीन कार्यों, पूर्ण हो चुके कार्यों और स्वीकृत लेकिन अभी तक शुरू नहीं हुई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के व्यय को पूरा करने के लिए परियोजना-वार नहीं बल्कि राज्यवार धनराशि आवंटित की जाती है। 2024-25 के दौरान अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव कार्यों के लिए आवंटित धनराशि इस प्रकार है:

क्रम.

संख्या

राज्य

आबंटन (करोड़ रुपये में)

1

अरुणाचल प्रदेश

2,287

2

नगालैंड

734

3

मणिपुर

1,097

4

त्रिपुरा

406

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का पूरा होना ऋण मुक्त भूमि की उपलब्धता, वन विभाग की मंजूरी, पर्यावरण विभाग की मंजूरी, उपयोगिता स्थानांतरण, कार्य के अनुकूल मौसम, ठेकेदार की वित्तीय स्थिति आदि पर निर्भर है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा राज्यों में सभी निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को वर्ष 2027 तक पूरा किया जाना है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने तथा विलम्ब को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

    1. भूमि अधिग्रहण को सुव्यवस्थित करना
    2. विवाद समाधान तंत्र में सुधार करना
    3. भूमि अधिग्रहण, मंजूरी आदि के संदर्भ में पर्याप्त तैयारी के बाद परियोजनाएं प्रदान करना।
    4. संरेखण को अंतिम रूप दिए जाने के बाद यथाशीघ्र सही ढंग से तैयार उपयोगिता अनुमान प्राप्त करना तथा उसे मूल्यांकन प्रस्ताव का भाग बनाया जाना।
    5. अन्य मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ समन्वय
    6. विभिन्न स्तरों पर नियमित समीक्षा
    7. कार्यक्षेत्र में परिवर्तन और समय विस्तार के प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी देना
    8. कार्यों की मंजूरी से पहले नेटवर्क नियोजन समूह द्वारा मूल्यांकन कराया जाना, ताकि अन्य विभाग/मंत्रालय परियोजना से संबंधित मंजूरी के संबंध में अपनी समस्याएं पहले से ही बता सकें और उनका समाधान निकाला जा सके।
    9. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण भूभागों में सुरक्षा कार्यों के लिए उचित प्रावधान रखे गए हैं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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एमजी/केसी/जेके/एसके


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