विद्युत मंत्रालय

श्रीमती परमिंदर चोपड़ा पीएफसी की निदेशक (वित्‍त) का पदभार संभाला

Posted On: 01 JUL 2020 3:37PM by PIB Delhi

सरकार के स्वामित्व वाली भारत की प्रमुख एनबीएफसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), ने आज श्रीमती परमिंदर चोपड़ा कोकंपनी की निदेशक (वित्त) नियुक्‍त करने की घोषणा की। वह श्री एन.बी. गुप्ता का स्‍थान लेंगी, जो 30 जून 2020 को सेवानिवृत्‍त हो गए।

श्रीमती चोपड़ा, निदेशक (वित्त) के रूप में कार्यभार संभालने से पहले पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) में कार्यकारी निदेशक (वित्त) के रूप में काम कर रही थीं। 32 वर्ष से अधिक के पर्याप्‍त और विविध अनुभव के साथ, वह फंड जुटाने, कॉर्पोरेट खाते, बैंकिंग और राजकोष, परिसम्‍पत्ति ऋण प्रबंधन, स्ट्रेस्ड एसेट रिजॉल्यूशन आदि के लिए महत्वपूर्ण और मुख्य वित्त कार्यों को संभालने में माहिर हैं।

पीएफसी में शामिल होने से पहले, वह नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनएचपीसी) और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (पीजीसीआईएल) जैसे बिजली क्षेत्र के प्रमुख संगठनों से जुड़ी थीं। 2005 में पीएफसी में आई श्रीमती चोपड़ा ने पीएफसी के फंड जुटाने से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक विविध पहल की, जिसने उधारदाताओं को कम लागत पर पैसा जुटाने की अनुमति दी। उसके केंद्रित दृष्टिकोण के साथ, विदेशी मुद्रा में फंड जुटाने की हिस्सेदारी 2 साल की अल्‍प अवधि में 2% से बढ़कर 15% हो गई।

श्रीमती चोपड़ा को पीएफसी के पहले ग्रीन बॉन्ड इश्यू को प्रारंभ करने और खंड 144 (ए) के अंतर्गत अमेरिकी बान्‍ड बाजार से पीएफसी के पहले फंड जुटाने सहित सबसे पहले किए गए अनेक कामों के लिए सराहा गया। उन्होंने आरईसी लिमिटेड में भारत सरकार की 52.63% हिस्सेदारी में पीएफसी के बहुत बड़े अधिग्रहण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पीएफसी की पूंजी पर्याप्तता के स्तर और पीएफसी के उधार समझौतों और घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग के बारे में विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत से जुड़ी चुनौतियों को काबू किया।

श्रीमती चोपड़ा बोर्ड ऑफ कोस्टल तमिलनाडु पॉवर लिमिटेड और चेयूर इन्फ्रा लिमिटेड के निदेशक के रूप में भी काम कर चुकी हैं।

श्रीमती चोपड़ा का लागत लेखाकार (कॉस्‍ट एकाउंटेंट)और एमबीए से पीएफसी में वित्त संबंधी कामकाज के शीर्ष रैंक तक पहुंचना उनकी विनम्रता, प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत को दर्शाता है।

पीएफसी के संचालन, उसकी ताकत और केन्द्रित क्षेत्रों की उनकी गहरी समझ निश्चित रूप से बिजली क्षेत्र के ऋणदाता को आगे बढ़ने में मदद करेगी और आने वाले दिनों में और अधिक मील के पत्थर हासिल करेगी।

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