श्रम और रोजगार मंत्रालय

विशेषज्ञ समूह ने मजदूरी दर सूचकांक (डब्ल्यूआरआई) के आधार में 1963-65=100 से 2016=100 के संशोधन पर रिपोर्ट जारी की

विशेषज्ञ समूह ने 2016=100 की नई श्रृंखला के आधार पर जुलाई 2016 से जुलाई 2020 तक के लिए मजदूरी दर सूचकांक (डब्ल्यूआरआई) भी जारी किया

Posted On: 24 NOV 2021 6:23PM by PIB Delhi

न्‍यूनतम मजदूरी एवं राष्ट्रीय आधार मजदूरी पर विशेषज्ञ समूह के अध्यक्ष प्रो. एस. पी. मुखर्जी, मजदूरी दर सूचकांक की तकनीकी सलाहकार समिति के चेयरमैन डॉ. जी. सी. मन्ना, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रधान सलाहकार श्री डी. पी. एस नेगी, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव सुश्री सिबानी स्वैन, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुश्री विभा भल्ला, डीजीएलबी श्री आई. एस. नेगी और विशेषज्ञ समूह के अन्य सदस्यों ने आधार वर्ष 2016=100 के साथ मजदूरी दर सूचकांक (डब्ल्यूआरआई) की नई श्रृंखला जारी की जिसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के एक संबद्ध कार्यालय श्रम ब्यूरो द्वारा संकलित और अनुरक्षित किया जा रहा है। आधार 2016=100 के साथ डब्ल्यूआरआई की नई श्रृंखला 1963-65=100 आधार के साथ पुरानी श्रृंखला को बदल देगी।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रधान सलाहकार श्री डी. पी. एस. नेगी ने श्रम ब्यूरो के प्रयासों की और उनकी दृढ़ता एवं अनुकरणीय भूमिका की सराहना की जिसके कारण अंततः डब्ल्यूआरआई की अद्यतन श्रृंखला जारी हो सकी है। इसके लिए किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने श्रम के सभी पहलुओं पर डेटा की आवश्यकता पर भी जोर दिया क्योंकि नीति निर्माण के दौरान इनपुट के रूप में वह काफी महत्वपूर्ण होगा और यह श्रम ब्यूरो जैसे संगठन के अस्तित्व को सही ठहराता है। आने वाले समय में डेटा के लगातार बढ़ते महत्व के साथ इस तथ्य को ध्‍यान में रखना कि भारत एक श्रम बहूल राष्ट्र है, श्रम एवं मूल्‍य संबंधी आंकड़ों के लिए श्रम ब्यूरो जैसा एक समर्पित संगठन होने से मानदंडों में मजबूती आएगी।

'मजदूरी दर सूचकांक की नई श्रृंखला (आधार 2016=100)' पर जारी यह रिपोर्ट आधार वर्ष 2016 के साथ डब्‍ल्‍यूआरआई की नई श्रृंखला से संबंधित अवधारणाओं, परिभाषाओं और कार्यप्रणाली को समझने लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, विद्वानों और डब्ल्यूआरआई के अन्य सभी हितधारकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ पुस्तक के रूप में काम करेगी।

भारत सरकार समय-समय पर प्रमुख आर्थिक संकेतकों के लिए आधार वर्ष में संशोधन करती है ताकि अर्थव्यवस्था में बदलाव को प्रतिबिंबित किया जा सके और श्रमिकों के वेतन पैटर्न को समझा जा सके।

इस प्रकार, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ), राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) आदि की सिफारिशों के अनुसार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत श्रम ब्यूरो द्वारा मजदूरी दर सूचकांक के लिए आधार वर्ष को 1963-65=100 से संशोधित कर 2016=100 कर दिया गया है। इससे इसके कवरेज बढ़ाने और सूचकांक के प्रतिनिधित्‍व को बेहतर करने में मदद मिलेगी।

मजदूरी दर सूचकांक की नई श्रृंखला 2016=100 अब पुरानी श्रृंखला (1963-65=100) की जगह लेगी जो लगभग छह दशक पुरानी है। नई श्रृंखला ने उद्योगों की संख्या, नमूने के आकार, चयनित उद्योगों के तहत व्यवसाय, उद्योगों के भारांश आदि के मामले में दायरा और कवरेज बढ़ा दिया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा डब्‍ल्‍यूआरआई पर सीएसओ के पूर्व डीजी डॉ. जी. सी. मन्‍ना की अध्यक्षता में गठित तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) ने नई डब्‍ल्‍यूआरआई श्रृंखला के लिए सभी तकनीकी जानकारी प्रदान की।

प्रो. एस. पी. मुखर्जी और न्यूनतम मजदूरी एवं राष्ट्रीय आधार मजदूरी पर गठित विशेषज्ञ समूह के अन्य सदस्यों का मानना था कि वेतन दर सूचकांक 2016=100 के आधार में किया गया यह संशोधन न्यूनतम मजदूरी एवं राष्ट्रीय आधार मजदूरी के साथ अन्‍य मानदंडों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जिन पर आने वाले समय में विशेषज्ञ समूह द्वारा विचार किया जाएगा।

मुख्‍य बातें:

आधार 2016=100 के साथ नई डब्‍ल्‍यूआरआई श्रृंखला हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को बिंदु-दर-बिंदु अर्ध-वार्षिक आधार पर वर्ष में दो बार संकलित की जाएगी। पुरानी श्रृंखला (1963-65=100) की तुलना में डब्‍ल्‍यूआरआई (2016=100) की नई श्रृंखला के तहत किए गए प्रमुख सुधार इस प्रकार हैं:

  • नई डब्‍ल्‍यूआरआई श्रृंखला में भार आरेख व्यावसायिक वेतन सर्वेक्षण (सातवें) दौर के परिणामों के आधार पर तैयार किया गया है।
  • नई डब्‍ल्‍यूआरआई बास्‍केट (2016=100) में कुल 37 उद्योगों को कवर किया गया है जबकि 1963-65=100 श्रृंखला में 21 उद्योगों को शामिल किया गया है।
  • नई श्रृंखला के तहत चयनित 37 उद्योगों में विनिर्माण क्षेत्र से 30 उद्योग, खनन क्षेत्र से 4 उद्योग और बागान क्षेत्र से 3 उद्योग को शामिल किया गया है जबकि पुरानी श्रृंखला में विनिर्माण क्षेत्र से 14 उद्योग, खनन क्षेत्र से 4 उद्योग और बागान क्षेत्र से 3 उद्योग शामिल किए गए थे।
  • नए डब्‍ल्‍यूआरआई बास्केट में मौजूदा मजदूरी डेटा को 37 चयनित उद्योगों के तहत 2,881 इकाइयों से एकत्र किया गया है, जबकि डब्‍ल्‍यूआरआई की पुरानी श्रृंखला में 21 उद्योगों के तहत 1,256 इकाइयों से डेटा संग्रह किया गया है।
  • डब्‍ल्‍यूआरआई (2016=100) की नई श्रृंखला में 37 चयनित उद्योगों के अंतर्गत लगभग 700 व्यवसायों को शामिल किया गया है।

भार पैटर्न

  • 1963-65=100 आधार के साथ डब्‍ल्‍यूआरआई की नई श्रृंखला में प्रयुक्त भार प्रत्येक चयनित उद्योग से संबंधित व्यवसायों में आधार वर्ष के अनुमानित रोजगार के आंकड़े थे।
  • नई डब्‍ल्‍यूआरआई श्रृंखला (आधार: 2016=100) के तहत डब्‍ल्‍यूआरआई के आंकड़े तैयार करने के लिए अपनाए गए भार प्रत्येक चयनित उद्योग में संबंधित व्यवसायों के लिए आधार वर्ष पर अनुमानित रोजगार के आंकड़े हैं। किसी उद्योग में व्यवसाय स्तर के सूचकांकों का भारित औसत से उद्योग स्तर पर डब्‍ल्‍यूआरआई मिलता है। भार प्रत्येक व्यवसाय में आधार वर्ष पर अनुमानित कुल रोजगार बिल होता है। इसी प्रकार, उद्योग/क्षेत्र स्तर के सूचकांकों का भारित औसत क्षेत्रीय/अखिल भारतीय सूचकांक प्रदान करता है। भार प्रत्येक उद्योग/क्षेत्र में आधार वर्ष पर अनुमानित कुल रोजगार बिल होता है।
  • पुरानी श्रृंखला 1963-65=100 और नई श्रृंखला 2016=100 के बीच भार, उद्योगों की संख्या और नमूना इकाइयों के लिहाज से क्षेत्रवार प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं:

 

क्षेत्र

उद्योगों की संख्या

भार

नमूना इकाइयां

1963-65

2016

1963-65

2016

1963-65

2016

विनिर्माण

14

30

48.78

82.57

923

2627

खनन

4

4

17.01

11.23

110

163

बागान

3

3

34.21

6.20

223

91

कुल

21

37

100.0

100.0

1256

2881

 

पुरानी श्रृंखला (1963-65=100) की तुलना में नई श्रृंखला के अंतर्गत क्षेत्र स्तरीय भारांक बदल गया है। समय के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र का भार काफी अधिक हो गया है जबकि बागान क्षेत्र और खनन क्षेत्र के भार में 1963-65=100 श्रृंखला के मुकाबले 2016=100 श्रृंखला में गिरावट आई है।

 

विनिर्माण क्षेत्र

  • डब्‍ल्‍यूआरआई बास्केट की नई श्रृंखला में 16 नए विनिर्माण उद्योग जोड़े गए हैं जिनमें सिंथेटिक टेक्सटाइल्‍स, टेक्सटाइल गारमेंट्स, प्रिंटिंग एंड पब्लिशिंग, फुटवियर, पेट्रोलियम, रसायन एवं गैसे, उर्वरक, दवा एवं औषधि, लौह एवं इस्‍पात, इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज, मोटर वाहन, मोटर साइकिल, चाय प्रसंस्‍करण, टायर्स एंड ट्यूब्स, दुग्‍ध उत्‍पाद और प्लास्टिक के सामान शामिल हैं।

खनन क्षेत्र

  • नई श्रृंखला में तेल खनन उद्योग को शामिल किया गया है ताकि खनन क्षेत्र को खनन के तीन अलग-अलग प्रकारों- कोयला, धातु एवं तेल के लिए कहीं अधिक प्रतिनिधि बनाया जा सके।

बागान क्षेत्र

  • तीन बागान उद्योग यानी चाय, कॉफी और रबड़ को नए डब्ल्यूआरआई बास्केट में व्‍यापक कवरेज दिया गया है।

डब्‍ल्‍यूआरआई सूचकांक

  • सभी 37 उद्योगों के लिए अखिल भारतीय वेतन दर 2020 (दूसरी छमाही) में 119.7 थी जो 2020 (पहली छमाही) के सूचकांक की तुलना में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
  • क्षेत्र के स्तर पर 2020 में उच्चतम मजदूरी दर सूचकांक (दूसरी छमाही) बागान क्षेत्र (126.5) में दर्ज किया गया। उसके बाद विनिर्माण क्षेत्र (119.6) और खनन क्षेत्र (116.7) का स्थान रहा।
  • कवर किए गए 37 उद्योगों में उच्चतम मजदूरी दर सूचकांक दवा एवं औषधि उद्योग (131.4) में दर्ज किया गया। उसके बाद चीनी (129.8), मोटर साइकिल (128.1), जूट वस्त्र (127.9) और चाय बागान (127.7) का स्थान रहा। दूसरी ओर, सबसे कम मजदूरी दर सूचकांक रबर बागान (106.7) उद्योग में दर्ज किया गया और उसके बाद पेपर (110.7), कास्टिंग्स एंड फोर्जिंग (111.3), वूलन टेक्सटाइल्स (111.9) और सिंथेटिक टेक्सटाइल्स (112.0) का स्थान रहा।

अंतर-क्षेत्र बदलाव

  • तीस विनिर्माण उद्योगों में 2020 के दौरान उच्चतम मजदूरी दर सूचकांक (दूसरी छमाही) दवा एवं औषधि उद्योग (131.4) में दर्ज किया गया। उसके बाद चीनी (129.8), मोटर साइकिल (128.1), जूट कपड़ा (127.9) और चाय प्रसंस्करण (127.6) उद्योग का स्‍थान रहा। इसके विपरीत, विनिर्माण क्षेत्र में सबसे कम सूचकांक कागज (110.7) उद्योग में दर्ज किया गया और उसके बाद कास्टिंग एवं फोर्जिंग (111.3), ऊनी वस्त्र (111.9), सिंथेटिक वस्त्र (112.0) और टेक्सटाइल गारमेंट्स (112.4) का स्थान रहा।
  • चार खनन उद्योगों में अधिकतम मजदूरी दर सूचकांक लौह अयस्क खान (122.9) में दर्ज किया गया। उसके बाद तेल खनन (117.4) और कोयला खनन (116.3) का स्थान रहा। इस क्षेत्र में न्यूनतम मजदूरी दर सूचकांक मैंगनीज खनन (114.5) में दर्ज किया गया।
  • बागान क्षेत्र में अधिकतम मजदूरी दर सूचकांक चाय बागान (127.7) में दर्ज किया गया जबकि न्यूनतम सूचकांक रबड़ बागान (106.7) में दर्ज किया गया।
  • सूचकांकों के संकलन के लिए कवर किए गए कुल 37 उद्योगों में से 12 विनिर्माण उद्योग, खनन क्षेत्र में 2 उद्योग और एक बागान क्षेत्र में सभी उद्योगों का के मजदूरी दर सूचकांक संयुक्त मजदूरी दर सूचकांक 119.7 के मुकाबले कम रहा।

औसत दैनिक शुद्ध मजदूरी दर

  • अखिल भारतीय औसत दैनिक शुद्ध मजदूरी दर 2020 (दूसरी छमाही) में 588.5 रुपये में जो 2020 (पहली छमाही) में 576.1 रुपये के मुकाबले 1.6 प्रतिशत अधिक है।
  • 2020 (दूसरी छमाही) के दौरान कवर किए गए तीन क्षेत्रों में उच्चतम औसत दैनिक शुद्ध मजदूरी दर खनन क्षेत्र (1,604.3 रुपये) में दर्ज की गई। उसके बाद विनिर्माण क्षेत्र (475.0 रुपये) का स्‍थान रहा और सबसे कम (212.3 रुपये) बागान क्षेत्र में दर्ज किया गया। .
  • विनिर्माण उद्योगों में सबसे अधिक औसत दैनिक शुद्ध मजदूरी दर टायर एवं ट्यूब (731.7 रुपये) दर्ज की गई। उसके बाद पेट्रोलियम (705.3 रुपये), जूट वस्त्र (698.5 रुपये), चीनी (694.9 रुपये) और दुग्ध उत्पाद (634.6 रुपये) का स्थान रहा। इस क्षेत्र में सबसे कम औसत दैनिक शुद्ध मजदूरी दर 196.2 रुपये मासिस उद्योग में दर्ज की गई।
  • खनन उद्योगों में सबसे अधिक और सबसे कम औसत दैनिक शुद्ध मजदूरी दर क्रमशः कोयला खानों (1,730.4 रुपये) और लौह अयस्क खदानों (679.4 रुपये) में दर्ज की गई।
  • बागान क्षेत्र में सबसे अधिक और सबसे कम औसत दैनिक शुद्ध मजदूरी दर रबर बागान में 425.2 रुपये और चाय बागान में 193.7 रुपये रही ।

2021 के मूल्‍य पर औसत दैनिक वास्‍तविक मजदूरी दर

  • 2001 के मूल्‍य पर अखिल भारतीय वास्तविक मजदूरी 2020 (दूसरी छमाही) में 174.3 रुपये थी जो 2020 (पहली छमाही) में 174.6 रुपये थी।
  • कवर किए गए तीन क्षेत्रों में 2001 के मूल्‍य पर सबसे अधिक औसत दैनिक वास्तविक मजदूरी दर खनन क्षेत्र (477.5 रुपये) में और उसके बाद विनिर्माण क्षेत्र (141.4 रुपये) में दर्ज की गई। बागान क्षेत्र में औसत दैनिक वास्तविक मजदूरी महज 63.2 रुपये दर्ज की गई।

डब्‍ल्‍यूआरआई पर तकनीकी सलाहकार समिति ने 2016=100 आधार के साथ वेतन दर सूचकांक की नई श्रृंखला को मंजूरी दी है।

  यह आधिकारिक वेबसाइट https://labour.gov.in और www.labourbureaunew.gov.in पर भी उपलब्ध होगा।

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