कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

एमएसडीई ने पारंपरिक नामदा क्राफ्ट को पुनर्जीवित करने, उत्प्रेरित करने और कश्मीर के कारीगरों और बुनकरो के कौशल को बढ़ावा देने के लिए पायलट परियोजनाओं की शुरूआत की

इन परियोजनाओं की घोषणा केवल दो महीने पहले राज्यमंत्री  श्री राजीव चंद्रशेखर की जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान की गई थी

सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ विकास को सुनिश्चित करने के लिए सभी वादों को पूरा कर रही है : श्री राजीव चंद्रशेखर

कालीन निर्यात को 600 करोड़ से बढ़ाकर 6,000 करोड़ करने और रोजगार के अवसर उत्पन्न करने पर बल दिया जा रहा है

पीएमकेवीवाई आरपीएल परियोजना का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर के 10,900 कारीगरों और बुनकरों के बीच कौशल विकास करना है

Posted On: 27 NOV 2021 5:42PM by PIB Delhi

श्री राजीव चंद्रशेखर, कौशल विकास एवं उद्यमिता और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री ने आज दो परियोजनाओं का शुभारंभ किया-(i) प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 3.0 के अंतर्गत एक विशेष पायलट परियोजना के रूप में कश्मीर के नामदा क्राफ्ट का पुनरुद्धार और (ii) पीएमकेवीवाई के घटक, पूर्व शिक्षा मान्यता (आरपीएल) के अंतर्गत कश्मीर के कारीगरों और बुनकरों का कौशल विकास।इन परियोजनाओं का उद्देश्य कश्मीर के पारंपरिक नामदा शिल्प को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है और स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को आरपीएल मूल्यांकन और प्रमाणन के माध्यम से उनकी उत्पादकता को बढ़ाने के लिए समर्थन प्रदान किया जाना है।नामदा परियोजना से कश्मीर के 6 जिलों (श्रीनगर, बारामुला, गांदरबल, बांदीपोरा, बडगाम और अनंतनाग) के 30 नामदा क्लस्टरों के 2,250 लोगों को लाभ प्राप्त होगा और आरपीएल पहल का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर के 10,900 कारीगरों और बुनकरों का कौशल विकास करना होगा।

नामदा शिल्प सामान्य बुनाई प्रक्रिया के बदले भेड़ के ऊन से बना हुआ एक गलीचा है। कच्चे माल की उपलब्धता में कमी, कुशल जनशक्ति और विपणन तकनीकों के अभाव के कारण 1998 और 2008 के बीच इस शिल्प के निर्यात में लगभग 100 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।इसलिए पीएमकेवीवाई के अंतर्गत इस विशेष परियोजना के माध्यम से कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने इस लुप्तप्राय शिल्प को संरक्षित करने के लिए अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया है। इस परियोजना को प्रशिक्षण के 3 चक्रों में 25 बैचों में लागू किया जाएगा। प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग साढ़े तीन महीने का होगा, जिसके परिणामस्वरूप यह चक्र लगभग 14-16 महीनों में पूरा हो जाएगा।

नामदा परियोजना नामदा शिल्प उत्पादन में शामिल लाभार्थियों के साथ एक उद्योग-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा जो कश्मीर में नामदा शिल्प से जुड़े हुए समृद्ध विरासत के संरक्षण और पुनरुद्धार में योगदान देगा। इससे कश्मीर में नामदा शिल्प क्लस्टर के मौजूदा कारीगरों की पहुंच में भी सुधार लाएगा और उनकी रोजगारपरकता की संभावनाओं में सुधार करेगा।

इस पहल की शुरुआत करते हुए, श्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि भारत के पास एक समृद्ध विरासत है और यह कई पारंपरिक कलाओं का घर है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक और विरासत कौशल को पुनर्जीवित करने और बढ़ावा देने और उन्हें आर्थिक रूप से चिरस्थायी बनाने के लिए उन्हें समर्थन देने के लिए सरकार का दृष्टिकाण है। उन्होंने आग्रह किया कि हमें उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए जिससे दुनिया हमारी जीवंत संस्कृति के बारे में जागरूक हो सके।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने विशिष्ट कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए समर्थन मांगा था। इसके माध्यम से कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा स्थानीय युवाओं की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने और उन्हें विकास के रास्ते पर लेकर जाने के लिए इस कार्यक्रम के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्थानीय उद्योग के हमारे साथ आने से हम कालीन निर्यात को 600 करोड़ से बढ़ाकर 6,000 करोड़ कर देंगे और 8 लाख लोगों के लिए रोजगार का अवसर उत्पन्न कर सकेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि इस कार्यक्रम के द्वारा स्थानीय युवाओं को स्किलिंग, अपस्किलिंग और रीस्किलिंग पर भी केंद्रित किया जाएगा जिससे उनके करियर के लिए प्रगति की सीढ़ी बनाई जा सके और उन्हें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का मजबूत स्तंभ बनाया जा सके।उन्होंने आगे कहा कि सरकार पारंपरिक कला को बढ़ावा देकर निर्यात को बढ़ावा देने और कारीगरों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए निवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास की दिशा में एक लेजर फोकस के साथ काम कर रही है और सभी वादों को पूरा कर रही है। मंत्री ने एमएसडीई, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम और क्षेत्रीय कौशल परिषदों के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना किया, क्योंकि इस कस्टम डिजाइन कार्यक्रम को केवल 2 महीने के रिकॉर्ड समय के अंदर ही संकल्पित, संसाधित और स्वीकृत किया गया।

राजेश अग्रवाल,सचिव, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत इस विशेष परियोजना पर कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय नए जोश के साथ काम कर रहा है।मंत्रालय ने नामदा को संरक्षित करने और इस लुप्त प्राय शिल्प को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने और स्थानीय कारीगरों को सहायता प्रदान करने हेतु रोजगार उत्पन्न करने के लिए एक अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय जम्मू-कश्मीर के बुनकरों और कारीगरों के समूहों का विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जनजातीय समुदाय के उत्थान और विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक प्रयास है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इसे पूरी तत्परता के साथ लागू किया जाए।

इसके अलावा, पूर्व शिक्षा मान्यता के अंतर्गत अपस्किलिंग परियोजना से हस्तशिल्प और कालीन क्षेत्र के असंगठित कार्यबल की दक्षताओं में सुधार होने की उम्मीद है।कारीगरों और बुनकरों को मानकीकृत एनएसक्यूएफ (राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क) से जोड़ा जाएगा। यह मौजूदा कारीगरों और बुनकरों की स्थायी आजीविका तक पहुंच में सुधार लाएगा और उनके बीच कौशल और तकनीकी ज्ञान को बढ़ावा देगा। इसके अतिरिक्त, पायलट परियोजना विपणन कौशल और तकनीकों में बढ़ोत्तरी करेगा जो कारीगरों और बुनकरों के पारंपरिक और स्थानीय शिल्प को बढ़ावा देगा।यह उन्हें बाजार की मौजूदा मांग के अनुसार डिजाइन बनाने में मदद करेगा। यह पहल भारत सरकार के प्रमाणीकरण के माध्यम से अपस्किलिंग ब्रिज मॉड्यूल के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों का मूल्यवर्धन करेगा। कौशल विकास पहल के लिए प्रशिक्षण वितरण भागीदार श्रीनगर का मीर हैंडीक्राफ्ट कालीन प्रशिक्षण और बाजार का केंद्र हैं और 10 प्रतिशत उच्च प्रदर्शन करने वालों के लिए विशेष मूल्यवर्धन है।

इस पूरे कार्यक्रम को विभिन्न चरणों में लागू किया जाएगा, जिसमें कारीगरों और बुनकरों का चयन, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण(टीओटी)  और ब्रिज मॉड्यूल के साथ आरपीएल के माध्यम से कारीगरों और बुनकरों का कौशल विकास शामिल है। पहला, कारीगरों और बुनकरों का चयन जम्मू और कश्मीर के पारंपरिक शिल्प समूहों से किया जाएगा। उनका चयन शिल्प और मौजूदा अनुभव और कौशल के आधार पर किया जाएगा। दूसरा, प्रशिक्षकों का चयन या तो एसएससी डाटाबेस से किया जाएगा या प्रस्तावित समूहों से मौजूदा कारीगरों और बुनकरों के लिए प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण(टीओटी) कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।यह टीओटी, नए बाजारों के महत्वपूर्ण विकास के साथ-साथ मानकीकरण तकनीकों, सॉफ्ट स्किल्स, फाइनेंशियल प्लानिंग और एंटरप्राइज बिल्डिंग के अन्य पहलुओं में केंद्रित कौशल को सुनिश्चित करेगा। अंत में, कारीगरों और बुनकरों को हस्तनिर्मित उत्पाद बनाने की अभिनव और उन्नत कलाओं में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद सभी कारीगर और बुनकर अपने-अपने समूहों में स्थापित सूक्ष्म इकाइयों के रूप में काम करेंगे। इसी दौरान लाभार्थियों को बाहरी मंत्रणा में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जिससे बाद के चरण में वे अपने आप ही बाजार संपर्कों का प्रबंधन करने में सक्षम हो सकें। प्रत्येक बैच 12 घंटे के ओरिएंटेशन और 60 घंटे ब्रिज मॉड्यूल के साथ 12 दिनों तक चलेगा।

इसके अलावा, ब्रिज मॉड्यूल के साथ ओरिएंटेशन प्रोग्राम के बाद, कारीगरों और बुनकरों को पूर्व शिक्षा (आरपीएल) टाइप-1 (ब्रिज मॉड्यूल प्रमाणन) की मान्यता के साथ प्रमाणित किया जाएगा। एमएसडीई के साथ मिलकर हैंडीक्राफ्टएंड कारपेट सेक्टर स्किल काउंसिल (एचसीएसएससी) समग्र परियोजना उनके प्रगति की दिन-प्रतिदिन निगरानी करेगा।

अनुच्छेद 370 और 35एकी समाप्ति ने कश्मीर को शेष भारत के साथ समान स्तर पर लेकर आया है, जो पिछली राजनीतिक व्यवस्थाओं के दौरान नजरअंदाज किए गए विभिन्न क्षेत्रों की सभी परियोजनाओं को नया जीवन प्रदान कर रहा है।माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब केंद्र शासित प्रदेश को विकास की राह पर लाने के लिए चौबीसों घंटे काम किया जा रहा है। भारत सरकार युवाओं की स्किलिंग, रीस्किलिंग और अपस्किलिंग के लिए दृढ़ता के साथ प्रतिबद्ध है और पहले से ही निजी क्षेत्र के साथ एक मजबूत संबंध स्थापित कर चुकी है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, बाहरी निवेशकों को किराए पर सब्सिडी प्रदान करने और जम्मू और श्रीनगर में दो विशाल आईटी पार्क बनाने जैसी कई पहलें की गई हैं। इस क्षेत्र में युवा स्टार्टअप के लिए कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ठोस और प्रौद्योगिकी आधारित प्रयास भी किए गए हैं। मोदी सरकार के मार्गदर्शन में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने भी घाटी में युवाओं को फिल्म निर्माण में प्रशिक्षित करने का फैसला किया है, जिससे उनके लिए नई भूमिका वाली नौकरी की संभावनाएं खुल रही हैं।

पिछले महीने श्री राजीव चंद्रशेखर ने नगालैंड और जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था। अपनी यात्रा के बाद उन्होंने इस क्षेत्र की विलुप्त होती जा रही पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए एक परियोजना आयोजित करने की आवश्यकता के बारे में कहा था क्योंकि हस्तशिल्प क्षेत्र वहां का प्रमुख रोजगार उत्पादक है। यह देखा गया कि विरासत और पारंपरिक कौशल समूहों को नागालैंड और जम्मू-कश्मीर में पारंपरिक शिल्प की मांग को पूरा करने के लिए गांवों से कुशल कारीगरों की आवश्यकता होती है। इस पहल का उद्देश्य उद्योग, बाजार संपर्क, सूक्ष्म उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है।

स्थानीय रोजगार का अवसर उत्पन्न करने और शिल्प समूहों को मजबूती प्रदान करने के लिए 4,000 से ज्यादा कारीगरों और बुनकरों को स्किल और अपकिल करने के लिए अगले महीने नगालैंड में इसी प्रकार की पायलट परियोजना शुरू की जाएगी।

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