आईएफएससी प्राधिकरण

बीमा पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट

Posted On: 16 NOV 2021 7:42PM by PIB Delhi

वित्तीय उत्पादों और सेवाओं में वृद्धि करने के उद्देश्य से, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) ने एलआईसी और एसईबीआई के पूर्व अध्यक्ष श्री जी.एन. वाजपेयी की अध्यक्षता में आईएफएससी से बीमा और पुनर्बीमा व्यवसाय को बढ़ाने के लिए प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करने हेतु एक बीमा समिति का गठन किया है।

समिति में बीमा व्यवसाय और विनियमों के विकास में व्यापक अनुभव एवं एक मज़बूत वैश्विक नेटवर्क रखने वाले निम्नलिखित अग्रणी व्यक्तित्व शामिल हैं:

1. श्री एम.आर. कुमार (अध्यक्ष, भारतीय जीवन बीमा निगम)

2. श्रीमती टी. एल. अलामेलु (पूर्णकालिक सदस्य, आईआरडीएआई और पदेन सदस्य, आईएफएससीए)

3. श्री अतुल सहाय (सीएमडी, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड)

4. श्री देवेश श्रीवास्तव (सीएमडी, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया)

5. श्री शंकर गिरीगिपार्थी (सीईओ और कंट्री मैनेजर, लॉयड्स इंडिया)

6. सुश्री इवा सेगुरा कोबोस (प्रमुख- नियामक जोखिम प्रबंधन एशिया, निदेशक, स्विस रे)

7. श्री साकेत खेतान (प्रबंध भागीदार, खेतान लीगल एसोसिएट्स, भारत और यूके)

8. श्री मनोज कुमार (कार्यकारी निदेशक, आईएफएससीए), सदस्य-सचिव

समिति ने व्यापक परामर्श, गहन अध्ययन और गहन विचार-विमर्श के बाद आईएफएससीए को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में आईएफएससी को वैश्विक (आरई) बीमा केन्द्र के रूप में विकसित करने की दूरगामी सिफारिश की गई है। समिति की महत्वपूर्ण सिफारिशें इस प्रकार हैं:

1. आईएफएससीए ने एयरक्राफ्ट लीजिंग और फाइनेंसिंग के लिए इको-सिस्टम विकसित किया है जिसका उपयोग आईएफएससी में एविएशन इंश्योरेंस हब और ट्रेड क्रेडिट इंश्योरेंस को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। साथ ही, संरक्षण और क्षतिपूर्ति क्लबों की सुविधा के माध्यम से शिपिंग उद्योग के लिए समान व्यवस्था लागू की जा सकती है।

2. कैप्टिव बीमा मॉडल स्वयं के जोखिम को प्रबंधित करने के प्रभावशाली तरीकों में से एक है। विश्व स्तर पर, प्रमुख वित्तीय केंद्रों में कैप्टिव बीमा मॉडल के लिए अनुकूल नियामक व्यवस्था है इसलिए आईएफएससीए कैप्टिव के संचालन को सक्षम करने के लिए एक नया बुनियादी ढांचा विकसित कर सकता है।

3. आईएफएससीए ने ग्लोबल इन-हाउस केंद्रों के लिए प्रारूप तैयार किया है जिसका उपयोग (आरई) बीमाकर्ताओं द्वारा बीमा के लिए सहायक सेवाएं प्रदान करने हेतु ग्लोबल इन-हाउस केन्द्र विकसित करने के लिए किया जा सकता है।

4. निवेश प्रारुप को फिर से तैयार किया जा सकता है ताकि बीमाकर्ताओं को अपनी निधि को वित्तीय साधनों और उत्पादों को जुटाने के लिए और अधिक लाभ और लचीलेपन की पेशकश की जा सके।

5. विश्व स्तर पर प्रीमियम वित्तपोषण प्रचलित है जो बीमा व्यवसाय के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण चालक है। इसे आईएफएससी में पेश किया जा सकता है।

6. वैश्विक बाजार के लिए उपलब्ध बीमा से जुड़ी प्रतिभूतियों, आपदा बांड और पैरामीट्रिक जोखिम हस्तांतरण जैसे वैकल्पिक जोखिम हस्तांतरण समाधान तैयार करना।

समिति ने प्रवासी भारतीयों की बीमा जरूरतों की मैपिंग और 'हब एंड स्पोक' मॉडल के प्रचार और विकास के माध्यम से ऐसी जरूरतों को पूरा करने की भी सिफारिश की है। वर्तमान में, आईएफएससीए का नियामक प्रारूप और पर्यवेक्षी प्रारूप डिजाइन और विकास के अधीन है। समिति ने आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रारूपको तैयार करने में मदद करने के लिए प्रस्तावों की एक श्रृंखला की रूपरेखा तैयार की है।

विस्तृत रिपोर्ट www.ifsca.gov.in पर उपलब्ध है

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