रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय

एनएफएल और आरसीएफ ने एक परिवर्तनकारी नैनो यूरिया तरल उर्वरक के 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण' के लिए इफको के साथ करार पर हस्ताक्षर किए


नैनो यूरिया का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने वाला भारत विश्व का पहला देश बन गया है

एमओयू से किसानों को एवं सरकारी सब्सिडी की और अधिक बचत होगी

यह करार 'अन्नदाता' के हित के प्रति और देश को उर्वरक क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर' बनाने की प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है: श्री मनसुख मंडाविया

Posted On: 27 JUL 2021 7:22PM by PIB Delhi

नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (आरसीएफ) ने आज एक परिवर्तनकारी एवं गेम चेंजर उर्वरक नैनो यूरिया लिक्विड के 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण' के लिए भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

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रसायन एवं उर्वरक और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मंडाविया और रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन और अन्य संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

किसानों द्वारा नैनो यूरिया को इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने के लिए इन समझौता ज्ञापनों के माध्यम से इफको से सार्वजनिक क्षेत्र की उर्वरक कंपनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्राप्त किया जाएगा। इस प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से उत्पादन में तेजी आएगी जिससे निरंतर आपूर्ति में बढ़ोतरी होगी जिसके परिणामस्वरूप नैनो यूरिया को तेजी से अपनाया जाएगा और इसके परिणामस्वरूप किसानों की और सरकारी सब्सिडी की और अधिक बचत होगी।

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इन समझौतों के तहत इफको लिक्विड नैनो यूरिया की तकनीक एनएफएल और आरसीएफ को हस्तांतरित करेगी। निकट भविष्य में एनएफएल और आरसीएफ देश के किसानों को नैनो यूरिया की आपूर्ति बढ़ाने के लिए नए नैनो यूरिया उत्पादन संयंत्र स्थापित करेंगे। श्री मंडाविया ने कहा कि इन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करना प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की देश के अन्नदाता (किसानों) के हितों की रक्षा करने और देश को उर्वरकों में 'आत्मनिर्भर' बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने 2019 में अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में किसानों से धरती मां को बचाने के लिए रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हम अपनी धरती मां को नष्ट कर रहे हैं और इस मां की संतान होने के नाते, एक किसान होने के नाते हमें धरती मां को नष्ट करने का कोई अधिकार नहीं है। प्रधानमंत्री के इन्हीं शब्दों से प्रेरणा लेते हुए रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने इस दिशा में लगातार काम किया है। इफको द्वारा बनाया गया नैनो यूरिया देश में कृषि के लिए गेम चेंजर साबित होने की क्षमता रखता है। भारत नैनो यूरिया का व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने वाला विश्व का पहला देश बन गया है।"

श्री मंडाविया ने नैनो यूरिया की तेजी से अनुकूलन क्षमता की जरूरतों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में उर्वरकों का असंतुलित उपयोग हो रहा है। इससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, असुंतलित उपयोग से जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण भी हो रहा है। नैनो यूरिया एक क्रांतिकारी उत्पाद है जो यूरिया के उपयोग को 50 प्रतिशत तक कम करके इन समस्याओं को हल करने में मदद करेगा। नैनो यूरिया पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद होने के कारण मिट्टी की रक्षा करेगा।

नैनो यूरिया के वित्तीय पहलू पर जोर देते हुए श्री मंडाविया ने कहा कि प्रत्यक्ष बचत के अलावा परिवहन लागत में भी कमी आएगी। नैनो यूरिया का भंडारण भी किसानों के लिए आसान होगा। प्रत्यक्ष वित्तीय बचत, परिवहन लागत में कमी और बेहतर उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि होगी। इससे देश किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। नैनो यूरिया से भारत में पारंपरिक यूरिया का आयात भी कम होगा। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे यूरिया और अन्य उर्वरकों के उत्पादन के मामले में प्रधानमंत्री का 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना पूरा होगा।

इन समझौता ज्ञापनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री मंडाविया ने कहा, किसी भी गेम चेंजर तकनीक के लिए सबसे बड़ी चुनौती आम जनता द्वारा बड़े पैमाने पर उसको अपनाना है। नैनो यूरिया भी इसी चुनौती का सामना कर रहा है। नैनो यूरिया एक परिवर्तनकारी उत्पाद है, लेकिन देश के आम किसान इसे जितनी तेजी से अपनाएंगे, उतनी ही जल्दी हमें इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा और हम कृषि क्षेत्र में 'पूर्ण आत्म निर्भर' होने की ओर तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।

श्री मंडाविया नेइफको द्वारानैनो यूरिया बनाकर देश की सेवा में किए गए कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, "मुझे बताया गया है कि इफको ने जून में नैनो यूरिया का उत्पादन शुरू किया और दिनांक 25 जुलाई तक दो महीने से भी कम समय में, इफको ने 8.28 लाख नैनो यूरिया बोतलों का उत्पादन पूरा कर किसानों को इसकी आपूर्ति की है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह आवश्यक है कि नैनो यूरिया का उत्पादन और बढ़े। उर्वरक के क्षेत्र में कार्यरत अन्य सरकारी कंपनियों को भी इस कार्य में शामिल किया जाना चाहिए। आज मेरे लिए खुशी की बात है कि नैनो यूरिया के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए इफको द्वारा एनएफएल और आरसीएफ के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इफको द्वारा यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण देश हित में बिना किसी रॉयल्टी के किया जा रहा है। इसके लिए इफको की सराहना की जानी चाहिए। इन एमओयू से आने वाले दिनों में यूरिया का उत्पादन बढ़ेगा।इसके प्रचार-प्रसार में तीनों संस्थाएं शामिल होंगी। इससे कम समय में किसानों के बीच नैनो यूरिया की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिलेगी और किसान इस नए उत्पाद को तेजी से अपनाने में सक्षम होंगे।

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