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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् ने संयुक्त रूप से आयुष में अनुसंधान और शिक्षा पर एक इंटरैक्टिव बैठक आयोजित की

प्रविष्टि तिथि: 10 MAY 2023 5:00PM by PIB Delhi

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) और केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) ने संयुक्त रूप से आज नई दिल्ली में आयुष में अनुसंधान एवं शिक्षा पर एक इंटरैक्टिव बैठक का आयोजन किया जिसमे अनुसंधान एवं विकास, शिक्षा और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इंटरएक्टिव मीट का उद्देश्य शैक्षणिक और अनुसंधान में अध्यक्षों की विशेषज्ञता और अनुभव को लाभ उठाने के लिए विचार-मंथन करना और लक्ष्य निर्धारित करना था। प्रतिभागियों ने स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर आयुष कॉलेजों में अनुसंधान शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा की। बैठक आयुष क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास, शिक्षा और क्षमता निर्माण पर केंद्रित थी। सभी निदेशकों ने अपनी सफलता की कहानियां प्रस्तुत की। इस अवसर पर आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, "आज हम सभी इस बात पर मंथन करने के लिए एकत्र हुए हैं कि हम विशिष्ट पीठ के विशिष्ठ ज्ञान का सामूहिक रूप से उपयोग कैसे कर सकते हैं और भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं। कोरोना महामारी आयुष के लिए अपने विज्ञान को विकसित करने का अवसर थी जिसे आयुष ने आयुष 64 आदि विकसित करके किया।

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आयुष मंत्रालय के विशेष सचिव श्री प्रमोद कुमार पाठक ने कहा, “इस बैठक से शोधकर्ताओं को आयुष विशिष्ट पीठों से अंतर्दृष्टि प्राप्त करने और अपने क्षेत्र में उनके अनुभव को समझने में मदद मिलेगी। इस तरह की पहल समय की मांग थी। आयुष मंत्रालय आयुष के पेटेंट और शोधों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है।“

एआईआईए की निदेशक तनुजा नेसारी ने सभी का स्वागत करते हुए कहा, “यह एक ऐतिहासिक आंदोलन है जब प्रशासक, नीति निर्माता, शिक्षा विशेषज्ञ, शोधकर्ता और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एक मंच पर आए हैं। यह मंच हमें अनुशासनात्मक मॉडल और एकीकरण बनाने वाले प्रमाण-आधारित आयुर्वेद को बनाने का अवसर देता है।

सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य ने कहा, “जब हम आयुष की इलाज की चीन की वैकल्पिक पद्धति से तुलना करते हैं, तो इसमें उच्च स्तर तक जाने की क्षमता अधिक है। कोविड के समय में आयुष प्रणाली ने चीनी चिकित्सा प्रणाली की तुलना में अधिक नैदानिक ​​अध्ययन दर्ज किए हैं। यह उचित समय है कि अनुसंधान को प्रमुखता दी जाए।"

बैठक में सभी राष्ट्रीय आयुष संस्थानों, अनुसंधान, परिषदों के प्रमुख और एमओए के सलाहकार, एनसीएसआईएम के अध्यक्ष वैद्य जयंत देवपुजारी और एनसीएच के डॉ. अनिल खुराना सहित पांच नव-प्रतिष्ठित वैज्ञानिक आयुष विशिष्ट वैज्ञानिक अध्यक्ष डॉ. नंदिनी के. कुमार (अंतःविषय नैदानिक ​​अनुसंधान) । अरविंद चोपड़ा, (सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारी विज्ञान), डॉ. शर्मिला शेखर मांडे (आयुर्वेद जीव विज्ञान और बुनियादी विज्ञान), डॉ. मधु दीक्षित (फार्मास्युटिकल ड्रग डेवलपमेंट) और डॉ. बी.एन. गंगाधर (चेतना और संज्ञानात्मक विज्ञान)शामिल थे।। यह बैठक आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा, विशेष सचिव पी.के. पाठक और प्रोफेसर (डॉ.) तनुजा नेसारी, निदेशक, एआईआईए, प्रो. (वैद्य) रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक (सीसीआरएएस) एमडीएनआईवाई के निदेशक डॉ. ईश्वर वी. बसवराड्डी और प्रो. भूषण पटवर्धन, राष्ट्रीय आयुष पीठ, राष्ट्रीय संस्थान और अनुसंधान परिषदों की मौजूदगी में हुई।

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