रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

कृषि प्रयोजन के लिए उत्पादन एवं अनुमानित मांग के बीच के अंतर को कम करने के लिए उर्वरक विभाग यूरिया का आयात करता है


उर्वरक उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं

प्रविष्टि तिथि: 06 AUG 2024 4:04PM by PIB Delhi

भारत सरकार उर्वरक विभाग के माध्यम से कृषि उद्देश्य को लेकर उत्पादन और अनुमानित मांग के बीच के अंतर को कम करने के लिए सरकारी खाते पर यूरिया का आयात करती है। 2023-24 के दौरान यूरिया का आयात। अमेरिकी डॉलर (अरब) में इसका मूल्य इस प्रकार है :

 

2023-24 में आयातित यूरिया की मात्रा (लाख मीट्रिक टन में)।

यूरिया का मूल्य अमेरिकी डॉलर (अरब) में

2023-24 में चीन से आयातित यूरिया की मात्रा (लाख मीट्रिक टन में)।

चीन से आयातित यूरिया का मूल्य अमेरिकी (अरब) डॉलर में

70.42

2.6080

18.65

0.7320



 

 

पीएंडके उर्वरकों का जहां तक सवाल है, उर्वरकों के ये ग्रेड पोषण आधारित सब्सिडी योजना (एनबीएस) के तहत ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के तहत आते हैं। इन्हें कंपनियों द्वारा अपनी व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य शर्तों पर आयात किया जाता है। आयातित पीएंडके उर्वरकों का मूल्य विभाग में नहीं रखा जाता है। हालांकि वर्ष 2023-24 के दौरान आयातित पीएंडके उर्वरकों की मात्रा नीचे दी गई तालिका में बताई गई है:

 

2023-24 में आयातित पीएंडके

उर्वरकों की मात्रा (लाख मीट्रिक टन में)।

2023-24 में चीन से आयातित पीएंडके

उर्वरकों की मात्रा (लाख मीट्रिक टन में)।

106.53

22.58


देश में यूरिया में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार ने 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एलएमटीपीए) क्षमता के नए अमोनिया-यूरिया संयंत्र स्थापित करने के लिए नामित सार्वजनिक उपक्रमों की संयुक्त उद्यम कंपनी (जेवीसी) के माध्यम से भारतीय उर्वरक निगम लिमिटेड (एफसीआईएल) की रामागुंडम (तेलंगाना) गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) सिंदरी (झारखंड) और तालचेर (ओडिशा) इकाइयों और हिंदुस्तान उर्वरक निगम लिमिटेड (एचएफसीएल) की बरौनी (बिहार) इकाइयों का पुनरुद्धार अनिवार्य कर दिया है। रामागुंडम और गोरखपुर इकाइयां क्रमशः 22.03.2021 और 07.12.2021 को चालू की गईं। इसके साथ ही बरौनी और सिंदरी इकाइयों ने क्रमशः 18.10.2022 और 05.11.2022 को यूरिया उत्पादन शुरू किया। इन इकाइयों ने देश में प्रति वर्ष 50.8 एलएमटी स्वदेशी यूरिया उत्पादन की क्षमता जोड़ी है।

सरकार ने फॉस्फेटिक और पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों के लिए 1.4.2010 से पोषण आधारित सब्सिडी नीति लागू की है। नीति के तहत सब्सिडी की एक निश्चित राशि वार्षिक/द्विवार्षिक आधार पर तय की जाती है, जो अधिसूचित पीएंडके उर्वरकों पर उनकी पोषक सामग्री के आधार पर प्रदान की जाती है। इस नीति के तहत उर्वरक कंपनियों द्वारा बाजार के हिसाब से उचित स्तर पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय की जाती है। इसकी निगरानी सरकार द्वारा की जाती है। एनबीएस के तहत सब्सिडी दरें तय करते समय सरकार अधिसूचित पीएंडके उर्वरकों की खरीद के लिए किसानों की सामर्थ्य सहित विभिन्न फैक्टर्स को ध्यान में रखती है।

देश को उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए गए हैं:

 

  1. उर्वरक कंपनियों को एनबीएस के तहत अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और नई पीएंडके कंपनियों और उनके उर्वरक उत्पादों को शामिल करने की अनुमति दी गई है।
  2. शीरा से पोटाश (पीडीएम) जो कि 100 प्रतिशत घरेलू विनिर्मित उर्वरक है को पोषण आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत अधिसूचित किया गया है।
  3. एसएसपी जो कि स्वदेश निर्मित उर्वरक है, इस पर माल ढुलाई सब्सिडी लागू कर दी गई है। इससे मिट्टी को फॉस्फेटिक या 'पी' पोषक तत्व प्रदान करने के लिए एसएसपी के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।


उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ)-1985 में उर्वरक-वार विस्तृत विनिर्देश निर्धारित किए गए हैं। कोई भी उर्वरक जो उक्त विनिर्देशों को पूरा नहीं करता है, वह कृषि उद्देश्यों के लिए देश में नहीं बेचा जा सकता है। एफसीओ की धारा 19 उन उर्वरकों की बिक्री या निर्माण पर सख्ती से रोक लगाती है जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करती हैं।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत घटिया/मिलावटी उर्वरकों की बिक्री दंडनीय है।

इसके अलावा राज्यों में मिलावटी उर्वरकों की बिक्री को विनियमित करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर जागरूकता और सतर्कता के लिए जिला गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र की स्थापना की गई है। इसके साथ ही प्रेस नोट, टीवी वार्ता, किसान गोष्ठी, कृषि मेला, कृषि महोत्सव आदि के माध्यम से किसानों के बीच नियमित आधार पर जागरूकता फैलाई जाती है।

एनबीएस योजना के तहत सभी उर्वरक कंपनियों को जो एनबीएस योजना के तहत पंजीकृत हैं, प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) और प्रचलित सब्सिडी दरों के आधार पर समान रूप से सब्सिडी प्रदान की जाती है। इसके अलावा गुणवत्ता की निगरानी राज्य सरकारों का विषय है।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

***

एमजी/एआर/आरकेजे


(रिलीज़ आईडी: 2045054) आगंतुक पटल : 393
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu