अंतरिक्ष विभाग

अंतरिक्ष विभाग की वर्षान्‍त समीक्षा

Posted On: 30 DEC 2019 6:25PM by PIB Delhi

वर्ष 2019 के दौरान अंतरिक्ष विभाग की पहल इस प्रकार रही :-

मिशन और परियोजना सम्‍बन्धित गतिविधियां

 

  • इसरो (आईएसआरओ) ने वर्ष 2019 के दौरान 6 लॉन्‍च वाहन मिशन और 7 उपग्रहों मिशनों सहित 13 मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
  • इस अ‍वधि के दौरान वाणिज्यिक आधार पर 7 देशों के 50 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया।
  • पीएसएलवी–सी44 ने 24 जनवरी, 2019 को श्रीहरिकोटा से माइक्रोसेट-आर और कलामसेट-वी2 को सफलतापूर्वक लॉन्‍च किया।
  • 6 फरवरी, 2019 को कौरो-फ्रेंच गुयाना एरियनस्‍पेस रॉकेट पर जीएसएटी 31 संचार उपग्रह को लॉन्‍च किया।
  • 01 अप्रैल, 2019 को इमिसेट को आनॅबोर्ड पीएससलवी-सी45 पर सफलतापूर्वक लॉन्‍च किया। श्रीहरिकोटा में लॉन्चिंग को देखने के लिए दर्शक गैलरी का उद्घाटन किया गया।
  • 22 मई, 2019 को श्रीहरिकोटा आरआईएसएटी-2बी रडार इमेजिंग पृथ्‍वी अवलोकन उपग्रह को ऑनबोर्ड पीएससलवी-सी46 पर लॉन्‍च किया गया।
  • भारत के सबसे शक्तिशाली लॉन्‍च वाहन जीएसएलवी-एमके III एम1 का 22 जुलाई, 2019 को सफलापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। यह लॉन्‍च वाहन 6 टन के उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में लॉन्‍च करने में समर्थ है। इस मिशन ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटरस्‍पेसक्राफ्ट को उसकी इच्छित ऑर्बिट में पहुंचाया। इसके उपकरण लगातार बहुत उपयोगी वैज्ञानिक डेटा उपलब्‍ध करा रहे हैं।
  • 27 नवम्‍बर, 2019 को उच्‍च संकल्‍प इमेजिंग क्षमता वाले तीसरी पीढ़ी के दक्ष उन्‍नत उपग्रह कार्टोसेट-3 का पीएससलवी-सी47 द्वारा श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया।
  • 11 दिसम्‍बर, 2019 को रिसेट-2बीआर 1 रडार इमेजिंग पृथ्‍वी अवलोकन उपग्रह का पीएससलवी-सी48 द्वारा श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया।
  • भारत के पहले अंतर-ग्रहीय मिशन मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) ने सितम्‍बर, 2019 में मार्टियन ऑर्बिट में पांच साल पूरे कर लिए हैं।
  • भारत की पहली बहु-वेवलैंथ अंतरिक्ष वेधशाला एस्‍ट्रोसेट ने सितम्‍बर, 2019 में ऑर्बिट में चार साल पूरे कर लिए हैं। डेटा को सार्वजनिक कर दिया गया है। एस्‍ट्रोसेट के 24 देशों में 900 से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।
  • वैश्विक मानक निकाय तीसरी पीढ़ी भागीदारी परियोजना (3जीपीपी) ने, जो मोबाइल टेलिफोनी के लिए प्रोटोकाल्‍स विकसित करता है, भारत की क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली एनएवीआईसी को मंजूरी दी है।
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से क्वालकॉम टेक्नोलॉजीज इंक ने अपने पोर्टफोलियो में चिपसेट से प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं और उनका  परीक्षण किया है जो भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली, एनएवीआईसी में सहायता प्रदान कर सकते हैं।
  • क्वालकॉम द्वारा स्नैपड्रैगन मोबाइल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले पहले एनएवीआईसी का 14 से 16 जनवरी, 2019 को नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान प्रदर्शन किया गया।
  • मानव अंतरिक्ष उड़ान केन्‍द्र (एचएसएफसी) नामक नए केंद्र का  इसरो/डीओएस में सृजन किया गया। इस पर मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान के  लिए एक शीर्ष केंद्र के रूप में काम करने की जिम्‍मेदारी है। गगनयान परियोजना का उद्देश्य लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) की ऑर्बिट में 5-7 दिनों के लिए 3 चालक दल के सदस्यों के साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करना और इसके साथ-साथ मिशन के बाद उनकी सुरक्षित रूप से वापसी करना भी है।
  • जीएसएलवी-एमके III के लिए चालक बचाव प्रणाली, चालक दल के मॉड्यूल और गगनयान के लिए सेवा मॉड्यूल को समग्रता के साथ अंतिम रूप दे दिया गया है। चालक दल चयन और प्रशिक्षण के लिए भारतीय वायु सेना के साथ एक समझौता ज्ञापन का निष्पादन किया गया है। चालक दल और स्क्रीनिंग मानदंड के लिए मेडिसिन की पहचान की गई है। यह प्रक्रिया जारी है।
  • अंतरिक्ष विभाग के तहत भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल), बेंगलुरु का 6 मार्च 2019 को गठन किया गया। इस कंपनी की मुख्‍य व्यावसायिक गतिविधियां में अंतरिक्ष प्रणालियों का उत्पादन करने के लिए भारतीय कंपनियों को समर्थ बनाना तथा भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों द्वारा जुटाए जाने वाले वाणिज्यिक अवसरों का लाभ उठाना शामिल हैं।
  • लॉन्च की आवृत्ति में सुधार लाने के लिए श्रीहरिकोटा में दूसरे वाहन असेंबली भवन में काम की शुरूआत।
  • इस वर्ष के प्रमुख विकास कार्यक्रम में भारतीय उद्योगों के लिए ली-आयन प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण रहा। इस प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए इसरो ने 10 उद्योगों का चयन किया था।

अन्‍य गतिविधियां

 

  • इसरो के संस्‍थापक डॉ. विक्रम ए साराभाई की जन्‍म शताब्‍दी के उपलक्ष्‍य में साल भर चलने वाले कार्यक्रम का 12 अगस्‍त, 2019 को उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदर्शनियों, स्‍कूल बच्‍चों के लिए प्रतियोगिताएं, पत्रकारिता पुरस्‍कार और जानी-मानी हस्तियों के भाषण शामिल हैं। यह कार्यक्रम देश भर के 100 चुनिंदा शहरों में आयोजित किए जाएंगे।
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कक्ष (एसटीसी) आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी दिल्‍ली में स्‍थापित किए गए ताकि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अनुसंधान और अनुप्रयोगों को नई ऊचांइयों पर पहुंचाया जा सके।
  • अंतरिक्ष के लिए क्षेत्रीय शैक्षिक केन्‍द्र (आरएसी-एस) एनआईटी कुरूक्षेत्र में स्‍थापित किया गया ताकि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए शैक्षिक-उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके।
  • इसरो के यूनिस्‍पेस नेनोसेटेलाइट असेंबली एंड ट्रेनिंग (उन्‍नति) कार्यक्रम के दो बैच का बेंगलुरू में आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 30 देशों के लगभग 62 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
  • स्कूली बच्चों के लिए एक विशेष कार्यक्रम युवा विज्ञानी कार्यक्रम (युविका) का सरकार के जय विज्ञान-जय अनुसंधान विजन के अनुसार आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्‍य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के बारे में बुनियादी ज्ञान प्रदान करना है।
  • इसरो के सहयोग से भूमि संसाधन विभाग ने वेस्‍टलैंड एटलस-2019 के पांचवें संस्करण को प्रकाशित किया। इसरो द्वारा भारतीय रिमोट सेंसिंग उपग्रहों का उपयोग करते हुए नई बंजर भूमि का मानचित्रण किया जाता है।
  • चंद्रयान-2 डेटा उपयोगकर्ता बैठक का आयोजन 22 अक्टूबर, 2019 को डीओएस ब्रांच सचिवालय, नई दिल्ली में किया गया। यह चंद्र विज्ञान श्रृंखला की तीसरी बैठक है।  चंद्र विज्ञान बैठकों का आयोजन उपभोक्‍ता आधार, विशेष रूप से राष्ट्रीय संस्थानों, अकादमियों और अनुसंधान संगठनों जैसे संस्थानों के उपभोक्‍ता आधार को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक परिणामों को अधिकतम करने के लिए किया जाता है।
  • बाढ़, उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान और जंगल की आग जैसी आपदाओं के दौरान देश के सामने आने वाले दुष्प्रभावों को कम करने के लिए उपग्रह आधारित शमन सहायता भी प्रभावी रूप से उपलब्‍ध कराई गई।
  • 157 में से 127 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी परियोजनाएं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा शासन और विकास में अनुप्रयोग के लिए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही हैं।
  • स्थानीय स्तर पर भूजल पुनर्भरण क्षेत्रों पर विशेष जानकारी के साथ 1000 से अधिक ब्लॉकों को कवर करने वाले मानचित्रों को डेटा के रूप में जल शक्ति अभियान को उपलब्‍ध कराया गया है।
  • बढ़े हुए पहुंच कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, इसरो ने छात्रों के साथ संवाद की शुरुआत की है, जिसके द्वारा देश के युवाओं को इसरो के चेयरमैन के साथ बातचीत करने का अवसर उपलब्‍ध हुआ है।  

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आरकेमीणा/आरएनएम/एएम/आईपीएस/एनएम – 5050



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