विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

“ स्कूली छात्रों में अन्वेषण की ललक विकसित करें “

विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि अन्वेषण उन्मुखी अभिनव शिक्षा भारत की

अर्थव्यवस्था को 50 खरब की बनाने के लक्ष्य में अपना योगदान देगी

डॉ जितेंद्र सिंह का कहना है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचार भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा और प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्म निर्भर भारत के सपने  को पूरा करेगा


डॉ जितेंद्र सिंह ने एक वर्चुअल समारोह के दौरान 8वें  इंस्पायर-मानक पुरस्कार प्रदान किए

Posted On: 08 SEP 2021 7:22PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग डॉ जितेंद्र सिंह ने आज एक वर्चुअल समारोह के दौरान 8वें इंस्पायर-मानक पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्कूली छात्रों में अन्वेषण की ललक को विकसित किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर अपने संबोधन में मंत्री महोदय ने कहा, कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में नवाचार का भविष्य उज्ज्वल है और यह भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा तथा अन्वेषण उन्मुखी अभिनव  शिक्षा भारत की अर्थव्यवस्था को 50 खरब की बनाने के लक्ष्य में अपना योगदान देगी।

कोविड-19 वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए कम समय में ही डीएनए आधारित वैक्सीन विकसित करने के अलावा तीन टीकों को उपयोग के लिए जारी  करने में भारत के निपुणता  का हवाला देते हुए, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि 21 वीं सदी में किसी भी देश की आर्थिक शक्ति उसके वैज्ञानिक विकास और संबंधित तकनीकी अनुप्रयोगों  से निर्धारित होती है।उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत इन नवोन्मेषी युवाओं को तैयार करके और उनके संसाधनों को एक साथ जोड़कर जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्त करेगा।

 

 

 

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि इंस्पायर (आईएनएसपीआईआरई ) योजना से वैज्ञानिक सोच बनाने में सहायता मिल रही है क्योंकि अब हर वर्ष  पुरस्कारों के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले इच्छुक छात्रों की संख्या में वृद्धि हो रही है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस वर्ष विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 3.92 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी परियोजनाएं जमा कीं थी  जिनमें से 581 को चुना गया और उनमे से 60 को पुरस्कृत किया गया। इस योजना के  शुरू होने के बाद से मानक (एमएएनएके) पुरस्कारों के तहत अब तक 5 लाख से अधिक स्कूलों तक पहुँचा गया है। उन्होंने कहा कि इससे यह सिद्ध होता है कि वैज्ञानिक सोच वाले युवा भारतीय मस्तिष्क तैयार करने के अवसरों में तेजी आ रही है।

 

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय राज्य सरकारों/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को अपने संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में पुरस्कारों और पुरस्कार विजेताओं के बारे में लोगों को संवेदनशील बनाने के लिए पत्र लिखेगा। उन्होंने कहा कि इससे स्कूली शिक्षा के शुरुआती चरणों से एक संपूर्ण वैज्ञानिक और नवीन अभिरुचि और सीखने की प्रक्रिया विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने देश में वैज्ञानिक मानसिकता के निर्माण के लिए अलग-अलग आयु वर्ग के तीन  संवर्गों पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया, अर्थात 25 वर्ष से कम आयु वर्ग, 25 से 35 वर्ष का आयु वर्ग और 35 वर्ष से अधिक आयु वर्ग।

इस वर्चुअल पुरस्कार समारोह को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव  डॉ रेणु स्वरूप और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन-एनआईएफ ) के अध्यक्ष डॉ. पी एस गोयल ने भी संबोधित किया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के इंस्पायर कार्यक्रम की प्रमुख श्रीमती नमिता गुप्ता , एनआईएफ के निदेशक डॉ. विपिन कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

 

इंस्पायर(आईएनएसपीआईआरई) अर्थात अभिप्रेरित अनुसंधान के लिए विज्ञान खोज में नवोन्मेष (आईएनएसपीआईआरई) - मानक (एमएएनएके) पुरस्कार  भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है और इसे संयुक्त रूप से भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी ), और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन-एनआईएफ) भारत द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। वर्ष 2016 में, अभिप्रेरित अनुसंधान के लिए विज्ञान खोज में नवोन्मेष (इनोवेशन इन साइंस परस्यूट फॉर इंस्पायर्ड रिसर्च -आईएनएसपीआईआरई ) योजना को नया रूप दिया गया और फिर  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई "स्टार्ट-अप इंडिया" पहल के लिए बनाई गई कार्य योजना के साथ जोड़ा गया। मानक (एमएएनएके-मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन एंड नॉलेज) के माध्यम से छात्रों को देश भर के सभी सरकारी अथवा निजी स्कूलों की ओर से प्रोत्साहित किया जाता है जिससे कि वे जन सामान्य की  समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने मौलिक और रचनात्मक तकनीकी विचारों/नवाचारों को भेजें और अपने दम पर समाधान के साथ आएं। चाहे यह घरेलू कार्यों या सामान ढोने वाले मजदूरों, समाज या इसी प्रकार  लोगों के लिए हो। इस प्रकार प्राप्त परियोजनाओं में से चुनी हुई परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी और परियोजना प्रतियोगिता (एनएलईपीसी) में भी प्रदर्शित किया जाता है ।

 

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