नागरिक उड्डयन मंत्रालय
हवाई अड्डों पर कर्मचारियों के आवागमन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए बायोमेट्रिक युक्त केंद्रीयकृत पहुंच नियंत्रण प्रणाली (सीएसीएस) और ई-बीसीएएस परियोजना के प्रशिक्षण मॉड्यूल का शुभारंभ
सुरक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने और हवाई अड्डों पर कार्य संचालन को आसान बनाने के लिए ई-गवर्नेंस पहलें की गईं हैं: हरदीप सिंह पुरी
प्रविष्टि तिथि:
30 DEC 2019 8:45PM by PIB Delhi
नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री हरदीप सिंह पुरी ने बायोमेट्रिक युक्त केंद्रीयकृत पहुंच नियंत्रण प्रणाली (सीएसीएस) और ई-बीसीएएस परियोजना के प्रशिक्षण मॉड्यूल का आज शुभारंभ किया। इस अवसर पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। आज शुरू की गई दो परियोजनाएं हवाई अड्डों पर सुरक्षा दुरुस्त करने और वहां कार्य संचालन को आसान बनाने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।
अभी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के 43 हवाई अड्डों और संयुक्त उद्यम के 5 हवाई अड्डों के साथ सीएसीएस परियोजना का उद्देश्य हवाई अड्डों पर कर्मचारियों के आवागमन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है। इस बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली में हवाई अड्डा प्रवेश परमिट (एईपी) उपयोगकर्ताओं की विशिष्टता, संपर्क रहित स्मार्ट कार्ड प्रौद्योगिकी के जरिए पीआईएन आधारित पहचान सत्यापन के अलावा बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण शामिल है, जो क्षेत्र, टर्मिनल, जोन और प्रवेश द्वार विशेषाधिकार के अनुसार स्वचालित वाहन पहुंच नियंत्रण प्रणाली पर आधारित आरएफआईडी के साथ कर्मचारियों के आवागमन का प्रबंधन करता है। कार्ड की लागत 225 रुपये है जो 3 वर्षों के लिए मान्य होगा। इस तरह जारी किया गया बायोमेट्रिक आईडी (बॉयोमीट्रिक युक्त केंद्रीयकृत पहुंच नियंत्रण प्रणाली जिसमें चिप एंबेडेड स्मार्ट एईपी है) का नकल नहीं किया जा सकता है।
ईसीआईएल और बीसीएएस के बीच 17 दिसंबर 2015 को 34.92 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। परियोजना का उद्देश्य हवाई अड्डों पर मौजूदा तंत्र को डिजिटल बनाना और मानव हस्तक्षेप को व्यवस्थित रूप से कम करना है क्योंकि अब तक कर्मचारियों को लैमिनेटेड पेपर आधारित हवाई अड्डा प्रवेश परमिट जारी किए गए थे। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने हाल ही में विभिन्न हवाई अड्डों- अहमदाबाद, चेन्नई और कोलकाता में एसएटी (कार्यस्थल स्वीकृति परीक्षण) का सफल आयोजन किया था।
इस कार्यक्रम में श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सीएसीएस परियोजना कार्य संचालन प्रक्रिया को आसान बनाएगी, सुरक्षा बढ़ाएगी और हवाई अड्डे पर अनधिकृत प्रवेश को रोकेगी, अधिकारियों को किसी घुसपैठ या अन्य अनियमितताओं पर तत्काल प्रतिक्रिया के लिए सतर्क भी करेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से हवाई अड्डे पर कुल मिलाकर कार्य संचालन में न केवल आसानी हो रही है, बल्कि सुरक्षा प्रणाली भी उन्नत हुई है। उन्होंने कहा कि सीएसीएस परियोजना हवाई अड्डे से जुड़े लगभग 2 लाख कर्मचारियों के रोजाना आवागमन में मदद करेगी।
श्री हरदीप सिंह पुरी ने 'ई-बीसीएएस परियोजना: प्रशिक्षण मॉड्यूल की भी शुरूआत की। इसका उद्देश्य 1.5 लाख से अधिक कर्मचारियों को मानवीय प्रक्रिया की बजाय डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण हासिल करने में मदद करना है। ई-बीसीएएस परियोजना का उद्देश्य बीसीएएस में सभी गतिविधियों को पारदर्शी, उपयोगकर्ताओं के अनुकूल और सक्षम बनाना है और इन सबसे ऊपर, परियोजना का उद्देश्य सभी हितधारकों के साथ कार्य संचालन में आसानी को बढ़ावा देना है।
सभी 29 अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थानों (एएसटीआई) को उपयोगकर्ता संस्थाओं के रूप में पंजीकृत किया गया है और अब वे विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन नामांकन कर सकते हैं। इसके अलावा यह प्रणाली अपने उपयोगकर्ताओं को बीसीएएस द्वारा अनुमोदन की जांच करने, नतीजे की घोषणा और क्यूआर कोड युक्त ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति देगा। इससे बीसीएएस के संपूर्ण प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ कुशल भी बनाया जा सकेगा।
इस परियोजना के शुरू होने से पहले, पंजीकरण/नामांकन से लेकर पाठ्यक्रमों के अनुमोदन, परिणामों की घोषणा, और प्रमाण पत्र जारी करने आदि की पूरी प्रशिक्षण प्रक्रिया मैन्युअल रूप से की जा रही थी। बीसीएएस प्रशिक्षण, परीक्षण और प्रमाणन पाठ्यक्रम अपने अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) से प्रमाणित एएसटीसी (विमानन सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र, वसंत कुंज, नई दिल्ली) और विभिन्न एयरलाइंस, हवाई अड्डा संचालकों, उड्डयन सुरक्षा समूह के लिए स्वीकृत उड्डयन सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थानों (29 एएसटीआई) के जरिए करता है। इसके अलावा भारत में अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम आईसीएओ, परिवहन विभाग, यूनाइटेड किंगडम और परिवहन सुरक्षा प्राधिकरण (यूएसए) द्वारा संचालित किए जाते हैं।
ई-बीसीएएस परियोजना
ई-बीसीएएस परियोजना की परिकल्पना भारत सरकार के ई-गवर्नेंस पहल के तहत ‘पेपरलेस ऑफिस’ हासिल के लिए की गई थी। इस परियोजना को 2016 में सभी आंतरिक कार्यालय प्रक्रियाओं के डिजिटल स्वचालन के जरिए बाहरी हितधारकों को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 21.69 करोड़ की अनुमानित लागत पर मंजूरी दी थी। ई-बीसीएएस परियोजना में प्रशिक्षण मॉड्यूल, गुणवत्ता नियंत्रण एवं परिचालन मॉड्यूल और प्रशासन इत्यादि शामिल किया गया था। वर्तमान में प्रशिक्षण मॉड्यूल भाग 30 लाख रुपये की अनुमानित लागत पर पूरा हो गया है।
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आर.के.मीणा/आरएनएम/एएम/एके– 5048
(रिलीज़ आईडी: 1598056)
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