विद्युत मंत्रालय

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 31,000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की विद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी 


पन बिजली और ऋण भार से जूझ रही तापीय विद्युत परियोजनाओं के संबंध में नीतियों को भी मंजूरी दी गई

प्रविष्टि तिथि: 07 MAR 2019 5:51PM by PIB Delhi

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आज विद्युत क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए अनेक प्रमुख निर्णय लिये। बक्‍सर (बिहार), खुर्जा  (उत्‍तर प्रदेश), किश्‍तवाड़ (जम्‍मू-कश्‍मीर) और सिरवानी (सिक्किम) में 31,000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की विद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके अलावा मंत्रिमंडल ने पन बिजली के विकास को बढ़ावा देने और कर्ज के बोझ से दबी तापीय विद्युत परियोजनाओं की सहायता के लिए उपायों को भी मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं/नीतियों का विवरण निम्‍नलिखित है-

  1. बक्‍सर ताप विद्युत परियोजना : सीसीईए ने बिहार के बक्सर जिले में 2x660 मेगावाट की बक्सर ताप विद्युत परियोजना (बक्सर टीपीपी) के लिए निवेश प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है। यह परियोजना 10,439,09 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पूरी की जाएगी। यह परियोजना भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत मिनी रत्न प्रतिष्ठान एसजेवीएन लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी एसजेवीएन थर्मल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्‍थापित की जाएगी। है।

 

बक्सर ताप विद्य़ुत परियोजना सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर आधारित होगी और इसमें 660 मेगावाट की दो इकाईयां होंगी। यह परियोजना पर्यावरण रक्षा के लिए नवीनतम उत्सर्जन नियंत्रण टेक्नोलॉजी से लैस होगी और इसमें उच्च क्षमता के साथ विद्युत उत्पादन में ईंधन का कम उपयोग होगा। बक्सर टीपीपी बिहार तथा पूर्वी क्षेत्र में विद्युत की कमी की स्थिति में सुधार लाएगी। बिहार सरकार ने उत्पादित विद्युत का 85 प्रतिशत सप्लाई के लिए विद्युत खरीद समझौता पर पहले ही हस्ताक्षर किया है।

इस परियोजना से क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक-आर्थिक विकास के अतिरिक्त प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की आशा है। बक्सर टीपीपी 2023-24 से लाभ देने लगेगी।

 

2.खुर्जा सुपर थर्मल पावर संयंत्र :

सीसीईए ने उत्‍तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में 11,089.42 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर 2x660 मेगावाट क्षमता वाले खुर्जा सुपर थर्मल पावर संयंत्र (एसटीपीपी) तथा मध्‍य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अमेलिया कोयला खान के लिए निवेश की मंजूरी को स्‍वीकृति प्रदान की गई। यह परियोजना 1587.16 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर कार्यान्वित की जाएगी और इसका कार्यान्‍वयन विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत मिनी रत्‍न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सीपीएसयू) टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।

खुर्जा एसटीपीपी प्रति 660 मेगावाट क्षमता वाली दो इकाइयों के साथ सुपर क्रिटिकल टेक्‍नोलॉजी पर आधारित होगी। यह पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नवीनतम उत्‍सर्जन नियंत्रण प्रौद्योगिकी से लैस होगी। यह उच्‍च दक्षता संपन्‍न होगी और विद्युत का उत्‍पादन करने के लिए ईंधन की कम मात्रा का इस्‍तेमाल करेगी। अमेलिया कोयला खान,कोयला मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जनवरी, 2017 में टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को आवंटित की गई थी। खुर्जा एसटीपीपी से उत्‍तरी क्षेत्र में और विशेषकर उत्‍तर प्रदेश में बिजली की कमी के परिदृश्‍य में सुधार आएगा, जो पहले ही परियोजना से 60 प्रतिशत बिजली की खरीद के लिए टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के साथ बिजली खरीद समझौते पर हस्‍ताक्षर कर चुका है। लाभान्वित होने वाले अन्‍य राज्‍यों में उत्‍तराखंड, राजस्‍थान,हिमाचल प्रदेश और दिल्‍ली शामिल हैं।

इस परियोजना से पर्याप्‍त प्रत्‍यक्ष और परोक्ष रोजगार का सृजन होने तथा पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले और अन्‍य नजदीकी जिलों का समग्र विकास होने की संभावना है। खुर्जा एसटीपीपी 2023-24 से लाभ प्रदान करना प्रारंभ करेगा।

 

3.कीरू एचईपी : सीसीईए ने मेसर्स चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (मेसर्स सीवीपीपीपीएल) द्वारा 4287.59 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर कीरू पनबिजली परियोजना (624 मेगावाट) के निर्माण के लिए निवेश को मंजूरी दी है। मेसर्स सीवीपीपीपीएल दरअसल एनएचपीसी, जम्मू-कश्मीर राज्य विद्युत विकास निगम (जेकेएसपीडीसी) और पीटीसी की एक संयुक्त उद्यम कंपनी है जिनकी इक्विटी शेयरभागिता क्रमशः 49 प्रतिशत, 49 प्रतिशत एवं 2 प्रतिशत है।

परियोजना जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर अवस्थित है। इसमें 624 मेगावाट (4x156 मेगावाट) की स्थापित क्षमता के साथ सबसे गहरे नींव स्तर के ऊपर 135 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रैविटी डैम के निर्माण की परिकल्‍पना की गई है। यह परियोजना 90 प्रतिशत डिपेंडेबल ईयर  के दौरान 2272.02 एमयू का उत्पादन करेगी।

इस परियोजना से उत्तरी ग्रिड को आवश्यक बिजली सुलभ होगी और इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के दूर-दराज के क्षेत्रों के विकास की प्रक्रिया में तेजी भी आएगी। यह परियोजना साढ़े चार वर्षों में पूरी की जाएगी।

4.तीस्ता चरण VI एचई परियोजना : तीस्ता चरण VI एचई परियोजना सिक्किम के सिरवानी गांव में रन ऑफ रिवर (आरओआर- जल संग्रहण के बिना) योजना है, जो तीस्‍ता नदी थाले की विद्युत क्षमता का जल प्रपात प्रणाली में उपयोग करती है। इसमें तीस्‍ता नदी पर 26.5 मीटर ऊंचे बैराज का निर्माण शामिल है।  500 मेगावाट की संस्‍थापित क्षमता (4x125 मेगावाट) वाली यह परियोजना के तहत 90 प्रतिशत डिपेंडेबल ईयर में 2400 एमयू बिजली का उत्‍पादन करेगी। 

इस परियोजना को पहले एसपीवी यथा लेंको समूह द्वारा प्रमोटेड मैसर्स लेंको तीस्‍ता हाइड्रोपावर लिमिटेड (एलटीएचपीएल), लेंको समूह द्वारा प्रमोटेड द्वारा विकसित किये जाने का प्रस्‍ताव था। हालांकि कंपनी में वित्‍तीय कठिनाइयों के कारण यह परियोजना निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो सकी।

तदनुसार, माननीय एनसीएलटी, हैदराबाद पीठ के दिनांक 16 मार्च, 2018 के आदेश द्वारा  कॉरपोरेट इन्साल्वेन्सी रेज़लूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) प्रारंभ किया गया। एनसीएलटी की बोली की प्रक्रिया में 907.00 करोड़ रुपये की बोली की राशि के साथ एनएचपीसी सबसे बड़ा बोलीकर्ता बनकर उभरा। तदनुसार 5748.04 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला एक निवेश प्रस्‍ताव भारत सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसे 7 मार्च, 2019 की सीसीईए की बैठक में मंजूरी दी गई। इस परियोजना को 60 महीने की अवधि में पूरा किया जाएगा। 

5.         ऋण भार से जूझ रही तापीय विद्युत परियोजनाएं : सीसीईए ने ऋण भार से जूझ रही तापीय विद्युत परियोजनाओं के मसले सुलझाने के लिए गठित की गई उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एचएलईसी) की विशिष्ट सिफारिशों पर गौर करने के लिए गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) की सिफारिशों को मंजूरी दे दी।

भारत सरकार ने ऋण भार से जूझ रही ताप विद्युत परियोजनाओं के मसले सुलझाने के लिए मंत्रिमंडलीय सचिव की अध्‍यक्षता में उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एचएलईसी) का गठन किया था। इस समिति ने ताप विद्युत क्षेत्र के ऋण भार को दूर करने के लिए सिफारिशें की थीं और अपनी रिपोर्ट 18 नवंबर को सौंप दी थी। एचएलईसी की रिपोर्ट विद्युत मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्‍ध है। इसके बाद सरकार ने एचएलईसी की विशिष्‍ट सिफारिशों की जांच के लिए मंत्रिसमूह (जीओएम) का गठन किया था और उसके बाद उसकी टिप्‍पणियों को मंत्रिमंडल के विचारार्थ भेज दिया था। उसके पश्‍चात, जीओएम ने एचएलईसी की ज्‍यादातर सिफारिशों की अनुशंसा की थी।

सीसीईए ने जीओएम की जिन मुख्‍य सिफारिशों को मंजूरी दी है उनमें अल्‍पा‍वधि पीपीए के लिए कोल लिंकेज प्रदान करना, बिजली वितरण कंपनियों द्वारा भुगतान न करने के कारण बिजली खरीद समझौता (पीपीए) के समाप्‍त होने की स्थिति में उपयोग के लिए मौजूदा कोल लिंकेज को अनुमति देना, पूर्व घोषित लिंकेज के लिए नोडल एजेंसी द्वारा बड़े पैमाने पर बिजली की खरीद करना, केंद्र/राज्‍य स्तरीय विद्युत उत्‍पादकों का बिजली के समूहक के तौर पर कार्य करना, बिजली क्षेत्र के लिए स्‍पेशल फॉर्वर्ड ई नीलामी हेतु कोयले की मात्रा में वृद्धि करना, नियमित अंतराल पर कोल लिंकेज नीलामियां करना, कोयले की कम आपूर्तियों का समाप्‍त न होना, एसीक्‍यू का निर्धारण द‍क्षता के आधार पर करना, विलंबित अधिभार भुगतान (एलपीएस) का भुगतान अनिवार्य बनाना, पीपीए/एफएसए/एलटीओए एनसीएलटी के बाद के परिदृशय का निरस्‍त न होना तथा सीओडी का अनुपालन न होने के कारण पीपीए का निरस्‍त न होना शामिल है। इन सिफारिशों के कार्यान्‍वयन के साथ ही ताप विद्युत क्षेत्र को प्रभावित करने वाले बहुत से मसलों का समाधान हो जाने की संभावना है।

6. पनबिजली क्षेत्र को बढ़ावा देने के उपाय : पनबिजली क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने विद्युत मंत्रालय द्वारा अपनाए गए कुछ उपायों को मंजूरी दे दी है। विशाल पन बिजली परियोजनाओं (एलएचपी अर्थात 25 मेगावॉट से अधिक क्षमता वाली) को नवीकरणीय ऊर्जा घोषित करने का फैसला किया गया है। उपायों की अधिसूचना के बाद एलएचपी के लिए पृथक पनबिजली खरीद बाध्‍यता (एचपीओ) की शुरूआत की गई। बाढ़ की गंभीरता में कमी लाने और सड़कों और पुलों जैसी आवश्‍यक बुनियादी सुविधाओं के लिए बजटीय सहायता प्रदान करना। शुल्‍क निर्धारण करने की कार्य पद्धति को संशोधित किया गया है, ताकि शुल्‍क संबंधी व्‍यापक लाभ प्राप्‍त हो सकें।

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आर.के.मीणा/एएम/आरके/जीआरएस


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